Friday, June 24, 2016

ज्योतिष की निंदा करने से पाखंडी भोगगुरु की पोल तो खुल गई कि इन्होंने आयुर्वेद भी नहीं पढ़ा है !

   पाखंडी बाबा लोग बिना पढ़े लिखे होने के कारण  कसरत और व्यायाम को भी योग बताने लगते हैं किंतु ज्योतिष को पाखंड और ज्यातिषियों को पाखंडी कहते हैं जबकि ज्योतिष ही वास्तव में दिव्य विद्या है ।
    इसीलिए पुराने लोग कहा करते थे कि बचपन में मेहनत करके पढ़ लो अन्यथा तुम्हारी मूर्खता के कारण ज्योतिष जैसा दिव्य शास्त्र तुम्हें समझ में नहीं आएगा और तुम समझोगे ज्योतिष ही गलत है !बेकार में नाक कटाते घूमोगे ज्योतिष एवं ज्योतिषियों पर उठ पटांग टिप्पणियाँ करके !वैसे भी हाथ पर हिलाने डुलाने वाले व्यायामी योगियों के बश का कहाँ है ज्योतिष जैसा गंभीर शास्त्र समझना !
     समय ही जिसका खराब हो उसे कैसे स्वस्थ कर लगा   आयुर्वेद या विश्व की कोई भी चिकित्सा पद्धति !समय जिसका पूरा  हो चुका हो उसे कैसे बचा लेगी विश्व की कोई भी चिकित्सा पद्धति !समय अच्छा है या बुरा इसे बताने वाला आयुर्वेद नहीं अपितु ज्योतिष है व्यायाम और आयुर्वेद की सामर्थ्य अत्यंत सीमित है चिकित्सा पद्धति स्वस्थ होने लायक रोगी को ही स्वस्थ कर सकती है हर रोगी को नहीं किंतु स्वस्थ होने लायक रोगी और न स्वस्थ होने लायक रोगियों के अंतर को स्पष्ट तो ज्योतिष ही करेगा !ये आयुर्वेद के बश की बात ही नहीं है !
      जिन पाखंडियों ने आयुर्वेद भी नहीं पढ़ा है वे ज्योतिष की निंदा करते फिर रहे हैं !आयुर्वेद ही पढ़ा होता तो भी पता होता ज्योतिष एवं वास्तु आदि का महत्त्व !मैं 'सुश्रुतसंहिता' और और 'चरकसंहिता' जैसे ग्रंथों में दिखा दूँगा ज्योतिषशास्त्र का खुला प्रयोग ! ज्योतिष शास्त्र के बिना विकलांग है आयुर्वेद !

    ज्योतिष शास्त्र समय संबंधी पूर्वानुमान का सबसे बड़ा विज्ञान है !ये अगर पेट पिचका कर पैसे कमाने वाले नट नागरों को न समझ में आए तो इसके लिए ज्योतिष शास्त्र और ज्योतिष विद्वान क्या करें !कैसे घुसाएँ उन दिमागी अपाहिजों की घमंडी खोपड़ी में! 
     जिस ज्योतिष शास्त्र को आयुर्वेद केवल मानता ही नहीं है अपितु आयुर्वेद अधूरा है ज्योतिष शास्त्र के बिना !आयुर्वेद के बड़े बड़े ग्रंथों में ज्योतिष शास्त्र संबंधित बातों को उद्धृत किया गया है  गया है !यदि कोई व्यक्ति ज्योतिष शास्त्र न भी पढ़ा हो केवल आयुर्वेद भी पढ़ा हो तो उसे भी पता होगा ज्योतिष शास्त्र का महत्त्व किंतु जिसने कुछ पढ़ा ही न हो उसके लिए बेकार है ज्योतिष क्या कोई भी शास्त्र ! वो जिस विषय में जितनी चाहे उतनी बकवास करे स्वतंत्र है वो !जितनी योग के नाम पर कसरत करने के लिए हाथ पैर तो कोई भी हिला  डुला सकता है पढ़ा हो या अनपढ़ किंतु ज्योतिष शास्त्र वेदों का नेत्र है !ये उसी को समझ में आएगा जिसके पास दिमाग होगा !ज्योतिष जैसे शास्त्र के विषय में मुख उठा के ऐसे ऐसे लोग बकवास करने लगते हैं जिनमें शास्त्रों को समझने की क्षमता ही नहीं है । 
    आयुर्वेद के शीर्ष ग्रंथों में भी औषधि आहरण से लेकर औषधि निर्माण एवं औषधि दान तक की विधि में ज्योतिष शास्त्र का भरपूर उपयोग किया गया है !औषधि आहरण में स्थान विशेष की चर्चा सुश्रुत संहिता में वास्तु के आधार पर ही की गई है की तक की विधि थ भी कहते हैं !ज्योतिषशास्त्र जन्मपत्री विज्ञान वास्तु विज्ञान को यदि वे गलत कहते हैं तो इधर उधर योग शिविरों कहते क्यों घूम रहे हैं सीधे शास्त्रार्थ करें और गलत सिद्ध करके दिखावें ज्योतिष को !साधू संतों जैसा वेष धारण करके शास्त्रों की निंदा करना निंदनीय है कोई बात यदि किसी को समझ में न आवे इसका मतलब ये नहीं कि वो गलत है !रिओं यदि उन्हें गलत की सत्यता पर यदि संदेह हो तो बाबा जी करें शास्त्रार्थ !सरकार व्यवस्था करे !
    योग शिविरों में ज्योतिष की बुराई करना ठीक नहीं है यदि ज्योतिष की पद्धति गलत सिद्ध होगी तो बंद कर दी जाएगी !दूध का दूध पानी का जाएगा !यदि सही होगी तो ज्योतिष की बुराई बंद हो जाएगी !ऐसे कोई भी कभी भी ज्योतिष की निंदाकरने लगता आखिर ज्योतिष एक विषय है !कोई ज्योतिषी गलत हो सकता है किंतु शास्त्र नहीं
!
के
वल ज्योतिष ही नहीं संपूर्ण धर्म क्षेत्र ही आज भ्रष्टाचार का शिकार है योग्य और सदाचारी लोगों को खोज पाना दिनोंदिन कठिन होता जा रहा है !धर्म की जितनी विधाएँ हैं सब फेल होती जा रही हैं समाज में बढ़ते अपराध इस बात के सुदृढ़ प्रमाण हैं !पैसे के बल पर भीड़ कहीं कोई कितनी भी इकट्ठी कर ले किंतु समाज सिरे से ख़ारिज करता जा रहा है !ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में जो ज्योतिष पढ़े नहीं हैं वो भी ज्योतिष की निंदा करते हैं अरे !जिस विषय को आप जानते ही नहीं हैं उसके सही गलत होने का फैसला आप कैसे कर सकते हैं ! आखिर ज्योतिष भी एक शास्त्र है कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए वो शास्त्र से बड़ा कभी नहीं हो सकता !वैसे भी शास्त्रार्थ अपनी पुरानी परंपरा है इसमें कोई बुराई भी नहीं है ! शंका समाधान हो जाए तो क्या बुरा है !
" ग्रहों की मान्यता को पाखंड बताने वाला कोई भी व्यक्ति यदि ज्योतिष पढ़ा हो तो उसे शास्त्रार्थ की खुली चुनौती !"

