Saturday, August 12, 2017

गोरखपुर बाल संहारकांड को कभी नहीं भूलेगा देश !सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही से बुझ गए इतने चिराग !!

      हे मुख्यमंत्री जी ! अब किस मुख से कोसोगे पूर्ववर्ती  सरकारों को ?हो सकता है उन्हें भी इन्हीं लापरवाह गैर जिम्मेदार कर्मचारियों ने ही धोखा दिया हो !
       इसमें तत्कालीन सरकारों में बैठे उन नेताओं की गलती ही न रही हो !जिन्होंने शिक्षा चौपट की चिकित्सा चौपट की दूरसंचार सेवाएँ बर्बाद की डाक विभाग की साख घटाई तभी तो प्राइवेट स्कूल अस्पताल मोबाईल कोरिअर पर लोग भरोसा करते हैं सरकारी सेवाओं पर नहीं करते सरकारों  को  अपने कर्मचारियों से काम लेने की अकल नहीं है तो उसका दंड जनता क्यों भुगते ! सरकार आखिर क्यों देती हैं उन्हें इतनी भारी भरकम सैलरी !ऐसा करते क्या हैं सरकार से आधी आधी सैलरी दिलाकर प्राइवेट संस्थाएँ किंतना साफ सुथरा और जिम्मेदारी का काम ले पाती हैं !सरकार में इतने अयोग्य लोग क्यों हैं कि उन्हें काम लेना नहीं आता !राजनीति में उच्च शिक्षा अनिवार्य की गई होती तो ये दुर्दशा कभी नहीं होती !अपने से अधिक योग्यता रखने वाले अधिकारीयों कर्मचारियों से काम लेने की   अल्प शिक्षित नेताओं में अकल ही नहीं होती है इसी लिए तो सरकारी मशीनरी उन्हें डराए धमकाए रहती है !ऐसा करोगे तो फँस जाओगे वैसा करोगे तो फँस जाओगे !डरपोक नेता थोड़ेदिन उछलकूद कर चुप हो जाता है !   
   अब सरकार यदि भला चाहती है और वास्तव में काम करने का इरादा है तो सरकार अपने कर्मचारियों की सैलरी घटाए उनकी संख्या बढ़ाए बेरोजगारी हटाए !साथ ही कामों के लिए अधिकारियों कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डाले !अवैध सम्पत्तियों पर कब्जे हों या अवैध काम काज उन्हें रोकने की जिन अधिकारियों कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी उन पर क्यों नहीं की गई कोई कार्यवाही ?सरकारउनकी संपत्ति की जाँच करवाए नौकरी लगते समय कितनी थी आज कितनी है घोषित आय स्रोतों से मेल खाती है क्या ?यदि नहीं तो की जाए कार्यवाही और जप्त की जाएँ संपत्तियाँ ! 
       इतनी सैलरी में तो ऐसे या इससे अच्छे दो तीन कर्मचारी रखे जा सकते हैं किन्तु प्राइवेट वालों को मिल जाते हैं सरकार को क्यों नहीं मिलते हैं !जब जनता की कमाई के टैक्स से मिला पैसा दान ही करना है तो ऐसे कीजिए कि सबको मिले केवल सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को ही क्यों मिले !किसानों को भी दिया जाए आखिर वे क्यों करें आत्महत्या ! सरकारी कर्मचारी ही नष्ट कार रहे हैं सरकार की साख !इसीलिए तो पुलिस जैसे विभाग भी यदि प्राइवेट भी होते होते तो कोई नहीं जाता सरकारी थानों में !

Friday, August 11, 2017

चोटी काटने के उपाय बताने वाले पाखंडी ज्योतिषियों पर की जाए कार्यवाही !

