Wednesday, May 26, 2021

ramdev

                                 बाबा रामदेव जी ! बकवास बंद करो या फिर करो शास्त्रार्थ !

        सिद्ध करो कि ज्योतिष शास्त्र गलत है तथा  योग और आयुर्वेद का ज्योतिषशास्त्र से कोई संबंध नहीं है !

    बाबाजी !यदि आप ईमानदारी से शास्त्रीय सत्य बोलें और स्वीकार करेंगे तो हमारे साथ शास्त्रार्थ का सामना अधिक देर तक करना आपके लिए केवल कठिन ही नहीं अपितु असंभव भी होगा  |यदि आप हमारी शास्त्रार्थ की चुनौती स्वीकार करते हैं तो अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए दें हमारे इन प्रश्नों के उत्तर -

  1. किसी रोग की प्रकृति को समझे बिना उस रोगी की चिकित्सा कैसे की जा सकती है उस रोग से मुक्ति  दिलाने में सक्षम औषधि कैसे नहीं बनाई जा सकती है !ऐसी परिस्थिति में कोरोना महामारी को समझे बिना उससे मुक्ति दिलाने वाली औषधि (कोरोनिल)बना लेने का दावा रामदेव जी आपने कैसे कर दिया ?

 2. जिस कोरोना महामारी को ठीक ठीक समझने में अभी तक विश्व का कोई वैज्ञानिक सफल नहीं हुआ है उस महामारी को समझ लेने का दावा बाबा रामदेव जी आप कैसे कर सकते हैं !महामारी का निदान (वर्णन) आयुर्वेद के किस ग्रंथ के किस सूत्र के आधार पर आपने किया है ?

3. कोरोनामहामारी का निदान एवं इससे मुक्ति दिलाने वाले औषधीय द्रव्य तथा औषधिनिर्माण विधि का वर्णन यदि आयुर्वेद के किसी ग्रंथ में नहीं मिलता है तब रामदेव जी आपने अपने 'कोरोनिल' कबाड़ को आयुर्वैदिक औषधि कैसे सिद्ध कर दिया ?

 4.आयुर्वेद के शीर्षग्रंथ 'चरकसंहिता' में भगवान् पुनर्वसु ने महामारी प्रारंभ होने से पहले महामारियों का पूर्वानुमान लगाकर उससे बचाव के लिए औषधि बना लेने का निर्देश दिया है |महामारी प्रारंभ होने के बाद बनी औषधि को निष्प्रभावी बताया है | ऐसी परिस्थिति में महामारी प्रारंभ होने के बाद बनी 'कोरोनिल' का महामारी से मुक्ति दिलाने का दावा झूठा नहीं तो और क्या है ?

 5. चरकसंहिता' में भगवान  पुनर्वसु ने महामारी का पूर्वानुमान लगाने की विधि ज्योतिषशास्त्र के आधार  पर बताई है| रामदेव जी आपको यह बात इसलिए समझ में नहीं आई क्योंकि इस जन्म में ज्योतिष समझ पाना आपके बश की बात नहीं है | ऐसी परिस्थिति में ज्योतिषशास्त्र को समझे बिना महामारी का पूर्वानुमान लगाया नहीं जा सकता फिर रामदेव जी आपने 'कोरोनिल' कबाड़ को महामारी की औषधि के रूप में कैसे बेचने लगे ?

 6.रामदेव जी !पहले योग से रोग दूर करने का नारा देकर आप कसरतें बेचते रहे  !कसरतें फ्लॉप होने के बाद आपने औषधियों से रोग दूर करने का नारा दिया !वह भी फ्लॉप हुआ तब आपने अच्छा राशन खिलाकर रोग दूर करने का नारा दिया उसके बाद भी स्थिति वही है | आखिर क्या कारण है कि दिनोंदिन समाप्त होती जा रही कोरोना महामारी आपकी 'कोरोनिल' लांच होते ही दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ने लगी ?

7. बाबा जी !कुलमिलाकर एलोपैथ और ज्योतिष आप इसलिए नहीं मानते हैं क्योंकि ऐसी गंभीर बातें समझने की क्षमता आप खो चुके हैं आयुर्वेद आप जानते नहीं हैं इसीलिए मशालों को भी आप आयुर्वैदिक औषधि मान लेते हैं !व्यायाम  करने को आप योग समझ बैठे हैं !बिना पढ़े लिखे किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार के भ्रम होने लगते हैं | आपकी शिक्षा कुछ है नहीं रिसर्च रिसर्च दिन भर करते हैं ! रिसर्च करने के लिए भी तो पहले पढ़ाई करनी होती है इस सच को आप स्वीकार करने के  लिए तैयार क्यों नहीं हैं !आयुर्वेद और योग के बिषय में झूठी अफवाहें क्यों फैलाया करते हैं ?

 

 

 4.जिस प्रकार से जीरा धनियाँ हल्दी मिर्चा नमक आदि सभी मशाले तथा आलू लौकी आदि सभी सब्जियाँ एवं गेहूँ चना आदि सभी आनाज दालों आदि का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है |उसीप्रकार से रामदेव की कोरोनिल में पड़े द्रव्यों का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है किंतु जिस प्रकार से सभी धर्मों देशों भाषाभाषियों के द्वारा उन द्रव्यों के सम्मिश्रण से बनाया गया भोजन आयुर्वैदिक नहीं होता है उसी प्रकार से रामदेव की कोरोनिल आयुर्वैदिक औषधि नहीं है क्योंकि इस औषधि का वर्णन आयुर्वेद में नहीं है | 

 

 आयुर्वैदिक हैं !,उन सब्जियों का प्रयोग सभी जाति भाषा ति उन्हीं द्रव्यों का प्रयोग केवल आयुर्वेद ही नहीं अपितु चिकित्सा की सभी पद्धतियों में आवश्यकता के अनुशार कर लिया जाता है | ऐसी परिस्थिति में आयुर्वेद के किसी ग्रंथ में वर्णन मिले बिना भी  अन्य चिकित्सा पद्धतियों की तरह ही आपने भी 'कोरोनिल' बना डाली !वह 'कोरोनिल' आयुर्वैदिक औषधि कैसे हो गई ?

