Wednesday, August 12, 2026

सरस्वती

 

 अर्थ :मोह रूपी अंधकार से भरे मेरे हृदय में मैया आप उदार भाव से विराज मान रहें | अपने शरीर के अंगों से निकल रही प्रकाश की किरणों से मेरे मन में भरे अंधकार को नष्ट करें | 

ब्रह्मा जगत् सृजति पालयतीन्दिरेशः शंभुर्बिनाशयति देवि !तव प्रभावैः | 

न स्यात् कृपा यदि तव प्रकट प्रभावे !न स्युः कथञ्चिदपि ते निज कार्य दक्षाः || 8||

अर्थ :  हे माता !आपके प्रभाव से ब्रह्मा संसार का सृजन करते हैं,विष्णु पालन करते हैं और शिव जी बिनाश करते हैं  | यदि आपकी उन पर कृपा न होती तो वे अपना अपना कार्य करने में समर्थ न होते || 8||

सरस्वतीं शुक्ल वर्णां सस्मितां सुमनोहराम् |

 कोटि चन्द्र प्रभामुष्ट पुष्टः श्रीयुक्त विग्रहाम्  ||9||

अर्थ :  हे माता ! सरस्वती आपके शरीर का रंग शुक्ल अर्थात सफेद है | आपका मुख मुस्कान से सुशोभित है | | करोड़ों चंद्रमाओं के प्रकाश से प्रकाशित आपका शरीर है | आप भक्तों के मन का हरण करने वाली हैं ||9||

वंदे  वीणाधरीं देवीं मयूर वर वाहनाम् |

देवत्वं प्रति पद्यन्ते यद्नुग्रहतो नरः  ||10||

अर्थ : श्रेष्ठ मयूर वाहन पर विराजमान वीणा धारण करने वाली मैया !आपकी कृपा से लोग देवत्व प्राप्त कर लेते हैं  | आपको बार बार बंदन है  ||10||

ब्रह्म स्वरूपा  परमा ज्योतिरूपा सनातनी | 

 सर्व विद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमोनमः ||11||

अर्थ :  सदैव विद्यमान ब्रह्म स्वरूपा परं ज्योतिरूपा सभी विद्याओं की अधिष्ठात्री देवी भगवती वाणी स्वरूपा को बार बार नमस्कार है | ||11||

या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता  | 

 नमस्तस्यै सरस्वत्यै वाग्दात्र्यै च पुनः पुनः  ||12|| 

अर्थ : जो देवी समस्त प्राणियों में विद्या स्वरूप में विद्यमान है | वाणीदात्री  उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है   ||12||

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता  | 

कवितारूपिणी या च तस्यै वाण्यै नमोनमः ||13|| 

अर्थ : जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति स्वरूप में विद्यमान है | कविता स्वरूपिणी उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है   ||13||

या देवी सर्वभूतेषु कीर्तिरूपेण संस्थिता  | 

प्रतिभारूपिणी या च तस्यै वाण्यै नमोनमः ||14 || 

अर्थ :  जो देवी समस्त प्राणियों में कीर्ति स्वरूप में विद्यमान है | प्रतिभा स्वरूपिणी उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है   ||14 ||