Wednesday, April 12, 2017

स्वास्थ्य अनुसंधान प्रस्ताव !

अनुसंधान प्रस्ताव

































अनुसंधान परियोजना के बी विवरण
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प्रोजेक्ट का TITLE:
  समय एवं प्राकृतिक संकेतों के द्वारा भावी घटनाओं का पूर्वानुमान ! 
2
उद्देश्य:
A.   रोगों एवं अवसाद जैसे मनोरोगों का पूर्वानुमान करके प्रिवेंटिव चिकित्सा को आसान बनाना !
B. अतिवर्षा बाढ़ एवं  भूकंप आदि का पूर्वानुमान एवं भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं से मिलने वाले संकेतों का अध्ययन 
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प्रस्तावित अनुसंधान का सारांश (150 शब्द तक) संकेत: -
      समय - शरीर और ब्रह्मांड दोनों की रचना एक जैसी है शरीर में रोग मनोरोग आदि हों या प्रकृति में बाढ़ भूकंप आदि ये सब अचानक घटित होते देखे जाते हैं !रोग होने पर चिकित्सा कर ली जाती है और प्राकृतिक दुर्घटनाओं के बाद बचाव कार्य कर लिए जाते हैं किंतु चिकित्सा और बचाव कार्य के परिणामों का पूर्वानुमान पता नहीं होता ! कई बार तो चिकित्सा होते हुए भी कुछ रोगियों का रोग बढ़ते और मृत्यु तक होते देखी जाती है इसी प्रकार से बाढ़ भूकंप आदि के बाद बचाव कार्य चला करते हैं उधर बाढ़ बढ़ती जाती है और भूकंप के झटके लंबे समय तक लगते रहते हैं !इसलिए  इनसे संबंधित पूर्वानुमान लगाने के लिए समयविज्ञान एवं प्रकृति संकेतों के अध्ययन हेतु !



4
योग्यता - आयुर्वेद ज्योतिष एवं वेद वेदांगों का अध्ययन


अध्ययन  संदर्भ:
    आयुर्वेद - चरकसंहिता,सुश्रुतसंहिता,शार्ङ्गधर संहिता,माधन निदान ,रस रत्न समुच्चय ,अष्टाङ्गसंग्रह,भावप्रकाश, चक्रदत्त आदि !
 ज्योतिष - ताजिक नीलकण्ठी ,होरा रत्नम,पराशर होरा शास्त्र ,जतक पारिजात ,वृहद्ज्जातक, जातकतत्वविवेक, जातकालंकार ,लघुपाराशरी, षड़पंचाशिका,गृह लाघव, सूर्यसिद्धांत,ज्योतिर्विवेक रत्नाकर,सारावली आदि    


5
पिछले लगभग बीस वर्षों से समय विज्ञान को आधार मानकर जीवन एवं प्रकृति से संबंधित विभिन्न विषयों पर अनेकों दृष्टिकोणों से रिसर्च किया जा चुका है जिससे कई विषयों के पूर्वानुमान में सफलता मिली है भूकंपों से संबंधित पूर्वानुमान लगा  पाने में भले ही अभी तक कोई विशेष सफलता न मिल पाई हो किंतु इस रिसर्च कार्य के द्वारा ही इसी क्षेत्र में सफलता के जो संकेत मिले हैं वो काफी आशा जनक हैं !
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संबंधित शीर्षकों के तहत विस्तृत शोध योजना
  1. पिछले 100 वर्षों में आए बड़े भूकंपों का अध्ययन
  2. भूकंपों के प्रकारों का अध्ययन 
  3.  भूकंपों से प्राप्त संकेतों के अध्ययन के आधार पर निकट भविष्य में घटने वाली प्राकृतिक सामाजिक व राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का पूर्वानुमान !
  4. भूकंप आने से पहले और बाद में होने वाले प्रकृति परिवर्तनों का अध्ययन !
  5. भूकंप आने से पहले और बाद में लोगों में होने वाले संभावित रोगों एवं स्वभावों में होने वाले बदलावों का अध्ययन !
  6.  वात  पित्त कफ प्रकृति के भूकम्पों का वात  पित्त कफ प्रकृति के लोगों पर अलग अलग पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन !
  7. भूकंपों के प्रकारों के आधार पर भिन्न भिन्न भूकंपों का अलग अलग जानवरों के स्वभावों शरीरों में आए परिवर्तनों का अलग अलग अध्ययन !
  8. भिन्न भिन्न भूकंपों का भिन्न भिन्न वृक्षों वनस्पत्तियों पर दिखने वाले बदलावों का अलग अलग अध्ययन !
  9. भूकंपों के आने के पहले से बाद तक की प्राकृतिक घटनाओं का अलग अलग अलग अध्ययन !
  10. भूकंपों के आने से पहले एवं बाद में होने वाले प्राकृतिक उत्पातों का अध्ययन ! 
  11. भूकंपों के आने से पहले एवं बाद में दिखने वाले आकाशीय एवं पार्थिव शकुनों अपशकुनों का अध्ययन !
  12. भूकंपों के समय ग्रहों नक्षत्रों एवं ग्रहसंयोगों के आधार पर भूकंपों का अध्ययन !
  13. पिछले 100 वर्षों में आए प्रमुख भूकंपों के समय के ग्रह एवं नक्षत्रों  का आधुनिक भूकंपों के लक्षणों के साथ संयुक्त अध्ययन !
  14. भूकंप आने वाले समय में ही भूकंप स्थलों पर पहुँच कर वहाँ की प्रकृति का अध्ययन
  15. प्रोफार्मा:
    1. अनुलग्नक I : निम्न बिंदुओं सहित रोगी की जानकारी:
      1. अनुसंधान और लाभ का उद्देश्य
      2. अध्ययन प्रक्रिया
      3. अध्ययन के प्रायोजक
      4. संभावित जोखिम:
      5. गोपनीयता:
      6. अध्ययन और आपके अधिकारों में आपकी भागीदारी: अध्ययन डिजाइन

