Friday, May 8, 2020

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आदरणीय प्रधानमंत्री जी
                            सादर नमस्कार
विषय : वेद विज्ञान की दृष्टि से राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित पूर्वानुमान के विषय में विनम्र निवेदन !
महोदय, 
       कल अर्थात 12-5-2020 \11.38 PM ,4.9 तीव्रता का संयुक्त भूकंप नेपाल भारत और चीन में आया है जिसका केंद्र नेपाल का सुंदरबटी स्थान बताया जा रहा है | भारत में इस भूकंप के झटके मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी और समस्तीपुर समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में महसूस किए गए हैं । 
    वेदविज्ञान की दृष्टि से इस भूकंप के द्वारा जो संकेत दिए जा रहे हैं उनके अनुसार नेपाल के इस क्षेत्र का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए चीन के द्वारा किया जा रहा है जिसमें नेपाल भी सहयोगी सिद्ध होता दिख रहा है |
     इस भूकंप के आधार पर ऐसा अनुमान है कि नेपाल की सीमा से उत्तर बिहार के कुछ जिलों में हथियारों या विस्फोटकों से युक्त कुछ ऐसे लोगों का प्रवेश कराया गया हो सकता है !ऐसे आतंकी उपद्रवी विस्फोट आदि के माध्यम से या अन्य किसी भी प्रकार से भारत को कोई तगड़ी चोट दे सकते हैं |
    दूसरी संभावना यह भी है कि कुछ कोरोना आतंकियों को नेपाल से भारत में प्रवेश कराया गया हो जो उत्तर बिहार के कुछ जिलों में कोरोना जैसी महामारी को विस्तार देने में सहायक हो सकते हैं |
     कुलमिलाकर जिस किसी भी प्रकार से 12\13 मई की रात्रि को भारत की सीमा में घुसे लोग भारतीयों के लिए अत्यंत कष्टप्रद हो सकते हैं |
      अतएव आपसे विनम्र निवेदन है कि मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी और समस्तीपुर एवं इनके आस पास के जिलों में चलने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए | सरकार यदि ऐसे लोगों पर सतर्कता पूर्वक अंकुश लगाने में सफल होती है तो यह भारत के लिए अत्यंत सुखद होगा !विशेष सतर्कता बरतने का प्रयास 27 मई तक किया जाए तो संभव है कि ऐसे उपद्रवियों के सुनियोजित षड्यंत्रों को विफल किया जा सके |
                         निवेदक -
    डॉ. शेष नारायण वाजपेयी 
             Ph. D.  By  BHU 
      A -7\41,कृष्णानगर,दिल्ली -51  
    मो.9811226973  \9811226983





आदरणीय प्रधानमंत्री जी
                            सादर नमस्कार
विषय : कोरोना समाप्ति से संबंधित पूर्वानुमान के विषय में विनम्र निवेदन !

