Friday, June 26, 2020

कोरोना



रामदेव जी !कोरोना जैसी महामारी की दवा बनाई जा सकती है क्या ?
      आयुर्वेद का सिद्धांत है जिस रोग में दवा से लाभ होने लगे वह रोग होता है और जिसमें दवाओं का असर ही न होता हो वो महारोग होता है !इसे ही महामारी कहते हैं | ऐसी परिस्थिति में महामारी की दवा कोई बना कैसे लेगा ?ऊपर से यह दावा करना कि दवा के रोगियों पर किए गए परीक्षण में सौ प्रतिशत रोग से सौ प्रतिशत मुक्ति मिलती देखी गई है |आयुर्वेद के हिसाब से दावा सौ प्रतिशत झूठ है |क्योंकि कोरोना महामारी है और महामारी की दवा बनाई ही नहीं जा सकती तथा जिस रोग की दवा बनाई जा सकती है वो महामारी नहीं हो सकती इसलिए रामदेव का कोरोना की दवा बनाने वाला दावा झूठा है |
     आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुशार महामारी की दवा बनाने के लिए महामारी शुरू होने से पहले महामारी का पूर्वानुमान पता लगा लिया जाना चाहिए और उसी समय दवा का निर्माण किया जा सकता है महामारी प्रारंभ होने के बाद दवा का निर्माण कर भी लिया जाए तो उसका कोई असर नहीं होगा | 
     कोई भी महामारी बुरे समय के प्रभाव से प्रारंभ होती है और बुरा समय समाप्त होने पर ही समाप्त होती है इसमें किसी दवा की कोई भूमिका नहीं होती है |इसीलिए इसे महामारी माना जाता है |


रामदेव आयुर्वेद के नाम पर खेल  रहे हैं धोखाधड़ी का खेल !
     आयुर्वेद में  'कोरोना' जैसी महामारी की कहीं चर्चा ही नहीं है तो 'कोरोना' की दवा आयुर्वेद की विधि से बनाई कैसे जा सकती है! फिर भी यदि रामदेव कहते हैं कि मेरे द्वारा बनाई गई दवा 'कोरोनिल' आयुर्वेदिक है तो बतावें कि आयुर्वेद के किस ग्रंथ के किस अध्याय के किस श्लोक में कोरोनारोग का वर्णन है जहाँ  बताया गया हो कि कोरोनारोग से पीड़ित व्यक्ति में क्या क्या लक्षण दिखाई पड़ते हैं जिन्हें देखकर पता लग जाता है कि इसे कोरोना हो गया है ?
      दूसरी बात आयुर्वेद के किस ग्रंथ के किस अध्याय के किस श्लोक में कोरोनारोग और कोरोनारोग से मुक्ति पाने के लिए किन किन जड़ी बूटियों या औषधियों आदि का वर्णन किया गया है ?
      यदि रामदेव या बालकृष्ण दोनों में से किसी ने आयुर्वेद का कभी कोई ग्रंथ देखा या पढ़ा भी हो तो उन्हें प्रमाण बता देना चाहिए साड़ी बात यहीं समाप्त हो जाएगी और उनकी 'कोरोनिल' कोरोना की आयुर्वेदिकदवा मान ली जाएगी यदि वे ऐसा नहीं कर पाते तो आयुर्वेद के नाम पर समाज को मूर्ख बनाना बिल्कुल ठीक नहीं है | आयुर्वेद के उस ग्रंथ का नाम रामदेव को बतादेना चाहिए जिसके आधार पर उन्होंने इस 'कोरोनिल'दवा को तैयार किया गया है |
   मैं  संपूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूँ ऐसी महामारी एवं ऐसी औषधि एवं इसके निर्माण की विधि आयुर्वेद के किसी ग्रंथ में नहीं है |इसलिए रामदेव और बालकृष्ण सात जन्मों में भी इसके प्रमाण नहीं दे सकते !ऐसी परिस्थिति में ये निर्णय समाज स्वयं करे कि रामदेव के द्वारा बनाई गई कुँए की औषधि आयुर्वैदिक है या नहीं !

कोरोना की दवा लाँच करने का समय !



 कोरोना को जाँचने की पारदर्शी प्रक्रिया का अभाव !
      दूसरी बात जिन मशीनों की जाँच में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्यमंत्री एक दिन संक्रमित और एक दिन संक्रमण रहित पाए जाते हैं ऐसी भ्रामक जिन्हें कोरोना संक्रमित बताती हैं उनमें कोरोना लक्षण नहीं मिलते और जिनमें लक्षण मिलते वे संक्रमित होते उन्हें साधारण खांसी जुकाम बुखार बता दिया जाता है | ऐसी मशीनीजाँच के आधार पर कोरोनारोगियों का परीक्षण करके आयुर्वेद की किसी दवा को कोरोना रोग की दवा कैसे माना जा सकता है ?

 रामदेव के 500 वैज्ञानिकों का रिसर्च है 'कोरोनिल'
       रामदेव के द्वारा बनाई गई 'कोरोनिल' में तुलसी,गिलोय और अश्वगंध मुख्य तीन चीजें बताई गई हैं | 50 ग्राम की डब्बी में ये तीनों चीजें जिस किसी भी प्रकार से भरी जाएँ तो 20 रुपए से अधिक का सामन नहीं भ जा सकता है फिर इसकी कीमत चार छै सौ रूपए कैसे हो सकती है ?
       तुलसी गिलोय और अश्वगंध का प्रयोग घर घर में हजारों वर्षों से किया जाता रहा है अभी भी किया जाता है इसके प्रभाव को भी सभी लोग जानते हैं तभी तो प्रयोग करते हैं अभी भी कर रहे हैं | इसमें रामदेव ने अपने 500 वैज्ञानिकों के द्वारा  ऐसा नया रिसर्च क्या  कराया है जो लोगों को पहले से पता नहीं था ?
       रामदेव जी !आपके 500 वैज्ञानिकों को तुलसी गिलोय और अश्वगंध के गुण और प्रभाव जानने में 6 महीने लग गए !इनका प्रयोग भारत वर्ष के घर घर में हजारों वर्षों से किया जा रहा है और लोग लाभान्वित होते हैं | ये बात ग्रामीणों , किसानों ,माताओं से पूछ लेते तो वो तुम्हारे वैज्ञानिकों से ज्यादा अच्छी तरह से तुम्हें समझा देते !
   महामारी में सोशल डिस्टेंसिंग कितनी कारगर है इसका कोई वैज्ञानिक अध्ययन हुआ है क्या ?





       
दूसरा -
     दूसरी बात जिन मशीनों की जाँच में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्यमंत्री एक दिन संक्रमित और एक दिन संक्रमण रहित पाए जाते हैं ऐसी भ्रामक जिन्हें कोरोना संक्रमित बताती हैं उनमें कोरोना लक्षण नहीं मिलते और जिनमें लक्षण मिलते वे संक्रमित होते उन्हें साधारण खांसी जुकाम बुखार बता दिया जाता है | ऐसी मशीनीजाँच के आधार पर कोरोनारोगियों का परीक्षण करके आयुर्वेद की किसी दवा को कोरोना रोग की दवा कैसे माना जा सकता है ?






