जिसने ज्योतिष पढ़ी हो उसी से हो सकता है शास्त्रार्थ !और जिसने जिस विषय को पढ़ा ही न हो वो उस विषय को सही या गलत कैसे कह सकता है ।बिना पढ़े लोग तो सारी दुनियाँ को अपने जैसा ही अनपढ़ समझते हैं इसलिए मुख उठाकर कभी किसी को भी कुछ भी बोल देते हैं ऐसे लोगों से शास्त्रार्थ कर पाना कैसेsee more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2016/06/blog-post_20.html "

Sunday, May 22, 2016

Bhukamp Date and Time


Magnitude 8 and Greater Earthquakes Since 1900

The lists and statistics on this webpage have not been updated since December 2012. Many of these will be updated and available when we have completed the transition into the new earthquake database. We hope to provide this sometime in 2015.

Display Magnitude 8 Earthquakes in Google Earth.
Date - UTC - Time
Latitude
Longitude
Magnitude
Fatalities
Region
1902/06/11 05: 50.00 148.00 8.0
Sea of Okhotsk
1903/01/04 05:07 -20.00 -175.00 8.0
Tonga
1903/08/11 04:32 36.36 22.97 8.3
southern Greece
1905/07/09 09:40 49.0 99.0 8.4
Mongolia
1905/07/23 02:46 49.0 98.0 8.4
central Mongolia
1906/01/31 15:36 1.0 -81.5 8.8 1000 Colombia-Ecuador
1906/08/17 00:40 -33.0 -72.0 8.2 3882 Valparaiso, Chile
1907/10/21 04:23 38.00 69.00 8.0
Afghanistan
1908/12/12 12:08 -14.0 -78.0 8.2
off the coast of central Peru
1911/06/15 14:26 28.0 130.0 8.1 12 Ryukyu Islands, Japan
1914/05/26 14:22 -2. 137. 8.0
West New Guinea
1915/05/01 05:00 47. 155. 8.0
Kurile Islands
1917/05/01 18:26 -29.0 -177.0 8.0
Kermadec Islands, New Zealand
1917/06/26 05:49 -15.0 -173.0 8.4
Tonga
1918/08/15 12:18 5.653 123.563 8.0 50 Celebes Sea
1918/09/07 17:16 45.5 151.5 8.2
Kuril Islands
1919/04/30 07:17 -19.823 -172.215 8.2
Tonga region
1920/06/05 04:21 23.5 122.0 8.0
Taiwan region
1920/09/20 14:39 -20.0 168.0 8.0
Loyalty Islands
1922/11/11 04:32 -28.553 -70.755 8.5
Chile-Argentina Border
1923/02/03 16:01 54.0 161.0 8.5
Kamchatka
1924/04/14 16:20 7.023 125.954 8.3
Mindanao, Philippines
1928/06/17 03:19 16.33 -96.7 8.0
Oaxaca, Mexico
1931/08/10 21:18 47.1 89.8 8.0 5 northern Xinjiang, China
1932/06/03 10:36 19.84 -103.99 8.1
Jalisco, Mexico
1933/03/02 17:31 39.22 144.62 8.4 2990 Sanriku, Japan
1934/01/15 08:43 27.55 87.09 8.1 10700 Bihar, India
1938/02/01 19:04 -5.05 131.62 8.5
Banda Sea
1938/11/10 20:18 55.33 -158.37 8.2
Shumagin Islands, Alaska
1939/04/30 02:55 -10.5 158.5 8.0
Solomon Islands
1940/05/24 16:33 -10.5 -77.0 8.2
near the Coast of central Peru
1941/11/25 18:03 37.171 -18.960 8.2
Azores-Cape St. Vincent Ridge
1942/08/24 22:50 -15.0 -76.0 8.2 30 Off the coast of central Peru
1943/04/06 16:07 -30.75 -72.0 8.2 18 off the coast of Coquimbo, Chile
1944/12/07 04:35 33.75 136.00 8.1 1223 Tonankai, Japan
1945/11/27 21:57 24.5 63.0 8.0 4000 off the coast of Pakistan
1946/04/01 12:28 52.75 -163.50 8.1 165 Unimak Islands, Alaska
1946/08/04 17:51 19.25 -69.00 8.0 100 Dominican Republic
1946/12/20 19:19 32.5 134.5 8.1 1330 Nankaido, Japan
1948/01/24 17:46 10.5 122.0 8.2 72 Panay, Philippines
1949/08/22 04:01 53.62 -133.27 8.1
Queen Charlotte Island, B.C., Canada
1950/08/15 14:09 28.5 96.5 8.6 1526 Assam-Tibet
1952/03/04 01:22 42.5 143.0 8.1 31 Hokkaido, Japan region
1952/11/04 16:58 52.76 160.06 9.0
Kamchatka, Russia
1957/03/09 14:22 51.56 -175.39 8.6
Andreanof Islands, Alaska
1957/12/04 03:37 45.15 99.21 8.1
Gobi-Altai, Mongolia
1958/11/06 22:58 44.329 148.623 8.3
Kuril Islands
1959/05/04 07:15 53.351 159.645 8.2 1 near the east coast of Kamchatka
1960/05/22 19:11 -38.29 -73.05 9.5 1655 Chile
1963/10/13 05:17 44.9 149.6 8.5
Kuril Islands
1964/03/28 03:36 61.02 -147.65 9.2 125 Prince William Sound, Alaska
1965/02/04 05:01 51.21 -178.50 8.7
Rat Islands, Alaska
1966/10/17 21:41 -10.807 -78.684 8.1 125 near the coast of central Peru
1968/05/16 00:49 40.903 143.346 8.2 47 off the east coast of Honshu, Japan
1969/08/11 21:27 43.478 147.815 8.2
Kuril Islands
1970/07/31 17:08 -1.49 -72.56 8.0
Colombia
1971/01/10 07:17 -3.132 139.697 8.1
Papua, Indonesia
1974/10/03 14:21 -12.254 -77.524 8.1 78 near the coast of central Peru
1976/08/16 16:11 6.292 124.090 8.0 8000 Mindanao, Philippines
1977/06/22 12:08 -22.878 -175.900 8.1
Tonga region
1977/08/19 06:08 -11.085 118.464 8.3 100 south of Sumbawa, Indonesia
1979/12/12 07:59 1.598 -79.358 8.1 600 near the coast of Ecuador
1985/03/03 22:47 -33.135 -71.871 8.0 177 offshore Valparaiso, Chile
1985/09/19 13:17 18.190 -102.533 8.0 9500 Michoacan, Mexico
1986/05/07 22:47 51.520 -174.776 8.0
Andreanof Islands, Aleutian Islands, Alaska
1989/05/23 10:54 -52.341 160.568 8.1
Macquarie Island region
1994/06/09 00:33 -13.841 -67.553 8.2 5 La Paz, Bolivia
1994/10/04 13:22 43.773 147.321 8.3 11 Kuril Islands
1995/07/30 05:11 -23.340 -70.294 8.0 3 Near Coast of Northern Chile
1995/10/09 15:35 19.055 -104.205 8.0 49 Near Coast of Jalisco, Mexico
1996/02/17 05:59 -0.891 136.952 8.2 166 Irian Jaya region, Indonesia
1998/03/25 03:12 -62.877 149.527 8.1
Balleny Islands region
2000/11/16 04:54 -3.980 152.169 8.0 2 New Ireland region, Papua New Guinea
2001/06/23 20:33 -16.264 -73.641 8.4 75 near the coast of southern Peru
2003/09/25 19:50 41.815 143.910 8.3
Hokkaido, Japan region
2004/12/23 14:59 -49.312 161.345 8.1
north of Macquarie Island
2004/12/26 00:58 3.295 95.982 9.1 227898 off the west coast of northern Sumatra
2005/03/28 16:09 2.074 97.013 8.6 1313 Northern Sumatra, Indonesia
2006/05/03 15:26 -20.187 -174.123 8.0
Tonga
2006/11/15 11:14 46.592 153.226 8.3
Kuril Islands
2007/01/13 04:23:21 46.243 154.524 8.1
East of the Kuril Islands
2007/04/01 20:39:58 -8.466 157.043 8.1 34 Solomon Islands
2007/08/15 23:40:57 -13.386 -76.603 8.0 650 Near the Coast of Central Peru
2007/09/12 11:10:26 -4.438 101.367 8.5 25 Southern Sumatra, Indonesia
2009/09/29 17:48:10 -15.489 -172.095 8.1 192 Samoa Islands region
2010/02/27 06:34:14 -35.846 -72.719 8.8 577 Offshore Maule, Chile
2011/03/11 05:46:23 38.322 142.369 9.0 28050 Near the East Coast of Honshu, Japan
2012/04/11 08:38:37 2.311 93.063 8.6
off the west coast of northern Sumatra
2012/04/11 10:43:09 0.773 92.452 8.2
off the west coast of northern Sumatra

South Latitudes and West Longitudes are indicated by NEGATIVE numbers.
Source: USGS NEIC PDE catalog; Data are preliminary.