    1. अनुबंध II : सहमति फॉर्म
      1. समझने योग्य भाषा
      2. अध्ययन जिसमें शोध शामिल है
      3. अध्ययन के प्रायोजक
      4. उद्देश्य और प्रक्रियाएं
      5. जोखिम और असुविधाएं
      6. लाभ
      7. भागीदारी के लिए मुआवजा
      8. अध्ययन संबंधी चोट के लिए मुआवजा
      9. भागीदारी के विकल्प
      10. रिकॉर्ड की गोपनीयता
      11. संपर्क जानकारी
      12. कथन वापस लेने का अधिकार
      13. सहमति स्वैच्छिक है
      14. जैविक सामग्री के भविष्य के उपयोग के लिए सहमति
      15. भविष्य में होने वाले व्यावसायीकरण जैसे किसी भी लाभ, जैसे कि दवा के विकास के लिए आनुवंशिक आधार
      16. यदि लिखित सहमति प्राप्त नहीं की गई है, तो कारण दें

    1. अनुलग्नक III : डेटा संग्रह / प्रश्नावली
  1. उपयोग किए जाने वाले उपकरणों और अन्य सामग्रियों:
  2. पेटेंट आदि प्राप्त करने के लिए संभावित तरीकों सहित सांख्यिकीय तरीकों सहित परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए कार्यप्रणाली / तकनीकों को नियोजित किया जाता है।

अध्ययन भागीदार

शामिल करने के मापदंड

बहिष्करण की शर्त

अध्ययन योजना

  1. समाप्ति बिंदु:
  2. टाइमसेट और फ्लोचार्ट:
#
अवधि
प्रस्तावित कार्य
क्रियाएँ
1
प्रवेश पर





  1. सांख्यिकीय विश्लेषण:

7
प्रस्तावित जांच के लिए जीएमसीएच में उपलब्ध उपकरण, आदि के संदर्भ में सुविधाएं

8
बजट की आवश्यकता (विस्तृत गोलमाल और पूर्ण औचित्य के साथ )
  1. स्टाफ़
  2. आकस्मिक व्यय
  3. आवर्ती
  4. गैर आवर्ती (उपकरण)
  5. यात्रा
  6. उपरि शुल्क
9
नैतिक अनुपालन: हाँ / नहीं


ए
अध्ययन का प्रकार:

क्लिनिकल

व्यवहार



बी
इस अध्ययन में मानव विषय शामिल होगा : हाँ / नहीं

सी
मानव विषय पर इस अध्ययन में विषयों को न्यूनतम जोखिम से ज्यादा सम्मिलित नहीं है (न्यूनतम जोखिम दैनिक जीवन में सामना करने के लिए तुलनीय है)

डी
इस अध्ययन में पशुओं को शामिल किया जाएगा (वर्तमान में इस अध्ययन में इन अध्ययनों की अनुमति नहीं है

ई
इस अध्ययन में शामिल विषयों की आयु 18 वर्ष से अधिक होगी और वैध सहमति देने में सक्षम होंगे
यदि नही।
  1. विषयों 18 वर्ष से ऊपर हैं लेकिन मानसिक विकार / विकास विकलांगता / शिक्षा या संचार समस्याओं के कारण सहमति नहीं दे सकते।
डिमेंशिया / मादक पदार्थों की लत