के द्वारा जीता जा सकता है | इसका वर्णन आयुर्वेद में कहाँ है क्या बता सकेंगे रामदेव !नहीं मिलता है 
कोरोना की दवा आयुर्वेद के अनुशार बनाई ही कैसे जा सकती है !
     कोरोना जैसी किसी भी महामारी की चर्चा आयुर्वेद में कहीं नहीं मिलती है फिर कोरोना रोगियों के लक्षण क्या होते हैं और उसकी दवा किन किन जड़ी बूटियों से बनायीं जा सकती है | इसका वर्णन आयुर्वेद में कहीं नहीं मिलता है फिर बाबा रामदेव कोरोना की आयुर्वेदिक औषधि बनाने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं



है ही नहीं रामदेव के द्वारा

Tuesday, June 23, 2020

'कोरोनिल' और 'बाबारामदेव'

     कोरोनिल कोरोना और बाबा रामदेव के रिसर्च पर सबसे बड़ा रिसर्च !
    कोरोना  महामारी को व्यापार बनाने का अवसर है !
        
      आज 23 जून है जब रामदेव ने अपनी तथाकथित कोरोना की दवा लांच की है बाजार में कोरोना के लिए अभी तक न कोई औषधि है और न ही कोई वैक्सीन बनी है ऐसी  परिस्थिति में उनके पास विज्ञापन के लिए पैसे भी हैं | तो उन्हें यह महामारी बेचकर धन कमाने का सबसे सुनहरा मौका है | व्यापारिक दृष्टि से उन्होंने बिल्कुल  ठीक समय पर निशाना लगाया है इस बीमारी के बहाने भगवान उन्हें बहुत पैसा दे ईश्वर से मैं भी ऐसी मंगल कामना करता हूँ | 
       रामदेव जो कहते हैं कि अभी तक कोरोना की दवा का रिसर्च करते रहे हैं वस्तुतः वो कोरोना की दवा का रिसर्च न होकर अपितु किस समय दवा लांच की जाए जब अपयश की सम्भावना काम और यश की संभावना अधिक हो और पैसा भी अधिक कमाया जा सके !इस दृष्टि से यह बिल्कुल ठीक समय है |इस लेख के माध्यम से हम तीन बिंदुओं पर बिचार करेंगे पहला यह समय ही दवा लाँच करने के लिए क्यों चुना गया ?दूसरी बात महामारी में होने वाले रोगों की दवा बना पाना संभव है क्या ?तीसरी बात रामदेव की दवा 'कोरोनिल' में पड़े घटक द्रव्यों में से उसके मुख्य द्रव्य गिलोय तुलसी अश्वगंधा ही हैं जैसा कि वो खुद कह रहे हैं तो इसमें इन तीन चीजों में से इतनी महँगी कौन सी चीज है जिसके कारण उन्हें इस 25 ग्राम की डब्बी की कीमत 600 या 400 रूपए समाज की मदद करने के लिए रखनी पड़ी है |
  सबसे पहले कोरोनिल दवा लाँच करने का समय :-
23 जून का आज वो दिन है जब कोरोना की बिना किसी दवा या वैक्सीन के कोरोना से संक्रमित रोगियों के ठीक होने की दर सारे विश्व में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है  स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब देश में संक्रमितों की रिकवरी रेट 56.38% हो गया है जो संक्रमितों की संपूर्ण संख्या के आधे से काफी अधिक है | पिछले 4 दिनों में इसमें 6% का इजाफा देखने को मिला है। इसके पहले 19 जून को 50.12% रिकवरी रेट थी। मंत्रालय के मुताबिक अभी तक देश में कुल 2 लाख 58 हजार 523 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं जबकि 1 लाख 78 हजार 014 संक्रमितों का इलाज चल रहा है | यहाँ तक कि आज सुबह से शाम तक 15,368 नए मामले सामने आए हैं और 10,386 रोगी स्वस्थ होकर घर गए हैं | उधर चिकित्सकों ने पहले से ही कह रखा है कि कोरोना का प्रभाव पहले की अपेक्षा कम हुआ है इसकी मारक क्षमता भी घटी है | दूसरी बात कोरोना से होने वाली मौतों में बहुत बड़ी संख्या उन रोगियों की है जो पहले से किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित हैं | केवल कोरोना से मरने वाले रोगियों की संख्या बहुत कम है |वैसे भी पिछले तीन दिनों से कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या दिनों दिन कम होते देखी जा रही है |
     ध्यान रहे कि अभी तक बिना किसी दवा वैक्सीन के भी कोरोना जैसी महामारी का पलायन तेजी से होते देखा जा रहा है|कोरोना की रिकवरी बढ़ने या कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या घटने या संक्रमण का बिषैलापन कम होने में किसी भी दवा या वैक्सीन की कोई भूमिका अभी तक सिद्ध नहीं हो सकी है ये सब बिना रामदेव जैसे लोगों की दवा लाँच हुए भी होते देखा जा रहा है | ऐसे समय ऐसी किसी दवा का ढिंढोरा पीटने का पवित्र उद्देश्य क्या हो सकता है | 
 कोरोना जैसी महामारियों को दवाओं या वैक्सीन से पराजित किया जा सकता है क्या ?
       वेद विज्ञान का मानना है कि महामारियाँ हमेंशा बुरे समय के प्रभाव से निर्मित होती हैं बुरा समय आते ही संपूर्ण वायु मंडल ,जल एवं समस्त खाद्य पदार्थ बिषैले होने लग जाते हैं !बिना साँस लिए या कुछ खाए पिए बिना किसी का रहना संभव होता नहीं है सभी को साँस तो लेनी ही पड़ेगी और जीने के लिए कुछ न कुछ खाना पीना भी पड़ता है | इसलिए बुरे समय के प्रभाव से होने वाली महामारियों के प्रभाव से किसी का बच पाना संभव नहीं होता है | 