     गुड़ गोबर कोयले कौवे कुत्ते बिल्ली तीतर बटेर पूजने वाले उपाय बताया करते हैं ऐसे ही अपने बाल लम्बे करने के लिए औरों की चोटी काटने वाले उपाय भी बताने लगे हैं ज्योतिष बिना पढ़े लिखे ज्योतिषी लोग ! 
    अनपढ़ ज्योतिषी ऐसे ही ऊट पटाँग उपाय बताते हैं !मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए बच्चों की बलि देने जैसी सलाहें भी ऐसे ही लोगों के दिमाग की उपज है!नपुंसकता दूर करने के लिए छोटी छोटी बच्चियों से शारीरिक संबंध बनाने की सलाह भी देते हैं ऐसे ही लोग !अन्यथा उन बेचारियों को अपनी हबस का शिकार कोई क्यों बनाएगा ! 
    इसी प्रकार से अपने बाल काले और लंबे बनाने के लिए औरों की चोटी काटने वाले उपाय या गोबर कोयले कौवे कुत्ते बिल्ली तीतर बटेर पूजने वाले उपाय बताने वालों पर अंकुश लगाया जाए !
    ऐसे मनगढंत उपायों का ज्योतिष शास्त्र के किसी भी ग्रन्थ से कोई संबंध नहीं होता !इसका एकमात्र रास्ता है मेडिकल की तरह ही ज्योतिष के क्षेत्र में भी ज्योतिष की प्रेक्टिस करने वालों की भी ज्योतिष क्वालीफिकेशन अनिवार्य बनाने संबंधी प्रावधान किए जाएँ जिन्हें न पालन करने वालों के साथ शक्ति से निपटे सरकार !इसी के साथ ही इस बात का भी प्रावधान किया जाए कि जो उपाय बताए जाएँगे जरूरत पड़ने पर उन्हें शास्त्र से प्रमाणित करना होगा !
     जिन्होंने ज्योतिष पढ़ी ही नहीं वो ज्योतिषी कैसे एवं जो उपाय  ही नहीं वे  उपाय कैसे ?घरों में फैली कलह के कारण या जीवन साथी के चरित्र पर शंका के कारण बढ़ती आत्महत्या की घटनाएँ ऐसी ही मानसिकता की देन हैं !चोटी काटने या गोबर कोयले कौवे कुत्ते बिल्ली तीतर बटेर पूजने वाले उपाय जब शास्त्रों में लिखे ही नहीं हैं वो बताते कैसे और कहाँ से हैं !ऐसे लोग न केवल ज्योतिष शास्त्र को बदनाम कर रहे हैं अपितु घरों की शांति को भी भंग कर रहे हैं |
     वैसे भी ज्योतिष पढ़ाने के लिए सरकार ने जब काशीहिंदूविश्व विद्यालय जैसे कई बड़े संस्थान बना रखे हैं जहाँ ज्योतिष डिपार्टमेंट हैं रीडर प्रोफेसर हैं ज्योतिष की कक्षाएँ लगती हैं परीक्षाएँ होती हैं अन्य विषयों की तरह ही ज्योतिष विषय के भी डिग्री प्रमाणपत्र मिलते हैं ज्योतिष सब्जेक्ट से Ph.D.आदि भी करते हैं लोग !शिक्षार्थी वर्षों तक दिन रात परिश्रम करके जो डिग्रियाँ प्रमाण पत्र आदि प्राप्त करते हैं दूसरी ओर ज्योतिष बिना पढ़े लिखे लोग भी विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य(MA)बताते हैं खुद को !अखवारों टीवी चैनलों में प्रचारित भी करवा रहे हैं !
       दैनिक राशिफल सौ प्रतिशत झूठ होता है कालसर्प दोष जैसी बातों की ज्योतिष शास्त्र में कहीं चर्चा  ही नहीं है फिर ऐसे लोग समाज को भ्रमित करने के लिए ऐसे भ्रम डालते रहते हैं |
   ज्योतिषियों के ज्योतिष डिग्री ,प्रमाणपत्रों तथा उन्हें जारी करने वाले सरकारी विश्वविद्यालयों की प्रमाणिकता से कीजिए ज्योतिषियों के ज्योतिष पढ़े लिखे होने की पहचान !अन्यथा वो ज्योतिषी किस बात के! ज्योतिष और आयुर्वेद में घुसने वाले फ्रॉड लोगों को रोकने के लिए ही तो डिग्रियों की व्यवस्था की गई थीवैसे पहले तो राज ज्योतिषी और राजवैद्य आदि हुआ ही करते थे !  
       बंधुओ !घर जो बनाता है घर से लगाव उसी का होता है !इसलिए वो अपने घर को उजाड़ता नहीं है चोरों  डकैतों को क्या वो तो मिनटों में ताला  तोड़ देते हैं दरवाजे तोड़ देते हैं आग लगा देते हैं इसमें उनका अपना नुक्सान क्या है !इसी तरह ज्योतिषशास्त्र को जिन्होंने पढ़ा ही न हो उन्हें शास्त्र से लगाव कैसे हो सकता है !और  वो ज्योतिष शास्त्र की बदनामी से डरें क्यों ?
    जो ज्योतिष पढ़ने किसी सरकारी विश्वविद्यालय के ज्योतिष  डिपार्टमेंट  में न गए हों ज्योतिष का स्लेबस पढ़कर डिग्री व प्रमाणपत्र हासिल न किए हों वो ज्योतिषी किस बात के! यदि किसी ज्योतिषी के कुकर्मों से ज्योतिष शास्त्र की यदि बदनामी भी होती है तो इसमें फर्जी ज्योतिषियों का क्या नुक्सान !वो तो जैसे चोरी चोरी आज ज्योतिष में घुस आए हैं ऐसे ही कल डॉक्टर इंजीनियर बन जाएँगे !इसलिए ज्योतिष शास्त्र की  बदनामी से नुक्सान तो उनका होगा जिन्होंने किसी सरकारी विश्वविद्यालय के ज्योतिष  डिपार्टमेंट  में ज्योतिष पढ़ने में 10 -12 वर्ष लगाए हों ऐसे विद्वान ज्योतिषी लोगों का वास्तव में नुकसान होता है ज्योतिष शास्त्र की बदनामी से !इसलिए विद्वान ज्योतिषी लोग ऐसा कुछ कभी नहीं करेंगे जिससे ज्योतिषशास्त्र  की बदनामी हो !क्योंकि ज्योतिष के सम्मान से ही उनका भी सम्मान है और ज्योतिष से ही उनका जीवन है !और अपने जीवन से खिलवाड़ कोई कैसे कर सकता है !भाग्य बताने एवं बदलने के नाम पर हो रहा है भारी भ्रष्टाचार ! संतान पैदा करने के नाम पर बाबा कर रहे हैं बलात्कार ! फर्जी ज्योतिषियों के धोखाधड़ी वाले कारोबार !उपायों के नाम पर कितने आडम्बर कितने पाखंड ! कौवे कुत्ते चीटी चमगादड़ पुजा रहे हैं लोग! नग नगीने यंत्र तंत्र ताबीजों का भारी भरकम कारोबार !बारे ज्योतिषव्यापारी बारे भाग्य व्यापार !
पाखंडी ज्योतिषीआजकल नशेड़ियों से ज्यादा गए गुजरे हो गए हैं न जाने किस जन्म का बदला  ले रहे हैं समाज से ! 
   कोई गाली देने का आदती कुशल शराबी दम भर शराब पीकर जितनी जल्दी गालियाँ नहीं दे सकता उससे ज्यादा जल्दी टीवीज्योतिषकर्मी  सैकड़ों जन्मों का हाल एक साँस में विधउपाय बक जाते हैं केवल अँगूठी बेचने के लिए या कोई उपाय करवाने के लिए एक मजबूत जगह टाँग फँसाकर बैठ जाते हैं जो बहम मछली के काँटे से अधिक फँसावदार होता है जो बिना मांस(धन)नोचे निकलता नहीं है ।  
     ऐसे मलमल  बाबाओं की कल्पित शक्तियाँ न केवल बड़ी चटोरी हैं अपितु शौक़ीन एवं फैशनेबल भी हैं वो गोल गप्पे तो माँगती ही हैं साथ ही पर्स दुपट्टा क्रीम भी मँगवाती हैं!मलमल बाबाओं एवं अशास्त्रीय ज्योतिषियों की निराधार बकवास देश के धार्मिक एवं शास्त्रीय ताने बाने  को रौंदती चली जा रही है ! 
     बंधुओ!जिन्होंने  ज्योतिष नहीं पढ़ी वे कंप्यूटर लिए बैठे हैं और जिन्होंने ग्रहों की शांति के लिए शास्त्रीय वैदिक उपाय करने के लिए 'ग्रहशांति' जैसे मंत्रग्रंथों को नहीं पढ़ा वे  उपायों के नाम पर कौवे कुत्ते तीतर बटेर चीटी चमगादड़ों के उपाय बताते घूम रहे हैं जिन्होंने फलित ग्रन्थ नहीं पढ़े वे कल्पित राशिफलों को दिन में कई कई बार कई कई प्रकार से अलग अलग लोग जो मुख में आया सो बेधड़क फ़ेंकते जा रहे हैं ,