  1. विषय 18 वर्ष से कम उम्र के हैं

  1. यदि उत्तर I और I वर्ष है, तो विषय के कानूनी अधिकृत प्रतिनिधि की उचित सहमति ली जाएगी










एफ
प्रतिभागियों / माता-पिता / कानूनी प्रतिनिधियों की जानकारी और सहमति
  1. सभी विवरण / कानूनी प्रतिनिधियों को परियोजना / जांच के बारे में स्पष्ट विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी, जो कि एक भाषा में अग्रिम रूप से सरल और आसानी से समझी जा सकती है
  2. सभी प्रतिभागियों को स्वैच्छिक रूप से भाग लेना होगा और जांच / संस्था द्वारा किसी भी दंड के बिना अध्ययन डेटा के आधार पर उनकी चिकित्सा जानकारी / जांच को वापस लेने / निकालने का अधिकार होगा यदि वे चिकित्सा के उपयोग और देखभाल के लिए खतरे के बिना जांच के दौरान चाहते हैं
  3. अन्वेषक प्रतिभागी के मरीज के विपरीत शक्ति की स्थिति में नहीं होगा (यानी कोई दबाव, प्रलोभन, गले का इस्तेमाल उसकी निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए रोगी के नामांकन के लिए किया जाएगा)
  4. हस्ताक्षरित और हस्ताक्षर किए गए (स्वतंत्र गवाह द्वारा) सहमति प्रत्येक मामले में अनुमोदित स्वीकृति प्रपत्र पर ली जाएगी















जी
नैदानिक ​​परीक्षण: ड्रग / टीके / डिवाइस / हर्बल उपचार:

  1. क्या अध्ययन में इसका इस्तेमाल होता है: कृपया टिक करें
दवा
उपकरण
टीके
भारतीय चिकित्सा पद्धति
चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणाली
कोई दूसरा
एनए
  1. क्या इसे स्वीकृत और विपणन किया गया है:
कृपया सही का निशान लगाएं:
भारत में
ब्रिटेन और यूरोप
अमेरीका
अन्य देशों, निर्दिष्ट करें
  1. क्या इसका उपयोग, खुराक, प्रशासन के मार्ग में परिवर्तन शामिल है?
यदि हां, क्या डीसीजीआई / अन्य कोई नियामक प्राधिकरण की अनुमति प्राप्त है?
यदि हां, तो अनुमति की तिथि:
  1. क्या यह एक नई दवा है?
यदि हां, इंड इंडिया:
    1. अन्वेषक के ब्रोशर ने प्रस्तुत किया
    2. मैं एन विट्रो पढ़ाई डेटा
    3. प्रीक्लिनिनिकल अध्ययन किया
    4. नैदानिक ​​अध्ययन है: चरण I / चरण II / चरण III / चरण 4
  1. क्या आप जानते हैं कि इस अध्ययन / समान अध्ययन कहीं और किया जा रहा है?
यदि हां, तो विवरण संलग्न करें




















एच
विषय चयन:
  1. विषयों की संख्या
  2. अध्ययन की अवधि।
  3. दोनों लिंगों से भर्ती हो सकते हैं : हाँ / नहीं
  4. शामिल किए जाने / बहिष्करण मानदंड दिए गए हाॅं नही
  5. विषय के प्रकार:
स्वयंसेवक
              रोगियों
  1. वी उलन इरबल विषय:
क्या मैं अध्ययन करता हूं :
              गर्भवती महिला
              बच्चे
              बुजुर्गों
              भ्रूण
              निरक्षर
              विकलांग
              बहुत बीमार
              गंभीर रूप से बीमार
              मानसिक रूप से विकलांग
              आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े
              कोई दूसरा
  1. विशेष समूह के विषय (कृपया टिक करें)
इसमें शामिल हैं: कैदियों
संस्थागत, कर्मचारी, छात्र, नर्स / आश्रित
सशस्त्र बलों, स्टाफ, किसी भी अन्य














मैं
गोपनीयता और गोपनीयता
  1. अध्ययन शामिल है
- प्रत्यक्ष पहचानकर्ता
              - अप्रत्यक्ष पहचानकर्ता / कोडित
              - पूरी तरह से अनजान / डिलीक्टेड              
  1. कर्मचारियों द्वारा डेटा की गोपनीय संभाल