     समय का प्रभाव ऐसा होता है कि महामारी के कठिन समय में भी रोगी वही लोग होते हैं जिनका अपना समय भी रोग कारक चल रहा होता है और  जिनका अपना समय मृत्यु कारक चल रहा होता है उनकी मृत्यु तो होनी ही होती है उनके लिए कोरोना जैसी महामारियाँ बहाना बन जाती हैं | जिनका अपना समय बिल्कुल ठीक चल रहा होता है वे ऐसी महामारियों में भी स्वस्थ बने रहते हैं या थोड़े बहुत रोगी होकर भी समय के प्रभाव से स्वस्थ होते देखे जाते हैं |यही कारण है कि इस बार भी बच्चे बूढ़े सभी वर्ग से लोग अपने अच्छे समय के प्रभाव से  स्वस्थ होते देखे गए हैं कुछ तो सौ वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी स्वस्थ होते देखे गए हैं क्योंकि उनका अपना समय अच्छा चल रहा था |
       कुलमिलाकर समय का ही समय का ही सारा खेल है जिसके जीवन में जब जैसा समय आता है तब वैसी घटनाएँ घटित होने लगती हैं |किसी व्यक्ति का समय जब ख़राब आता है तब उसके सारे काम बिगड़ने लगते हैं उसे तनाव होने लगता है ऐसे लोग हर किसी से झगड़ने लगते हैं किंतु लोग उसकी आदत समझ कर सह जाया करते हैं किंतु समस्या तब होती है जब उसी समय किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में भी ऐसा ही समय आ जाता है ऐसे दो लोग किसी एक ही  परिवार ,व्यापार,सरकार ,संस्थान,संस्था या राजनैतिकदल में प्रभावी पद पर बैठे होते हैं और उन्हें एक दूसरे के साथ ही काम करना पड़ता है तो वहाँ उन दोनों के बीच आपसी तनाव बहुत अधिक बढ़ जाता है कई बार तो इसी समय के प्रभाव से संस्थाएँ टूटते या नष्ट भ्रष्ट होते देखी जाती हैं | यदि ऐसे समय के शिकार कोई पति पत्नी एक साथ ही हो जाते हैं तो उन दोनों के बीच उसी समय कलह बहुत अधिक बढ़ जाता है कई बार तो इसी बुरे समय के प्रभाव से पति पत्नी में तलाक तक होते देखा जाता है | ये सब बुरे समय का ही प्रभाव है |
      यही स्थिति चिकित्सा के क्षेत्र में भी है लगभग एक तरह के कुछ रोगी किसी अस्पताल में रोग मुक्ति अर्थात स्वस्थ होने के लिए एडमिट होते हैं उन्हें अत्यंत योग्य एक जैसे चिकित्सकों के द्वारा अच्छी से अच्छी औषधियाँ स्वास्थ्य सुधारने के लिए दी जाती हैं किंतु उस एक जैसी चिकित्सा का असर प्रत्येक रोगी के स्वास्थ्य पर अलग अलग होते देखा जाता है |उनमें से कुछ स्वस्थ होते हैं कुछ अस्वस्थ रहते हैं और कुछ मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं ये उन सभी रोगियों के अपने अपने समय का ही असर होता है ऐसा महामारियों में भी होते देखा जाता है |कोरोना जैसी महामारियों के समय भी कुछ लोग अस्वस्थ होते हैं और उनमें से बहुत कम लोगों की मृत्यु होते देखी जाती है इनके अतिरिक्त बहुत बड़ा वर्ग ऐसा होता है जिसको ऐसे समय में भी सर्दी जुकाम तक नहीं होता है ये उनके अपने अच्छे समय का प्रभाव होता है |इसलिए जिनका जब जैसा समय चल रहा होता है उन्हें तब वैसी परिस्थिति का सामना करना ही पड़ता है |जिसे अपने समय के संचार के बिषय में पता होता है ऋतुपरिवर्तन अर्थात मौसम बदलने के समय या महामारी फैलने के समय विशेष सावधानी पूर्वक पथ्य परहेज से रहना होता है |मैंने इसी बिषय पर अनुसंधान अनुभव एवं पीएचडी की है पिछले 25 वर्षों से अनुभव भी करता आ रहा हूँ इसलिए मैं विश्वास पूर्वक कह सकता हूँ कि जब किसी का अपना समय ख़राब आता है तब वह रोगी होता है उसे तनाव होता है उसके सारे काम बिगड़ते हैं किंतु जब सारे संसार पर सामूहिक रूप से बुरे समय का प्रभाव पड़ता है तब महामारियाँ फैलती हैं दो देशों के बीच तनाव होता है बार बार भूकंप आते हैं | आदि आदि और भी बहुत कुछ | रामदेव ने यदि आयुर्वेद पढ़ा होता तो उन्हें समय के बिषय में ये बातें पता होतीं | उन्होंने आयुर्वेद पढ़ा नहीं या उन्हें यह कठिन बिषय समझ में नहीं आया ईश्वर ही जाने !इसलिए वे समय बोधक शास्त्र को न मानने की बात करने लगे कि मैं तो इसे मानता ही नहीं हूँ और उस शास्त्र का ही मजाक उड़ाने लगे |आयुर्वेद में बीस से पच्चीस प्रतिशत समय बोधक शास्त्र के प्रभाव की चर्चा है जिसे न जानने वाले रामदेव जैसे लोग आयुर्वेद के विद्वान् कैसे हो सकते हैं | यही कारण है कि समय के प्रभाव से होने वाली महामारियों को वे समझ नहीं पाए कि महमारियां समय से होतीं और समय से ही समाप्त होती हैं इनकी कोई औषधि चिकित्सा आदि संभव  ही नहीं है !इसीलिए विश्व के लाखों लोग लगे हैं वैक्सीन बनाने और औषधि खोजने में किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली ये कह रहे हैं मैंने तो बना ली | जबकि आयुर्वेद उनके ऐसे आचरण का समर्थन नहीं करता है | 
      