   ऐसे बाबाओं ज्योतिषकर्मियों की मन गढंत कहानियों उपायों पाखंडों एवं बकवासों ने शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान देवी देवताओं पूजा पाठ एवं हिंदू धर्म निष्ठा को बुरी तरह रौंदा है जो मुख में आता है सो बेझिझक बक देते हैं ये लोग और उसी को धर्म बता देते हैं आखिर आम समाज इतना नासमझ क्यों है कि उन बातों को धर्म मान लेते हैं लोग ! 
    अरे!हिंदुओ आपका धर्म मन गढंत नहीं है वेदों शास्त्रों पुराणों उपनिषदों रामायणों की असीम पूँजी आपके पूर्वजों की आपके पास है आपकी क्या मजबूरी है कि आप ऐसे लोगों के पास रोने धोने गिड़गिड़ाने पहुँचते हैं जो न तो आपके धर्म एवं धर्म शास्त्रों को जानते हैं और न ही किसी पूजा पाठ में रूचि रखते हैं !ऐसे लोग हिन्दू धर्म के लिए समर्पित भी नहीं होते हैं वो किसी को कुछ पूजने के लिए बताते हैं किसी को कुछ !
       बंधुओ !देश में धर्म एवं धर्म शास्त्रों की उपेक्षा करने की कितनी तेजी से पृथा सी चल पड़ी है जिसे समय रहते यदि रोका  नहीं गया तो बहुत जल्दी धर्म ,धर्म शास्त्र एवं शास्त्र प्रमाणित पूजा पाठ एवं चरित्रवान शास्त्रीय पद्धति का पालन करने वाले साधू संत विद्वान पंडित समुदाय अप्रासंगिक हो जाएँगे !तब शाश्वत सत्य धर्म,अध्यात्म एवं सभी प्रकार के शास्त्रीय ज्ञान विज्ञान से भारतीय संस्कृति को कौन सींचेगा कैसे बचेंगे भारतीयों में वे पवित्र संस्कार जिनके बल पर भारत को विश्व गुरु होने का गौरव प्राप्त था!
  मलमल बाबाओं के गोलगप्पी उपायों ने देश को कुसंस्कारों और बलात्कारों की ओर मोड़ा है अभी क्या अभी तो सब चुप हैं किन्तु जब जिस पर कानून का शिकंजा कसता है तब सब कबूलते हैं कि किसका कितना कब से कैसा शोषण चल रहा था अभी तो एक दूसरे की सुन सुन कर चरणों में कोटि कोटि प्रणाम करने का स्लोगन सभी रटते जा रहे हैं । 
   ऐसे तथाकथित बाजारू बाबाओं की बकवास सुन सुन कर लोग इतने निष्ठुर होते जा रहे हैं कि आम समाज से लेकर टेलीवीजनों तक पर ज्योतिष और धर्म के नाम पर अब केवल और केवल बकवास ही सुनाई पड़ने लगी है ऐसे लोग जो कुछ बोल रहे होते  हैं उन बेचारों को खुद नहीं पता होता है कि वो ऐसा क्यों बोल  रहे हैं।जो वो समाज को समझा रहे हैं ये उन्होंने समझा कहाँ से है किसी शास्त्र  पुराणों में उन्हें लिखा मिला है क्या ?किसी कोर्स में उन्होंने पढ़ा है क्या ?जो वो कह रहे हैं उसके पीछे तर्क क्या हैं ये उन्हें स्वयं भी नहीं पता है !बंधुओ!सच्चाई ये है कि ज्योतिष और धर्म के नाम पर ऐसे लोग एक बार जो कुछ बक चुके होते हैं दुबारा यदि आप उसी विषय में पूछ दो तो उन्हें याद ही नहीं होता है कि वो पहले क्या और क्यों बोले थे दुबारा नए तरह से बोल जाएँगे कई बार पहले वाली अपनी बात के विरुद्ध बोल जाएँगे क्योंकि उन्हें होश ही नहीं होता है कि पहले बोले क्या थे !
      ऐसे लोगों की पोल तब खुल जाती है जब इनसे पूछो कि ये जो कुछ तुम बता रहे हो ये तुमने कहीं किसी स्कूल कालेज में पढ़ा भी है क्या ?कहीं लिखा भी है और यदि हाँ तो क्या कोई प्रमाणित पुस्तक है क्या ?इतने सुनते ही चेहरे उतर जाते हैं और कोई जवाब देने की जगह हकलाने लगते हैं ये लोग !
ज्योतिषशास्त्र  के नाम पर ऐसी बकवास ? 
      लालकिताब जैसी ज्योतिष की जिन किताबों का ज्योतिष के विश्व विद्यालयीय स्लेबस में या प्राचीन ज्योतिष में या भारतीय ज्योतिष की किसी भी विधा में कहीं  कोई उल्लेख ही नहीं है| किसी पढ़े लिखे व्यक्ति के मुख से कभी ऐसी किसी किताब के बारे में कोई चर्चा ही नहीं सुनी गई है।वैसे भी लालकिताब के नाम पर की गई भविष्य वाणियाँ और बताए गए उपाय तर्क संगत न होने के कारण विश्वसनीय नहीं हैं।जहाँ एक ओर तो मनुष्य जाति इस सृष्टि की  रत्न मानी गई है नर से नारायण की ओर बढ़ने का द्वार नर अर्थात मनुष्य शरीर ही बताया गया है वहीं  किसी मनुष्य को सामने नारायण की ओर देखने के बजाए उपायों के नाम पर कौवे कुत्ते बिल्ली पूजना सिखाया जाए टिंडा जौं चावल धनियाँ मेथी मिर्च हल्दी  गुड़ गोबर कोयले आदि के उपाय बताए जाएँ !यह कैसा मजाक है ! इसी प्रकार एक मलमल बाबा  दरवार लगाता है उसकी शक्तियाँ न केवल बड़ी चटोरी हैं अपितु शौक़ीन एवं फैशनेबल भी हैं वो गोल गप्पे तो माँगती ही हैं पर्स दुपट्टा क्रीम भी मँगवाती हैं!इसप्रकार परेशान लोगों के साथ भाग्य बदलने के नाम पर इतनी धोखा धड़ी चल  रही है! 
    पहली बात तो इनकी बातों के कोई प्रमाण नहीं होते,दूसरी बात इनका कोई तर्क नहीं है, तीसरी बात जन्म जन्मान्तर के कर्मों के संचय से बना मनुष्य का भाग्य जो बड़ी बड़ी तपस्या से मुश्किल से वो भी आंशिक रूप से ठीक हो पाता है उसे गुड़ गोबर कोयले कौवे कुत्ते बिल्लियों का पूजन भजन करके कैसे ठीक किया जा सकता है?किन्तु लाल किताब एवं लालकिताबी भविष्य भौंकने वालों की ही माया है कि भगवान को पूजने वाले मनुष्य से कौवे कुत्ते पुजवाए जा रहे हैं!आश्चर्य इस बात का है कि ये सब ड्रामा हमें फँसाने के लिए किया जा रहा है यह जानते हुए भी ऐसी बकवास लोग सुन रहे हैं!लोग सुनें भी क्यों न !भारी भरकम विज्ञापन न होता तो क्यों सुनते लोग?गलत धन का संचय है जो विज्ञापनों में फूँका जा रहा है और भाड़े के प्रशंसा कर्मियों को पकड़ पकड़ कर उनसे कराई जा रही है अपनी बेवकूफत की तारीफ, इसके बदले उन्हें पैसे दिए जाते हैं।अपनी उम्र से दो गुनी अधिक उम्र के लोगों को बेटा बेटा कहकर बुलाते हैं ये लोग! न सुनने वाले को शर्म न कहने वाले को! किन्तु प्रशंसा और पैसे पाने का लोभ किसी भी व्यक्ति को पागल बना देता है वही पागलपन ऐसे दरवारों में दिखता है। दूसरी ओर पढ़े लिखे ज्योतिषियों के पास ईमानदारी के कारण ब्लैकमनी नहीं होता इसलिए  वो न तो टी.वी.वालों को पैसे दे पाते हैं और न ही खरीद पाते हैं भाड़े के प्रशंसाकर्मी ही !बिना पैसे के झूठी प्रशंसा करने वाली वो सुन्दर सी लड़की भी नहीं मिलती! जो अक्सर मटक मटक कर भविष्य भौंकताओं की झूठी तारीफों के पुल बाँध रही होती है। उसी झुट्ठी के बिना शास्त्रीय ज्योतिषी बेचारे पिटते चले जा रहे हैं !क्योंकि उसे देखने के चक्कर में बड़े बड़े लोग फँसने के बाद होश में आते हैं तब  ज्योतिषशास्त्र  को गाली  देते हैं उन्हें यह होश ही नहीं होता है कि वो जिस के चक्कर में पड़े थे वो वह ज्योतिष नहीं थी जिसे वे गाली दे रहे हैं।जिस चक्कर में विश्वामित्र पराशर आदि बड़े बड़े ऋषि फँस  गए वहाँ हम जैसे लोग क्या हैं ?वैसे भी ज्योतिषी के पास उस तरह की लड़की का काम ही क्या है? 
    इसलिए मेरा निवेदन है कि इन लाल किताबी मलमल दरवारों के चक्कर में जो पड़े सो पड़े किन्तु इससे  ज्योतिष का कहीं कोई लेना देना नहीं है

