भाग्य से ज्यादा और समय से पहले किसी को न सफलता मिलती है और न ही सुख ! विवाह, विद्या ,मकान, दुकान ,व्यापार, परिवार, पद, प्रतिष्ठा,संतान आदि का सुख हर कोई अच्छा से अच्छा चाहता है किंतु मिलता उसे उतना ही है जितना उसके भाग्य में होता है और तभी मिलता है जब जो सुख मिलने का समय आता है अन्यथा कितना भी प्रयास करे सफलता नहीं मिलती है ! ऋतुएँ भी समय से ही फल देती हैं इसलिए अपने भाग्य और समय की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति को रखनी चाहिए |एक बार अवश्य देखिए -http://www.drsnvajpayee.com/
Thursday, July 31, 2014
शंकराचार्य जी का आह्वान साईं घुसपैठियों से सावधान !
मंदिरों में नाक मुख आँखें कान आदि बनाकर रखे गए साईं नाम के पत्थर पूजने से अनेकों प्रकार के नुक्सान हैं !मंदिरों में रखे गए साईं पत्थरों को पूजने से समाज को भारी भ्रम होगा और कहीं आगामी पीढ़ियाँ भगवानों की प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों को भी साईं पत्थरों की तरह ही पत्थर न समझने लगे जिससे अनादि कालीन सनातन संस्कृति से जुड़ी संतानें भ्रमित होकर भटक न जाएँ इसलिए सनातन धर्मियों को मिलजुलकर अपने मंदिरों से साईं पत्थरों को जल्दी से जल्दी बाहर करना होगा अन्यथा सनातन मंदिरों का आस्तित्व ही समाप्त होता दिख रहा है कई सनातन धर्म के देव मंदिर आज साईं मंदिरों के नाम से प्रसिद्ध होने लगे हैं ये चिंता का विषय है !
Monday, July 28, 2014
'साईं एक समस्या अनेक ' 'ये हैं साईं के साइड इफेक्ट' संस्कारों के संकट से गुजर रहा है समाज !
"साईं धर्म का सिद्धांत"केवल साईं पूजा कर लेने से मिल जाता है सबका अपमान करने का लाइसेंस?
'साईं पूजा के साइड इफेक्ट' हैं - टूटते परिवार, बिखरता समाज और बर्बाद होते बच्चे !छिन्न भिन्न होतीं शास्त्रीय परम्पराएँ, विभाजित होता धार्मिक see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
इस समय समाज में दो चीजें ही हैं बढ़ रही हैं एक तो भ्रष्टाचार और दूसरा साईं की संपत्ति !क्या इन दोनों के बीच कोई सम्बन्ध है ?कहीं ये 'साईं के साइड इफेक्ट' तो नहीं हैं! see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
आज घरों से फेंकी गई बच्चियाँ कचरे के डिब्बे में पड़ी मिल रही हैं कहाँ पहुँच रहे हैं हम !
जब साईं पूजा नहीं थी तब कभी सुने जाते
थे इतने बलात्कार !पाँच पाँच वर्ष की कन्याओं के साथ दुराचार! बच्चियों के
साथ एक से एक जघन्यतम अत्याचार ,ये साईं बाबाओं को भगवान बनाने का ही दुष्परिणाम है!see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
संस्कृत
विद्यालयों के छात्रों ने पढ़ने में रूचि कम कर दी है वो सोचने लगे हैं कि
क्या करना है पढ़ लिख कर जब बिना पढ़े लिखे लोग भी साईं को दिखाकर खूब
कमाई कर रहे हैं !see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
सुना है कि साईं के समर्थन में लाबिंग करने करवाने के लिए बाबाओं और
पंडितों को खरीदा जाएगा वो लोग साईं का पक्ष ले लेकर लड़ेंगे सनातन धर्मियों
से !साईं वाले ये सारा खेल पैसे के बल पर कराएँगे और खुद दूर बैठकर
देखेंगे और हँसेंगे !see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
अबकी
गुरुपूर्णिमा के दिन चढ़ावे के नाम पर चंदा इकठ्ठा करके मोटा फंड जुटाया
गया है !सुना जा रहा है कि ये सूचना बाबाओं एवं पंडितों के पास भी भेजी जा
रही है कि वो शिर्डी आवें और साईं को सनातन धर्म का अंग बताते हुए साईं को
भगवान मान कर पूजा करने की वकालत मीडिया के सामने करें !इसके बाद पेमेंट
लें अपने घर जाएँ !see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
साईं के यहाँ विधि निषेध का विधान न होने से समाज में बढ़ रहा है अपराध !