Monday, March 21, 2016

सेक्स मुक्त साधक साधू संत !


    सेक्स मुक्त साधक साधू संत भी होते हैं यह सुन कर थोड़ा अटपटा सा भले लगे किंतु सच्चाई यही है कि सेक्स मुक्त विरक्त साधू संतों के पास इतना समय कहाँ होता है कि वो सामाजिक प्रपंच फैलते फिरें !यही करना होता तो वो विवाह करते बच्चे होते तो उनका उत्सव मनाते धंधा व्यापार करते !और आज भी जो साधक साधू संत हैं उनका न उत्सवों से लगाव है न मीडिया से अपितु वे तो किसी से मिलना ही नहीं चाहते !वैराग्य वाले साधू संत न तो धन संग्रह करते हैं और न ही सांसारिक प्रपंचों में फँसते हैं और नही किसी को ये बताते फिरते हैं कि मैं क्या खाता हूँ क्या पीता हूँ कैसे रहता हूँ आदि आदि !
    आजकल धार्मिक पाखंडियों को  इस बात का भी प्रचार प्रसार करना पड़ रहा है कि वो केवल एक ग्लास गाय का दूध लेते हैं वो जमीन में केवल एक चटाई बिछाकर सोते हैं उनके नाम से एक भी पैसा नहीं है उनका किसी महिला से कोई सम्बन्ध नहीं है !किंतु ऐसे पाखंडियों की हर हरकत पर समाज की निगाहें होती हैं  इसीलिए तो ये पाखंडी पापी दे रहे होते हैं सफाई !इन्हें ये समझ में नहीं आता है कि तुमने ऐसी हरकतें की क्यों कि समाज को तुम पर शक हुआ और तुम्हें सफाई देनी पड़ी !
   वैसे भी जिसने धन कमाया मकान बनाया सुख सुविधा के सारे साधन जुटाए वो सेक्स से दूर रहेगा ये विश्वास करने योग्य ही नहीं है जिसे अपने मन पर लगाम ही लगाना होता वो पहली स्टेज पर ही लगा लेता किंतु सारे साधन जुटाकर फिर केवल सेक्स नहीं करेगा !ऐसे लोग लुक छिप कर समाज में इतनी गन्दगी फैला रहे हैं जिसका जब भंडाफोड़ होता है तब अपने पापों के कारण सारे धर्म एवं धार्मिक समाज को ही कटघरे में खड़ा कर देते हैं ऐसे लोग !जिसकी पीड़ा और उससे संबंधित समाज के ताने महीनों वर्षों तक सहने पड़ते हैं चरित्र वान  साधूसंतों को !इसलिए ऐसे पाखंडियों का शुरू से ही बहिष्कार करे धार्मिक समाज !
  गाँवों में कहावत है कि "राणें तो रणापा सहकर भी रह सकती हैं किंतु रणुआ लोग रहने दें तब न !"इस कहावत का मतलब है कि विधवा स्त्रियाँ यदि अपना जीवन नियम संयम पूर्वक बिताना भी चाहें तो भी रणुआ अर्थात विवाह की आशा छोड़ चुके अविवाहित लोग उन्हें जीने कहाँ देते हैंअर्थाततंग किया हीकरतेहैं ।        बिलकुल यही स्थिति धर्म के क्षेत्र में भी है यदि बाबा बैरागी नियम संयम पूर्वक रहना भी चाहें तो भी कुछ कामचोर अकर्मण्य आलसी भाग्यपीड़ित ईश्वर विमुख लोग उनके आश्रमों में दुँदाढ़ी पर साँप रेंगाने पहुँच जाते हैं - यथा : मलमल बाबा की जय हो !मलमल बाबा के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम !बाबा जबसे हम आपके समागम में आए आपने पति दिया, पत्नी दी ,प्रेमी दिया ,प्रेमिका दी , बच्चे भी आप के ही दिए हुए हैं माकन आपने दिया है सरकारी नौकरी आपने दे दी है मेरा कारोबार खूब चलने लगा है हमारे यहाँ आपने इतना धन भर दिया है कि हम तो माला माल हो गए ! ऐसे भाड़े के प्रशंसा कर्मियों ने बाबाओं के न केवल दिमाग ख़राब कर दिए हैं अपितु उन्हें भगवान सिद्ध कर दिया है। 
    यह सब बनावटी विरुदावली  सुनकर बाबा को लगता है कि क्या वास्तव में मेरे अंदर ये गुण हैं और यदि हैं तो क्यों न सब कुछ अपने लिए ही सबकुछ किया जाए और जब अपने लिए करने लगते हैं तो तुरंत पकड़ जाते हैं तो पता लगता है कि  ये बुद्धूबकस वैसे तो ढपोल शंख हैं किंतु लोग पूजने लगे तो पुजवाने लगे और पुजवाने के चक्कर में खा रहे हैं जेलों की हवाएँ !
       कुलमिलाकर संपत्ति बढ़ती है वैभव बढ़ता है यश बढ़ता है सुख सुविधा के साधन बढ़ते हैं सुन्दर सा मकान बनता है उसमें बेडरूम बनता है उसमें बेड पड़ता है जिस विरक्त का मन यहाँ तक पहुँच गया वो इसके आगे की जीवन यात्रा ब्रह्मचारी बन कर करेगा इसकी कल्पना भी नहीं की जानी चाहिए ! वैरागियों के मन बेडरूम से बेडों तक पहुँचते ही नहीं हैं वो इनके बहुत पहले संयम पूर्वक रोक लिए जाते हैं ।
   धार्मिक भ्रष्टाचारियों  अर्थात भीड़ लगाने वाले सुख सुविधा भोगी आधुनिक धार्मिकों के आनंदभवनों (आश्रमों )की तलाशी जहाँ जहाँ भी हुई है वहाँ  और कुछ मिला हो न मिला हो किन्तु सेक्स सामग्री तो लगभग मिलती ही है वैसे भी ऐसे सेक्सकांड जहाँ भी पकड़े जाते हैं वहाँ कोई बाबा निकलता है या जहाँ कोई बाबा पकड़ा जाता है वहाँ सेक्स निकलता है ! आखिर बाबाओं और सेक्स का आपसी सम्बन्ध क्या है !बंधुओ !सांसारिक प्रपंचों में फँसे होने पर भी जो बाबा पकड़े नहीं जाते हैं उसमें उनके पवित्र बने रहने का श्रेय उनके राजनैतिक रसूक को दिया जाए या उनके पैसे के प्रभाव को या उनके अनुयायियों के दबाव को या फिर प्रशासन की ढिलाई को !किंतु दुर्भाग्य इस बात का है कि ऐसे लोग आजकल मीडिया के द्वारा धर्मगुरु  योगगुरु ज्योतिषगुरु आदि और भी बहुत कुछ बताए जाने लगे हैं मीडिया को जैसे पैसे मिलते हैं उतना उसके विषय में बढ़ा चढ़ा कर बोला जाता है ।

