अर्थ :मोह रूपी अंधकार से भरे मेरे हृदय में मैया आप उदार भाव से विराज मान रहें | अपने शरीर के अंगों से निकल रही प्रकाश की किरणों से मेरे मन में भरे अंधकार को नष्ट करें |
ब्रह्मा जगत् सृजति पालयतीन्दिरेशः शंभुर्बिनाशयति देवि !तव प्रभावैः |
न स्यात् कृपा यदि तव प्रकट प्रभावे !न स्युः कथञ्चिदपि ते निज कार्य दक्षाः || 8||
अर्थ : हे माता !आपके प्रभाव से ब्रह्मा संसार का सृजन करते हैं,विष्णु पालन करते हैं और शिव जी बिनाश करते हैं | यदि आपकी उन पर कृपा न होती तो वे अपना अपना कार्य करने में समर्थ न होते || 8||
सरस्वतीं शुक्ल वर्णां सस्मितां सुमनोहराम् |
कोटि चन्द्र प्रभामुष्ट पुष्टः श्रीयुक्त विग्रहाम् ||9||
अर्थ : हे माता ! सरस्वती आपके शरीर का रंग शुक्ल अर्थात सफेद है | आपका मुख मुस्कान से सुशोभित है | | करोड़ों चंद्रमाओं के प्रकाश से प्रकाशित आपका शरीर है | आप भक्तों के मन का हरण करने वाली हैं ||9||
वंदे वीणाधरीं देवीं मयूर वर वाहनाम् |
देवत्वं प्रति पद्यन्ते यद्नुग्रहतो नरः ||10||
अर्थ : श्रेष्ठ मयूर वाहन पर विराजमान वीणा धारण करने वाली मैया !आपकी कृपा से लोग देवत्व प्राप्त कर लेते हैं | आपको बार बार बंदन है ||10||
ब्रह्म स्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी |
सर्व विद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमोनमः ||11||
अर्थ : सदैव विद्यमान ब्रह्म स्वरूपा परं ज्योतिरूपा सभी विद्याओं की अधिष्ठात्री देवी भगवती वाणी स्वरूपा को बार बार नमस्कार है | ||11||
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै सरस्वत्यै वाग्दात्र्यै च पुनः पुनः ||12||
अर्थ : जो देवी समस्त प्राणियों में विद्या स्वरूप में विद्यमान है | वाणीदात्री उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है ||12||
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता |
कवितारूपिणी या च तस्यै वाण्यै नमोनमः ||13||
अर्थ : जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति स्वरूप में विद्यमान है | कविता स्वरूपिणी उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है ||13||
या देवी सर्वभूतेषु कीर्तिरूपेण संस्थिता |
प्रतिभारूपिणी या च तस्यै वाण्यै नमोनमः ||14 ||
अर्थ : जो देवी समस्त प्राणियों में कीर्ति स्वरूप में विद्यमान है | प्रतिभा स्वरूपिणी उस माता सरस्वती को बार बार नमस्कार है ||14 ||
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