लव के लिए लबाते जवान लड़के लड़कियाँ , खुला नंगपन बेचने वाले कुछ
अभिनेता अभिनेत्रियाँ, मॉडलिंग की दुनियाँ से जुड़े अधिकाँश लोग,इसी प्रकार
से और भी ऐसे वैसे लोग साईं संप्रदाय से ही जुड़ना अधिक पसंद कर रहे हैं
!क्योंकि साईं के यहाँ विधि निषेध करने वाला कोई शास्त्र न होने
स्वेच्छाचारी लोगों को वहाँ सुविधा रहती है क्योंकि वहाँ गलत काम करने
वालों को रोका नहीं जाता है आखिर किस नियम का हवाला दिया जाएगा किसी को !see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
साईं संप्रदाय का उद्देश्य धर्म का व्यापारीकरण-
साईं का सम्पूर्ण कारोबार धार्मिक लोगों के आधीन न होकर व्यापारियों के
आधीन है वहाँ सारी ऊर्जा अधिक से अधिक धन इकठ्ठा करके सनातन धर्म में
घुसपैठ करने पर लगाई जाती है। इसलिए वहाँ धर्म का कोई वातावरण ही नहीं है
साईं संप्रदाय विशुद्ध रूप से धर्म के व्यापारीकरण पर टिका हुआ हैsee more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
आखिर साईं संप्रदाय के लोगों ने शंकराचार्य जी को
टी.वी. चैनलों पर बैठकर गालियाँ क्यों दी हैं ?उनसे माफी माँगने के लिए क्यों कहा
है !वो लोग ये कैसे भूल गए कि शंकराचार्य जी को सनातन धर्म में क्या
गौरव हासिल है !see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
सनातन धर्म के मंदिरों , मूर्तियों ,पूजा पद्धतियों को
करप्ट करने वाले साईं नाम के वायरस से सनातन धर्मियों को सावधान करना
शंकराचार्य जी की शास्त्रीय जिम्मेदारी है वही वो कर रहे हैं ! वो कोई
राजनीति नहीं कर रहे हैं see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
शंकराचार्य जी ने इस घुसपैठ का विरोध क्या कर दिया साईंयों ने उन्हें
गालियाँ देनी शुरू कर दीं , रैलियाँ निकालने लगे,केस करने लगे मीडिया को
पैसे देकर साईं समर्थन में धर्म संसदें आयोजित कराने लगे !कुल मिलाकर ये
लोग तो एक दम पागल हो उठे see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_1841.html
Friday, July 25, 2014
- माता पिता के साथ भी गद्दारी-
पवित्र प्रेम परमात्मा का स्वरूप होता है किन्तु अपवित्र प्रेम क्या होता है ?
जब तक मित्रता है तब तक ही प्रेम पवित्र रहता है तब तक किसी को किसी से कोई खतरा नहीं होता है किन्तु मित्रता के संबंध जब मूत्रता में बदलने लगें तो पवित्रता नहीं रह जाती इसलिए वहाँ परमात्मा भी नहीं रहता इसलिए वहाँ जितना भी बड़ा धोखा मिले उसे छोटा ही समझना चाहिए अर्थात कुछ भी घटित हो सकता है तैयार रहना चाहिए ! या तो सहने के लिए या अलग रहने के लिए !मर्जी अपनी अपनी !!!
- युवाओं की माता पिता के साथ भी गद्दारी-
कुछ लोग अपने माता पिता से छिपकर किसी लड़की या लड़के से प्रेम करते हैं ऐसे लोग जब अपने माता पिता के नहीं हुए तो किसी और के क्या होंगे ! सुख दुःख हैरानी परेशानी आदि सभी परिस्थितियों में अपनी संतानों के साथ तन मन धन से साथ खड़े रहने वाले माता पिता के साथ भी गद्दारी करने वाली संताने सुखी कैसे हो सकती हैं !
जो लोग मनोकामनाओं की पूर्ति के भ्रम में अपने भगवान को बदल कर साईं को भगवान बना बैठे ऐसे लोग अपने जीवन में कब क्या बदल लेंगे विश्वास नहीं किया जा सकता !
आज हार्ट अटैक की घटनाएँ बढ़ क्यों रही हैं ?इससे क्या है पुत्रियों का सम्बन्ध ?
पुत्र तन का पोषण करता है खाना पीना रहन सहन आदि किन्तु पुत्री मन का पोषण करती है जब बुढ़ापे में एकांत में उदास बैठे होगे उस समय आया हुआ पुत्री का एक फोन या पत्र भी सारे दुःख दूर कर देता है वो सुख धरती पर और कहीं नहीं मिल पाएगा जिनके पुत्रियाँ नहीं है पूछो उनसे उनके बुढ़ापे का हाल हृदय में कितने घाव हैं है कोई भाव का लेप लगाने वाला !
Wednesday, July 23, 2014
-आदरणीय चन्द्र शेखर आजाद जी को नमन -
प्यारे चन्द्र शेखर जी प्रार्थना हमारी है ये
एक बार भारत में फिर से पधारिए ॥
ऐसी ही स्वतंत्रता की कल्पना थी आपकी क्या,
चारों ओर लूट लतखोरी है निहारिए ॥
रेप से रँगे हैं अखवारों के अनंत पृष्ठ
छोटी छोटी बेटियों की विपति बिचारिए ।
शासकों से साँठ गाँठ होती अपराधियों की,
ऐसे राष्ट्र नायकों की नियत सुधारिए ॥
- डॉ.एस.एन. वाजपेयी
'' साईं भगवान हैं या नहीं ' इस विषय पर बहस ही क्यों ?
आखिर पैदा ही क्यों हुआ धर्म में साईं संकट ?
साईं को भगवान की तरह ,भगवान के मंदिरों में, भगवान की प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों की भाँति, भगवान के मन्त्रों एवं पूजा पद्धति से पूजा जाना ही सनातन धर्म पर विधर्मियों का बहुत बड़ा हमला है !
इसलिए सनातन धर्मियों का फाइनल फैसला यही है कि साईं बुड्ढे में भगवान की कल्पना भी नहीं जा सकती !अतः इस विषय पर बहस का औचित्य क्या है !
अभी तक सनातन धर्म द्रोहियों के द्वारा किसी के धर्म के विषय में दुष्प्रचार तो किया जाता रहा है किसी के धार्मिक ग्रंथों के विषय में दुष्प्रचार भी किया जाता रहा है,किसी के धार्मिक महापुरुषों के विषय में दुष्प्रचार भी किया जाता रहा है किन्तु अब तो भगवान के आस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया गया है।ऐसे तो कभी भी कोई भी ऐरा गैरा बन जाएगा हिन्दुओं का भगवान !