Monday, June 26, 2017

नेता बनता ही वही है जिसे घर वाले कामचोर समझते हैं जिसने अपने घर में काम न किया हो वो मंत्री बनकर वो काम करने लगेगा क्या ?

मंत्री हो और घमंडी न हो, नेता हो और काम करे ऐसा कभी हो सकता है क्या ?मंत्री बदलते रहने से ये बात ढकी रहती है बहाना बनाने का मौका मिलता रहता है !
    मंत्री सांसद विधायक आदि बनने के बाद घमंडी सभी हो जाते हैं ! काम करना न आता है और न ही करना चाहते हैं संवेदनाएँ मर सी जाती हैं !मंत्री बदल बदल कर सरकार अपना मुख साफ दिखाने की कोशिश किया करती है किंतु जनप्रतिनिधियों के आचरणों के दाग धब्बे तो आ ही जाते हैं |काश !संयमशील होते अपने भी देशभक्त नेता लोग !!!
  विधायकों सांसदों मंत्रियों आदि को जब होने लगता है सत्ता का नशा !तब ऐसे स्वयंभू भगवानों को इंसान बना देती है जनता !इसलिए सत्ता की ऐसी नशाखोरी से बचने में ही हर किसी की भलाई है !
    राजनेता हों या राजनैतिक दल ये स्वयं में न अच्छे होते हैं न बुरे !सत्ता पाते ही पागल हो जाते हैं बस !इनकी सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि जिसे सत्ता मिलती है वो घमंडी हो जाता है बिना सत्ता के सब सुंदर शालीन मनुष्यता पसंद गाँवों गरीबों किसानों मजदूरों के हमदर्द दिखते हैं !
     नेता जब सरकार में रहते हैं वो स्वार्थी घमंडी आदि दुर्गुणों से भरपूर हो जाते हैं और सत्ता जाते ही फिर इंसान के इंसान ! भूल जाता है देवता बनना !तब याद आने लगते हैं जनता कार्यकर्ता गाँव गरीब किसान आदि सब !इसलिए दोष राजनेताओं का नहीं अपितु दोष तो सत्ता का होता है इसीलिए सत्ता छीनकर अपने को भगवान् समझने वाले नेताओं को इंसान बना देना जानती है जनता !
         विरोधी पार्टियां जब सरकार  थीं तब उनसे बड़ी शिकायत थी उनके नेताओं की मैं निंदा किया करता था किंतु जब अपनी पार्टी सत्ता में आ गई तो समझ में आ गया कि वो नेता सही और मैं ही गलत था !मैं उन बेचारों को समझ नहीं पाया कि इतने मासूम होते हैं वे बेचारे !सत्ता का नशा होता ही ऐसा है कि बड़े बड़े ज्ञानियों गुणियों को भी अंधा बना देता है | सच्चाई यही है कि सत्ता में पहुँचने के बाद प्रायः नेता लोग होश में नहीं रह जाते !जो नेता पहले कभी आपके साथ  बात बिना बात हँसते हाथ मिलाते गले मिलते रहे थे वे सत्ता में आने के बाद उनसे वैसी उम्मींद नहीं की जानी चाहिए ! 
      सत्ता में सम्मिलित नेता कब किसका किस बात पर कितना अपमान कर दें पता ही नहीं चलता !सत्ता में रहकर  उठने बैठने बोलने मिलने जुलने का शिष्टाचार तो बिल्कुल समाप्त हो ही जाता है! अपने दरवाजे मिलने आए हर व्यक्ति को बिना कुछ दिए भी भिखारी समझने लगते हैं सत्ता में आ जाने वाले  सत्तामूर्च्छित नेतालोग ! 
    कोमल भावनाओं वाले अधिक संवेदन शील भावुक  लोगों को नेताओं या पूर्व परिचित नेताओं के पास कभी मिलने नहीं जाना चाहिए !जरूरी जाना पड़े भी तो अपमान और अप्रिय व्यवहार उपेक्षा आदि सहने के लिए तैयार होकर जाना चाहिए !
     सत्तापक्ष के सरकारों में सम्मिलित नेताओं के अप्रिय एवं उपेक्षा पूर्ण व्यवहारों से आहत कार्यकर्ता लोगों की समस्याओं के समाधानों एवं उनकी शिकायतों के निवारण के लिए अक्सर सत्तासीन नेताओं की कुंडी खटखटाना मैं अपना कर्तव्य समझता रहा हूँ अभी भी कुछ ऐसा ही करना पड़ा !कुछ कार्यकर्ताओं की आलोचना से आहत होकर उनकी बात ठीक जगह पहुँचाने के उद्देश्य से मैंने सरकार से संबंधित कुछ जगहों पर और कुछ नेताओं से संपर्क करने के प्रयास किए किंतु परिणाम वास्तव में दुखद थे !सरकारें लोकतान्त्रिक पद्धति से काम पैतृक व्यवसाय की तरह अधिक संचालित की जा रही हैं सेवा भाव तो खोजने पर भी नहीं मिलता शक और शंका की दृष्टि से हर किसी को देखा जा रहा है न जाने क्यों ?ऐसी स्थिति से मैं स्वयं आहत हुआ कि कार्यकर्ता को जो संगठन अपना नहीं समझते कार्यकर्ता ही उन्हें अपना क्यों समझे और कहाँ तक अपनी सेवा भावना की परीक्षा देता रहे !कैसी दुविधा है सच्चे कार्यकर्त्ता के सामने !आलोचना की नहीं जाती उपेक्षा सही नहीं जाती !ऐसा असमंजस !!
    मैं सनातन हिंदू विचार धारा के संगठन के विविध आयामों से सन  1986 से जुड़ा चला आ रहा हूँ !कभी किसी दायित्व की परवाह नहीं की सेवाकार्य समझ कर करते चले गए विचार धारा कभी नहीं बदली !धार्मिक संगठनों के सभी सामाजिक कार्यकर्ता लोग धार्मिक नैतिक आदि मधुर बात व्यवहार करने के लिए जाने जाते रहे हैं एक परिवार की तरह सबका सबसे कितना अपनापन हुआ करता था एक दूसरे के सुख दुःख में लोग बड़े छोटे का भाव भूलकर खड़े हो जाया करते थे कितना उत्साह बर्द्धन किया करते थे वे ! श्रेष्ठ संगठन के लिए अपनी क्षमता के अनुशार कोई दायित्व लिए बिना समर्पित रहा हूँ अयोध्या बनारस कानपुर से लेकर दिल्ली तक के जितने भी लोग मुझे जानते हैं वो इसी रूप में जानते हैं ! किसी को संगठन परिवार के प्रति मेरे समर्पण पर संशय नहीं है यहाँ तक कि शोशल साइटों पर मेरे साथ जुड़े हजारों लोग भी मुझे इसी रूप में मानते हैं !
     मेरी तीन फेस बुक और 9 ब्लॉगों पर कुछ हजार आर्टिकल विभिन्न विचारों पर प्रकाशित हैं जो  संगठनात्मक विचारधारा एवं समाज और संगठन की भलाई के लिए सामाजिक सुधार एवं भ्रष्टाचार समाप्ति के लिए विपक्षियों को तर्कयुक्त जवाब आदि से संबंधित हैं | इस प्रकार से संगठन और पार्टी के लिए जो कुछ अच्छा से अच्छा कर सकते थे वो करने का प्रयास प्रभावी रूप से किया है | संगठन के कार्यों में भी सहभागी रहता रहा हूँ | यहाँ तक कि 2013 चुनावों के लिए एक एक दिन में 14 -14 घंटे लगातार सोशल साइटों पर समर्पित भावना से संगठन और पार्टी के लिए काम किया है | एक क्रम 2 वर्ष लगतार चलता रहा जो अभी कुछ महीने पहले तक चला अब भी जारी है किन्तु निराशा होने के कारण अब  उतना मन नहीं लगता है  !