महोदय,  
   कोरोना जैसी महामारी से संपूर्ण विश्व के लाखों लोग बीमार हुए एवं बहुत बड़ी संख्या में मृत्यु को प्राप्त हुए हैं अभी भी कई देशों प्रदेशों में इस महामारी का कहर जारी है जिससे समाज का भयभीत होना स्वाभाविक है | इसी बीच एम्स के डायरेक्टर साहब का एक बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा है -
                   "भारत में जून-जुलाई में चरम पर होगी कोरोना महामारी"
     प्रधानमंत्री जी !आधुनिक विज्ञान के पास महामारी का पूर्वानुमान लगाने की कोई प्रक्रिया अभी तक विकसित नहीं की जा सकी है अन्यथा महामारी के आने से पहले ही इसके विषय में पूर्वानुमान लगाकर कोरोना के विषय में भविष्यवाणी क्यों नहीं कर दी गई थी ?यदि तब नहीं की जा सकी तो अब किस आधार पर ऐसे वक्तव्य दिए जा रहे हैं | ये डर पैदा करने वाले वक्तव्य कितने विज्ञान सम्मत हो सकते हैं | 
    आधुनिक विज्ञान में मौसम से लेकर महामारियों तक के बिषय में पूर्वानुमान लगाने की कोई प्रक्रिया ही नहीं है जिसके आधार पर भविष्य भाषण किया जाता है वो अवैज्ञानिक एवं केवल खानापूर्ति मात्र होती है | यही कारण है कि अधिकाँश प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सका है |इसीलिए अचानक घटित होने वाली प्राकृतिकआपदाओं से बड़ी संख्या में जनधन की हानि होती रही है |स्थिति यह रही है कि मौसम के विषय में लगाए गए तीर तुक्के यदि सही निकल जाते रहे तब तो भविष्यवाणी और यदि गलत  निकल गए तो जलवायुपरिवर्तन !मानसून आने जाने की तारीखों का भी कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है | इसीकारण उन तारीखों पर कभी मानसून आया गया भी नहीं है | इस वर्ष मई के महीने में हो रही इतनी अधिक बारिश के विषय में पहले कभी कोई भविष्यवाणी नहीं की गई थी जिस अज्ञान एवं लापरवाही की कीमत लाखों किसानों को चुकानी पड़ रही है |
      इसी प्रकार से कोरोना जैसी महामारी का पूर्वानुमान लगाने की आधुनिक वैज्ञानिकों के पास कोई प्रमाणित प्रक्रिया नहीं है |इसीलिए कोरोना का पूर्वानुमान पता नहीं लगाया जा सका और न ही इसका स्वरूप स्वभाव लक्षण औषधियाँ आदि ही खोजी जा सकीं !जब कोरोना अपने आप से समाप्त हो जाएगा तब हमेंशा की तरह बड़े बड़े दावे कर दिए जाएँगे ये और बात है | 
        कोरोना से जो लड़ाई लड़ने की बातें की जा रही हैं ऐसी परिस्थिति में सोचा जाना आवश्यक है कि इससे लड़ने लायक हमारे पास है क्या ?बिना हथियारों और रणनीति के युद्ध नहीं जीते जाते हैं |जहाँ तक बात सोशल डिस्टेंसिंग की है इसका असर कितना है इसका अभी तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है क्योंकि बहुत केस ऐसे भी पाए गए हैं जिनमें संक्रमित व्यक्ति के साथ रहने सोने जागने खाने पीने वाले लोगों में भी कोरोना का संक्रमण नहीं पाया गया है | 
      कोरोना स्वरूप बदल रहा है यदि इसे सच माना जाए तो प्रश्न उठता है कि कोरोना का वास्तविक स्वरूप था क्या उसके लक्षण क्या था स्वभाव कैसा था जो आज बदल चुका है | उस बदलाव के लक्षण क्या हैं ? ऐसा कहने के पीछे वैज्ञानिक आधार क्या है ?क्या पहले जो कोरोना था उसे रोकने के लिए कोई औषधि खोज ली गई थी जिसका असर उस समय तो संक्रमितों पर पड़ता था आज नहीं पड़ रहा है |आखिर ऐसा नया हुआ क्या जिससे इस बात पर विश्वास हो कि कोरोना स्वरूप बदल रहा है | 