     यह समय का प्रभाव ही है कि कोरोना से निपटने के लिए विश्व के अनेकों देशों ने अलग अलग प्रकार से प्रयास किए !कुछ ने लॉकडाउन किया तो कुछ ने नहीं भी किया कुछ देशों या देशों की बस्तियों परिवारों गरीबों   या घनी बस्तियों आदि में शोसल डिस्टेंसिंग बनाना या मस्का लगाकर रह पाना संभव ही नहीं था फिर भी अन्य जगहों की अपेक्षा वहाँ संक्रमितों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई हो ऐसा देखा नहीं गया | दूसरी ओर कई लोग तो कोरोना के संपूर्ण समय में घर से निकले ही नहीं किसी से मिले जुले ही नहीं कोरोना उन्हें भी होते देखा गया है ये सब सबके अपने अपने समय का ही प्रभाव है |
     समय विज्ञान की दृष्टि से पिछले 25 वर्षों से मैं इस बिषय पर अनुसंधान करता आ रहा हूँ इसीलिए इस महामारी के घटने और बढ़ने की तारीखों के बिषय में मैंने भारत सरकार की मेल पर 19 मार्च को ही एक पत्र के माध्यम से पूर्वानुमान भेज दिया था जो अभी भी साक्ष्य रूप में विद्यमान है उसमें 6 मई से इस महामारी के समाप्त होने लगने की बात लिखी गई है यह उसी समय सुधार का ही प्रभाव है कि आज रिकवरी 56 प्रतिशत हो चुकी है |समय का प्रभाव सभी देशों पर समान रूप से पड़ता है इसीलिए यह रिकवरी भी सभी देशों में लगभग समान रूप से ही बढ़ी है जिन्होंने लॉकडाउन या शोसल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं भी किया है वहां भी बढ़ी है यही तो समय का प्रभाव है जब समय अच्छा आने लगता है तब सभी चीजें अपने आपसे ठीक होने लगती हैं | आज कोरोना रिकवरी दर दिनोंदिन बढ़ती जा रही है |
     संक्रमितों की संख्या बढ़ने का कारण  दूसरा है किसी नदी के संपूर्ण भाग में मछलियाँ विद्यमान होती हैं किंतु जाल जितने बार फेंका जाता है उसमें उतनी ही मछलियाँ फँस पाती हैं | ऐसी परिस्थिति में अधिक बार जाल फेंकने से यदि अधिक मछलियाँ फँसने लगें तो इसका ये मतलब कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि नदी में मछलियाँ बढ़ गई हैं अपितु सच्चाई यही है कि जाल अधिक बार फेंकने से अधिक मछलियाँ फँसी होती हैं | यही स्थिति कोरोना से प्रभावितों की है जब जितनी बार जितने कम या अधिक लोगों की जाँच हुई तब उतनी कम या अधिक संक्रमितों की संख्या मिली | संक्रमित  तो समाज में विद्यमान है ही ठीक भी हो रहे हैं जिन्हें इलाज मिला वे भी समय के प्रभाव से ठीक हो रहे हैं और जिन्हें इलाज नहीं मिला समय के प्रभाव से वे भी ठीक हुए हैं | ध्यान रहे कि महामारियाँ समय से आतीं और समय से ही जाती हैं या समय जनित महारोग होता है इसलिए इसपर किसी दवा का कोई विशेष असर नहीं होता है | 
    आयुर्वेद के शीर्ष ग्रंथ चरकसंहिता में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि महामारियाँ अपने समय से आती हैं और समय से ही जाती हैं इनमें औषधियों की कोई विशेष भूमिका नहीं होती है जिन औषधियों की भूमिका होती है वे दुर्लभ होती हैं एवं उनका निर्माण न केवल अत्यंत कठिन अपितु असंभव भी होता है क्योंकि उसके लिए महामारी प्रारंभ होने से पूर्व महामारी के बिषय में पूर्वानुमान लगा कर उसी समय उसकी औषधि तैयार करके रख लेनी होती है केवल वही औषधि महामारी काल में होने वाले महारोग से मुक्ति दिलाने में सक्षम हो सकती है |आयुर्वेद के शीर्षग्रंथ चरक संहिता में उसकी विधि स्पष्ट  से बताई गई है | 
     चूँकि इस महामारी का पूर्वानुमान लगाया नहीं जा सका है अन्यथा सबको  पहले से पता होता कि इस वर्ष कोरोना जैसी महामारी होगी और इतना भयंकर रूप ले लेगी | पूर्वानुमान के बिना दवा या वैक्सीन आदि बना पाना संभव ही नहीं है यदि कोई कहता है कि मैंने बना ली है तो वो केवल झूठ बोलता है इसे आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर ग्रंथ प्रमाणों के द्वारा मैं सिद्ध करने को तैयार  हूँ | साहस है तो हमारा शास्त्रार्थ का आमंत्रण रामदेव स्वीकार करें | 
           महामारियों का व्यापार और सच्चाई !
    महामारियों का लाभ लेने या इससे अपना धंधा चमकाने के प्रयास हमेंशा से किए जाते रहे हैं कुछ चतुरलोग ऐसे समय में समाज को भ्रमित करके श्रेय लूटने एवं महामारियों को कैस करने में हमेंशा से सफल होते रहे हैं | महामारियों का प्रकोप जब तक बढ़ा रहता है तब तक ये मौके की ताक में चुप बैठे बैठे महामारियों की दवा खोजने के लिए रिसर्च करने का आडंबर किया करते हैं और समय के प्रभाव से जैसे ही महामारियाँ स्वयं समाप्त होने लगती हैं वैसे ही ऐसे लोगों की रिसर्च पूरी हो जाती है और वो महामारियों से मुक्ति दिलाने की दवा बना लेने का नाटक करने लगते हैं |समाज की मुसीबतों को व्यापार बना  लेने का इसवर्ग को महारथ हासिल होता है बहुत बड़ा वर्ग इस फिराक में दृष्टि गड़ाए बैठा है कि जब महामारी स्वयं समाप्त होने लगेगी तब महामारी की दवा बनाने के नाम पर हम पैसे कमा लेंगे | इसलिए इससे किसी को भ्रमित नहीं होना चाहिए | ईश्वर पर भरोसा रखिए सभी लोग अब स्वस्थ होते चले जाएँगे | महामारियों के समय केवल ईश्वर ही मदद करता है | 
     ऐसे ही 'बाबारामदेव' भी कोरोना को कैस करने निकल पड़े हैं |आखिर व्यापार करने के लिए ही वे बाबा बने हैं तो ऐसे मौके पर चौका लगाना उनका भी तो बनता था उन्होंने भी दवा लाँच कर दी है !विज्ञापन पुरुष वे स्वयं ही हैं प्रचार के लिए पैसा उनके पास है ही और साधू संत झूठ नहीं बोलते समाज में ऐसा विश्वास बना ही है इसीलिए तो बहुत व्यापारी लोग ईमानदार दिखने के लिए टीका लगाने या लालपीले कपड़े पहनने लगते हैं |इस आंशिक बाबा बन जाने से व्यापार बढ़ाने में बहुत मदद मिलती है और जो व्यापार के लिए समूचा ही बाबा बन गया हो उसके कहने ही क्या हैं | 
     ऐसी परिस्थिति में रामदेव को भी लगा होगा कि इस समय कोरोना की दवा के नाम पर समाज के कोरोनाभय का दोहन किया जा सकता है इसमें केवल ऐसी दवाएँ बेचीं जा सकती हैं जिससे  कोई नुक्सान न हो और फायदा तो अपने आप हो ही रहा है क्योंकि अच्छा समय आ चुका है तभी तो स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है | ऐसे समय में विज्ञापनों के माध्यम से थोड़ा हाथ पैर मार कर बहते पानी में हाथ धो लेने के लिए ये यह सबसे अच्छा अवसर है |
    अब बात 'कोरोनिल' की -
      रामदेव की 'कोरोनिल' में मुख्य द्रव्य गिलोय, अश्‍वगंधा, तुलसी बताए जा रहे हैं यदि यह सच है तो इसमें इतनी महँगी कौन सी जड़ी बूटी है जिसके कारण 25 ग्राम की डिब्बी की कीमत चार या छै सौ रूपए रख गई है वह भी समाज पर उपकार करने के लिए !
   दूसरी बात गिलोय, अश्‍वगंधा, तुलसी ये ज्वर रोग में लाभप्रद  हैं किंतु 'कोरोनिल' के छोटे छोटे टेबलेट्स में इनकी मात्रा इतनी कम होगी कि उतने से कोरोना तो छोड़िए साधारण ज्वर उतरना भी संभव नहीं है ! इसीलिए इसका कोई दुष्प्रभाव संभव नहीं है |
    इसके अतिरिक्त श्‍वसारि रस और अणुतेल बताए जा रहे हैं | श्वसारि रस बलगम को नियंत्रित करता है जिसके बिषय में 'श्वाससकुठाररस' 'कफकर्तरीरस' जैसी और भी बहुत प्रभावी औषधियाँ बहुत पहले से प्रचलन में हैं जिनका रामदेव और पतंजलि से कोई लेना देना नहीं है इनके बिषय में लोगों को बहुत पहले से पता है और वे कोरोना काल में भी प्रयोग करते देखे जा रहे हैं |इस प्रकार की औषधियाँ देश की डाबर बैद्यनाथ जैसी पुरानी  कंपनियाँ बाबा रामदेव और पतंजलि के जन्म से बहुत पहले से बना रही हैं और वैद्य लोग प्रयोग भी करते आ रहे हैं | 
     अब बात 'अणुतेल' तेल की कोई भी हो यहाँ तक कि सरसों के तेल का भी यदि नस्य लिया जाए तो भी नाक शिर कान गले और केशों के लिए अच्छा होता है मर्दन करने का और अधिक प्रभाव है !सरसों के तेल को कान में डालने से 'कर्णनिनाद' आवाजें सुनाई देना जैसे रोग नियंत्रित होते हैं अणुतेल का इसी दिशा में कुछ अधिक प्रभाव हो सकता है किंतु इसका कोरोना से सीधा कोई संबंध दूर दूर तक नहीं है |
     कुलमिलाकर जब रामदेव ने कोरोना की दवा बना लेने का दावा किया है इससे कुछ पहले भी विश्व में बहुत देश कोरोना वैक्सीन बनाने या उसका ट्रायल करने का दावा करते रहे हैं इसमें बहुत दवाओं का प्रयोग करके परीक्षण भी किया गया होगा किंतु किसी के दावे में अभी तक कोई प्रमाणित सच्चाई सिद्ध नहीं हुई है |ऐसे लोगों को स्वयं भी पता था कि वे महामारियों के बिषाणुओं से होने वाले रोगों की दवाएँ नहीं बना सकते हैं यही कारण है कि अनादिकाल से अभी तक महामारियों के लिए कोई दवा बनाई ही नहीं जा सकी है इसीलिए तो वे महामारियाँ या महारोगों की श्रेणी में डाली गई हैं |

