15 अगस्त पर -
जिस प्राचीन समृद्ध ज्ञान विज्ञान अनुसंधानों का गुणगान करते करते आपकी सरकार पार्टी एवं मातृसंगठन इतनी उँचाई पर पहुँचा है | उससे संबंधित अनुसंधानों की आपने चर्चा ही नहीं की | उसके विकास विस्तार उत्थान के लिए आपकी सरकार की भावी योजना क्या है |उससे संबंधित अनुसंधानों का समाजहित में कैसे उपयोग किया जाएगा | इसका नाम तक लेना आपने आवश्यक नहीं समझा | ध्यान रहे कि कोरोना महामारी आपकी ही सरकार में आई थी | जिससे समाज को सुरक्षित बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सका | ऐसे संकट का समाधान किया जाना केवल प्राचीन विज्ञान के द्वारा ही संभव है | उसकी उपेक्षा भविष्य में बहुत याद आएगी |
प्रधान मंत्री जी !
सादर नमस्कार
बिषय : आपके 15 अगस्त के भाषण पर आवश्यक विनम्र निवेदन !
महोदय
आपने देश के सभी क्षेत्रों में उन्नति का जो विराट वैभव बताया निस्संदेह इससे हर भारतीय गौरवान्वित हो उठता है | वैश्विक मंच पर आपने जो गौरव बढ़ाया है | वह भी हम सभी भारतीयों के लिए गर्व का बिषय है | इसके साथ ही साथ आपको अचानक आ जाने वाली महामारियों से सुरक्षा संबंधी भावी तैयारियों के बिषय में भी बताना चाहिए था |जिससे भविष्य में कोरोना जैसी महामारियों से समाज की सुरक्षा की जा सके |
मान्यवर ! भारत को पड़ोसी देशों के साथ लड़ने पड़े तीनों युद्धों में मिलाकर जितने लोगों की मृत्यु हुई थी | उससे कई गुणा अधिक लोग केवल कोरोना महामारी में ही मृत्यु को प्राप्त हुए हैं |इसका कारण केवल महामारी ही नहीं थी प्र्त्युत वे वैज्ञानिक अनुसंधान थे | जिनकी असफलता के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोग मृत्यु को प्राप्त हुए हैं | महामारी वर्षा की तरह प्राकृतिक घटना है उसे तो अपने समय पर घटित होना ही होता है | उससे भीगें न इसकी व्यवस्था तो स्वयं ही करनी पड़ती है जो वैज्ञानिकों के द्वारा नहीं की जा सकी |जिन अनुसंधानों पर सरकार देशवासियों से टैक्स रूप में प्राप्त पैसे पानी की तरह बहाती है| कोरोना जैसी इतनी बड़ी आपदा में वे अनुसंधान देश वासियों के किसी काम नहीं आ सके |
महामारी तथा उसकी लहरों के बिषय में न तो कोई पूर्वानुमान लगाए जा सके और न ही महारोग के स्वभाव को समझा जा सका | महामारी का विस्तार अंतर्गम्यता प्रसार माध्यम आदि पता ही नहीं लगाया जा सका | तापमान ,वायुप्रदूषण आदि मौसम का प्रभाव महामारी संबंधी संक्रमण पर पड़ता भी है या नहीं अभी तक पता नहीं किया जा सका है | महामारी मनुष्यकृत थी या प्राकृतिक पता नहीं है | प्लाज्मा थैरेपी या वैक्सीन कितनी लाभप्रद रही पता ही नहीं है | ऐसी संदिग्ध परिस्थिति में यह भी पता लगाया जाना संभव नहीं है महामारी भयंकर थी या वैज्ञानिकों के द्वारा महामारी से सुरक्षा की कोई तैयारी ही नहीं की गई थी | इसीलिए वैज्ञानिकों के देखते देखते लाखों लोग मौत के मुख में समाते चले गए | अनुसंधानों के नाम पर बातें बड़ी बड़ी काम कुछ नहीं | खर्चा बहुत बड़ा जवाब देही कुछ नहीं |
प्रधानमंत्री जी!लालकिले की प्राचीर से आपने जितने बड़े बड़े वैज्ञानिक विकास गिनाए वो जिस जनता के जीवन की कठिनाइयाँ कम करके उसे सुख सुविधाएँ प्रदान करने के लिए हासिल की गई हैं |कल्पना कीजिए वो जनता ही न बचे तो ये विकास ये सुख सुविधा की तैयारियाँ किस काम की | महामारियों और प्राकृतिक आपदाओं में यदि वह जनता ही मरती चली जाएगी तो ऐसा विकास जनता के किस काम का ?
वैज्ञानिक महामारी तथा प्राकृतिक आपदाओं को समझ नहीं पाते हैं उनके बिषय में सही पूर्वानुमान नहीं लगा पाते हैं | उनकी इतनी ही गलती नहीं हैं | सच्चाई तो ये है कि वे ऐसा करने लायक ही नहीं हैं क्योंकि ऐसा कोई विज्ञान ही नहीं है जिससे प्राकृतिक घटनाओं को समझा जा सकता हो और इनके बिषय में सही अनुमान पूर्वानुमान लगाए हों | इसीलिए आज तक महामारी या मौसमसंबंधी किसी भी प्राकृतिक घटना के बिषय में सही दीर्घावधि अनुमान पूर्वानुमान नहीं लगाए जा सके हैं |
मैं प्राचीनविज्ञान के आधार पर पिछले 35 वर्षों से ऐसे अनुसंधान करता आ रहा हूँ | उसके आधार पर मैंने ऐसे प्राकृतिक रहस्यों को सुलझा लिया है |जिससे प्राकृतिक आपदाओं एवं महामारियों से समाज की सुरक्षा करने में मदद मिल सकती है | प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में सही अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाए जा सकते हैं | हमारी बातों पर बिचार करें एवं हमारेप्राचीन विज्ञान संबंधी अनुसंधानों को भी अवसर दें |
निवेदक ::
डॉ. शेष नारायण वाजपेयी
Ph.D. By BHU
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