    चीन के वुहान से निकलकर निरंकुश हाथी की तरह कोरोना अधिकाँश विश्व को अपने प्रभाव में ले चुका है इससे मुक्ति दिलाना तो दूर इसे किसी क्षेत्र में सीमित कर पाने तक की कोई तकनीक खोजी नहीं जा सकी है चार महीने बीत चुके हैं | ऐसी परिस्थिति में इसके घटने बढ़ने के बिषय में निराधार भविष्यवाणियाँ करना या इसके स्वरूप बदलने की बातें तर्कहीन एवं अवैज्ञानिक हैं |इसलिए आधुनिकविज्ञान के भरोसे महामारियों के विषय में कुछ भी कहना सतर्कता बरतने के लिए तो ठीक है किंतु उसे विज्ञान सम्मत एवं प्रमाणित नहीं  माना जा सकता है और न ही यह कहा जा सकता है कि इसके विषय में हम जो कल्पना कर रहे हैं वही सच है | 
    ऐसी परिस्थिति में आपसे मेरा विनम्र निवेदन है कि बिना किसी पूर्वाग्रह के जिस किसी भी पद्धति के द्वारा महामारियों से संबंधित विज्ञान खोजने की दिशा में सार्थक प्रयास प्रारंभ किए जाने चाहिए ताकि देश वासियों को  भविष्य में दोबारा कभी ऐसी दुर्दशा का सामना न करना पड़े | जिन वैज्ञानिक अनुसंधानों पर देश की इतनी भारी भरकम धनराशि खर्च होती है वही अनुसंधान उस समय समाज का साथ छोड़ देते हैं जब समाज को उनकी मदद की सर्वाधिक आवश्यकता होती है | महामारियों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं तक प्रायः ऐसा होते देखा जाता है | यह स्थिति किसी भी  देश या समाज के भविष्य को उज्जवल नहीं बना सकती है |
    वेद विज्ञान में महामारी का पूर्वानुमान लगाने की विधि वर्णित है |आयुर्वेद के शीर्ष ग्रन्थ चरकसंहिता में महामारियों का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक पूरा अध्याय ही वर्णित है | अत्यंत प्राचीन परंपरा वाले अनुभव समृद्ध भारत के उन अनुसंधानों पर यदि विश्वास किया गया होता तो संभव है कि इस महामारी से जूझने की इतनी पीड़ा नहीं सहनी पड़ती !भारत अत्यंत प्राचीनकाल से महामारियों का पूर्वानुमान लगाने एवं इनसे बचाव करने योग्य अनुभव समेटे हुए है जो आज की परिस्थिति में सहायक हो सकते थे | 
     मैं लगभग 25 वर्ष से पूर्वानुमान विज्ञान से संबंधित अनुसंधान कार्यों में लगा हुआ हूँ जिसके आधार पर मैंने 19 मार्च 2020 को आपको एक पत्र लिखा था जिसमें लिखा गया है कि "कोरोना महामारी का समय 6 मई से समाप्त हो रहा है इसलिए इस महामारी की समाप्ति होना तभी से प्रारंभ हो जाएगा | "
      अस्तु !आज 8 मई है देश के 216 जिले कोरोना मुक्त हो चुके हैं |कुछ प्रदेशों में संक्रमित लोगों की जो संख्या बढ़ भी रही है उसका कारण उन प्रदेशों में घटित हुई कुछ लापरवाहियाँ तो हैं ही इसके साथ ही कुछ प्राकृतिक  घटनाएँ भी हैं जो संक्रमितों की संख्या के अचानक उछाल मारने  में सहायक हुई  हैं !कुछ भूकंपों का घटित होना बारबार बिजली गिरना एवं हाल ही में दो बार हुआ उल्कापात तथा मौसम में इस प्रकार का अप्रत्याशित बदलाव आदि इस महामारी को अस्थायी रूप से बढ़ाने में सहायक हुआ है | जिसका असर दो तीन दिन में क्रमशः समाप्त होता चला जाएगा !उसके बाद इस महामारी से क्रमशः मुक्ति मिलती चली जाएगी !इसलिए  वेद वैज्ञानिक दृष्टि से महामारी के जून-जुलाई में बढ़ने की बात निराधार एवं अवैज्ञानिक है | 