      जहाँ धार्मिक लोग शास्त्रीय आचार व्यवहार सदाचरण आदि छोड़कर निरंकुश स्वेच्छाचारी जीवन जीने लगते हैं उन पर विश्वास ही क्यों किया जाता है उनका बहिष्कार क्यों नहीं किया जाता !और समाज के जो लोग ऐसे अवारा लोगों साथ दे रहे होते हैं उन्हें दोषी क्यों न माना जाए !आखिर ये कैसे मान लिया जाए कि वहाँ हो रहे कुकर्मों के विषय में उन्हें कुछ पता ही नहीं था !बंधुओ !आप घर बनाने खड़े होते हैं तो हजारों अड़चनें आती हैं किंतु आप बाबा हैं इसलिए आश्रम बनाने खड़े होते हैं तो धड़ाधड़ बनता चला जाता है आखिर कैसे ?इसी प्रकार आप व्यापार करने निकलते हैं तो कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं क्या कुछ नहीं सहना पड़ता है उधार व्यवहार पैसे माँगने पड़ते हैं ब्याज चुकाना पड़ता है गारंटी देनी पड़ती है आदि आदि और भी बहुत कुछ !किंतु यदि आप बाबा बनके ब्यापार करना चाहते हैं तो कितना आसान होता है लोग दसपाँच वर्षों में करोड़ों अरबोंपति बन जाते हैं ।
 अपनी भावनाओं को कब तक यों ही कुंठित होने दें बाबा लोग ! 
      दूसरों को सेक्स सुखों के छलकते तालाबों में डूबते उतराते आखिर कब तक यूँ ही बेबश निगाहों से निहारते  रहें !आखिर क्यों न उतरें आप भी इस सेक्स सरोवर में !ऐसी ही भावनाओं से गर्भित विरक्ति विहीन मन निकल पड़ता है परोपकार या समाज सेवा करने । कुछ बाबालोग शादियाँ कराने लगते हैं कुछ तो दूसरों की डिस्टर्ब मैरिज लाइफ को ही सेट करने लगते हैं कुछ तो सेट करते करते खुद सेट हो जाते हैं इसी सेटिंग में कुछ को तो बाल बच्चे तक हो जाते हैं ,कुछ बाबा लोग नपुंसकता दूर करने के आसन सिखाने लगते हैं कुछ बच्चा होने की दवाई बनाते बेचते हैं कुछ बच्चा होने के यंत्र तंत्र ताबीज देते हैं तो कुछ लोग बच्चा होने का आशीर्वाद केवल वाणी से देते हैं तो कुछ कृपालु ऐसे भी हैं जो किसी को बच्चा देने के लिए अपना शारीरिक योगदान भी करते हैं !

Wednesday, March 9, 2016

महिलाएँ हर क्षेत्र में पुरुषों को बराबर टक्कर दे रही हैं फिर छेड़छाड़ के आरोप केवल पुरुषों पर क्यों ?