सनातन धर्मियों के भगवान , भगवान की मूर्तियों ,भगवान की पूजा पद्धतियों, भगवान के मंदिरों जैसी अत्यंत पवित्र अवधारणा पर ही अब तो साईं नाम का हमला हुआ है अब हम लोग पंचायत करते घूम रहे हैं कभी टी. वी. चैनलों पर तो कभी वैसे और वो भी इस विषय पर कि साईं भगवान हैं कि नहीं !ये विषय बिचार करने के लिए लाया जाना भी साईं के आस्तित्व को न्यूनाधिक रूप से स्वीकार करना ही है जबकि उचित तो यह है कि इस विषय को जड़ से ख़ारिज ही किया जाना चाहिए !
वैसे भी इस विषय में सनातन धर्मशास्त्र के अनुशार शास्त्रीय संतों के धर्मशास्त्रीय विचार ही विश्वनीय माने जा सकते हैं किन्तु साईं किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होंगे ! फिर भी यदि सौभाग्य से सनातन धर्म के शास्त्रीय संतों की सभा होनी ही है तो आत्ममंथन इस विषय पर हो कि साईं नाम की समस्या पैदा ही क्यों हुई ?इससे निपटा कैसे जाए ?दूसरी बात वर्तमान समय के सनातन धर्म के जिम्मेदार महापुरुषों से चूक आखिर कहाँ हुई है ,आखिर क्यों पैदा हुआ है धर्म में साईं संकट ?और दुबारा ऐसी परिस्थिति पैदा ही न हो इसके लिए क्या किया जाएगा !
साईं पूजा के समर्थन में जिन धर्माचार्यों ने जो बयान दिए हैं वो कहाँ तक उचित हैं उस पर शास्त्रीय संत समाज का रुख स्पष्ट किया जाए !साईं के संदर्भ में शास्त्रीय सच्चाई समाज के सामने रखने के लिए सनातन धर्म के अधिकृत शास्त्रीय संत क्या कुछ करने का आदेश देंगे वही सनातन धर्मियों को मान्य होगा !
साईं शब्द के प्रारम्भ में ॐकार और अंत में राम लगाकर ,झूठ मूठ में साईं गायत्री बना एवं बताकर मंदिरों में साईं की मूर्तियाँ घुसा कर जिन सनातन धर्मियों को भगवान के भ्रम में साईंयों के द्वारा फाँसा गया है उनके सामने शास्त्रीय सच्चाई कौन रखेगा किस प्रकार से रखी जाएगी आदि आदि बातों पर देश काल परिस्थिति के अनुशार शास्त्रीय संत विचार करें !
अंधेर हो गई साईं भगवान बनेंगे !"जान न पहचान बड़े मियाँ सलाम" वर्तमान समय में तो साईंयों ने जो घृणापन फैला रखा है उसके आधार पर साईं को संत भी नहीं माना जा सकता है क्योंकि "संत वही भगवंत जो मानै"और जो भगवान की जगह अपनी पूजा कराने लगे ये तो सनातन हिन्दुओं की परंपरा ही नहीं है और जो हिन्दुओं की परंपरा का पालन ही न करता हो वो जब हिन्दू ही नहीं हैं तो संत कैसे हो सकते हैं और जहाँ तक बात भगवान की है वो तो कोई प्रश्न ही नहीं है क्योंकि भगवान हमारे निश्चित हैं उनकी संख्या घटाई बढ़ाई कैसे जा सकती है !
साईं संकट कोई आम घटना नहीं है ये सब कुछ सुनियोजित सा लगता है । अभी हाल ही में पैदा हुआ एक अदना सा टी.वी.चैनल धर्म ,धर्मशास्त्रों ,धार्मिक महापुरुषों ,धर्माचार्यों एवं श्रद्धेय साधूसंतों की छीछालेदर करने के बल पर ही आज राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय आदि जो कुछ कहें सो हो गया है! लाख टके का सवाल यह है कि केवल एक टी.वी. चैनल चलाने के लिए धर्म जैसे संवेदन शील विषय की तथ्यहीन एवं लक्ष्य हीन चीड़फाड़ करना या कराना कहाँ तक उचित एवं नैतिक है ! वह भी तब जब एक धर्म विशेष के आस्था महापुरुषों की पोशाक की नक़ल करने मात्र से बवाल हो चुका हो किन्तु आज सनातन धर्मियों की भावनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को कैसे और क्यों दिया जा रहा है कोई झिझक क्यों नहीं होती! ऐसी बातें सनातन हिन्दू धर्म एवं धर्मशास्त्रों के विरुद्ध बोलने पर ?
हिन्दुओं का भगवान कैसे बनाया जा सकता है साईं भगवान हैं या नहीं इस पर बहस ही क्यों और किस बात के लिए बहस !और बहस से यदि ये सिद्ध भी कर दिया जाएगा कि साईं भगवान हैं तो क्या श्री राम कृष्ण शिव दुर्गा गणेश हनुमान जी जैसे देवी देवताओं के बराबर साईं को बैठाया जाना स्वीकार कर लिया जाएगा !
हिन्दुओं के धर्म एवं धर्मशास्त्रीय विषयों का निर्णय कुचक्रपाणियों ,आमोद प्रमोदों ,प्रज्ञाकुंदों से कराया जाना कहाँ तक ठीक है ? जिनका शास्त्र से कोई सम्बन्ध ही नही है ये बिना पेंदी के लोटे जिधर पैसे देखते हैं उधर लुढक जाते हैं ऐसे लोगों से ही टी.वी.चैनलों को भी मजा आ रहा है धर्मसंसद के नाम पर अशास्त्रीयता को स्थापित करने में टी. वी.चैनल भी महती भूमिका अदा कर रहे हैं ।
पाखंडियों ने धर्म को विकृत करने की कसम सी खा रखी है अग्निवेश कह रहे हैं कि "बाबा अमरनाथ में शिव लिंग केवल बर्फ का पुतला है "
आखिर यह कहकर अग्निवेश जी समझाना क्या चाहते हैं ,कहीं ये तो नहीं कि वो सामान्य बर्फ पिंड मात्र है इसके अलावा कुछ नहीं है यदि उनके कहने का वास्तव में यही मतलब है जो मैं समझ पा रहा हूँ तो मैं अग्निवेश जी से जानना चाहता हूँ कि हमारा और उन जैसों का शरीर भी उस दृष्टि से तो मांस पिंड ही है अर्थात इसमें शरीर की दृष्टि से केवल मीट ही मीट है इसके अलावा कुछ भी नहीं है किन्तु क्या हमारे शरीरों की तुलना कसाई की दूकान पर रखे मीट से की जा सकती है ! यदि हम लोग केवल मांस पिंड अर्थात मीट के लोथड़े मात्र हैं तो आपका विचार अपनी दृष्टि से सही माना जा सकता है !