      सरकार बने पिछले तीन वर्ष हो गए सरकार के अनेकों मंत्रालयों सांसदों एवं पार्टी पदाधिकारियों के पास मिलने का समय स्वयं मैं माँग चुका हूँ सैकड़ों पत्र डाल चुका हूँ न समय मिला न पत्रों का उत्तर !यहाँ तक कि निजी तौर पर PM साहब और उनके PA श्री ओम प्रकाश जी के भी संपर्क में कभी मैं रह चुका हूँ तब माननीय मोदी जी मेरी मदद करने के लिए कभी फोन भी कर दिया करते थे किंतु जब से सरकार बनी तब से वे भी... !
    सरकार बनने के बाद ऊपर से नीचे तक सबको न जाने क्या हुआ जा रहा है कि वो विचारधारा वो सहजता वो सत्यवादिता वो सेवाभावना वो जिम्मेदारी के भाव न जाने क्यों छूटते जा रहे हैं |उन्हें  लगता है जैसे केवल उनके अपने और उनके अपनों  के लिए सरकार बनवाई गई थी बाकी सबको आश्वासन लेटर आदि देकर पीछा छुड़ाने में लगे हैं विधायक संसद मंत्री आदि लोग | 
     पार्टी परिवार में अपनों के साथ इतना उदासीन वर्ताव किया जा रहा है ऊपर से नीचे तक ! पार्टी पदाधिकारी हों या सरकार में सम्मिलित लोग !इनके स्वभाव पहले ऐसे तो नहीं थे !माना कि व्यस्तता बढ़ी है किंतु इसका मतलब ये भी तो नहीं है कि सेवा भावना से जुड़े पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं की बात सुनने के लिए कोई जिम्मेदारी और  जवाबदेही  ही न समझी जाए ! समाज के जो लोग हमारे संपर्क में रहे हैं आज वो हमारे पास काम के लिए संपर्क करते हैं मैं उनके नैतिक काम भी करवा पाने की स्थिति में नहीं हूँ | 
     पार्टी की उदासीनता के शिकार ऐसे बहुत लोग होंगे !स्वयं मुझे अपने जरूरी कामों के लिए कई बार घूस माँगने वाले अफसरों का सामना पड़ता  है ! ऐसी परिस्थिति में मैं अपनी पार्टी और सरकार के अच्छे कामों का प्रचार प्रसार कैसे करूँ और सरकार के किन गुणों की प्रशंसा करूँ ?कहाँ तक सूखा सूखा फीलगुड करूँ !
     इतना ही नहीं वैदिकविज्ञान के द्वारा मनोरोग चिकित्सा मौसम और भूकंप जैसे रहस्यमय विषयों पर मैंने सार्थक शोधकार्य किया है उससे इन विषयों में चल रहे शोध कार्यों को बड़ी मदद मिल सकती हैं किंतु इन विभागों से जुड़े लोग मेरी बात इसलिए सुनने के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि वो वैदिक विज्ञान को विज्ञान मानने को तैयार ही नहीं हैं |मुझे अपने जरूरी शोधकार्य  को और आगे बढ़ाने के लिए सरकार से मदद चाहिए किंतु मदद तो दूर सरकार या पार्टी में कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं | 
   पहले हमारी विचारधारा से संबंधित सभी लोग जिन बातों विचारों व्यवहारों के लिए सत्तारूढ़ अन्य दलों और उनके नेताओं की आलोचना किया करते थे उन्हें कहा करते थे कि वे सत्ता मूर्छित लोग हैं !किंतु आज... !
     कई बार ऐसा लगता है कि क्या ये दोष उस समय उन पार्टियों और नेताओं का नहीं था जिन्हें हम सभी लोग गलत समझकर जिनकी निंदा करते करते जिन्हें सत्ता से बाहर धकेला गया !वस्तुतः ये दोष सत्ता देवी का ही है जो भी सत्ता में आएगा वो ऐसा हो ही जाता है !किंतु अटल जी की सरकार विभन्न मंत्रियों और सांसदों के यहाँ मैं भी मिलने गया किंतु सबके यहाँ केवल सहजता दिखती थी अपितु होती भी थी बातें सुनी भी जाती थीं मानी भी जाती थीं !
       यही PMO था !अटल जी से मिलने के लिए मैंने समय माँगा था तो बाकायदा हमारे नाम पत्र भेजकर  हमें यह  कहकर मना कर दिया था कि अभी वे व्यस्त हैं किंतु  उसी दिन शाम 8 बजे मैंने पुनः फ़ोन किया और कल का ही  समय लेने  की जिद कर दी ये  उनके लिए कितना कठिन रहा होगा कि रात 12 बजे PMO से फोन आया कि आप कल 13. 40 पर पहुँच जाओ !मैं गया और वे मिले ! 
      तब तो माननीय जोशी जी ,श्री अडवाणी जी , श्रद्धेय रज्जू भैया जी ,माननीय अशोक सिंघल जी के पास भी पहुँच कर अपनी बात आसानी से कही जा सकती थी अब तो पूरी सरकार और संगठन बिल्कुल पैक है आखिर क्यों ? सामान्य कार्यकर्ता को भी समझाइए सबसे अधिक उसी को जूझना पड़ता है जनता से !
     अब तो न किसी की कोई सुनेगा न उनके समाधान के विषय में कुछ बोलेगा और न कुछ देखेगा !केवल सरकार दौड़े जा रही है क्यों ?आखिर क्या किया जाए ऐसी मैराथनों  का !सरकार है तब उसकी उपेक्षा सरकार न हो तब तो उपेक्षा होती ही है ! 
     सरकार बनाने के लिए पार्टी के द्वारा चलाए जा रहे प्रयासों में एक एक कार्यकर्ता अपनी संपूर्ण सामर्थ्य से समर्पित रहा है फिर भी यदि सरकार उसके लिए नहीं है तो वो सरकार के लिए क्यों होगा !ऐसे भोजन बैठक और विश्राम के नाम पर बहुमूल्य स्वाँसें ब्यर्थ में क्यों नष्ट करेगा !
       इसलिए जिम्मेदार लोगों पार्टी और सरकार के जिम्मेदार शीर्ष लोगों से निवेदन है कि यदि संभव हो तो कार्यकर्ता की ओर भी देंखें उसे भी  समय दें कुछ उसके भी काम करें क्योंकि कार्यकर्ता उचित अनुचित बिचार किए बिना पार्टी और सरकार के साथ खड़ा होता है | फिर भी आप कार्यकर्ता का अनुचित काम मत कीजिए उचित तो कीजिए अन्यथा जिम्मेदारी से उत्तर तो दीजिए कारण और निवारण के उपाय तो बताइए !कोई  बताइए जहाँ कार्यकर्त्ता भी पहुँच कर अपनी बात रख सके और उसे आम जनता से कुछ तो अधिक अपनापन मिले !
    विशेष -मेरा उद्देश्य सरकार की आलोचना कतई नहीं हैं किंतु आम आदमी हो या कार्यकर्त्ता उसकी बात उठाना भी अपना धर्म है !यदि सरकार कोई समाधान निकालकर कोई ऐसा मंच संस्था या फोन नंबर उपलब्ध कराती है जो जिम्मेदारी पूर्वक आम कार्यकर्ता के साथ वर्ताव कर सके और संपूर्ण रूप से नैतिक कार्यों में कार्यकर्ता की मदद कर सके और अनैतिक कार्यों के लिए साफ साफ मना कर सके तो मुझे ख़ुशी होगी और मैं सम्पूर्ण निष्ठा के साथ उस संपर्क सूत्र का प्रचार प्रसार करके सरकार की छवि को अधिक से अधिक स्वच्छ और बेदाग़ बनाने के लिए प्रचार प्रसार करूँगा !
     