बलात्कारविश्लेषण-आखिर रुक क्यों नहीं रहे हैं बलात्कार !
     कहीं ऐसा तो नहीं है कि गलती केवल पुरुषों की न हो !अन्यथा इतने बड़े बड़े दंड विधानों का उतना असर होता क्यों नहीं दिख रहा है समाज पर !लगभग हर दिन सुनाई पड़जाता है कोई न कोई केस !अब तो छोटी छोटी बच्चियों के साथ भी किए जाने लगे हैं अत्याचार !आखिर कहाँ तक और किस किससे बचाई  जाएँ बच्चियाँ !ग़लतियाँ बड़ों की और भोग रही हैं बच्चियाँ !
     वर्तमान समय में अच्छे बुरे जो भी जितने प्रकार के काम पुरुष करते या कर सकते हैं लगभग वो हर काम आज महिलाएँ भी करती या करने का प्रयास करते देखी जा सकती हैं !आतंकियों नक्सलियों नशेड़ियों शराबियों तस्करों चोरों हत्यारों आदि बुरे से बुरे कामों में भी महिलाएँ सम्मिलित देखी जा रही हैं आज !फिर क्या कारण है कि रेप जैसी जितनी भी दुर्घटना घटती हैं सब में केवल पुरुष समाज को दोषी ठहरा दिया जाता है आखिर  महिलाओं में सेक्स की इच्छा नहीं होती है क्या ?आप स्वयं देखिए कहाँ पीछे हैं महिलाएँ -see more...http://khabar.ibnlive.com/photogallery/ibn7-operation-lajja-reavels-wife-swapping-459253.html
    महिलाओं की सुरक्षा हेतु  पुरुषों को अनुशासित रखने के लिए बड़े से बड़े दंडविधानों का प्रावधान किया गया किंतु महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचार घटते नहीं दिख रहे हैं आखिर क्यों ?हो न हो हर क्षेत्र में पुरुषों को बराबर टक्कर दे रही महिलाएँ इसक्षेत्र में भी अधिक न सही आंशिक रूप से ही हो अपनी भूमिका भी अदा कर रही हों ! केवल पुरुषों को कहीं बेवजह परेशान तो नहीं किया जा रहा है !
     सेक्स भावना जिन भी स्त्री पुरुषों के मन में जितनी अधिक होती है ऐसे स्त्री पुरुष उतने ही अधिक सजते सँवरते अर्थात श्रृंगारप्रिय होते हैं कुलमिलाकर शरीर के  श्रृंगार का लेवल मन की बासना के लेवल को प्रकट  करता है ये प्राचीन शास्त्रीय सिद्धांत है संभवतः पुराने लोग इसीलिए सहज श्रृंगार ही करते थे !इस शास्त्रीय सिद्धांत के अनुशार यदि श्रृंगार का सीधा संबंध सेक्सभावना से माना जाए तो वर्तमान समय में श्रृंगार करने करवाने का शौक पुरुषों में अधिक होता है या महिलाओं में ?ब्यूटी पार्लरों की जरूरत अधिक किसे पड़ती है । पुरुषों को या स्त्रियों को  ?
     इसी प्रकार कोई भी दूकानदार हर बिकाऊ वस्तु को सीसे में रखता है ताकि दिखाई पड़ती रहे जब दिखाई पड़ेगी तब तो कस्टमर उसे पसंद करेंगे !जो चीज में किसी के पसंद न पसंद की चिंता नहीं होगी उसे लोग दिखाएँगे क्यों ढक कर रखेंगे !वर्तमान फैशन के युग में स्त्री -पुरुषों में शरीर दिखाने की भावना किसमें किससे अधिक देखी जाती है ?       
    अब स्त्री-पुरुषों,लड़के-लड़कियों का रोडों पर साथ साथ निकलना बंद किया जाए !ऑड इवेन के हिसाब से घरों से निकलें पुरुष और महिलाएँ ! जिसदिन महिलाएँ रोडों बाजारों के लिए निकलें उस दिन पुरुष दूर दूर तक दिखाई न पढ़ें इसी प्रकार पुरुषों के लिए भी नियम बनाए जाएँ !बंद हो जाएगी सारी  छेड़छाड़ ! पुरुष अपने आपसे किसी महिला को छुएँ न देखें न घूरें न कुछ बोलें न और महिलाओं को जो ठीक लगे सो सब कर सकती हैं महिलाएँ !ये कैसी बराबरी !!
     छोटी छोटी बच्चियों पर हो रहे अत्याचार रोकने के लिए करना होगा ये ....http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2015/10/blog-post_25.html
   प्यार का खतरनाक खेल खेलते दोनों हैं किंतु बातबिगड़े तो दोषी पुरुष समाज !ये कैसी बराबरी !!किसी के पास कितनी है धन संपत्ति यह जानने के लिए पहले प्यार करें मन मिलाकर पूछ लें सबकुछ इसके बाद छेड़ छाड़ से लेकर बलात्कार तक का लगाकर आरोप भेज दें जेल समझौता हो तो अच्छा हो अन्यथा सड़े जेल में !बाद में दोषी बेचारा पुरुष समाज !प्यार का खेल दोनों ने खेला और भुगते केवल आदमी !अरे ये कैसी बराबरी ? 
    ससुराल वाले दहेज़ लें न लें उनके मातापिता बहू की कितनी भी प्रताड़ना सहें किंतु कुछ न कहें और यदि कभी कुछ मुख से निकल ही जाए आखिर मर मर कर जिसघर को बनाते हैं उसे बर्बाद होते कैसे देख सकते हैं किन्तु इतनी भी बात बर्दाश्त नहीं है तुरंत होता है दहेज़ का मुकदमा घर भर भेज दिए जाते हैं जेल!ऐसे बचेगा समाज !उचित तो ये है कि ऐसी महिलाओं से उन वृद्ध मातापिता की सुरक्षा के लिए क्यों न बनाए जाएँ कुछ कठोर नियम !ऐसी महिलाओं की असहनशीलता के कारण दिनोंदिन बुढ़ापा बोझ होता जा रहा है।जो घर में घरभर को दबाकर रखती हैं उन्हें बाहर सुरक्षा की जरूरत पड़ती होगी क्या ?सरकार ने भी तो सारे कानून महिलाओं के ही पक्ष में बना रखे हैं ये कोई नहीं सोच रहा आम समाज में सामान्यतौर पर गुजर बसर करने वाले उन परिवारों का क्या होगा जो महिलाओं की प्रताड़ना से नर्क बन चुके हैं आज !पुरुष हों या स्त्री अपने दायित्वों के प्रति जो समर्पित नहीं हैं वे सब दोषी !ऐसे हो सकती है बराबरी !दायित्व भ्रष्ट हर स्त्रीपुरुष का सामाजिक पारिवारिक बहिष्कार हो !
    समाज में मुश्किल से दस प्रतिशत लड़के लड़कियाँ पुरुष स्त्रियाँ आधुनिक खुलेपन की जिंदगी जीने के चक्कर में कर रहे हैं बड़ी बड़ी गलतियाँ !ये नशे से लेकर सारे दुष्कर्मों में एक दूसरे से बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और बदनामी भुगत रहा है देश का सारा सभ्य समाज !जिसे इस आधुनिकता फैशनेबलनेस से कोई लेना देना ही नहीं है बच्चे पालने मुश्किल हो रहा है उसे !वो एय्याशी करेगा तो खाएगा क्या ? इन दस प्रतिशत फैशनेबल हाईटेक स्त्री पुरुषों ने प्यार आधुनिकता और फैशन के नाम पर बदनाम कर रखा है सारा समाज !        कानून के हिसाब से महिलाएँ सबकुछ कर सकती हैं बेचारे पुरुष नहीं कर सकते !कहने को है बराबरी किंतु हकीकत में बहुत बड़ा अंतर है। बात यदि बराबरी की है तो मैट्रो में दो कमरे महिलाओं के लिए आरक्षित हैं तो दो पुरुषों के लिए भी होने चाहिए किन्तु ऐसा होता तो नहीं है आखिर क्यों ?महिलाओं के लिए भी तो बननी चाहिए कोई आचार संहिता !ऐसा कब तक  चलेगा कि गलती करें महिलाएँ और फाँसी पर लटकाते रहा जाए पुरुषों को ! पुरुष इस समाज के अंग नहीं हैं क्या ?प्यार दोनों मिलकर करते हैं किंतु कोई दुर्घटना पुरुषों पर घटती है तो कोई बात नहीं महिलाओं पर घट जाए तो महिला सुरक्षा की बात उठने लगती है ।
    फाँसी जैसा कठोर कानून बनने के बाद इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए और क्या किया जाए !सभी पुरुषों को बदनाम करना ठीक नहीं है !पुरुष इस समाज में कैसे रहें ये महिलाएँ ही निर्णय कर दें।आम आदमी हो या आम महिलाएँ प्यार फैशन इस प्रकार के सारे लफड़ों से दूर हैं वे !  
     खजाने को चाहने वाले बहुत लोग होते हैं इसलिए वो बहुमूल्य होता है इसीलिए उसे छिपाकर रखना होता है अन्यथा उसकी सुरक्षा के लिए किससे किससे कैसे कैसे लड़ा जाएगा ! यदि किसी के पास कोई खजाना हो और नैतिक तथा कानूनी दृष्टि से वो उसका अपना हो किंतु यदि उसे एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान पर पहुँचाना हो तो उसे लोग छिपाना क्यों चाहते हैं उसे ले जाने के लिए सिक्योरिटी की जरूरत क्यों पड़ती है और यदि कोई खजाना खोलकर केवल सरकारी सिक्योरिटी के बलपर ले जाना चाहे इसका मतलब क्या ये नहीं है कि वो खजाना स्वयं लुटवाना  चाहता है ।
     इसीप्रकार से महिलाओं के संपर्क में रहने से लेकर उन्हें छूने देखने आदि सभी प्रकार से महिलाओं से जुड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों से महिलाओं को संपर्क सीमित क्यों नहीं रखने चाहिए !जो सरकारें शहरों की रोडों पर बिना स्पेशल सिक्योरिटी के बैंकों की कैस बैन नहीं भेजती हैं इसका मतलब महिलाओं को भी समझना चाहिए कि आम नागरिकों को मिली सिक्योरिटी पर सरकार स्वयं भरोसा नहीं करती है तो ऐसी सरकारी सिक्योरिटी के भरोसे महिलाएँ अपने को सुरक्षित कैसे मानती हैं इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए निजी तौर पर सतर्कता बरतना चाहिए !क्योंकि कामी पुरुषों के लिए महिलाएँ किसी खजाने से कम नहीं होती हैं । 