अज्ञानी अग्निवेश जी ! आपकी धर्म एवं धर्म द्रोह करने की आदत ठीक नहीं है आखिर क्यों करते हैं बुढ़ापे में भी गाली खाने का काम ?माना कि आपको धार्मिक होने का सम्मान नहीं मिल पाया इसलिए आपको अपनी इज्जत की परवाह नहीं अपितु धर्म से चिढ है किन्तु कौशेय वस्त्रों की तो मर्यादा बनी रहने दीजिए !संतों की सी वेष भूषा बनाकर घूमने वाले किसी व्यक्ति के मुख से ये मंदिरों में स्थापित मूर्तियों की आलोचना एवं बाबा अमर नाथ जी के बर्फ लिंग की आलोचना सुन कर न केवल सम्पूर्ण हिन्दू समाज हतप्रभ है अपितु उसके बाद से लोग आपको कलियुग का कालनेमि कहने लगे हैं !
कुल मिलाकर हमारा तो सभी सनातन धर्मी साधू संतों विचारकों से यही निवेदन है कि चोरों को गाली देने की अपेक्षा अपना घर ही क्यों न सँभाल लिया जाए !
Monday, July 21, 2014
saai 5
धर्म की ये दुर्दशा -
बड़े बड़े मलमलबाबाओं, तमाशारामों, आमोदप्रमोदों तथा कुचक्रपाणियों के मनमाने ऊलजुलूल एवं धर्म के नाम पर धर्म विहीन अधार्मिक अशास्त्रीय निर्णयों वक्तव्यों आचरणों से सनातन धर्मी समाज अब तंग आ चुका है । जब होता है तब सनातन धर्म कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है आखिर क्यों और कोई धर्म क्यों नहीं ? सनातन धर्म शास्त्रों में लिखी बातों का उपहास उड़ाया जाता है सनातन धर्म के बड़े से बड़े साधू संतों को टी.वी.चैनलों पर बैठकर लोग गाली दे देते हैं ,ऐसे लोग जिनकी धार्मिक शिक्षा बिलकुल शून्य है वो भी टी.वी.चैनलों पर बैठकर धार्मिक विन्दुओं पर हमारे साधू संतों से माफी माँगने की माँग करते हैं उनका इतना दुस्साहस !
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भगवा वस्त्रों में शरीर लिपेट कर रहने वाला कोई सनातन धर्म शास्त्र द्रोही हिन्दुओं के प्राण रूप भगवान श्री राम और श्री कृष्ण को आम इंसान बता देता है भगवान की मूर्तिओं को आम पत्थर बता देता है ऐसे निकृष्ट व्यक्ति का भी सम्मान करने की एवं उसे स्वामी जी कहने की हिन्दू समाज की आखिर क्या मजबूरी है!
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राजनीति करने के लिए कुछ लोग धर्म से जुड़े हैं धार्मिक वेष भूषा बनाए फिरते हैं अधिकांश ऐसे साधुओं ने ही साईं पूजा का समर्थन किया है उनकी बातों का विश्वास आखिर कैसे किया जाए क्योंकि वो पूर्णतया धार्मिक नहीं होते हैं आधे धार्मिक और आधे नेता होते हैं तो धार्मिक वेष भूषा में रहते हुए भी राजनैतिक दोष दुर्गुण उनमें आ जाना स्वाभविक ही है ,आखिर चुनाव लड़ने के लिए उन्हें बहुत पैसा चाहिए दुनियां जानती है कि उनका कोई कारोबार नहीं है उन्हें यदि चुनावी चंदा चाहिए तो माँगना ही पड़ेगा !उस धन के लिए वो साईं की वकालत करें या किसी और प्रकार की दलाली या कमीशन का कुछ और काम धंधा देखें ,कुछ न कुछ ऐसा ही करना पड़ेगा उन्हें अन्यथा आखिर कहाँ से आएगा वो भारी भरकम धन जो चुनाव लड़ने के लिए चाहिए इसलिए धन के लिए कोई भी अशास्त्रीय समझौता करना उनकी मजबूरी हो सकती है किन्तु आम आदमी जो बिलकुल आम बनकर जी लेना चाहता है आखिर वो अपने देवी देवताओं ,धर्म शास्त्रों ,मंदिरों एवं महापुरुषों की प्रतिष्ठा से समझौता क्यों करे !
more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlseeधर्म की ये दशा -
हिन्दुओं के यहाँ भगवानों की कोई वैकेंसी खाली नहीं है !
जहाँ साईं को भर्ती कर लिया जाए !भगवान बनाकर पूजने की लिस्ट में साईं का कहीं नंबर ही नहीं है !