संस्थापकः-  राजेश्वरीप्राच्यविद्याशोधसंस्थान seemore....http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2014/06/blog-post_3979.html
हमारी शिक्षा -
व्याकरणाचार्य (एम.ए.)संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी
ज्योतिषाचार्य (एम.ए.ज्योतिष)संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी
एम.ए. हिन्दी कानपुर विश्व विद्यालय
पी.जी.डिप्लोमा पत्रकारिता ,उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी
पी.एच.डी. हिन्दी (ज्योतिष)बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी बी. एच. यू. वाराणसी(काशी हिंदू विश्वविद्यालय) 
विशेष योग्यताः- वेद, पुराण, ज्योतिष, रामायणों तथा समस्त प्राचीन वाङ्मय एवं राष्ट्र भावना से जुड़े साहित्य का लेखन और स्वाध्याय
हमारेलिखी हुई पुस्तकें-
प्रकाशितः- पाठ्यक्रम की अत्यंत प्रचारित प्रारंभिक कक्षाओं की हिन्दी की किताबें
   कारगिल विजय (काव्य )
श्री राम रावण संवाद (काव्य )
श्री दुर्गा सप्तशती (काव्य अनुवाद )
श्री नवदुर्गा पाठ (काव्य)
श्री नव दुर्गा स्तुति (काव्य )
श्री परशुराम (एक झलक)
श्री राम एवं रामसेतु
(21 लाख 15 हजार 108 वर्षप्राचीन)
कुछ मैग्जीनों में संपादन, सह-संपादन, स्तंभ लेखन आदि।
अप्रकाशित साहित्यः- श्री शिव सुंदरकांड, श्री हनुमत सुंदरकांड,
संक्षिप्त निर्णय सिंधु, ज्योतिषायुर्वेद, श्री रुद्राष्टाध्यायी, वीरांगना द्रोपदी, दुलारी राधिका, ऊधौ-गोपी संवाद, श्रीमद्भगवद् गीता‘ काव्यानुवाद’
रुचिकर विषयः- प्रवचन, भाषण, मंचसंचालन, काव्य लेखन, काव्य पाठ एवं शास्त्रीय विषयों पर नित्य नवीन खोजपूर्ण लेखन तथा राष्ट्रीय भावना के विभिन्न संगठनों से जुड़कर कार्य करना।
जन्मतिथिः 9.10.1965
जन्म स्थानः- पैतृक गाँव - इंदलपुर, पो.- संभलपुर, जि.- कानपुर,उत्तर प्रदेश
तत्कालीन पता :
के -71, छाछी बिल्डिंग चौक,
कृष्णा नगर, दिल्ली-110051
दूरभाष : 01122002689, 01122096548,
मो. 9811226973, 9968657732
ई - मेल : vajpayeesn @gmail.com 
आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी एवं श्री श्याम बिहारी मिश्र जी के साथ 
आचार्य डॉ.शेष नारायण  वाजपेयी