                         निवेदक -
    डॉ. शेष नारायण वाजपेयी 
             Ph. D.  By  BHU 
      A -7\41,कृष्णानगर,दिल्ली -51  
    मो.9811226973  \9811226983





श्रीमान जी ! चिकित्साक्षेत्र के बड़े और जिम्मेदार पद पर बैठे किसी व्यक्ति के बयान को देशवासियों ने गंभीरता से ले लिया है जिसके कारण लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है | 
     देश का व्यापारी वर्ग अभी तक आशा लगाए बैठा था कि लॉक डाउन खुलेगा तो काम काज प्रारंभ होगा अब एम्स जैसे बड़े संस्थान के डायरेक्टर साहब का यह बयान निराश करने तथा भय बढ़ाने वाला है जिससे समाज का धैर्य टूट सकता है |
     महानगरों में काम के लिए आए मजदूरों पर ऐसे बयानों का पड़ने वाला असर समाज में आराजकता का वातावरण पैदा करने वाला है | मजदूरों का एक बहुत बड़ा वर्ग इस महामारी से भयभीत होकर अपने अपने गॉंवों की ओर निकल चुका है |दूसरा वर्ग ट्रैन आदि संसाधनों की तलाश में है साधन मिलते ही  वह भी निकल जाना चाहता है | तीसरा वर्ग जो लॉक डाउन खुलने का इंतज़ार कर रहा है कि इसके बाद व्यापार पुनः प्रारंभ होगा और हमें भी काम मिलेगा !जिंदगी पटरी पर लौट आएगी | ऐसा वर्ग भी इतना हिम्मती नहीं है कि एम्स के डायरेक्टर साहब की बात सुनने के  बाद भी इतनी लंबी बेरोजगारी का समय महानगरों में बिताने की हिम्मत बाँध सके | इससे महानगरों की संपूर्ण व्यवस्था चरमरा सकती है क्योंकि यह मजदूरवर्ग महानगरों को व्यवस्थित रखने वाला मेरुदंड है | यहाँ के छोटे से बड़े तक सभी काम इनके सहयोग के बिना संभव नहीं हैं |उनके इस महत्त्व को समझा जाना चाहिए | 
    इसके साथ ही इतने लंबे समय तक निरंतर सेवाएँ प्रदान करने वाले कोरोना योद्धा भी थक चुके हैं उन्हें अपने परिवारों से मिले महीनों बीत गए हैं यह बयान उनके लिए भी निराशा पैदा करने वाला है | 
     यह  बयान सरकार के प्रति जनाक्रोश को पैदा करने वाला है यह सुनने के बाद लोग सोचने लगे हैं कि अभी इस महामारी का सबसे भयावह समय आना बाकी है तो सरकार ने महीनों पहले से लॉक डाउन जैसी बर्जनाएँ महीनों पहले से क्यों लगा रखी हैं | इसका मतलब है कि जून जुलाई में अभी और अधिक कठोरता बरती जाएगी ?
     
ऐसी 

मैं आपको लगभग 



 

 

AIIMS के डायरेक्टर का बड़ा बयान!






   कोरोना जैसी महामारी से संपूर्ण विश्व के लाखों लोग बीमार हुए एवं बहुत बड़ी संख्या में मृत्यु को प्राप्त हुए हैं |