     पहले शरीर ढकने के लिए कपड़े पहने जाते थे अब शरीर दिखाने के लिए कपड़े पहने जाते हैं !आजकल मुख्य मुख्य जगहों पर कपड़े पहनकर उन्हें हाईलाईट करने का फैशन चला है इसीलिए कपड़े मुख्य मुख्य जगहों पर पहने जाते हैं तब आचार ब्यवहार संस्कार सृजन को ध्यान में रख कर कपड़ों का चयन किया जाता था उससे चरित्रवान संस्कारी समाज का निर्माण होता था अब फैशनेबल लोग बलात्कारी समाज तैयार कर रहे हैं वो रेप गैंगरेप सेक्स या मासिक धर्म जैसी चीजों को मन और शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया मानते हैं ऐसे इतने आधुनिक स्त्री पुरुषों को कोई रोके कैसे इससे भारत कहीं आधुनिकता की दौड़ में पिछड़ न जाए ! फैशन स्त्रियों का हो या पुरुषों का इसमें नया कुछ नहीं होता है बल्कि फैशन का उद्देश्य ही पुरानी परंपराओं की दीवार लाँघ कर खुला खुला जीवन जीना होता है ऐसी खुली विचार धारा के स्त्री पुरुष लड़के लड़कियाँ का पहनावे से लेकर रहन सहनबोली भाषा मिलना जुलना सब कुछ आधुनिक होता है।पुराने समय में लोग  किसी महिला के प्रति अपनी सेक्सुअल भावना व्यक्त नहीं कर सकते थे इस भावना से उन्हें छू भी नहीं सकते थे पूरा शरीर ढक कर रखना होता था श्रृंगार मर्यादा में रखना होता था संगीत मर्यादित होता था ये सब करने का उद्देश्य सादा सात्विक रहन सहन एवं संस्कारयुक्त चरित्रवान सादा  जीवन उच्च विचार बनाए रखना था किंतु जिसे पुरातन आचार ब्यवहार रहन सहन सब पसंद न हों वो आधुनिक फैशनेबल आदि कुछ भी कहे जा सकते हैं । ये आधुनिक लोग प्राचीन के बिलकुल बिलोम होते हैं आधुनिकों का  रहन सहन आचार ब्यवहार आदि सबकुछ प्राचीनता विरोधी होता है उस समय पूरे कपड़े पहने जाते थे अब आधे पहने जाते हैं पुराने रहन सहन में संस्कार सदाचार आदि सबकुछ होता था प्राचीन का बिलोम शब्द है आधुनिक , इसलिए पुरातन आचार ब्यवहार रहन सहन जिन्हें  पोंगापंथी लगने लगता है ऐसे आधुनिक फैशनेबल लोग जब अपनी जिंदगी का सबकुछ बदल लेंगे तो संस्कार सदाचार आदि कैसे बचा रहेगा !ये भी तो बलात्कार जैसी भ्रष्टता में बदल जाएगा ।
       प्यार करने वाली महिलाएँ हों या पुरुष सम्मिलित तो दोनों ही होते हैं प्यार कभी किसी का अकेले तो हो भी नहीं सकता है दूसरी बात प्यार के पथ पर धोखे भी सबसे अधिक मिलते हैं !प्यार करने वाले स्त्री पुरुष प्रायः शूनशान जगह खोजते हैं और अपराधियों को भी शूनशान जगहें या खाली बसें आदि सवारियाँ ही प्रिय होती हैं ।ऐसी जगहों पर प्रेमी जोड़े जाते ही इसलिए हैं कि वहाँ असामाजिक या अश्लील हरकतें कर सकें और वहाँ पहुँचकर वो करते ही यही सबकुछ हैं ये वो जगहें होती हैं जहाँ समाज का जाना आना कम हो और पुलिस की पहुँच भी कम हो ! एकांत में प्रेमी   की अश्लील हरकतों में रूचि ले रही प्रेमिका को पाकर नशेड़ी अपराधियों में बासना न जगे इसकी कल्पना कैसे कर ली जाए वो भी तब जबकि वो जानते हैं कि प्रेमी जोड़ा अकेले है जबकि अपराधी अक्सर अकेले नहीं होते हैं जो प्रेमी जोड़े ऐसी जगहें ताक कर ही जाते हैं और वहाँ यदि कोई अप्रिय वारदात होती है तो उनकी सुरक्षा समाज या पुलिस कैसे करे कहाँ कहाँ खोजे इन्हें ? और इसमें सारे पुरुष समाज का दोष कैसे ?
       कुछ ऐसी संस्थाएँ बनीं हैं जहाँ सेक्स सुविधाओं के लिए कुछ निश्चित अमाउंट लेकर लड़कियाँ उपलब्ध करवाई जाती हैं कुछ शरारती लड़के आपसी सहमति से खूबघनी एवं पिछड़ी बस्ती में आपसी कंट्रीब्यूशन में कुछ घंटों का किराया देकर एक कमरा लेते हैं उधर चार्ज जमा करके एक लड़की लाई जाती है किंतु उसे ये नहीं बताया जाता है कि लड़के पाँच हैं जिन्हें देखकर लड़की लड़ने लगी किंतु लड़े या कुछ भी करे अब जो होना था वो तो हुआ ही बाद में  लड़की रोड पर छोड़ आई गई जहाँ उसने गैंगरेप का पुलिस कम्प्लेन किया किंतु अब न वो लड़के उस कमरे में होंगे और न ही वो लड़की घनी बस्ती के उस मकान तक पहुँच ही सकती है बताओ ऐसी परिस्थिति में क्या करे पुलिस और महिला सुरक्षा के नाम पर सारे पुरुष समाज को क्यों कोसा जाए !
        मैट्रो में खड़ा प्रेमी प्रेमिका का एक जोड़ा उस भीड़ भरी जगह में एक दूसरे से अश्लील हरकतें कर रहा था लोग देख रहे थे किंतु उन दोनों को शर्म नहीं थी देखने वालों में तीन शरारती लड़के भी थे उन्होंने लड़की को एकदम रोमांटिक मूड में देखा वो ब्याकुल हो गए उन्होंने निश्चय किया कि जिस स्टेशन पर ये लड़की उतरेगी वहीँ हम भी उतरेंगे मेट्रो पास था ही तो यही किया और उस प्रेमी जोड़े का पीछा किया पास में ही एक ओबर ब्रिज था वहाँ  उन दोनों को पकड़ लिया प्रेमी को पीटा प्रेमिका रेप की शिकार हुई !दोषी सारा पुरुष समाज कैसे ?
     राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक पार्क में मुझे पता लगा कि सौ सौ पचास पचास रूपए में लड़कियाँ उपलब्ध रहती हैं ये मुख्यजगह और मुख्यमार्किट का पार्क है जागरूक नागरिक होने के नाते मैंने वहाँ जाकर देखा तो अश्लील परिस्थिति में कई जोड़े मिले एक आध को डांटा और पुलिस बोलाने की धमकी दी तो वो कहने लगे बोला लीजिए क्या कर लेंगे वो हर सप्ताह के हिसाब से बीत वाले से पैसे बँधे हैं हमारे !मैं दूसरे कोने पर स्थित पार्क के चौकीदार के पास गया शिकायत करने तो उसे कमरे में एक प्रेमी जोड़ा लेटा रखा था पैग लग रहे थे तो मैंने चौकीदार को डाँटा कि तुम्हें यही सबकुछ करने के लिए कमरा मिला है तो उसने कहा पुलिस वाले भी तो यही करते हैं तब तक चैकीदार के पास एक फोन आया कि पार्क के इस कोने की लाइट बंद कर दे तो उसने हमसे कहा कि देखो पुलिस वाला लाइट बंद करवा रहा है अब वहाँ कुछ होगा उसने लाइट बंद कर दी मैंने सोचा मैं फिर जला  दूँ किंतु देखा तो तारों का सारा जाल था तो मैंने कहा ठीक क्यों नहीं कराते ये सब तो उसने कहा कि कोई सुनता ही नहीं है तो मैंने निगम पार्षद को फोन किया तो पता लगा कि परसों ही ठीक करवाया गया है चौकीदार ही ख़राब कर देता है जब हमने चौकीदार को डांटकर पूछा तो उसने बताया कि लाइट  बंद करने और  6-8  पार्क में गस्त न करने के लिए उसे सौ रूपए रोज मिलते हैं तो वो घर से कपड़े लाता है धोया करता है पार्क में !          इसके बाद उधर पहुँचे जहाँ की लाईट बंद करवाई गई थीं तो वहाँ एक लड़की को तीन लोग पीट रहे थे मैंने जाकर छोड़वाने का प्रयास किया तब तक दो पुलिस वाले आए वो हमें वहाँ से जाने के लिए कहने लगे उन्होंने हमें बताया कि ये यहाँ का रोज का काम है ये लड़की अपने प्रेमी से सेक्स कर रही थी उसी समय ये तीनों गूजर लड़के आ गए इन्होंने देख लिया है ये भी करना  चाह रहे हैं लड़की मान नहीं रही है इसलिए झगड़ा हो रहा है !तुम जाओ यहाँ से !
     मैंने सोचा सौ नंबर डायल कर दूँ तो मैंने कर दिया !उन दोनों पुलिस वालों ने प्रेमी जोड़ों को समझाया देख यदि आज एक पकड़ गया तो ये खेल रोज के लिए बंद हो जाएगा इसलिए सब लोग कह देना यहाँ ऐसी कोई बात ही नहीं हुई है वो सब मान गए !जब सौ नंबर वाले आए तो पुलिस वालों के सिखाए के अनुशार वे लड़कियाँ हम पर ऊट पटाँग गंदे आरोप लगाने लगीं और वो लड़के गवाही देने को तैयार उधर पार्क में आने जाने वाले लोग कुछ बोलने को तैयार न थे अंत में उन पुलिस वालों ने और प्रेमी जोड़ों ने आपसी एकजुटता दिखाते हुए हमें अपराधी सिद्धकर दिया !अंत में आज के बाद मैं पंगा नहीं लूँगा इस शर्त पर मुझे छोड़ा गया !
      प्यार के पथ पर रूचि लेने  वाली महिलाओं के आपसी संबंध पुरुषों से जब तक नार्मल रहते हैं तब तक तो वो दोनों प्रेमी प्रेमिका होते  हैं किंतु जिस दिन प्रेमिका किसी नए प्रेमी को पकड़ ले जिसमें प्रेमी की कोई गलती न हो फिर भी वो पुराना प्रेमी  घुट घुट कर मरता रहे या आत्म हत्या कर ले या वो प्रेमिका ही उसकी हत्या करवा दे !ऐसे किसी प्रकरण में केवल एक पुरुष की हत्या मानी जाती है किंतु ऐसी ही दुर्घटना का शिकार यदि कोई लड़की या महिला होती है तो महिलाओं पर अत्याचार मानकर सारे पुरुषों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है क्यों ?
      महिलाएँ नौकरी पाने के लिए ,प्रमोशन के लिए ,पैसे के लिए ,राजनीति में कोई पद प्रतिष्ठा पाने लिए पीएचडी करते समय गाइड आदि लोगों से अपने काम बनाने के लिए कई बार शारीरिक समझौता करते देखी  जाती हैं जिससे कई महिलाओं को कई उन बड़े पदों पर आसीन देखा जा सकता है जिसके लायक वो नहीं होती हैं किंतु इन बातों के कहीं कोई प्रमाण नहीं होते हैं फिर भी समाज तो सबकुछ समझता है । ऐसे ही प्रकरणों में जब उनका वो लक्ष्य बाधित होता है जिसके लिए समझौता हुआ तब उड़ती हैं बलात्कार की अफवाहें और कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है सारा पुरुष समाज !