श्रद्धेय श्री रज्जू भइया जी के साथ आचार्य डॉ.शेष नारायण वाजपेयी 


आदरणीय  डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी के साथ 
आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी                श्रीमान कुशाभाऊ ठाकरे जी के साथ आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी
श्रीमती सुषमा स्वराज जी के साथ आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी
        श्री मदनलाल खुराना जी के साथ आचार्य डॉ.शेष नारायण वाजपेयी




                                          




                            
                                                                                                                                                                                                                                                     


    

Sunday, April 30, 2017

नौकरी पानी हो या राजनीति में सफलता ! दोनों के लिए चाहिए घूस और सोर्स का जुगाड़ !

     भ्रष्टाचारियों को घूस देने के लिए जिसके पास पैसे न हों और नेताओं की चमचागिरी करके सोर्स का जुगाड़ न बैठा सकता हो !उसे सरकारी नौकरी और राजनीति में सफलता के सपने ही नहीं देखने चाहिए !भ्रष्टाचार के इस युग में ईमानदारी के नारे लगा लगा कर बेईमान लोग सब कुछ बेच लेते हैं !भले वो सरकारी नौकरी हो या राजनैतिक पद प्रतिष्ठा और पहचान ही क्यों न हो !
   सेक्स और सुंदरता भी अहम् भूमिका निभाती है राजनीति और सरकारी सेवाओं में !अच्छा पद प्रतिष्ठा प्राप्त करके राजाओं की तरह सुख सुविधा भोगने के इच्छुक लोग अपनी इन्द्रियों पर लगाम लगाएँगे क्या ?ऐसे संयमी लोग कितने प्रतिशत होंगे राजनीति में !        ऐसे नौकरी विहीन राजनैतिक सफलता विहीन ईमानदार लोगों को सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करने से सरकारी एवं राजनैतिक भ्रष्टाचारी लुटेरे घूसखोर मक्कार कायर लोकतंत्र के हत्यारे बेईमान सफेदपोश लोग नहीं रोक सकते !यदि आप चाहते हैं कि आपकी तरह किसी अन्य प्रतिभासंपन्न विद्वान ईमानदार सदाचारी किसी युवा की जिंदगी न बर्बाद हो तो इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के लिए सोशल साइटों पर संभाल लीजिए मोर्चा !और इन्हें दर्पण दिखते रहिए जिनमें शर्म होगी वो तो सुधर ही सकते हैं बाकी  गद्दारी तो सरकारी शोणित में है ही उसका रोना किस्से रोया जाए !समाज बदलना है तो आगे आओ !
    आज वो लोग पढ़ा रहे हैं जिन्हें खुद पढ़ना नहीं आता क्या सरकार में हिम्मत है कि अपने कर्मचारियों की एक बार परीक्षा ले कर देख तो ले कि इन्होंने जिन डिग्रियों के जो सर्टिफिकेट दिए हैं उनमें से कितने फर्जी हैं और कितने ओरिजनल और यदि ओरिजनल हैं तो इनमें काम करने की अकल कितने में है !यदि ये लोग योग्य ही होते तो सरकारी कामकाज की भद्द हर जगह क्यों पिटी पड़ी है !सरकार के प्रायः हर विभाग को जनता चोर की निगाह से क्यों देखती है !सैनिकों से इन्हें कुछ सीखना नहीं चाहिए क्या कि जिम्मेदारी क्या होती है !
     सरकार अपने कर्मचारियों की परीक्षा लेकर देखे तो सही घूस और सोर्स का चमत्कार !भ्रष्टाचार के कारण  देश की प्रतिभाओं के साथ कैसे कैसे धोखा होता रहा है !आज अधिकारियों को उठना बैठना सोना जगना सिखाना पड़ रहा है बारी उच्च शिक्षा !
   अब तो अधिकरियों के कान में बताया जा रहा है कि जो सैलरी अभी तक तुम्हें बिना कुछ किए मिलती थी अब उसके लिए तुम्हें आफिसों में जाना पड़ेगा और जो लोग आएँगे उनकी बातें सुननी पड़ेंगी !उन्हें जाँच कराने के झूठ साँच आश्वासन देने पड़ेंगे !नौकरी करने के लिए तुम्हें और क्या करना है ये भी बताया जाएगा !जैसा जैसा कहा जाए वैसा वैसा करते जाना !बारे अधिकारी !जिन्हें अब तक अपने दायित्व का ही बोध नहीं था अगर इनके पास उच्चस्तरीय शिक्षा थी भी तो भी देश और समाज के भरोसे पर खरे तो नहीं उतर सके !अगर ये अशिक्षित ही होते या ऐसे अधिकारी होते ही न तो इससे ज्यादा और क्या भद्द पिटती जितनी अभी तक पिटती रही है !दुर्भाग्य है ऐसे लोकतंत्र का !
  काश  मैं भी नेता बन पाता ! 
 हर पार्टी के लोगों को मैंने यह कहते  सुना है कि वो राजनैतिक शुद्धि के लिएपढ़े लिखे ईमानदार लोगों को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं।जिससे देश में ईमानदार राजनीति का वातावरण बनाया जा सके। यह सुनकर मैंने सोचा कि मैंने भी दो विषय से आचार्य (एम.ए.)  दो विषय से अलग से एम.ए. एवं बी.एच.यू. से पीएच.डी की है।करीब150 किताबें लिखी हैं यद्यपि सारी प्रकाशित नहीं हैं,कई काव्य ग्रंथ भी हैं।प्रवचन भाषण आदि करने ही होते हैं।आरक्षण आंदोलन से आहत होकर मैंने आजीवन सरकार से नौकरी न मॉंगने का व्रत लिया हुआ है। वैसे भी ईमानदारीपूर्वक जीवन यापन करने का प्रयास करता रहा  हूँ। फिलहाल अभी तक निष्कलंक जीवन है यह कहने में हमें कोई संकोच नहीं हैं।           
      इस प्रकार से अपनी शैक्षणिक सामर्थ्य  का राजनैतिक दृष्टि से देशहित में सदुपयोग करना चाहता था, इसी दृष्टि से मैंने लगभग हर पार्टी से संपर्क करने के लिए सबको पत्र लिखे अपनी पुस्तकें भेजीं अपने डिग्री प्रमाणपत्र भेजे फोन पर भी संपर्क करने का प्रयास किया,किंतु कहीं किसी ने हमसे मिलने के लिए रुचि नहीं ली।किसी ने हमें पत्रोत्तर देना भी ठीक नहीं समझा।कई जगह तो दो दो बार पत्र डाले किंतु कहीं कोई चर्चा न हो सकी किसी ने मुझे पत्र लिखने लायक या फोन करने लायक नहीं समझा मिलने की बात तो बहुत दूर की है।
      हमारे राष्ट्रपति जी दुर्गा जी के भक्त हैं यह सुनकर उन्हें अपनी दोहा चौपाई में लिखी दुर्गा सप्तशती की पुस्तकें  भेंट करके अपनी कुछ बात निवेदन करने का मन बनाया किंतु वहॉं पुस्तकें एवं पत्र भेजने के बाद भी कोई पत्र नहीं मिला।
       इसके बाद कुछ हिंदू संगठनों से  इसलिए संपर्क किया कि मेरी धार्मिक शिक्षा विशेष रूप से हैं शायद  वहीं हमारा जनहित में शैक्षणिक सदुपयोग हो सके तो अच्छा होगा तो वहॉं के बड़े बड़े लोगों ने हमसे मिलना ठीक नहीं समझा उनसे छोटे लोगों को हमारी शिक्षा में कोई प्रत्यक्ष रुचि नहीं हुई, यद्यपि वहॉ मुझे इसलिए उन्होंने संपर्क में रहने को कहा ताकि हमारी समाज में जो गुडबिल है उसे संगठन के हित में आर्थिक रूप से कैस किया जा सके।यहॉं से इसी प्रकार के यदा कदा फोन भी आये जिनमें मैंने पैसे के कारण रुचि नहीं ली।
      इसके बाद निष्कलंक जीवन बेदाग चारि़त्र का नारा देने वाले एक सामाजिक संगठन से जुड़ने के लिए वहॉं के मुखिया को अपना साहित्य भेजा और मिलने के लिए पत्र के माध्यम से समय मॉंगा किंतु वहॉं भी मुझे घास नहीं डाली गई।इसके बाद ब्लाग पर बैठ कर चुपचाप मैं अपने बिचार लिखने लगा।
       यहॉं यह अपनी निजी कहानी लिखने का अभिप्राय केवल यह है कि इन राजनेताओं को अपने दलों में अपने साथ जोड़ने में न जाने किस शैक्षणिक या और प्रकार की योग्यता की आवश्यकता होती है जिन ईमानदार कार्यकर्ताओं के नाम पर वे जिनकी तलाश किया करते हैं न जाने वे कौन से भाग्यशाली लोग हैं,और वे अपनी किस योग्यता से अपनी ओर राजनैतिक समाज को प्रभावित किया करते हैं?मुझे तो केवल इतना पता है कि  हमारे जैसा शिक्षा से जुड़ा हुआ व्यक्ति इन राजनैतिक लोगों के किसी काम का नहीं है तो आम ग्रामीण या सामान्य आदमी इन राजनैतिक या सामाजिक संगठनों से क्या आशा  रखे?अगर उसे अपनी कोई समस्या कहनी ही हो तो किससे कहे ?और यदि राजनैतिक क्षेत्र में जुड़कर कोई काम करना ही हो तो कैसे करे ?
        