सबसे अधिक देवी देवता हिन्दुओं में ही हैं, इसलिए साईं को कृपा करके उन धर्मों पर थोपा जाए जिनके यहाँ भगवानों की कमी है !हिन्दू अपने धर्मों एवं परंपराओं से बाहर जाकर किसी तथाकथित भगवान को गोद नहीं ले सकता !ये मजबूरी सबको समझनी चाहिए ,वैसे भी हिन्दुओं को यदि किसी को भगवान बनाकर ही पूजना होगा तो उनके स्वयं असंख्य साधू संत महापुरुष आदि दिव्यातिदिव्य हो चुके हैं जिन्होंने देश समाज धर्म एवं धर्म शास्त्रों के लिए बहुत कुछ किया है जिनके योगदान को
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
यदि हमें भगवान बनाकर ही पूजना ही होगा तो हम अपने पूर्वजों को पूजेंगे, उनके मंदिर बनाएँगे उनकी मूर्तियाँ लगाएँगे । जिनके चरित्र से दुनियाँ सुपरिचित है उनके योगदान के विषय में कोई एक प्रश्न करेगा तो सौ उत्तर देंगे आखिर उनके आचरण ही ऐसे उत्तमश्लोक होंगें कि उनकी पहचान बताने और प्रशंसा करने में हमें शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा बगलें नहीं झाँकनी पड़ेंगी ,टी.वी. पैसा देकर झूठी प्रशंसा नहीं करवानी पड़ेगी !
more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlseeधर्म की ये दशा -
साईं सनातन धर्म के प्रति समर्पित व्यक्ति नहीं थे वो सभी धर्मों को मानने वाले थे इसलिए जिसे हमारे धर्म के प्रति भरोसा नहीं था उस पर हम ही भरोसा क्यों कर लें ? सभी धर्मों के लोग उन्हें जितना मानेंगे हिन्दू भी उतना मानेंगे वो जिसकी इच्छा होगी ।
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धर्म की ये दशा -
साईं बूढ़े थे इस नाते उनका सम्मान उसी तरह किया जा सकता है जितना सभी वृद्धों का होता है आखिर साईं वीआईपी बूढ़े क्यों माने जाएँ !आखिर हमें क्यों लगता है कि हमारे माता पिता दादा दादी आदि पूर्वज भगवान बनने के लायक नहीं थे उनमें ऐसी क्या कमी थी जिसे साईं पूरी करते हैं अगर कोई कहता है कि साईं मनोकामना पूरी कर देते हैं याद रखिए बड़े बूढ़ों की सेवा से जो आशीर्वाद मिलता है वो अमोघ कवच होता है वो अनंत पुण्यफल प्रदान करता है उससे बड़ी बड़ी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं ये स्वाभाविक है हमारे धर्म शास्त्रों का ये उद्घोष है कि वृद्धों की सेवा से ये चार चीजें प्रतिदिन बढ़ती हैं -
चत्वारि तस्य बर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्
आयु, विद्या,यश और बल
इसका अनुभव वही बता सकते हैं जिन्होंने अपने घर के वृद्धों का सम्मान किया है पूजन किया है जो अपने घर के वृद्धों का हक़ मार करके दूसरे के वृद्धों(साईं ) का पूजन करते घूमते हैं उन्हें फल तो भगवान देते हैं किन्तु वो फल नहीं मिलता है जो अपने बृद्धों के पूजन से मिलता है आखिर हम दूसरे के बूढ़ों को पूजते घूमेंगे तो हमारों को कौन पूजेगा इसलिए वो फल नहीं मिलता दूसरा फिर अपने परेशान करते हैं अर्थात पितृदोष होता है !
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
ऐसे कितने लोग हैं जो अपने पितरों का पूजन करते हैं श्राद्ध करते हैं और उन्हें छोड़कर साईं बाबा जैसे दूसरे के बूढ़े को पूजते घूमते हैं !अपने माता पिता सास श्वसुर आदि की पूजा न करके दूसरे बूढ़ों (साईं )को पूजते हैं तो उनका श्राप लगता है बेशक वोमाता पिता आदि जीवित ही क्यों न हों बेशक वो श्राप न दें किन्तु भगवान ही ऐसा न्याय करते हैं यदि ऐसा नहीं होगा तो दुनियाँ साईं को पूजने लगेगी और अपने माता पिता को वृद्धाश्रम भेज आएगी या उनकी उपेक्षा करने लगेगी !
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
यह तो सब लोग मानते हैं कि साईं और कुछ भी हों किन्तु हिन्दुओं के भगवान नहीं हो सकते !यदि यह सच है तो यह भी मानना पड़ेगा कि साईं की मूर्तियाँ मंदिरों में नहीं रखी जा सकतीं क्योंकि मंदिर भगवान के लिए बनाए जाते हैं ! जितना यह सच है उतना ही सच यह भी है कि साईं की मूर्तियाँ प्राण प्रतिष्ठित नहीं हो सकतीं क्योंकि वेदों में मन्त्र तो देव प्रतिष्ठा के लिए होते हैं और बिना प्राण प्रतिष्ठा की हुई मूर्तियों का पूजन करने से हिन्दुओं के देवी देवताओं की मूर्तियों की पूजा के विषय में भी संशय होगा कि शायद ये भी देव मूर्तियाँ न होकर पत्थरों के खंड ही पुरुषाकृति के बनाकर फूल मालाएँ चढ़ाकर कर गाया बजाया जाने लगा हो जबकि देवी देवताओं की मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है जो साईं की मूर्ति में संभव ही नहीं है । हो सकता है साईं साधू संत या कोई दूसरे धर्म के फकीर रहे हों किन्तु मंदिरों में साईं की मूर्ति रखकर देव पूजा पद्धति से साईं की पूजा तो नहीं ही की जा सकत है क्योंकि यह शास्त्र सम्मत नहीं है ।
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
साईं को साधू संत यदि मान भी लिया जाए तो शास्त्र को एक तरफ रखकर आँखें मूँद कर साधुवेष पर भी अंध विश्वास तो नहीं ही किया जा सकता है वैसे भी अंध आस्था के कारण ही माता सीता का हरण हुआ था सनातन हिन्दुओं को उस घटना से बहुत कुछ सीखना होगा !