आज भी कुछ बिचारकों के द्वारा आशंका व्यक्त की जा रही है कि चीन अमेरिका ब्रिटेन स्पेन इटली आदि देशों में कोरोना बढ़ने का क्रम जिसप्रकार का रहा है उस हिसाब से भारत में कोरोना अभी और अधिक बढ़ेगा जिससे कोरोना पीड़ितों की संख्या भारत में भी लाखों में पहुँच सकती है | उनके इस बिचार के हिसाब से कोरोना का पीक आना अभी बाकी है | 
    श्रीमान जी !इस बिषय में वेदविज्ञान के अनुशार लगाए गए पूर्वानुमान के अनुशार मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि अब कोरोना महामारी के तेजी से समाप्त होने का समय आ चुका है इसलिए अब घबड़ाने वाली बात नहीं है वो भयंकर समय बीत चुका है जिसके दुष्प्रभाव से इतनी बड़ी महामारी का उदय हुआ था |ऐसे समय का निर्माण कई वर्षों में हुआ था जिसके संकेत प्रकृति ने काफी पहले से देने प्रारंभ कर दिए थे जिन्हें समझने में चूक हो गई है | अब चूँकि वह दारुण समय बीत  चुका है इसलिए इस महामारी को भी अब आप समाप्त हुई ही समझिए | इस समय कोरोना संक्रमितों की संख्या जो बढ़ती दिखाई दे रही है वे पहले ही संक्रमित हो चुके हैं संसाधनों के अभाव में उनकी जाँच अब हो पा रही है | 
     मान्यवर,उस समय कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार प्राकृतिक  वातावरण में  व्याप्त बिषैलापन 11 फरवरी से कम होना प्रारंभ हो गया था 23 मार्च को समानता के स्तर पर आ गया था इसके बाद यह बिषैलापन कम होना प्रारंभ  हुआ था और जैसे जैसे बिषैलापन कम होता जा रहा था वैसे वैसे  विश्व के समस्त देशों में कोरोना बढ़ने की दर न केवल रुक गई थी अपितु कम होने लगी थी इसके बाद 14 अप्रैल से वातावरण में व्याप्त बिषैलापन बहुत अधिक कम हो चुका था जिसके प्रभाव से कोरोना मरीजों के डबल होने की गति में तेजी से रुकावट होनी प्रारंभ हो गई थी | उसी क्रम में आज की स्थिति यह हो चुकी है कि विश्व के सभी देश प्रदेश कोरोना जैसी महामारी से तेजी से मुक्त होते जा रहे हैं | इसी क्रम में अब अतिशीघ्र समाप्त हो जाएगी 6 मई के बाद इसके प्रभावी परिणाम प्रत्यक्ष रूप में दिखने भी लगेंगे !
    महोदय !19 मार्च को इसी मेल पर मैंने इस बिषय में एक पत्र भेजा था जिसमें ये पूर्वानुमान इसी रूप में लिखे गए थे और 6 मई से कोरोना के बिल्कुल समाप्त होने की बात भी उसमें लिखी गई है और भी कुछ पत्र आपको भेजे गए हैं उनमें भी ऐसा ही लिखा है |सच यही है कि वेदविज्ञान के अतिरिक्त विश्व में कोई दूसरा ऐसा विज्ञान नहीं है जिसके द्वारा महामारियों के विषय में पूर्वानुमान लगाया जा सके | मौसम संबंधी पूर्वानुमान भी केवल वेद विज्ञान के द्वारा ही लगाया जा सकता है उपग्रहों रडारों के द्वारा बादलों आदि की निगरानी कर लेना पूर्वानुमान की श्रेणी में नहीं आता है यही कारण है कि कोरोना जैसी महामारी के अतिरिक्त भी आजतक जितनी भी भूकंप बाढ़ तूफ़ान जैसी जनसंहारक  प्राकृतिक आपदाएँ आई हैं उनमें से किसी के विषय में पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सका है वे सभी अचानक ही घटित हुई हैं और उनमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं | 
     इसलिए  आपसे निवेदन है कि जिस किसी भी प्रकार से भारत के पूर्वानुमान विज्ञान को सशक्त बनाया जाए जिससे मौसम संबंधी घटनाओं के साथ साथ कोरोना जैसी महामारियों का पूर्वानुमान लगाने की विधा भी विकसित की जा सके | इससे भविष्य में जब कभी इतनी बड़ी आपदा का अवसर आने की संभावना दिखे तो समय रहते ऐसी महामारी से लड़ने के लिए समस्त विश्व को सतर्क किया जा सके | यही वह विधा है जिसके बलपर भारत को पहले विश्वगुरु माना जाता था जबसे हम अपने परंपरागत ज्ञान विज्ञान को भूल गए तो विश्व हमें भूल गया यदि आज हम पुनः अपने पूर्वानुमान विज्ञान की विश्वसनीयता वापस कर लेने में सफल हो जाते हैं तो भारत का विश्व गुरुत्व एक बार फिर से देदीप्यमान हो उठेगा |   क्षमा याचना के साथ आपको पुनः प्रणाम | 


Saturday, May 2, 2020

वेदविज्ञान और ब्राह्मणों का योगदान !