जे
जैविक / खतरनाक सामग्रियों का उपयोग: (कृपया टिक करें)
  1. भ्रूण के ऊतक या बबर्टस का प्रयोग
  2. अंगों या शरीर तरल पदार्थों का उपयोग
  3. पुनः संयोजक / जीन थेरेपी का प्रयोग
यदि हां, तो डीएएनए उत्पादों के लिए बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) की मंजूरी मिली है
  1. पूर्व-मौजूद / संग्रहीत / बाएं नमूनों का उपयोग
  2. बैंकिंग / भविष्य के अनुसंधान के लिए संग्रह
  3. लियोनीसिन विकिरण / रेडियोसोटोप का प्रयोग
यदि हां, भभ परमाणु रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) के पास रेडियोधर्मी आइसोटोप प्राप्त किया गया है?
  1. संक्रामक / बायो खतरनाक नमूने का प्रयोग
  2. सामग्री के उचित निपटान
  3. क्या मरीजों से एकत्र किए गए नमूने विदेशों में भेजे जाएंगे?
अगर हाँ, सहयोगियों के विवरण के साथ जस्टिफाइड
  1. क्या अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की स्क्रीनिंग समिति (एचएमएससी) से मंजूरी के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा रहा है?
  2. नमूना विदेश भेजा जाएगा क्योंकि: (कृपया टिक करें)
सुविधा भारत में उपलब्ध नहीं है
भारत में सुविधा दुर्गम है
सुविधा उपलब्ध है लेकिन उपयोग नहीं की जा रही है
              यदि हां, तो कारण ...













के
क्या विषय के भर्ती के लिए कोई विज्ञापन किया जायेगा? (पोस्टर, फ्लायर, ब्रोशर, वेबसाइट - यदि ऐसा है तो कृपया एक कॉपी संलग्न करें)

एल
जोखिम और लाभ:
  1. विषयों / समुदाय / देश को अनुमानित लाभ की तुलना में जोखिम क्या उचित है?
  2. क्या शारीरिक / सामाजिक / मनोवैज्ञानिक जोखिम / असुविधा है?
यदि हाँ, न्यूनतम या कोई जोखिम नहीं है
न्यूनतम जोखिम से अधिक
भारी जोखिम
  1. क) क्या इस विषय का एक फायदा है?
                                          डायरेक्ट
                                   अप्रत्यक्ष                                          
              बी) क्या समाज के लिए एक लाभ है: हां / नहीं







एम
प्रकाशन नैतिकता
  1. अन्वेषक सार्वजनिक हित में जानकारी के अनुसंधान / प्रसार के परिणाम के उचित प्रकाशन को सुनिश्चित करेगा।
  2. पारस्परिक सहमति द्वारा निर्धारित ग्रन्थकारिता के आदेश को परेशान नहीं किया जाएगा।
  3. ब्याज के संघर्ष अगर कोई भी शामिल किया जाएगा
  4. प्रकाशन का विवरण संस्थागत अनुसंधान और नैतिकता समिति को सूचित किया जाएगा
जहां भी उपयुक्त हो, व्यक्तियों का पावती दी जाएगी

एन
अन्वेषक को स्वयं के संपर्क नंबर के साथ-साथ सहभागिता को नैतिक समिति के संयोजक कार्यालय (एआरए) की संपर्क संख्या भी प्रदान करनी चाहिए


Tuesday, March 28, 2017

शिक्षा व्यवस्था के साथ गद्दारी करने वालों को सैलरी दी जाती है देशवासियों के खून पसीने की कमाई से !

       नक़ल करवाने में लगी है जो सरकारी मशीनरी   उन पर भी सैलरी उड़ेल रही है सरकार बारी उदारता !एक ओर गरीबों ग्रामीणों मजदूरों किसानों का संघर्ष पूर्ण मुसीबतों भरा जीवन तो दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था के  साथ गद्दारी करने वाले नक़ल करवाने वालों का सुख सुविधापूर्ण जीवन ! सच कहें तो शिक्षा कर्म से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों की घिनौनी करतूतें देखकर अब तो शिक्षा व्यवस्था से ही घृणा होने लगी है अब तो किसी को बताने में भी शर्म  लगने लगी है कि मैंने भी चार विषय से MA किया है !आप स्वयं देखिए -see more.... http://aajtak.intoday.in/karyakram/video/special-report-24th-march-over-ayodhya-and-ram-mandir-1-919535.html