Saturday, June 20, 2020

पुरुष का श्रृंगार

पुरुष का श्रृंगार तो स्वयं प्रकृति ने किया है।।
पुरुष हीरा है जो अँधेरे में भी चमकता है और उसे मेकअप की कोई आवश्यकता नहीं होती।।
खूबसूरत मोर होता है मोरनी नहीं।।
मोर रंग - बिरंगा और हरे - नीले रंग से सुशोभित जबकि मोरनी काली सफ़ेद।।

मोर के पंख होते हैं इसीलिए उन्हें मोरपंख कहते हैं।।
मोरनी के पंख नहीं होते।।
दांत हाथी के होते हैं।।हथिनी के नहीं।।
हांथी के दांत बेशकीमती होते हैं।।
नर हाथी मादा हाथी के मुकाबले बहुत खूबसूरत होता है।।
कस्तूरी नर हिरन में पायी जाती है।।
मादा हिरन में नहीं।।
नर हिरन मादा हिरन के मुकाबले बहुत सुन्दर होता है।।
मणि नाग के पास होती है,नागिन के पास नहीं।।
नागिन ऐसे नागों की दीवानी होती है जिनके पास मणि होती है।।
रत्न महासागर में पाये जाते हैं नदियो में नहीं।।
और अंत में नदियों को उसी महासागर में गिरना पड़ता है।।
संसार के बेशकीमती तत्व इस प्रकृति ने पुरुषों को सौंपे।।
प्रकृति ने पुरुष के साथ अन्याय नहीं किया।।
9 महीने स्त्री के गर्भ में रहने के बावजूद भी औलाद का चेहरा, स्वभाव पिता की तरह होना।।
ये संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य है।।क्योंकि पुरुष का श्रृंगार प्रकृति ने करके भेजा है,उसे श्रृंगार की आवश्यकता नही।।

Tuesday, June 16, 2020

आदरणीय प्रधानमंत्री  जी !
         सादर नमस्कार !
विषय : कोरोना जैसी महामारी से संबंधित पूर्वानुमान के विषय में -
     महोदय,  
     प्रधानमंत्री जी मैंने 19 मार्च 2020 को आपको कोरोना महामारी के बिषय में एक पत्र लिखा था जिसमें इसमहामारी के समाप्त होने के लिए पूर्वानुमान दिया गया था जिसमें लिखा गया था -" कोरोना का समय 24 मार्च 2020 तक चलेगा | उसके बाद इस महामारी का समाप्त होना प्रारंभ हो जाएगा जो क्रमशः 6 मई तक चलेगा | |उसके बाद समय में  पूरी तरह से सुधार हो जाने के कारण 6 मई के बाद संपूर्ण विश्व अतिशीघ्र इस महामारी से मुक्ति पा सकेगा |"
     यदि देखा जाए तो 24 मार्च से संक्रमण संपूर्ण विश्व में कम होने लगा था किंतु इसकी गति अत्यंत धीमी थी !6 मई के बाद इस महामारी से मुक्त होने वाले स्वस्थ रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है उसी का प्रभाव है कि आज 16 जून तक भारत समेत संपूर्ण विश्व के 50 प्रतिशत से अधिक लोग  बिना किसी औषधि के क्रमिक रूप से स्वस्थ होते चले जा रहे हैं |इसका कारण कोई औषधि है और न ही कोई वैक्सीन | केवल समय में सुधार होने के कारण कोरोना पीड़ित रोगियों को रोग मुक्ति मिलती जा रही है | यह महारोग इसी क्रम में क्रमशः समाप्त होता चला जाएगा जिसमें अधिकतम एक मास अर्थात 16 जुलाई तक का समय लग सकता है |
       इसके बाद यह महामारी 9 अगस्त से दोबारा प्रारंभ होनी शुरू हो जाएगी जो 24 सितंबर तक रहेगी !उसके बाद यह संक्रमण स्थायी रूप से समाप्त होने लगेगा और  16 नवंबर के बाद यह स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगा !
     विशेष बात यह है कि दिल्ली गुजरात जम्मूकश्मीर जैसे जिन क्षेत्रों में बार बार भूकंप आ रहे हैं वहाँ कोरोना का प्रकोप दूसरी जगहों की  अपेक्षा कुछ अधिक समय तक रह सकता है |आगे जहाँ जैसे भूकंप आएँगे वहाँ उस प्रकार का प्रभाव भी कोरोना महामारी पर देखने को मिलेगा |
  निवेदक -  
डॉ. शेष नारायण वाजपेयी
       Ph.D  By  BHU
A-7\41,कृष्णानगर,दिल्ली-51                                                                         
   9811226973 \9811226983

विनम्र निवेदन : अभी कुछ समय पूर्व मैंने इसी बिषय में आपको एक पत्र भेजा है जिसमें इस रोग की समाप्ति की तारीख 24 सितंबर की जगह गलती से 24 अगस्त लिख गई है जिसके लिए क्षमा याचना के साथ निवेदन है कि यह महामारी 9 अगस्त से दोबारा प्रारंभ होनी शुरू हो जाएगी जो 24 सितंबर तक रहेगी!ऐसा समझा जाना चाहिए !
      कोरोना जैसी महामारी के इतने बड़े संकट से निपटने में कुछ समय तो लगेगा किंतु अधिक घबड़ाने की आवश्यकता इसलिए नहीं है क्योंकि इस दृष्टि से जो समय अधिक बिषैला था वो 11 फरवरी तक ही निकल चुका था | इसलिए महामारी का केंद्र रहे वुहान में यहीं से इस रोग पर अंकुश लगना प्रारंभ हो गया था | उसके बाद इस  महामारी के वुहान से दक्षिणी और पश्चिमी देशों प्रदेशों में फैलने का समय चल रहा है | जो  24 मार्च 2020 तक चलेगा | उसके बाद इस महामारी का समाप्त होना प्रारंभ हो जाएगा जो क्रमशः 6 मई तक चलेगा | |उसके बाद समय में पूरी तरह सुधार हो जाने के कारण संपूर्ण विश्व अतिशीघ्र इस महामारी से मुक्ति पा सकेगा | 