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
साईं को साधू संत यदि मान भी लिया जाए तो शास्त्र को एक तरफ रखकर आँखें मूँद कर साधुवेष पर भी अंध विश्वास तो नहीं ही किया जा सकता है वैसे भी अंध आस्था के कारण ही माता सीता का हरण हुआ था सनातन हिन्दुओं को उस घटना से बहुत कुछ सीखना होगा !
इसलिए कुछ धार्मिक लोग भी यदि साईंपूजा का समर्थन कर देंगे तो भी ऐसे स्वयंभू नीति नियामकों को सनातन धर्मी हिन्दू समाज अपना धार्मिक प्रतिनिधि क्यों मान लेगा यदि वो शास्त्र सम्मत न बोलकर अपितु धर्मशास्त्रों की आवाज दबाकर अपना मनगढंत फतवा जारी करेंगे!सनातन धर्मी हिन्दू किसी का बँधुआ मजदूर तो नहीं है जो धर्म के नाम पर उसे जैसा समझा दिया जाएगा वैसा मान लेगा !यदि वो शास्त्र पढ़ सकता है तो स्वयं भी पढ़ेगा और समझेगा तब मानेगा !
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlधर्म की ये दशा -
केवल धार्मिक वेष भूषा धारण कर लेने से किसी को संत नहीं माना जा सकता! संत स्वयंभू नहीं हो सकते !साधू संत वेद पुराणों एवं धर्म शास्त्रों को मानते हैं भगवान को भगवान मानते हैं इसलिए हिन्दू समाज उन्हें भगवान की तरह मानता है !किन्तु इसका ये कतई मतलब नहीं है कि धर्मवेष धारण करने वाले ऐसे कुछ लोग किसी अनाम बुड्ढे को भगवान बनाकर पूजने के लिए सनातन हिन्दुओं पर थोप देंगें ! अब सनातन धर्मी हिन्दू समाज किसी के भी ऐसे आदेश को स्वीकार नहीं करेगा जिससे उसके धर्म शास्त्रों की उपेक्षा होती हो देवताओं का गौरव घटता हो जिससे उसके आस्था प्रतीकों मंदिरों की गरिमा के साथ खिलवाड़ किया जाता हो !
see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/07/blog-post_20.htmlSunday, July 13, 2014
साईं संप्रदाय के लोगों को हमारे ज्योतिषी होने पर आपत्ति क्यों ?
मुझे यह समझ में नहीं आता है कि यदि हमने सरकारी पाठ्यक्रम के हिसाब से भारतीय कानून का अनुपालन करते हुए हिंदी (ज्योतिष)) में डॉक्टरेड किया है फिर भी यदि किसी को ज्योतिष अंधविश्वास लगता है तो उसे शिकायत हमसे नहीं सरकार से होनी चाहिए इसलिए हम फेस बुक के अपने सभी मित्रों से केवल इतना ही निवेदन करते हैं !
यदि कोई ज्योतिष या वास्तु के किसी भी विषय में कोई भविष्यवाणी करता है और वह गलत हो जाती है अथवा वो किसी के जीवन से जुड़ी कोई समस्या या उसके समाधान बताता है किसी को किसी आधार पर लगता है कि वो गलत हैं या उसे भ्रमित किया जा रहा है या उसके साथ धोखाधड़ी की जा रही है ऐसी परिस्थिति में उसके लिए चिकित्सा पद्धति की तरह ही इसमें भी कानून के दरवाजे खुले हैं कानूनी प्रक्रिया में वो जवाब देय होगा कि किन ग्रंथों प्रमाणों के आधार पर ज्योतिर्विद ने ऐसी बात कही है वो काम उसका है वो अपना पक्ष कोर्ट में रखेगा या सजा भुगतेगा !
हर भविष्यवाणी गलत होने पर गलती ज्योतिषी की ही नहीं होती है क्योंकि ज्योतिष जैसे गंभीर विषय को सँवार कर फलित करने की सारी जिम्मेदारी केवल ज्योतिष वैज्ञानिकों की ही नहीं है आम समाज को इसमें सहयोग करने की आवश्यकता है ।कई बार जन्म पत्रियाँ गलत होती हैं या कम्प्यूटर से बनी हुई होती हैं उनमें उतनी शुद्धता न होने के कारण वो पूर्ण विश्वनीय नहीं होती हैं कई बार जिसकी जन्मपत्री लोग दिखाते हैं किन्तु दोष उसमें नहीं होता दोष घर के किसी अन्य सदस्य की कुण्डली या वास्तु आदि का होता है जिसे भुगत वो रहा होता है ऐसी परिस्थिति में उन सारी चीजों की गहन जाँच करनी होगी ,उसका खर्च भी अधिक आएगा और समय भी अधिक लगेगा ये स्वाभाविक है किन्तु जो लोग अज्ञान,कंजूसी या चालाकी के कारण उस पर लगने वाला खर्च वहन नहीं करना चाहते हैं इसका मतलब यह नहीं होता है कि हम अपनी श्रद्धा से जो चाहें सो दें पंडित जी वो लेंगे और पंडित जी मेहनत पूरी करेंगे !किन्तु ऐसा कभी नहीं होता है ज्योतिषी के साथ जैसा व्यवहार आप करेंगे ज्योतिषी भी वैसा ही व्यवहार आपके साथ करेगा ! ये कभी नहीं सोचना चाहिए कि ज्योतिषी यदि विद्वान है तो वो तो हमारा भाग्य सही सही बताएगा ही उसे परिश्रम चाहें जितना करना पड़े !ये भ्रम है जैसे बिजली किसी जगह चाहें जितनी हो किन्तु जितने बाड का बल्व लगा होता है प्रकाश उतना ही होता है ।