    नक़ल रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों ने पूरी ताकत झोंक रखी है नक़ल करवाने में !बारे सरकारी काम काज की शैली !इतनी गद्दारी करते हैं सरकार के अपने लोग इसके बाद भी सरकार उन्हें देती है सैलरी ये सरकार के हिम्मत की बात है किंतु सैलरी जनता की कमाई से देनी होती है इसमें सरकारों का मोह कैसा !
        काम करने के नाम पर गद्दारी करने की सैलरी उठा रहे हैं बहुत लोग !सरकार ख़ुशी ख़ुशी देती जा रही है उन्हें भारी भरकम सैलरी !जितनी सैलरी में आम मार्केट में तीन से चार शिक्षक मिल जाएँ वो भी पढ़े लिखे परिश्रम करने वाले ईमानदार लोग किंतु उतनी सैलरी सरकार अपने एक एक शिक्षक को देती है फिर भी वे लोग यदि शिक्षा व्यवस्था के साथ गद्दारी कामचोरी मक्कारी बेईमानी आदि करने लगें तो दोष सरकार का नहीं तो किसका है !
      सरकारी कर्मचारियों से काम लेना जब सरकार के बश का है ही नहीं और न ले पा रही है फिर उन्हें क्यों दे रही है सैलरी और जनता से क्यों लेती है टैक्स !भ्रष्टाचार मुक्त ईमानदार सेवाएँ उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है !इसमें सरकारी कर्मचारी यदि सरकार का साथ नहीं देते हैं तो ये समस्या सरकार के अपने परिवार की है किन्तु सरकार यदि जनता से टैक्स लेती है तो सरकार की सेवाओं के प्रति दिनोंदिन मरते जा रहे जनता के विश्वास को जिन्दा करना सरकार का धर्म है और स्वधर्म का पालन करे सरकार !
    शिक्षाअधिकारी प्रेंसिपल शिक्षक और पुलिस विभाग से संबंधित जो लोग गद्दारी कर रहे हैं छात्रों के भविष्य के साथ उनसे शक्तिपूर्वक निपटे सरकार !सरकारों के भ्रष्टाचार की पोल न खोल दें केवल इसलिए सैलरी लुटाई जा रही है उन्हें !सरकार आगे से आगे बढ़ाती जाती है उनकी भी सैलरी ! उन्हें भी न केवल सारी सुविधाएँ दी जाती हैं अपितु छींकने खाँसने नहाने धोने आदि हर काम की छुट्टी भी देती है सरकार !
    इसमें सरकार के पिता जी का जाता क्या है सैलरी तो जनता की जेब से जाती है वाहा वाही सरकार की होती है छुट्टियों पर छुट्टियाँ घोषित करना कामचोरी को प्रोत्साहित करना नहीं तो क्या है ?
     इन्हें सैलरी नक़ल कराने के लिए दी जाती है क्या ?
      शिक्षक ,प्रेंसिपल और शिक्षाअधिकारी हों या पुलिस विभाग !बच्चों के भविष्य के साथ गद्दारी कर रही है भ्रष्ट सरकारी मशीनरी ! ऐसे लोगों को भी सरकार न केवल सैलरी आदि सारी सुविधाएँ देती जा रही है अपितु इन भ्रष्टाचारियों की भी सैलरी बढ़ाती जा रही है!ये सैलरी देश वासियों के खून पसीने की गाढ़ी कमाई से प्राप्त टैक्स से देती है सरकार !ये नहीं भूला जाना चाहिए । 
        गरीबों ग्रामीणों मजदूरों किसानों की ओर देखो दिन रात शर्दी गर्मी हमेंशा कर्तव्य पालन में लगे रहते हैं कितना संघर्ष पूर्ण मुसीबत की जिंदगी जीते हैं वे लोग !इनमें बहुत बड़ा वर्ग अच्छे खासे पढ़े लिखे लोगों का है जिनके पास घूस देने के पैसे नहीं थे सोर्स लगाने के लिए दलाल नहीं थे इसलिए उनकी सरकारी नौकरी नहीं लग पाई वे भी बेचारे पढ़े लिखे होनहार लोग आज मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन यापन करने पर मजबूर हैं !दूसरी ओर सरकारें सरकारी विभागों में बैठे गद्दारों मक्कारों कामचोरों बेईमानों को भी सैलरी बाँटे जा रही हैं जो सरकार से भारी भरकम सैलरी लेकर भी अपराधियों और शिक्षा माफियाओं का साथ देते देखे जाते हैं शिक्षा से जुड़े लोग शिक्षा विभाग चौपट करने पर लगे हुए हैं चिकित्सा से जुड़े लोग चिकित्सा विभाग चौपट कर रहे हैं किंतु इन विभागों से जुड़े अधिकारियों के चेहरों पर जिम्मेदारियों का जरा सा एहसास नहीं दिखाई देता है और न ही उनकी कोई भूमिका ही समझ में आती है सरकारी विभागों में एक एकांत कमरा रूपी कोप भवन बना दिया जाता है जहाँ वातानुकीलित वातावरण में समय पास किया करता है भूमिका विहीन ये वर्ग !
      किसान भी अपने खेतों की ओर चक्कर मारने जाते हैं किंतु अधिकारी आफिसों में आराम करते हैं उन्हें उनके विभाग की लापरवाहियाँ मीडिया वाले बताते हैं तब वो बड़े आराम से कह रहे होते हैं मैंने जाँच के आदेश दे दिए हैं रिपोर्ट मँगवाई है दोषियों पर कठोर कार्यवाही होगी किंतु सोचने वाली बात है कि जिनका अधिकारी इतना आलसी हो उसके कर्मचारी कितने सक्रिय और ईमानदार होंगे कल्पना की जा सकती है ! जाँच करने वालों में भी सम्मिलित लोग वे ही होते हैं जो वहाँ उन शिक्षा माफियाओं की मदद कर रहे होते हैं ऐसी परिस्थिति में रिपोर्टें बिलकुल ओके आती हैं न कोई अपराध और न कोई अपराधी !कैमरे झूठ वीडियो गलत !सबजगह रामराज्य !
    खेती के मामलों में भ्रष्टाचार करने वाले लेखपाल से ही उसी से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले की मँगवाई जाती है जाँच रिपोर्ट !सरकार के हर विभाग का यही हाल है !सरकारी विभागों का शोषितों पीड़ितों के साथ जाँच नाम का ये इतना भद्दा मजाक है जैसा छोटे छोटे बच्चे अपनी हँसी मजाक के खेलों में भी नहीं खेलते हैं ।इसीलिए सरकारी कामकाज की शैली से उठता जा रहा है जनता का विश्वास ! 
          शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े ईमानदार लोगों का सर शर्म से झुक जाता होगा जब वे देखते होंगे नक़ल करवाने वाले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों की ऐसी कुकार्यशैली उनकी पीड़ा का एहसास हमें है उनसे क्षमा याचना के साथ मुझे कठोर शब्दों का प्रयोग करना पड़ रहा है !




