Sunday, October 22, 2017

BOOK भूकंप

                                                          विषय प्रवेश -
       भूकंप और  प्राचीनविज्ञान !
       भूकंप जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों में विश्व वैज्ञानिक समुदाय निरंतर प्रयासरत है इसके लिए और इससे जुड़े विज्ञानविद लोगों के लिए एवं आधुनिकविज्ञान से संबंधित रिसर्च के लिए सरकार भारी धनराशि खर्च करती है फिर भी सफलता की शून्यता से देश का चिंतित होना स्वाभाविक है !वहीँ दूसरी ओर भारत के प्राचीन वैदिकविज्ञान के अनुसंधान से यदि कोई वैदिकविद्वान् सरकार से बिना कोई आर्थिक सहयोग लिए भी  कुछ ऐसा खोज लेने की बात कहता है जिससे भूकंपों से संबंधित अनुसंधानों को कुछ ऐसी ऊर्जा मिल सकती है जो  भूकम्पीय अनुसंधानों को गति प्रदान करने में समर्थ हो सहायक हो!तो सरकार उसकी बात माने न माने किंतु उसकी बात सुनने से भी परहेज क्यों ?प्राचीन वैदिक विद्वानों को ऐसे विषयों से यह कहकर दूर क्यों रखा जाता है कि उन्होंने आधुनिक विज्ञान नहीं पढ़ी है इसलिए वे ऐसे विषयों पर विचार नहीं कर सकते !और उनकी सम्मति विश्वसनीय नहीं मानी जाएगी !
  भूकंप आने के तीन कारण अभी तक वैज्ञानिकों के द्वारा बताए जाते रहे हैं वो हैं ज्वालामुखी , कृत्रिमजलाशय और  धरती के अंदर भरी गैसों के भारी भंडार !ये तीनों हैं या इन तीन में से भी कोई एक अथवा दो हैं और ऐसा मानने के समर्थन में आधारभूत उनके पास विश्वसनीय परीक्षित प्रमाण क्या हैं ये निश्चित नहीं है !
     प्रकृतिविज्ञान, आयुर्वेदविज्ञान , ज्योतिषविज्ञान, खगोलविज्ञान आदि का संयुक्त अनुसंधानपूर्वक अध्ययन करने से भूकंपों की प्रवृत्ति को समझने में सहायक तथ्य मिलते हैं किंतु सरकार के इससे सम्बंधित विभाग ऐसे प्राचीन विषयों को विज्ञान नहीं मानते हैं इस लिए वे ऐसी प्रमाणित बातों पर भी विचार करने को तैयार नहीं हैं !इसीलिए भूकंपों से संबंधित ऐसे तथ्य जो वैश्विक दृष्टि से भूकंप संबंधी अध्ययनों को गति प्रदान कर पाने में समर्थ हो सकते हैं उनकी विश्वसनीय एवं उचित प्रस्तुति के लिए सरकार को आत्मीयता पूर्वक विचार करना चाहिए !
प्रकृति का संदेश प्राणियों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है भूकंप         
       प्रकृति जब जब प्राणियों से कुछ कहना चाहती है तो वो प्रकृति के अनेकों माध्यमों के द्वारा भूकंप आने के 6 महीने पहले से संकेत देने शुरू कर देती है धीरे धीरे वही बढ़ते चले जाते हैं और एक दी भूकंप के रूप में घटित हो जाते  हैं !प्रकृति में जैसे जैसे समय आगे बढ़ते जाता है वैसे वैसे भूकंपों के लक्षण प्रकृति में प्रकट होने लगते हैं !वातावरण में व्याप्त होते देखे जाते हैं !वृक्षों बनौषधियों के आकार प्रकार बदलने लग जाते हैं मनुष्यों पशुओँ पक्षियों आदि समस्त जीव जंतुओं के स्वभाव बदलने लगते हैं रुचि अरुचि की मात्रा में बदलाव आने लग जाते हैं खान पान  की मात्रा में बदलाव होते दिखने लगते हैं !इतना सब  कुछ जानते हुए लोग बेचैनी का अनुभव तो करते हैं किंतु उस बेचैनी के कारण तक ध्यान ही नहीं जाता है !