इसी प्रकार से समुद्र में पानी चाहे जितना हो किन्तु पानी उतना ही देता है जितना बड़ा बर्तन होगा ठीक इसी प्रकार से कोई ज्योतिषी विद्वान चाहे जितना हो और किसी से सम्बन्ध चाहे जितने अच्छे हों किन्तु जितना आपका धन लगता है उतना ही ज्योतिषी का मन लगता है यदि धन नहीं तो मन नहीं, हाँ ,जैसे और जितनी चिकनी चुपड़ी बातें आप करके चले आओगे उतनी ही चिकनी चुपड़ी बातें करके ज्योतिषी लोग आपको प्रेम पूर्वक भेज देंगे !यदि आप सोचते हैं कि मैंने चतुराई से काम निकाल लिया तो ज्योतिषी सोचता है कि मैंने परन्तु पैसे कम देने में आप भले सफल हो गए हों किन्तु जिस काम के लिए आप ज्योतिषी के पास गए थे वो काम आप बिलकुल बिगाड़ कर चले आए हो लेकर कई लोग अपनी समस्याओं से निपटने के लिए ज्योतिष पर उतना विश्वास नहीं कर पाते हैं जितना अन्य माध्यमों पर जैसे कोई बीमार है तो डाक्टर जाँच पर जाँच बताते जाएँगे इलाज पर इलाज बदलते जाएँगे उसमें धन खर्च करने में उतनी दिक्कत नहीं होती है किन्तु ज्योतिष विद्वान यदि उस हिसाब से समस्या की जड़ तक पहुँचना चाहे तो काम बढ़ जाएगा जिसका खर्च भी बढ़ेगा जिसके लिए लोग तैयार नहीं होते ऐसी परिस्थिति में ज्योतिषी भी उस कठिन परिश्रम से बचते हुए उतने में ही जो कुछ संभव हो पता है वो बता कर अपना पीछा छुड़ा लेता है ऐसे लोग बाद में सोचते हैं कि भविष्यवाणी गलत हो गई जो गलत है। मेरी तो सलाह ऐसे लोगों को है कि आधी अधूरी श्रद्धा लेकर किसी ज्योतिष वैज्ञानिक के पास जाना क्यों आखिर कोई विद्वान किसी के घर बुलाने तो जाता नहीं है कि हमें दिखा लो अपनी कुंडली !
इसी प्रकार से विवाह विचार में लड़के लड़की की कुंडली मिले जाती है और सास बहू की लड़ाई होकर तलाक हो जाता है इसमें ज्योतिष का क्या दोष ?या तो पहले ही विचार सारे घर के सदस्यों को लेकर किया गया हो फिर तो बात है । इसीप्रकार विवाह के दस वर्ष बाद एक बीमार हो जाता है या नहीं रहता है या संतान नहीं होती है या व्यापार बिगड़ जाता है इसमें ज्योतिष गलत कहाँ है ? इन विषयों में विचार करने के लिए ज्योतिषी को पर्याप्त काम करने की उतनी आर्थिक स्वतन्त्रता ही नहीं मिली !इसमें ज्योतिष का क्या दोष ?
रही बात वास्तु की इसे हमेंशा तीन भागों में बाँट कर चलना होता है 33 प्रतिशत उसकी जन्म पत्री में,33 प्रतिशत वास्तु भूमि के अंदर ,और 33 प्रतिशत भवन निर्माण कला में होता है। जन्मपत्री से हमारा अभिप्राय यह है कि जब भाग्य में भवन सुख होगा तभी तो मिलेगा ऐसा प्रत्यक्ष तब देखा जाता है जब कोई किसी एक कमरे में रहते रहते एक कोठी बना लेता है जबकि उस कमरे में जगह की कमी के कारण वह किन्हीं वास्तु नियमों का पालन नहीं कर पाया फिर भी कोठी बन गई ये भाग्य है इसमें जन्मपत्री का विषय होता है। दूसरा वास्तु भूमि के अंदर से आशय उस विषय से है जब जमीन के अंदर कुछ ऐसी चीज गाड़ी गई हो या गड़ी हो जो वहाँ किसी को बसने न दे रही हो जैसे जीवित शल्य अर्थ ऐसे व्यक्ति की हड्डी जो पूर्णायु का भोग किए बिना ही किसी दुर्घटना आदि में शरीर छूट गया हो उसकी हड्डियाँ जीवित शल्य होती हैं जिनका दुरूपयोग तांत्रिक लोग किया करते हैं जो गलत है ऐसी जमीनों को शुद्ध करने के लिए ज्योतिषीय गणित के द्वारा पहले उनका पता लगाया जाता है फिर उन्हें शास्त्रीय शल्यानयन विधि से निकला जाता है । उसके बाद वहाँ रहने लायक भवन बनाया जा सकता है तीसरे नंबर 33 प्रतिशत भूमिका वास्तुकला की होती है जिसमे किस दिशा में क्या बनाना है इसमें आवश्यकतानुशार कुछ समझौते भी किए जा सकते हैं जिनका बहुत बड़ा असर नहीं होता है यदि बाकी दोनों चीजें सही हुईं तो और यदि वो दो बिगड़ गईं तो सब कुछ बिगाड़ा ही जानना चाहिए ऐसी परिस्थिति में केवल वास्तु कला किसी काम नहीं आएगी इसीलिए केवल वास्तु कला मानकर नहीं चला जा सकता है जैसा आजकल हो रहा है क्योंकि अधिकाँश दोष जमीन के अंदर होते हैं और विशेष प्रभाव वास्तु का होता है।
अब बात मौसम की सरकारी मौसम विभाग आजकल बड़ी चालाकी से काम ले रहा है जैसे अबकी बार ही अभी से बोल दिया कि सूखे की संभावना है इसका प्रमुख कारण है कि यदि पानी बरस जाएगा तो लोग खुश होकर ऐसी भविष्य वाणियाँ भूल जाएँगे और यदि बरसा नहीं हुई तो भविष्य वाणी तो सच हो ही गई !यदि इन्होंने अच्छी वर्षा होने की भविष्यवाणी की होती और फिर सूखा पड़ जाता तो दुःख में भविष्यवाणियाँ बहुत याद आती हैं सुखी लोग कहाँ सोचते हैं भविष्यवाणियों के विषय में !