      कोरोना समाप्त होने के समय का पूर्वानुमान 
     कोरोना जैसी महामारियाँ समय के बिगड़ने से प्रारंभ होती हैं और समय के सुधरने के साथ ही समाप्त हो जाती हैं |कुलमिलाकर ऐसी महामारियों के पैदा होने का कारण समय होता है इसलिए इनसे मुक्ति भी समय सुधरने पर ही मिलेगी | इसीलिए इससे मुक्ति दिलाने में औषधि आदि चिकित्सकीय प्रयासों की कोई बिशेष अधिक भूमिका नहीं होती है |समय के साथ साथ जब महामारियाँ स्वतः समाप्त होने लगती हैं ऐसे समय में महामारी से पीड़ित रोगियों पर जिस औषधि का प्रयोग किया जा रहा होता है उसे ही इसकी औषधि माना लिया जाता है जबकि महामारी अपने समय से स्वतः समाप्त हो रही होती हैं | 
       समय ख़राब आ जाने पर सबसे पहले उसका असर वायुमंडल पर होता है उससे संपूर्ण प्रकृति प्रभावित होती है इससे सभी खाने पीने वाली वस्तुएँ उससे प्रभावित होकर रोगकारक हो जाती हैं और लोग महामारी से पीड़ित होने लग जाते हैं |महामारी के समाप्त होने का भी यही क्रम होता है और समय भी लगभग उतना ही लगता है जितना महामारी के प्रारंभ होने में लगता है | 
      इसीक्रम में कोरोना महामारी का असर कम होने का समय 11 फरवरी सन 2020 से प्रारंभ हो चुका था | संपूर्ण वातावरण में इसका दुष्प्रभाव विद्यमान होने के कारण इसकी क्रमिक समाप्ति में समय लग्न स्वाभाविक था | 
    मैंने 19 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा था जिसमें इसमहामारी का समाप्त होने के लिए पूर्वानुमान दिया गया था -" 24 मार्च 2020 तक चलेगा | उसके बाद इस महामारी का समाप्त होना प्रारंभ हो जाएगा जो क्रमशः 6 मई तक चलेगा | |उसके बाद समय में पूरी तरह सुधार हो जाने के कारण संपूर्ण विश्व अतिशीघ्र इस महामारी से मुक्ति पा सकेगा |" 
     यदि देखा जाए तो 24 मार्च से संक्रमण संपूर्ण विश्व में कम होने लगा था किंतु इसकी गति अत्यंत धीमी थी !6 मई के बाद इस महामारी से मुक्ति मिलने की गति बढ़ती चली जा रही है उसी का प्रभाव है कि आज 16 जून तक भारत समेत संपूर्ण विश्व 50 प्रतिशत से अधिक लोग  बिना किसी औषधि के क्रमिक रूप से स्वस्थ होते चले जा रहे हैं |यह सर्व विदित है कि अभी तक कोई औषधि खोजी नहीं जा सकी है और न ही वैक्सीन ही बनाई जा सकी है फिर भी कोरोना पीड़ित रोगियों को रोग मुक्ति मिलने में समय नहीं तो और कोई दूसरा कारण दिखाई नहीं पड़ता है | इसी क्रम में यह महारोग क्रमशः समाप्त होता चला जाएगा जिसमें अधिकतम एक मास अर्थात 16 जुलाई तक का समय लगेगा | 
       इसके बाद यह महामारी 9 अगस्त से दोबारा प्रारंभ होगी जो 24 अगस्त तक रहेगी !उसके बाद यह संक्रमण स्थायी रूप से समाप्त होने लगेगा | 16 नवंबर के बाद यह स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगा !
      इसके बाद 31 मार्च तक सामाजिक अपराध उन्माद आदि का वातावरण समाज में अशांति पैदा करेगा उसके बाद वह भी शांत होता चला जाएगा |   
       विशेष बात यह है कि दिल्ली गुजरात जम्मूकश्मीर जैसे जिन क्षेत्रों में बार बार भूकंप आ रहे हैं वहाँ कोरोना का प्रकोप दूसरी जगहों के अतिरिक्त कुछ अधिक समय तक रहेगा |
  
      संपूर्ण विश्व में संक्रमितों की संख्या अनुमान से बहुत अधिक थी किसी में संक्रमण का असर अत्यंत सूक्ष्म रूप में था किसी में बहुत अधिक था जो समय बढ़ने के साथ साथ बढ़ता चला गया |उनमें से बहुत कम लोगों की जाँच की जा सकी उस जाँच में जब जो संक्रमित निकले वही सामने लाए जा सके जबकि उनके अतिरिक्त भी बहुत बड़ी संख्या में लोग संक्रमित थे जिन्हें समय के सात साथ स्वतः इस महामारी से मुक्ति मिलती चली गयी |

Friday, June 12, 2020

मोरारीबापू प्रकरण में यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान क्यों न खोजा जाए !