         समय विज्ञान के आधार पर भूकंपों के विषय में लगातार अनुसंधान करने के बाद प्राप्त अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि प्रत्येक भूकंप उस क्षेत्र के लोगों को कोई न कोई महत्वपूर्ण सन्देश देने के लिए आया होता  है ऐसे भूकंपीय संदेशों  को यदि समय रहने समझने और पालन करने का प्रयास किया जाए तो कई बड़ी दुर्घटनाएँ सतर्कता पूर्वक टाली जा सकती हैं कुछ के द्वारा संभावित हानियों को प्रयास पूर्वक घटाया जा सकता है कई प्राकृतिक आपदाओं की धार कुंद करके उनके द्वारा होने वाले नुक्सान को घटाकर प्रभावित क्षेत्र के लोगों के जानमाल की रक्षा की जा सकती है !
      ऐसे भूकंप कई बार किसी क्षेत्र में गुप्त रूप से पनप रहे किसी साजिश की सूचना दे रहे होते हैं कई बार संभावित आतंकवाद जैसी किसी घटना की सूचना दे रहे होते हैं कई बार निकट भविष्य में होने वाली अति वृष्टि या सूखा जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं की सूचना दे रहे होते हैं !किसी क्षेत्र विशेष में होने वाली सामूहिक उन्मादी दुर्घटनाएँ सूचित की जा रही होती हैं !
       मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण लोगों की किसी जन सभा के कुछ दिन पहले उसी क्षेत्र में यदि कोई भूकंप आ जाता है तो ऐसे महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा में हो रही चूक या उनके विरुद्ध रची जा रही किसी बड़ी साजिश की सूचना दे रहा होता है वो भूकंप !कई बार किसी क्षेत्र में कोई बीमारी या महामारी  फैलने जा रही होती है उसकी सूचना उपलब्ध करवा रहे होते हैं भूकंप ! कभी कभी दो पड़ोसी देशों के बीच आपसी बैर विरोध समाप्त करने या शुरू होने के संकेत  देने के लिए भी आते हैं भूकंप !
      कई बार तो इतनी छोटी छोटी घटनाओं की सूचना देने के लिए भूकंप आ जाते हैं जिनके विषय में सोचकर भरोसा ही नहीं होता है किंतु ऐसी सूचनाओं का अनुसंधान करके उनके द्वारा सूचित की जा रही घटनाओं के   विषय में भूकंप आते ही उसी के आधार पर हम तुरंत लिखकर रख लेते हैं बाद में वे वैसी ही घटित होती हैं इसी लिए तो इन पर विश्वास होने लगता है !जिसे सामाजिक रूप से प्रमाणित करने के लिए भी मैंने कुछ साक्ष्य सँजो रखे हैं जिन्हें उचित और विश्वसनीय मंच मिलने पर प्रस्तुत किया जा सकता है जो इस विषय में विश्व के लिए बिल्कुल  नया अनुसंधान होगा !
      इसके अलावा किसी प्रमुखभूकंप के आ जाने के बाद वाले झटके किस भूकंप में आएँगे किसमें नहीं आएँगे किसमें कितने  दिनों या महीनों तक आएँगे आदि भूकंप से संबंधित सभी जानकारियाँ  भूकंप के आने के 30 मिनट के अंदर दी जा सकती हैं !
     भूकंप से संबंधित ऐसी समस्त सूचनाओं का पूर्वानुमान भूकंप आने के तीस मिनट के अंदर  प्राप्त  किया जा सकता है इसके लिए भूकंप आने का समय एवं उस स्थान को देखना होता है या उससे संबंधित कुछ जानकारियाँ प्राप्त करनी होती हैं !
    भूकंप से संबंधित ऐसे अनुसंधान मेरे द्वारा लगभग दो दशकों से चलाए जा रहे हैं जिसके आधार पर सफलता की कुछ किरणें दिखाई देने लगी हैं !




       

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