Tuesday, March 1, 2016

dalit kaanuun ....

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दलित दुकानदारी बंद हो !
सवर्णों को गालियाँ देकर कुछ लोग बहुत बड़े बड़े पद प्रतिष्ठा पा गए कुछ ने दलितों के नाम से भारी भरकम चंदा लिया और खुद खा गए सरकारों से अनुदान लिया अपने पास रख लिया आज ऐसे नेताओं से उनकी अचानक इकठ्ठा की गई अकूत सम्पत्तियों के स्रोत पूछे जा सकते हैं क्या और यदि नहीं तो क्यों ?ऐसे ही दमनकारी लोगों ने उस युग में गरीबों का शोषण किया था वही इस युग में कर रहे हैं इनकी कोई जाति धर्म नहीं होता जैसे ये इस युग में नहीं रोके जा पा रहे हैं ऐसे ही ये पहले भी नहीं रोके जा सके थे इसके लिए सारा समाज जिम्मेदार है न कि केवल सवर्ण !फिर गालियाँ सवर्णों को क्यों ?


जातिगत आरक्षण सवर्णों के लिए एक बड़ी सजा है !
ये सवर्णों के उन पूर्वजों पर आरोप लगाकर दी जा रही है जो आज इस दुनियाँ में नहीं हैं लोकतांत्रिक देश में न्याय की व्यवस्था यदि सबके लिए है तो आरक्षण जैसी कठोर सजा देने से पहले सवर्णों का पक्ष भी तो सुना जाए !सवर्णों ने दलितों का शोषण किया कब क्यों और कैसे ?बहुसंख्यक दलितपूर्वजों ने उस युग में इसका विरोध क्यों नहीं किया ? 


मनुस्मृति की निंदा क्यों ?
जिन्होंने जब लिखी थी तभी नियम बना दिया गया था कि मनुस्मृति केवल सतयुग में मानी जाएगी कह दिया गया था कि 


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Tuesday, February 2, 2016

बैंगलोर में किया जा रहा है दिल्ली सरकार का शुद्धीकरण !

सारी दुनियाँ दारी से दूर दिल्लीनरेश बैंगलोर  में ले रहे हैं खाँसी का आनंद !
    उधर बैंगलोर में दिल्ली नरेश को नहाना धोना उठना बैठना बोलना चालना सिखाया जा रहा होगा !लोगों पर झूठे आरोप लगाने के दोष गिनाए जा रहे होंगे दिल्ली की जनता के धन का विधायकों की सैलरी और विज्ञापनों में दुरूपयोग करने को रोका जा रहा होगा !खाना पीना सोना जागना आदि सब कुछ करने के लिए संयम से लेकर सात्विकता तक के उन्हें गंभीर  पाठ पढ़ाए जा रहे होंगे !इस प्रकार से सारा आचार व्यवहार संस्कार शिष्टाचार आदि सिखाया जा रहा होगा !ऐसी ही योगिक क्रियाओं से उनकी मन वाणी आत्मा आदि का शुद्धीकरण होते ही पापों का प्रायश्चित्त हो जाता है इस प्रकार से दिल्ली नरेश जी का शरीर पापमुक्त होते ही  स्वतः भाग  जाती हैं खाँसी जैसी सारी आधियाँ ब्याधियाँ !
    "कूड़ाफेस्टिवल " भाई !बड़ा प्रभावी है आड  इवेन फार्मूला ! देखिए प्रदूषण बढ़ने पर दिल्ली सरकार ने आड  इवेन फार्मूला चलाया था और अब प्रदूषण घटते ही मनाया जा रहा है "कूड़ाफेस्टिवल "!
    विरोधी कहते हैं सरकार कुछ करती नहीं है अरे !अभी तो कूड़ा फैलाने का बजट पास कराया जायेगा फिर कूड़ा हटाने का बजट पास होगा फिर कूड़ा फैलाने और हटाने का जश्न मनाया जाएगा तभी तो किया जाता है स्याही संस्कार बारी दिल्ली सरकार !
   इस "कूड़ाफेस्टिवल " में सफाईकर्मियों ने भी  पूरी ताकत झोंक रखी है जगह जगह सजाए गए हैं कूड़े के अंबार ! 'आप' के वालेंटियरों से लेकर मंत्रियों तक  को लगाया गया है कूड़े के काम में !मीडिया तो कूड़ा कूड़ा कर रहा है ! 
    दिल्लीसरकार धूमधाम से मना रही है "कूड़ाफेस्टिवल " उधर केजरीवाल जी खाँसी सेलिब्रेट करने गए हैं बैंगलोर ! केजरीवाल जी जिस महीने ज्यादा झूठ बोल जाते हैं उसी महीने खाँसी जोर पकड़ जाती है उनकी खाँसी !
     बंधुओ ! दिल्ली का काम प्रदूषण के बिना चल ही नहीं सकता !आड  इवेन फार्मूले से प्रदूषण का लेवल इतना अधिक घट गया कि अचानक बढ़ाना आवश्यक हो गया और दिल्ली की गली गली में कूड़ा फैलवाना पड़ा !बारी  शुभ चिंतक दिल्लीसरकार !उधर दिल्ली सरकार की खाँसी अचानक जोर पकड़ गई और  सरकार  कीआत्मा को अचानक जाना पड़ा बैंगलोर !बैंगलोर जाना कोई बुरी बात नहीं है किंतु पिछली बार केजरीवाल जी जब खाँसी ठीक करवाकर आए थे बैंगलोर से तभी हुआ था "योगेंद्रकांड" अबकी किसपर बीतेगी ये बैंगलोर यात्रा भगवान ही जाने !           
    बंधुओ ! कभी आपने सोचा है कि सारे देश के लोग इलाज कराने दिल्ली आते हैं किंतु दिल्ली के मुख्यमंत्री खाँसी ठीक करवाने बैंगलोर
क्यों जाते हैं !क्या वहाँ इलाज की व्यवस्था दिल्ली से अधिक अच्छी है और यदि ये सच है तो चिकित्सा की वैसी व्यवस्था दिल्ली में क्यों नहीं की जा सकती जैसी बैंगलोर में है यही प्रश्न तब उठता था जब सोनियाँ जी इलाज कराने विदेश जाया करती थीं किंतु न जाने क्यों सत्ता और सरकार मिलने के बाद बीमारियाँ बढ़ती भी हैं !
   पिछली बार जब केजरीवाल जी खाँसी ठीक करवाकर आए थे तभी हुआ था "योगेंद्रकांड" अबकी किसपर बीतेगी ये बैंगलोर यात्रा भगवान ही जाने ! 