     डॉ. शेष नारायण वाजपेयी   
                            संस्थापकःराजेश्वरी प्राच्यविद्याशोधसंस्थान               
                                                         एवं               
                                                           दुर्गापूजाप्रचारपरिवार
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         
   व्याकरणाचार्य (एम.ए.)द्वारा संपूर्णानंदसंस्कृतविश्वविद्यालयवाराणसी   ज्योतिषाचार्य(एम.ए.ज्योतिष)
द्वारासंपूर्णानंदसंस्कृतविश्व विद्यालयवाराणसी
   एम.ए.      हिन्दी    द्वारा   कानपुर         विश्व  विद्यालय
   पी.जी.डिप्लोमा पत्रकारिता द्वारा उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी   पी.एच.डी. हिन्दी (ज्योतिष)     द्वारा
    बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी बी.एच. यू.  वाराणसी
   विशेषयोग्यताः-वेद, पुराण, ज्योतिष, रामायणों तथा समस्त प्राचीनवाङ्मयएवं राष्ट्र भावना       सेजुड़ेसाहित्य में लेखन और स्वाध्याय 
 प्रकाशितः-पाठ्यक्रम की अत्यंत प्रचारित प्रारंभिक कक्षाओं की हिन्दी की किताबें
कारगिल विजय      (काव्य )             श्री राम रावण संवाद  (काव्य )
श्री दुर्गा सप्तशती     (काव्य अनुवाद )      श्री नवदुर्गा पाठ      (काव्य)                               
श्री नव दुर्गा स्तुति (काव्य )  श्री परशुराम(एक झलक श्री राम एवं रामसेतु  (21 लाख 15 हजार 108 वर्षप्राचीन)
              कुछ मैग्जीनों में संपादन, सह संपादन स्तंभ लेखन आदि। 
अप्रकाशितसाहित्यः-श्रीशिवसुंदरकांड,श्रीहनुमतसुंदरकांड,संक्षिप्तनिर्णयसिंधु,   
ज्योतिषायुर्वेद,श्रीरुद्राष्टाध्यायी,वीरांगनाद्रोपदी,दुलारीराधिका,ऊधौगोपीसंवाद,    श्रीमद्भगवद्गीता‘काव्यानुवाद’                
 रुचिकर विषयः- प्रवचन, भाषण, मंचसंचालन, काव्य लेखन, काव्य पाठ एवं शास्त्रीय विषयों पर नित्य नवीन खोजपूर्ण लेखन तथा राष्ट्रीय भावना के विभिन्न संगठनों से जुड़कर कार्य करना। 
जन्मतिथिः-9.10.1965                                                    
जन्म स्थानः- पैतृक गाँव-इंदलपुर, पो.संभलपुर, जि.कानपुर,उत्तरप्रदेश                                       वर्तमान पता  के -71, छाछी बिल्डिंग चौक , कृष्णानगर,दिल्ली51                                                        फो.नंः-011 22002689,011 22096548,मो.09811226973,09968657732