सरकारी मौसमविभाग केवल चालाक ही नहीं कृषि आदि के कुछ विषयों में अप्रासंगिक भी है जैसे पशुओं का चारा आनाज आदि खाद्य सामग्री तो फसल पर ही संग्रह करना होता है इसलिए अगले काम से कम छै महीने अथवा पूरे वर्ष के मौसम की जानकारी किसान को फसल तैयार होने से पहले हो जानी चाहिए इससे वो फसल तैयार होने पर अपने एवं अपने पशुओं के लिए खाद्य सामग्री का संग्रह वर्ष भर के लिए कर लेता है !किन्तु जब वो फसल तैयार करके कुछ महीनों की खाद्य सामग्री का संग्रह करके बाक़ी फसल बेच लेता है क्योंकि उसे पता होता है कि कुछ महीने में अगली फसल आनी है। इसके कुछ महीने बाद मौसम विभाग यदि सूखे की भविष्यवाणी कर भी देता है तो किसान के किस काम की और सरकार के किस काम की क्योंकि सरकार यदि किसी अन्य देश से लेकर आपूर्ति करना भी चाहे तो समय तो उसके लिए भी चाहिए !
ऐसी परिस्थिति में मौसम विभाग क्या करता होगा कैसे करता होगा उसकी तो वाही जानें किन्तु ज्योतिषीय मौसम विभाग के विषय में विश्वास पूर्वक कहा जा सकता है कि कोई भी भविष्यवाणी पचास से साथ प्रतिशत तो सच होगी ही किन्तु इसका एक लाभ और है कि इस ज्योतिषीय मौसम भविष्यवाणी को कुछ महीनों ही नहीं अपितु वर्षों पहले भी किया जा सकता है!मेरे कहने का अभिप्राय है कि यदि पचास प्रतिशत का इशारा भी किसानों तथा सरकार एवं सरकारी संस्थाओं को पहले से मिल जाए तो वो यथासंभव आवश्यक व्यवस्था कर लेंगी किन्तु ज्योतिषीय मौसम भविष्यवाणी के लिए सरकार को संसाधन उपलब्ध कराने से लेकर आर्थिक सहयोग तक में पूर्ण रूचि लेनी होगी और परिणामों में जितनी छूट सामान्य वैज्ञानिकों को मिलती है उतनी ही ज्योतिष वैज्ञानिकों को भी देनी होगी मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास भी है कि इसे देश एवं समाज का महत्वपूर्ण लाभ होगा ।
इसी प्रकार से किसी की बीमारी आदि के विषय में मान लीजिए उसे ग्रह जनित दुष्प्रभाव से बीस से सत्ताईस वर्ष बीमार रहना है तो इसका पता जन्म के समय भी लगाया जा सकता है जिससे सतर्क रहते हुए उसके उपाय करते हुए पाठ्य परहेज पूर्वक उस समय को निकला जा सकता है अन्यथा जाँच चिकित्सा में डाक्टर बदलते अस्पताल बदलते शहर शहर में या विदेशों में भी इलाज के नाम पर भटककर समय पार करना पड़ता है कई लोग तो इलाज कराते कराते सब जगह से थक हारकर किसी तीर्थ में यह सोचकर बस जाते हैं कि सब जगह इलाज कराकर थक गए अब जो होगा सो होगा और वहीँ किसी वैद्य आदि के यहाँ से कोई सामान्य दवा काढ़ा आदि लेते हैं देवी देवताओं बाबा बैरागियों आदि के दर्शन करते रहते हैं । इसी बीच वो अचानक ठीक होने लगता है और ठीक हो जाता है तब तक उसका वो बीस से सत्ताईस वर्ष अर्थात सातवर्ष का समय पार हो जाता है अब वो अपने ठीक होने का श्रेय उन उन लोगों को देने लगता है जो जो उपाय उसने बाद में किए थे जब कि वो समय के प्रभाव से बीमार हुआ था समय के प्रभाव से ठीक हो गया !यही कारण है कि प्रतिकूल समय में दवाएँ भी उतना असर नहीं करती हैं जितना करना चाहिए। इसलिए किसी व्यक्ति पर चिकित्सा को प्रभावी बनाने के लिए ज्योतिष का भी इस रूप में सहयोग लिया जा सकता है।
इन समस्त बातों में कहीं कोई लीपा पोती नहीं है चिकित्सा के क्षेत्र की तरह ही सारी सरकारी एवं कानूनी पारदर्शिता है जिसे सबको मिलजुलकर पालन करना चाहिए ज्योतिष शास्त्र को गाली देना ठीक नहीं नहीं है और न ही ज्योतिषियों को !जैसे कोई किसी अन्य सब्जेक्ट का अध्ययन करता है वैसे ही कोई ज्योतिषी ज्योतिष विषय का जैसे चिकित्सा आदि किसी अन्य क्षेत्र में डिग्रियाँ सरकारी विश्व विद्यालयों द्वारा छात्रों को दी जाती हैं वैसे ही ज्योतिष पढ़ने वाले छात्रों को पढ़ाई पूरी करने पर सरकारी विश्व विद्यालय डिग्रियाँ देते हैं ।भारतीय संविधान के दायरे में रहकर जैसे कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय को पढ़ने में स्वतन्त्र होता है इसी स्वतंत्रता से ज्योतिषी लोग ज्योतिष पढ़ते हैं तो उनका अपराध क्या है ?
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