हमसे कुछ लोगों ने हमारी शिक्षा को लेकर प्रश्न किया है वे यह लिंक खोलकर देख सकते हैं -see more... http://snvajpayee.blogspot.com/2012/10/drshesh-narayan-vajpayee-drsnvajpayee.html 
 हमारे अनुसंधान कार्यों को इस वेवसाइट पर देखा जा सकता है - http://www.drsnvajpayee.com/
                        बिशेष बात :
  मैं अपनी शास्त्र साधना में लगा हूँ |मेरा किसी से कोई लेनादेना नहीं है एक बार मैंने साईं प्रकरण के विवाद में साईं का विरोध करके अपनी भूमिका अदा की थी और आज धार्मिक टिड्डियों को खदेड़ने के लिए मुझे आगे आना पड़ा !इसके अतिरिक्त मेरा  किसी के किसी विवाद वाग्व्यापार का न समर्थन है न विरोध !
    जहाँ तक बात मोरारी बापू जी की है 1987 में काशी के चेतसिंह किले पर इनकी कथा हो रही थी जिसमें काशीनरेश जी की भी गरिमामयी उपस्थिति हुई थी !यह काशी में संगीतमय पहली कथा थी जिसका विद्वानों ने विरोध भी किया और कहा जा रहा था कि शास्त्रार्थ के लिए ललकारा जाएगा आदि आदि किंतु मात्र थोड़े पैसों में वे लोग मान गए और सारी बातें समाप्त हो गईं !इसी कथा में काशीनरेश जी ने भी अपने उद्बोधन में अंतिम दिन कहा था कि काशी की धरती पर आप डालडा बेचने में सफल हो गए ! 
    उसके बाद रमेश भाई ओझा जी की कथा हुई उसमें काशी के बहुत लोग जाते थे किंतु बात वही संगीतमय कथा नहीं होनी चाहिए !खैर उसी समय संकट मोचन जी में शाम को मानस सम्मेलन भी चल रहा था !उसमें बक्सर वाले श्रीमन्नारायण (मामा जी) बोल रहे थे !दीनदयाल जालान जी रमेश भाई जी को लेकर वहाँ पहुँच गए इसी बीच रामचरितमानस की महती विभूति डॉ. श्रीनाथ मिश्र जी कुछ विद्वानों के साथ वहाँ पहुँच  गए | श्रीमन्नारायण जी (मामा जी) जब कथा करके मंच से उतरे तो उन्होंने डॉ. श्रीनाथ मिश्र जी को दण्डवत प्रणाम किया इसके बाद रमेश भाई ओझा जी को भी उसी प्रकार प्रणाम किया किंतु रमेश भाई जी की ओर से उनके सम्मान में ऐसा कुछ ध्यान नहीं दिया गया जिससे उनका भी सम्मान झलकता इसके बाद जब डॉ. श्रीनाथ मिश्र जी ने प्रवचन प्रारंभ किया तो उन्होंने कहा मामा जी बहुत बड़े विद्वान हैं और इतने सरल हैं की वे ऐसे ऐसे लोगों को प्रणाम करते हैं जिन्हें जीवन भर पढ़ा सकते हैं |ये उनकी गरिमा थी जो कहने का साहस केवल काशी की उस विभूति ने किया था !
      इसके बाद कलकत्ते वाले बालव्यास उन्होंने नाच गाने के माध्यम से श्रीमद भागवत कथा परंपरा की काशी की धरती पर जो धज्जियाँ उड़ाईं उसका एक ओर तो विरोध किया जा रहा था अंदर से समझौता हो रहा था !बालव्यास जी मुमुक्षुभवन के सामने वाली कोठी में रुकते थे एक दिन दोपहर में उनके विश्राम कक्ष के दरवाजे पर गुरुवर त्रिनाथ जी और गुरुवर शशिधर उनकी प्रतीक्षा में बैठे थे काफी भीड़ थी !मैं अचानक पहुँच गया तो उन्हें वहाँ प्रतीक्षा में बैठे देखते ही मैंने उन्हें प्रणाम किया और उनसे आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा व्यासजी से मिलना था मुझे आश्चर्य हुआ !खैर मैंने धक्का देकर दरवाजा खोला बालव्यासजी मुझे न केवल पहचानते थे अपितु स्नेह भी करते थे मैं उनको तुरंत बाहर लाया और उन दोनों विभूतियों को प्रणाम करवाया इसके बाद उनके गौरव के बिषय में बालव्यासजी को बताया उन्होंने सभी प्रकार से सम्मानपूर्वक उन्हें वहाँ से बिदा किया !ऐसा और भी होता रहा है |
   कुलमिलाकर  एक नहीं अनेकों बार हम लोगों ने उनसे कुछ धन ले लेकर अपनी गरिमा के साथ समझौता किया है आज हम उन्हीं लोगों को धर्म से बहिष्कृत करने की बातें करते हैं हमें हमारा इतिहास जानना होगा !
      मेरा मोरारी बापू जी जैसे किसी व्यक्ति से न कोई व्यक्तिगत संबंध है और न कुछ लेना देना किंतु मेरा उन लोगों से लेनादेना जरूर है जो खुद अयोग्य हैं धर्म शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में जिनका कोई अपना स्वाध्याय ही नहीं है किंतु शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान की बात शुरू होते ही वे दुम पटकने एवं उछलकूद करने लग जाते हैं !अरे इतनी ही खुजली थी तो तुम खुद ऐसे बिषयों का अध्ययन करके अपने समाज को अपने शास्त्रीय नियमों धर्मों के आधार पर चला सकते थे उनके लिए प्रेरक बन सकते थे !किंतु अपना पतन हुआ इसलिए खुद को दोष न देकर किसी न किसी बड़े व्यक्तित्व को पकड़ कर उसे दुदकारने  हैं | ऐसे निर्लज्ज लोग ये नहीं देखते कौन कितना विद्वान् है कौन कैसा साधक है कौन कितना बड़ा संत है सनातन धर्म एवं समाज को समेट  कर  चलने में उसका अभी तक क्या योगदान रहा है !बिना कुछ देखे सुने फुदकने लग जाते हैं इसने ऐसे कपड़े क्यों पहने? ये ऐसा बोलता क्यों ?ये उनसे मिला क्यों ?ये वहाँ गया क्यों |अरे कोई तुम्हारे पिता जी की कमाई खाता है जो तुमसे आज्ञा ले लेकर काम करे !मुल्लों की तरह फतवे जारी करने वाले लोग दूसरे को मुल्ला बताते हैं  लोग  होते हैं जो सिर पर छेदवाली टोपी लगा लें तो  इनकी बातों से  लगने लगेगा कि ये किसी बिधर्मी के सिखावे पर फतवे जारी कर  रहे हैं | अरे अपने धर्म के किसी  व्यक्ति से कोई गलती हो भी गई हो तो उससे मिलकर  एक बार अपनी नाराजगी व्यक्त करो वो उस पर ध्यान न दे  तो दूसरे तीसरे आदि कदम हो सकते हैं !ये कौन सी बात है अपने बीबी बच्चों के साथ कपड़े उतार उतार कर रोडों पर नाचने लगे किसी ने पूछा ऐसा क्यों कर रहे हैं बोले मोरारीबापू ने ऐसा गाया  क्यों ?इसलिए जब तक वे मानेंगे नहीं तब तक मैं तो ऐसे ही नाचूँगा !अरे नाचो न इससे उनकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा |
    शास्त्रचर्चा के लिए कुछ शास्त्रों का अध्ययन करके कुछ कहा जाए तो अच्छा लगता है बड़े स्तर पर यदि किसी से कोई धार्मिक या शास्त्रीय गलती हो भी रही है तो उस पर धर्मादेश देने के लिए हमारे सनातन धर्म के श्रद्धेय शंकराचार्य हैं वे उस बिषय में सोच बिचार करके निर्णय लेते रहते हैं उन्हें बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होता है और प्रत्येक बिषय में सोचना होता है !वे हर बिषय में उचित अवसर की प्रतीक्षा करते हैं जब उन्हें जो ठीक लगता है वैसा धर्मादेश देते हैं हमें विश्वास रखना चाहिए कि वे हर परिस्थिति पर दृष्टि बनाए हुए हैं साईं का विरोध करने के लिए उन्हें किसी ने प्रेरित नहीं किया था फिर भी उन्होंने उचित समय पर उचित निर्णय लिया था !इसलिए हर प्रकरण में प्रतीक्षा की जानी चाहिए ! शरीर के किसी अंग में घाव हो जाए तो उसे काटकर फेंकना इतना आसान नहीं होता वही स्थिति धर्म की है | किसी को 50 वर्ष तक धार्मिक वक्ता  के रूप में प्रतिष्ठित करना इसके बाद उसे मुल्ला मुल्ला कहकर धर्म से बहिष्कृत करने की बात करना ये केवल वो उन लोगों के द्वारा जिनका धार्मिक जगत में शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में कोई अध्ययन अनुसंधान ही नहीं है | कई लोग तो ऐसे हैं उन्होंने शिक्षा तो डॉक्टर इंजीनियर  या कुछ और बनने की ली है किंतु धर्म के क्षेत्र में वे भी टाँग फँसाने पर आमादा हैं कुछ लोग तो इसलिए इसमें टाँग फँसाते हैं कि उनकी माता जी पहले किसी आश्रम में सेवा देती रही हैं तो उनके बच्चों को लगने लगा मैं तो जन्मजात  धार्मिक खानदान से हूँ |
    कई लोगों ने सरकारी विभागों में नौकरियाँ करते हुए जम के घपले घोटाले किए हैं अब प्राण फड़फड़ा रहे हैं कहीं पकड़ न जाएँ इसलिए अपनी चमड़ी बचाने के लिए ऐसे लोगों ने लालपटुका पहन कर टीका लगाना प्रारंभ कर दिया अपना पाप छिपाने के लिए धर्म के क्षेत्र में घुस कर मोरारीबापू मोरारीबापू धर्म धर्म करते जा रहे हैं ऐसे लोग अपने को धार्मिक सिद्ध करने के लिए एक अजीब सा मुखौटा बनाए घूम रहे हैं | कल एक टेलीफोन विभाग के लाइनमैन हमारे लिए कह रहे थे कि बहुत हिम्मती है इतने लोगों से अकेले जूझ रहा है | अरे इसमें आश्चर्य क्या है मैं किसान परिवार से हूँ बचपन में खूब बकड़ियाँ चराई हैं इससे ज्यादा उन लोगों को माना भी नहीं जा सकता हैं शास्त्रीय ज्ञानविज्ञान में जीरो वेषभूषा बिलकुल धार्मिक इंसानों जैसी बनाए घूम रहे हैं | एक लोग अपने को ब्राह्मण बता कर हमें अब्राह्मण सिद्ध करने में लगे हुए थे | बाद में मैंने उनके बिषय में पता किया तो उनकी माता जी किसी आश्रम में किसी साधू की सेवा में रही थीं उन्हीं संस्कारों से उनका प्रादुर्भाव हुआ जबकि उनके पिता दरजी थे किंतु श्रीमान जी हमारे ब्राह्मणत्व पर प्रश्न खड़े कर रहे थे | एक ने कहा कि मेरी आपके प्रति पहले बहुत आस्था थी आज वो ख़त्म हो गई !अरे भाई जब थी तब भी उस आस्था का वजूद क्या था और आज नहीं रही तो उससे नुक्सान क्या हुआ !तुम्हारा अपना कोई धार्मिक वजूद होता ये सब बातें तब मायने रखती थीं ऐसे तो बालों में हो जाने वाले जुओं से ज्यादा धार्मिक हैसियत क्या है सिर में तभी तक वजूद है जबतक हम कंघी नहीं करेंगे | 
     कोई एक हमारे लिए तमाम अपशब्दों का प्रयोग कर रहे थे उनके पूर्वज पतित होने से पूर्व पहले कभी  त्रिपाठी रहे होंगे तब वे वेद वेदादि का अध्ययन करते रहे होंगे इसलिए उन भूतपूर्व त्रिपाठी को भी लगता है शायद वे भी त्रिपाठी ही हों पढ़े पाँच मंत्र नहीं ,एक भी वेद नहीं पढ़े लिखते त्रिपाठी हैं इसके बाद विद्वानों के विरद्ध फतवा जारी करते हैं निर्लज्जता की हद है | एक है वो कह रहा है मैं तो बहुत बड़ा धार्मिक हूँ मैंने तो दीक्षा ली है मैं ब्राह्मण हूँ मोरारी बापू मुल्ला हैं  उसकी प्रोफाइल में चेहरे से शक हुआ पता लगा कि उसके पुरखे किसी ईदगाह में झाड़ू लगाने का काम करते रहे हैं | ऐसे लोग धार्मिक विद्वानों पर अंगुली उठाते हैं कितने शर्म की बात है !ऐसे न जाने कितने लोग हैं जो अपनी शास्त्रीय हैसियत पहचाने बिना दूसरों पर टिपण्णी करने लगते हैं धर्म के क्षेत्र में ये छिछोरापन बंद होना चाहिए !धार और धार्मिक विद्वानों पर टिप्पणी करनी है तो अपनी शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान की क्षमता विकसित करनी होगी !
      हम सनातन धर्म के हर उस महात्मा विद्वान् कथाबाचक साधू संत पर किए जाने वाले हमलों का विरोध करेंगे !जहाँ उसके गुण और दोषका स्पष्ट मूल्यांकन किए बिना ही उसके विरुद्ध विधर्मी लोग फतवा जारी करने लगेंगे | अरे ! जिसने संघर्ष पूर्वक इतने लंबे समय में साधना पूर्वक अपने जीवन को बुना है मनुष्य होने के नाते कभी किसी से कोई गलती हो भी सकती है ऐसा संभव है जिसके लिए वो कह भी देता है कि मेरे मेरे किसी बात व्यवहार से यदि किसी को कष्ट हुआ हो तो मैं क्षमा माँगता हूँ !इसके बाद क्या बच जाता है जिसके लिए डुप्लीकेट सनातन ठेकेदारों ने उछलकूद मचा रखी है कुछ कालनेमियों की संतानें देखने में खुद तो किसी अँगेज की अवैध संतान लगते हैं वे भी सनातन धर्मियों को कालनेमि बताते  हैं !ऐसे लोगों के वक्तव्य का वजूद क्या है जो खुद किसी लायक नहीं हैं धर्म के क्षेत्र में उनका कोई योगदान भी नहीं है किंतु वे भी सनातनधर्म को अपने पिता जी का पतलून समझ बैठे हैं कि मोरारीबापू गलत हैं | कुछ खलिहर लखेरे लोग अपनी लुगाई को दिखाने के लिए मोरारी बापू का विरोध कर रहे हैं ताकि उनकी कुटाई करने वाले उनके घर वाले उन्हें हिन्दू समझ कर दो टाइम भोजन और चाय देते रहें उनके पापी पेट का सवाल है मैं समझता हूँ | ऐसे लोग पूँछ उठाए घूम रहे हैं कि मोरारी बापू माफी मांगेंगे तब हम मानेंगे !नहीं मानोगे तो मत मानों ऐसे लोग विरोध करके भी कर क्या सकते हैं धरती का बोझ हल्का करने के लिए किसी पहाड़ पर चढ़ के कूद भले जाएँ इसके अलावा शास्त्रीय अध्ययन तो है नहीं जो वहाँ जाकर मोरारी बापू जी को शास्त्रार्थ के लिए ललकारें !इतनी असलियत कहाँ लगी है |
     मोरारी बापू को मौला और साईंबापू को पापा मानने वाले लोगों के बिषय में महर्षि पराशर ने साफ साफ साफ लिखा है -
   चित्रकर्मः यथानेकैः रंगैरुन्मील्यते शनैः | 
   ब्राह्मण्यमपि तद्विद्धि संस्कारैः मंत्रपूर्वकैः || 
    सावित्र्याश्चापि गायत्र्या  संध्योपासत्यग्नि कार्ययोः | 
    वेदं चैवानधीयानाः सर्वे ते वृषलाःस्मृताः || 
  सावित्री गायत्री संध्योपासन अग्निहोत्र वेदाध्ययन से विहीन अपने को ब्राह्मण कहने वाले लोग ब्राह्मण नहीं अपितु शूद्र हैं !उनके पतित होने से पूर्व उनके पूर्वजों में वे शास्त्रीय गुण और सदाचार था इसलिए वे तो अधिकृत ब्राह्मण रहे होंगे किंतु इनमें से अधिकाँश टिड्डियों के ब्राह्मणत्व या हिंदुत्व के बिषय में तो भगवान ही जाने जो यहाँ बकवास करते रहे हैं !