   वैज्ञानिक अनुसंधानों से समाज को लाभ पहुँचाते रहने के कारण ब्राह्मणों को सम्मान मिला करता था पीढ़ियों की पीढ़ियाँ पूजी जाती रहीं हैं अब जिन ब्राह्मणों में वैसी योग्यता का अभाव है वे भी उसी दुर्दशा को भोगने पर विवश हैं जो अन्य जातियों के अयोग्य लोग भोगते आ रहे हैं | 
    इसलिए केवल जातियों से जुड़ी अज्ञानता पूर्ण बातों के कहने सुनने के लिए अब बहुत थोड़ा समय बचा है सरकारों ने अपनी बुद्धिमती वैज्ञानिक एजेंसियों को इसके परीक्षण के लिए लगा रखा है जिसे नकारपाना उन वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल हो रहा है जो सरकारी प्रक्रिया के तहत अभी तक वैज्ञानिक कहलाकर ऐसे विषयों की निंदा करने में गर्व किया करते थे आज इस वेद विज्ञान के आगे उनका भी सर चकरा रहा है आज उन्हें कोई जवाब नहीं सूझ रहा है फेस बुक पर चोंच लड़ा लेना और बात होती है जब सच्चाई से सामना होता है तब कुछ लिखकर देने में बड़ों बड़ों के हाथ की कलम काँपने लगती है | उस स्थिति का सामना आज कुछ बड़े पदों पर बैठे लोगों को करना पड़ रहा है अपने वेदवैज्ञानिक अनुसंधानों के द्वारा यह परिस्थिति पैदा करने के लिए जिम्मेदार जो व्यक्ति है  भी संयोग से ब्राह्मण जाति में ही हुआ है किंतु यह परिक्षण जातियों के आधार पर नहीं अपितु अनुसंधानों के आधार पर हो रहा है |  इसलिए रही बात ब्राह्मणों की तो ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में जातियों को लाना ठीक नहीं आधुनिक विज्ञान का उदय अभी हुआ है प्राचीन विज्ञान के उपासक तो हमेंशा से ब्राह्मण रहे हैं उसका सम्मान उन्हें हमेंशा से मिलता रहा है उसे मिटाया भी नहीं जा सकता | आज कुछ लोग उन्हीं प्राचीन ब्राह्मण वैज्ञानिकों की निंदा आलोचना केवल इस लिए करना चाहते हैं क्योंकि उनके पुरखे ऐसा कोई योगदान दे नहीं पाए यदि उन्होंने ऐसा किया होता तो हो सकता है ब्राह्मणों से अधिक सम्मान भी उन्हें मिलता क्योंकि सम्मान तो ब्राह्मण का नहीं अपितु उनकी योग्यता का होता है | ब्राह्मणों में भी अयोग्य लोग हैं जो आज भी दर दर की ठोकरें खाते घूम रहे हैं और अन्य जातियों के भी योग्य लोग अब स्वाभिमान से जीना प्रारंभ कर चुके हैं इसलिए जातियों के बल पर जीवन जीना अब दिनों दिन दूभर होता जा रहा है वह ब्राह्मण हो या किसी अन्य जाति का हो | जातिगत आरक्षण के बल पर जीवन जीने वालों का कितना सम्मान बन पाया है कितना स्वाभिमान बना है कितनी संपत्तियाँ जोड़ी जा सकी हैं | बिना योग्यता के किसी को कोई सम्मान नहीं मिलता केवल जातियों के आधार पर भीख तो मिल सकती है किंतु सम्मान मिलता उनके प्रति शृद्धा नहीं बन सकती है | कुछ लोग ऐसी अपेक्षा रखते भले  हों किंतु मूर्खता पूर्ण बातें अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं | 
     किसी गाँव में कोई हाथी घुस आता है तो उससे डर कर कुछ कुत्ते भौंकते हुए उससे दूर भागने लग जाते हैं वे चाहें तो अन्य पशुओं की तरह वे भी जहाँ जैसे हैं वैसे बने रहें हाथी से उन्हें भी कोई खतरा नहीं है वे किंतु वे हाथी को देखकर भागते भी हैं और भौंकते भी हैं और भौंकते उसी की ओर देखदेख कर हैं | अपना वजूद बचाकर रखने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ता है हाथी तो गाँव में कुछ देर के लिए आते हैं कुत्ते तो गाँव में ही रहते हैं गाँव ही उनके लिए एक तरह की फेसबुक होता है जहाँ उनका भौंक पाना संभव होता है जंगलों में