Monday, March 27, 2017

भष्टाचार का पैसा ऊपर तक जाता है ! सरकार कहती है कि घट गया है भ्रष्टाचार !बारी सरकार !!

     भ्रष्टाचार का पैसा जब अपने को भी मिलने लगता है तब तो सरकारों में सम्मिलित नेता लोग भी कहने लगते हैं कि अब कहाँ है भ्रष्टाचार !किंतु जब तक अपने को नहीं मिलता था और दूसरे खाए जा रहे होते हैं तब तक भ्रष्टाचार का नाम ले लेकर मचाते रहते हैं ईमानदारी का हाहाकार !उन्हें देखकर लगता है कि इन भर कोई ईमानदार नहीं है !अपनी और अपने लोगों की इन्हीं कमजोरियों के कारण आज भ्रष्टाचार पर कार्यवाही करना तो दूर कम्प्लेन का जवाब देना तक जरूरी नहीं समझती है सरकार !उसे पता होता है कि इसमें अपने लोग ही फँसेंगे !   
घूसलेने का नशा -    
     घूसलेने की इच्छा सबसे भयंकर नशा है घूस खोरी से जब तक जो दूर रहता है तभी तक उसे ये बुरी लगती है किंतु जो लेने लगता है वो तो लती हो जाता है उसके तो हाथ ही नहीं चलते हैं बिना घूस लिए !
      EDMC में भ्रष्टाचार के कारण ही बिना सैलरी लिए भी अपनी सेवाएँ देने को तैयार बैठे हैं बहुत से लोग !एक बार विज्ञापन देकर तो देखे सरकार !बारे भ्रष्टाचार !!
    लोग तैयार भी क्यों न हों आखिर निगमों में काली कमाई की तो रौनक सी लगी ही रहती है निगम वालों के काले कारनामों के कारण  ही अक्सर  घाटे में ही चला करते हैं निगम !निगमों के अधिकारी कर्मचारी लोग पहले तो बहुत सारे कामों को अवैध घोषित कर देते हैं इससे उन कामों का पैसा लेने का निगम का हक़ ही ख़त्म हो जाता है किंतु अपने कहे हुए अवैध कार्यों को करने से ये मना किसी को नहीं करते अपितु उन अपने घोषित किए हुए अवैध कार्यों के बदले अवैध काम करने वालों से करते रहते हैं वसूली और आपस में छोटे से लेकर बड़े तक मिल बाँटकर खा जाते हैं धन और निगम को दिखा देते हैं ठेंगा !ऊपर से कहते हैं निगम घाटे में चल रहा है । अरे !किसी खेत को जब मेड़ ही खाने लगे तो उसका भला भगवान् भी नहीं कर सकते हैं । 
     नियमानुसार तो अवैध काम रोके जाने चाहिए और वैध काम होने देने चाहिए यही निगम कर्मचारियों का कर्तव्य माना जाता है और संभवतः यही करने के लिए सरकार ने उनको नौकरी पर रखा है पद दे रखे हैं और सैलरी देती है और यदि वे ऐसा नहीं करते तो सरकार उन्हें ढोए क्यों जा रही है और क्यों दिए जा रही है सैलरी !किंतु इनकी काली कमाई चूँकि ऊपर तक जाती है इसलिए सरकार उनसे पूछे क्यों और किस मुख से ?ये काली कमाई का ही कमाल है !
     निगम की घूसखोरी के कारण जनता आपस में लड़ती रहती है !निगमों के अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार के कारण खुद तो कमाई करते रहते हैं और जनता को लड़ाया करते हैं !ये कानून हैं या मजाक !!