Thursday, December 24, 2015

युग पुरुष अटल जी को प्रणाम पूर्वक अनंतानंत शुभ कामनाएँ !

   युग पुरुष  माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी  के जन्म दिवस पर अनंतानंत शुभ कामनाएँ -ईश्वर आपको स्वस्थ प्रसन्न तथा दीर्घायुष्यवान  करे 

 रखना सुरक्षित स्वस्थ  जीवन प्रसन्न सदा 

                   देश की धरोहर इस अमित निशानी को ।

त्याग के तागों से निर्मित कलेवर यह 

                    अमर बना रहे ये सत्य कवि  बानी हो ॥

ईश्वर अनंत यश देता रहे आपको 

                   अटल! तुम्हारी अमितायु जिंदगानी हो ।

गरिमा मय जीवन सदैव रहे आपका 

                 अंत में कलंक मुक्त मंजुल कहानी हो ॥ 1 ॥

 कामना हमारी है ये कुशल रहो सदैव

                          ईश्वर कृपा करे जो सबका सहारा है। 

देश ने प्रशासकों के घृणित घोटाले देख 

                     आपसे व्रती को आर्त  होकर पुकारा है ॥

भूल मत जाना तुम भूषण हो भारत के 

                      मातृ भूमि के लिए ही जीवन सँवारा है। 

अटल! अटल सदैव जीवन तुम्हारा रहे 
                    भारती वसुंधरा पे सबका दुलारा है ॥2 ॥

त्याग के सभी का मोह राष्ट्र निर्माण हेतु 

                   भारतीय  क्षितिज में अटल सितारा था। 

स्वार्थ पे न ध्यान सदा ध्येय परमार्थ रहा 

                    देश के लिए ही निज जीवन उतारा था॥ 

लूटते स्वशासकों के घृणित घोटाले देख 

                      राष्ट्र की सुरक्षा हेतु शासन सँवारा  था। 

रो चला था देश देख आपकी  विनम्रता को 

                  तेरह दिनों का ताज हँसके उतार था ॥3 ॥ 

 जीवन का सारा भाग भारती की सेवा हेतु 

                 सौंप दिया जिसने समस्त सुख विसार के। 

 धैर्य धर्म सत्यता समाज के हितों का ध्यान 

                         रखते रहे सदैव त्याग के आधार पे ॥

 साधना  चरित्र वा पवित्र राष्ट्र सेवा की जो 

                   आज लौं  बचा रखी है चढ़ के भी धार पे । 

चाहते तो जाते सिद्धांत सरकार नहीं 

                 बिकने के लिए लोग तब भी तैयार थे ॥4॥                                                  - कारगिल विजय से

आदरणीय अटल जी जब प्रधानमंत्री थे तो एक दिन उनसे बात करने और अपनी काव्य पुस्तक कारगिल विजय भेंट करने एवं कविताएँ सुनाने का सौभाग्य मुझे मिला इतने व्यस्त जीवन में भी कितना तन्मय होकर वो सुन रहे थे हमारी रचनाएँ! उनकी टिप्पणियाँ  मुझे आज भी याद हैं देश एवं समाज के प्रति कितना अपनापन  है उनमें !वास्तव में वो राष्ट्र निष्ठा के समुद्र हैं साथ में भाजपा सांसद श्री श्याम बिहारी मिश्र जी एवं एक और पंडित जी थे जब मैं कविताएँ सुनाने लगा तो वो न केवल सुन रहे थे अपितु टिप्पणियाँ भी करते जा रहे थे । जब मैंने उनसे निवेदन किया कि आपके आदर्श जीवन को कोई आम आदमी समझना चाहे तो क्या पढ़े कितना पढ़े तो वो हँसने लगे और कहा -

         न भीतो मरणादस्मि केवलं दूषितो यशः । 

   अर्थात मैं मृत्यु से भयभीत नहीं हूँ केवल यश दूषित होने से डरता हूँ !

       हमारे द्वारा लिखी गई कारगिल विजय पुस्तक की श्री अटल जी से सम्बंधित कुछ और रचनाएँ -

  जेनेवा में भेजे जाने के लिए -

  चाह के भी सत्ता पक्ष खोज न विकल्प सका 

               अटल को भेजना ही एक मात्र चारा था ।

सबकी निगाहें ढूँढ़ते न थकती थीं जिसे 

         बुद्धिजीवियों कि भावनाओं का सितारा था ॥

  विज्ञ नरसिंह राव से प्रबुद्ध शासक ने

                      अपने ही मुख से कह गुरू पुकारा था  ।

कैसे छिनाया गया ताज उस शासक से 

     जो सौ करोड़ हिंदुओं कि आस का सहारा था ॥1॥

आपस में बढ़ते विवादों से विषाक्त विश्व 

                 चुने चुने नायकों का भारी अखारा था।

विश्व की विभूतियाँ न रौंद दें हमारा मान

          ध्यान था सभी का देश चिंतित बिचारा था॥

सौ करोड़ हिंदुओं कि आश का सहारा था जो 

             अटल बिहारी वहाँ प्रतिनिधि हमारा था । 

उससे छिनाया था ताज पद लोलुपों ने 

        जाकर जेनेवा जो न हारा  ललकारा था ॥ 2 ॥    

 भारत को शक्तिवान मान ले विशाल विश्व 

              करके परमाणु विस्फोट जो दहाड़ा  था। 

शोर सुन घोर चीत्कार उठे रौद्र राष्ट्र 

              जिनकी बहादुरी का बजता नगाड़ा था ॥

मान के कँगाल हमें कोटि प्रतिबन्ध किए

            पहले के शासकों की भीरुता को ताड़ा था । 

किन्तु पाला  पड़ा था आज अटल बिहारी जी से 

             डटे निःशंक और सबको लताड़ा था ॥ 3 ॥

                                                - कारगिल विजय से