जाकर हाथी को चुनौती देना उनके बश की बात भी नहीं होती | इसी तरह उनके पिता पितामह आदि भी यही करते चले गए वे अपना स्वभाव छोड़ ही नहीं पाए यही आगे की भी पीढ़ियाँ करती रहेंगी जबकि उनके अतिरिक्त कुछ गंभीर जीव जंतु पशु पक्षी आदि भी होते हैं हाथी के आने पर भी वे न भौंकते हैं न डरते हैं और न ही हाथी के पास जाते हैं अपितु उस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं हाथी आया तो उनकी बला से | इससे उनका कुछ बिगड़ता भी नहीं है | 
    इस प्रक्रिया का पालन यहाँ भी किया जा सकता है ब्राह्मणों के बिषय में ध्यान ही क्यों देना उनकी योग्यता अयोग्यता पर ध्यान होना चाहिए उन्हें देखकर या उनके विषय में सोचकर भौंकना क्यों ?हमें अपनी योग्यता के आधार पर उनसे बड़ी रेखा खींच लेनी चाहिए दुनियाँ जिस योग्यता के आधार पर कभी उन्हें पूजती रही है आज उन्हें कोई दूसरा दिखेगा तो वे उसे पूजने लगेंगे समाज किसी की जाती नहीं अपितु योग्यता से जुड़ा होता है यह सच्चाई जिन्हें समझ में जितनी जलती आ जाती है वे उतनी जल्दी इंसान बन जाते हैं अन्यथा किसी हाथी के आते ही उसके सामने अपना वजूद सिद्धकरने की मजबूरी उन्हें आजीवन ढोनी पड़ती है |  मुझे ऐसी किसी व्यक्ति से चर्चा करने में कोई आक्रोश नहीं होता यदि चर्चा किसी जीवित व्यक्ति से हो रही हो !इसलिए इससे अधिक चर्चा इस विषय पर अब हमारे द्वारा संभव नहीं है आपको कोई और मिल जाएगा जुटे रहिए |
    जो जो कुछ है उसे कुछ और नहीं बनाया जा सकता तो दलितों को कोई मूर्ख कैसे बना सकता है | किसी घड़े को कुछ और कैसे बनाया जा सकता है वस्तुतः जो जो कुछ होता है उसे उसी बात से होती है क्योंकि वो उसका दंड भोग रहा होता है !
    एक बिहार के व्यक्ति किसी दूसरे को बिहारी कह कर गालियाँ दे रहे थे !मैंने उनसे पूछा आप भी तो बिहारी हैं तो उन्होंने कहा तुम चुप रहो यदि मैं इसे बिहारी नहीं कहूँगा तो ये मुझे बिहारी बना देगा !इसलिए ये कहना हमारी अपनी मज़बूरी है क्योंकि काफी लोगों को मैं बता चुका हूँ कि मैं बिहारी नहीं हूँ !इसीप्रकार  कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें कोई दूसरा मूर्ख बना रहा है जबकि वे जन्म से ही ऐसे होते हैं किंतु कोई उनकी इस सच्चाई को समझ न जाए इसलिए वे दूसरों को सावधान किया करते हैं कि मूर्ख क्यों बना रहे हो जबकि दोषी वे स्वयं होते हैं जिसे छिपाने के लिए उन्हें खुद को ज्ञानवान होने का आडंबर करना पड़ता है अन्यथा किसी दूसरे में इतनी हिम्मत कहाँ होती है कि वो किसी बुद्धिमान व्यक्ति को मूर्ख बनाकर  दिखा दे यदि ऐसा हो सकता होता तो ब्राह्मण अब तक ब्राह्मण नहीं रहे होते और न ही दलित वर्ग के लोग दलित रहे होते अपितु वे वही बन जाते सरकारें तथा समाज उन्हें जो कुछ बनाना चाहता है किंतु बनाने से कुछ नहीं होता जो जो  है वो वही रहता है | 
       वेद विज्ञान का अर्थ समस्त ज्ञान विज्ञान है न कि केवल ज्योतिष मैंने तो ज्योतिष लिखा भी नहीं है ऐसा तो नहीं है कि पूर्वानुमान लगाने का काम केवल ज्योतिष का ही हो यदि ऐसा होता तो मौसम पूर्वानुमान विज्ञान भी केवल ज्योतिष है क्या ?क्योंकि आधुनिक विज्ञान में तो पूर्वानुमान लगाने के लिए कोई विज्ञान है ही नहीं |पूर्वानुमान विज्ञान की एक विधा ज्योतिष भी है चिकित्सा शास्त्र भी हैं और योगविद्या भी है इनमें से सभी विषय ज्योतिष भले ही न हों किंतु पूर्वानुमान विज्ञान के आधार स्तम्भ हैं !