   EDMC जिस काम को अवैध घोषित कर चुकी होती है !नियमानुसार चलने वाले कुछ लोग तो EDMCकी ऐसी शाकाहारी बातों पर भरोसा कर लेते हैं जो उनकी हरकतों से परिचित नहीं हैं बाकी आजकल सभी लोग समझने लगे हैं कि EDMC का लालच नहीं होगा तो वो गलत काम होने क्यों देगी गलत कामों को रोकना उनका दायित्व है किन्तु यदि वे रोक नहीं रहे हैं तो इसमें उनका घूस प्रेम नहीं तो फिर मक्कारी कामचोरी कही जाए क्या ?  
   EDMC घूस लेकर उन्हीं लोगों के उन्हीं कार्यों को करने की अघोषित अनुमति दे देती है जो पहले अवैध घोषित कर चुकी होती है !उधर अवैध कार्यों के विरुद्ध शिकायत करने वालों की तरफ से उन्हीं अवैध काम वालों को नोटिश दे देती है और उनसे कह देती है कि तुम कोर्ट में जाकर स्टे ले लो !वो स्टे ले लेते हैं इसके बाद वो अवैध काम करने वाला व्यक्ति अवैध होते हुए भी EDMC की कृपा से चारों ओर से सुरक्षित हो जाता है। कोर्ट के स्टे  का नाम सुनते ही हर विभाग उससे डरने लगता है । 
    अब वह अवैध कार्य शिकारी की मुट्ठी में बंद चिड़िया की जिंदगी की तरह होता है वो चाहे तो मार दे या छोड़ दे उसकी मर्जी !ठीक इसी प्रकार से जेई और ल अफसरों के रहमों करम पर टिका होता है वो अवैधकाम !जब तक उनको अवैध काम करने वाले पैसे देते जाते हैं तब तक वे लोग लंबी लंबी तारीखें लेते जाते हैं और बढ़वाते जाते हैं स्टे !और जिस दिन उसने पैसे देने बंद किए उसी दिन ये निगमों के ड्रामेबाज लोग बुलडोजर वगैरह लेकर पहुँच जाते  हैं और करने लगते हैं नंगा नाच !पैसा मिलता रहे तो EDMC के अपने  नियमों के अनुशार वो अवैध काम भी वैध काम की अपेक्षा ज्यादा मजबूत हो जाता है और EDMC को ठेंगा दिखा देते हैं ! जनता तंग होती रहती है किंतु EDMC के भूत प्रेत अपनी जेबें भरा करते हैं !पूछो तो कहते हैं कि ये तो ऊपर तक जाता है ऊपर वाले जब भाषण देते हैं तो साक्षात धर्मराज लगते हैं जनता वहाँ जाकर उनसे पूछ सकती नहीं है कि भाई EDMC के गलत कार्यों का पैसा आप तक पहुंचता है या नहीं !
   EDMC के कर्मचारियों की काली  कमाई से प्रभावित होकर सैकड़ों लोग बिना सैलरी लिए भी EDMC के अधिकारी कर्मचारियों के रूप में अपनी सेवाएँ देने के लिए तैयार बैठे हैं सरकार  एक बार वैकेंसी निकाल के तो देखे !
EDMC के चुनाव !
  EDMC के चुनावों का मतलब होता है जिन जिन पार्षदों के पेट भर चुके हैं वे लोग अपनी सम्पत्तियाँ इकट्ठी कर चुके हैं अब वे पीछे हटें और अपने दूसरे भाइयों को मौका दें ! 
        आप स्वयं देखिए एक उदाहरण -
   एक प्रकरण पूर्वी दिल्ली कृष्णानगर में छाछी बिल्डिंग चौक पर K -71 नाम से एक बिल्डिंग है जिसमें सोलह फ्लैट्स हैं और चार दुकानें हैं । ये बिल्डिंग 1998 में बनी थी सारे फ्लैट्स एवं दुकानें बेच दी गई थीं !
      इसके लगभग 5-6 वर्ष बाद बिल्डिंग की छत के एक कोने पर एक मोबाईल टॉवर लगवा दिया गया ! जिसमें  MCD से कोई परमीशन नहीं ली गई ,बिल्डिंग में रहने वाले फ्लैट्स मालिकों से सहमति नहीं ली गई ,तीसरी बात इस बिल्डिंग की ऊँचाई लगभग 55 से 57 फिट है जबकि 50 फिट ऊँचाई से अधिक निर्माण की अनुमति नहीं है !इसके अतिरिक्त भार के लिए बिल्डिंग की मजबूती की कभी कोई जाँच नहीं की गई  इन सारी अनियमितताओं के लिए जिम्मदार है केवल भ्रष्टाचार !सरकार कहती है भ्रष्टाचार कहाँ है !
       मोबाईल टावर का किराया किसी ऐसे व्यक्ति को जाता है जिसका इस बिल्डिंग में कोई फ्लैट नहीं है और न ही वो यहाँ रहता है इसलिए इस मोबाईल टावर से होने वाले रेडिएशन से बीमार हों तो इस बिल्डिंग के सोलह फ्लैटों में रहने वाले परिवारों के सदस्य और किराया ले वो बाहरी व्यक्ति !
   बिल्डिंग के बीचोबीच बनी सीढ़ियों से मोबाईल टावर मेंटीनेंस के जो अपरिचित से मैकेनिक लोग छत पर जाते हैं उन्होंने कई बार कई लोगों के साथ आपराधिक वारदातें की हैं जिनसे लोगों का बड़ा नफा नुक्सान भी हुआ है !वो कहतें हैं टावर नहीं रहेगा तो बिल्डिंग भी नहीं रहने दूँगा एक बार तो विस्फोटक जैसी कोई चीज बिल्डिंग के बेस मेंट में रखकर चले गए थे जिसमें पुलिस भी आई थी किंतु टावर गिरोह ने  सब को मैनेज कर लिया था !शुरू से ही बिल्डर ने छत पर पानी की बारह टंकियाँ सामूहिक रखी थीं जिनसे सभी फ्लैटों में पानी की सप्लाई होती रहती थी किंतु इसी टॉवर गिरोह ने पहले तो टंकियों में कूड़ा कबाड़ मरे चूहे बिल्ली आदि डाल देता रहा पिछले तीन वर्षों से तो पाइप काट रखे हैं टंकियाँ फाड़ दी हैं छत पर जाने के रास्ते पर ताला लगा रखा है तब से पानी बंद है ऐसी ही गुंडा गर्दी से तंग होने के कारण कई फ्लैट वाले लोग अपना फ्लैट बेचकर चले गए !
      इस अवैध मोबाईल टॉवर का किराया गुंडागर्दी और घूस खोरी के बल पर खाने वाले गिरोह का मानना है कि जिस फ्लैट वाले को रहना हो रहे नहीं रहना है न रहे किंतु अवैध होने के बाद भी ये मोबाईल टावर हटने दूँगा !EDMCसे लेकर SDM और पुलिस विभाग तक हर किसी का हिस्सा सबको पहुँचा दिया जाता है जेई हर महीने पैसे लेता है !यहाँ तक कि टॉवर हटाने के विरुद्ध दिया गया स्टे भी आपसी सेटिंग से बढ़वाया जाता रहेगा तारीखें पड़ती जाएँगी किंतु टॉवर नहीं हटेगा जज को भी EDMC वालों ने मैनेज कर लिया है उसके पैसे भी देने पड़े थे ऐसे भ्रष्टाचार का पैसा दिल्ली सरकार तक पहुँचता है !यदि ऐसा न होता तो अभी तक हटा न दिया जाता !जो पैसे खाते हैं वो टॉवर हटाने संबंधी कम्प्लेन पर कोई विचार ही क्यों करेंगे !
        मोबाईल टॉवर का किराया बिल्डिंग मेंटिनेंस में लगाया जाएगा ये कहकर लगाए गए टावर का एक भी पैसा आज तक बिल्डिंग के किसी भी कार्य में नहीं लगाया गया है सब टावर गिरोह EDMC के लोग और सरकार के अधिकारी कर्मचारी खा जाते हैं किन्तु बेसमेंट में अक्सर पानी भर जाता है!वो ठीक करवाने के लिए फ्लैट वाले लोग तब तक अपना पैसा क्यों लगावें जब तक टॉवर हटाया नहीं जाता !  EDMC के भ्रष्टाचार से निराश होकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को भी कई पात्र लिखे जा चुके हैं किंतु कहीं कोई सुनवाई नहीं होती यह देश सुनकर अब हम लोगों को भी भरोसा हो चला है कि भ्रष्टाचार का पैसा वास्तव में ऊपर तक जाता है !