 

 

 

 

 

रामदेव को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती ! रामदेव सिद्ध करें कि वे योग या आयुर्वेद जानते हैं !

  1. महामारी की प्रकृति को आपने पहचाना कैसे ? महामारी के स्वभाव और लक्षणों को आपने समझा कैसे ?  महामारी का निदान (वर्णन) आयुर्वेद के किस ग्रंथ में है ! महामारी को समझने का दावा आप आयुर्वेद के किस ग्रंथ के किस सूत्र के आधार पर कर रहे हैं ?

2. आयुर्वेद का सिद्धांत है कि किसी रोग को ठीक से समझे बिना उसकी औषधि का निर्माण नहीं किया जा सकता !ऐसी परिस्थिति में महामारी को समझे बिना उसकी दवा बना लेने का दावा आप किस आधार पर कर रहे हैं ?

3. कोरोनामहामारी का निदान एवं इससे मुक्ति दिलाने वाले औषधीय द्रव्य तथा औषधिनिर्माण विधि का वर्णन यदि आयुर्वेद के किसी ग्रंथ में नहीं मिलता है तब आपकी काल्पनिक 'कोरोनिल' आयुर्वैदिक औषधि कैसे हो गई ?

 4. औषधियों में पड़ने वाले कई द्रव्य तो मशाले के रूप में सब्जियों में भी डाले जाते हैं !उन्हीं द्रव्यों का प्रयोग केवल आयुर्वेद ही नहीं अपितु चिकित्सा की सभी पद्धतियों में आवश्यकता के अनुशार कर लिया जाता है | ऐसी परिस्थिति में आयुर्वेद के किसी ग्रंथ में वर्णन मिले बिना भी  अन्य चिकित्सा पद्धतियों की तरह ही आपने भी 'कोरोनिल' बना डाली !वह 'कोरोनिल' आयुर्वैदिक औषधि कैसे हो गई ?

 5.आयुर्वेद के शीर्ष ग्रंथ 'चरकसंहिता' में महामारियों को समझने के लिए सबसे पहले उसका पूर्वानुमान लगाना आवश्यक बताया गया है उसी  पूर्वानुमान के आधार पर महामारी प्रारंभ होने से पहले ही महामारी से बचाव के लिए औषधि  बना लेने की बात कही गई है महामारी प्रारंभ होने के बाद बनाई गई औषधि महामारी से मुक्ति दिलाने में प्रभावशून्य होती है | महामारी प्रारंभ होने के बाद बनी आपकी 'कोरोनिल' आयुर्वैदिक कैसे  है ?

 6. चरकसंहिता' में भगवान  पुनर्वसु ने महामारी का पूर्वानुमान लगाने की विधि ज्योतिषशास्त्र के आधार  पर बताई है उस ज्योतिष को समझपाने की क्षमता आप दोनों ने जन्म से ही खो दी है इसलिए इस जन्म में उस दिव्य ज्योतिषशास्त्र  को समझ पाना आपके बश की बात भी नहीं है उसके लिए उन्नत चरित्र एवं साधना की आवश्यकता होती है | ऐसी परिस्थिति में भगवान  पुनर्वसु के आदेशानुसार महामारी का पूर्वानुमान आप लगा नहीं सकते हैं !उसके बिना कोरोना महामारी की आयुर्वैदिक औषधि बना लेने का दावा आप कैसे कर सकते हैं ?

 7.बाबा जी !सबसे पहले योग से रोग दूर करने का नारा देकर आप कसरतें बेचते रहे  !कसरतें फ्लॉप होने के बाद आपने औषधियों से रोग दूर करने का नारा दिया !वह भी फ्लॉप हुआ तब आपने अच्छा राशन खिलाकर रोग दूर करने का नारा दिया उसके बाद भी स्थिति वही है | आखिर क्या कारण है कि दिनोंदिन समाप्त होती जा रही कोरोना महामारी आपकी 'कोरोनिल' लांच होते ही दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ने लगी ?

8. बाबा जी !कुलमिलाकर एलोपैथ और ज्योतिष आप इसलिए नहीं मानते हैं क्योंकि ऐसी गंभीर बातें समझने की क्षमता आप खो चुके हैं आयुर्वेद आप जानते नहीं हैं इसीलिए मशालों को भी आप आयुर्वैदिक औषधि मान लेते हैं !व्यायाम  करने को आप योग समझ बैठे हैं !बिना पढ़े लिखे किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार के भ्रम होने लगते हैं | आपकी शिक्षा कुछ है नहीं रिसर्च रिसर्च दिन भर करते हो ! रिसर्च करने के लिए भी तो पहले पढ़ाई करनी होती है इस सच को आप स्वीकार करने के  लिए तैयार नहीं हैं | 

Sunday, May 23, 2021

Monday, April 12, 2021

मार्तिकावत

मार्तिकावत (देश) का राजा चित्ररथ था यह देश आधुनिक जयपुर, जोधपुर और अलवर राज्य का सम्मिलित भू-भाग था।इसी चित्ररथ राजा पर रेणुका जी मुग्ध हुई थीं !


कवि कालिदास कृत ‘रघुवंश’ महाकाव्य में विंध्यपाद में अनूपदेश का उल्लेख है जिसकी राजधानी माहिष्मति बताई गई है। सातवाहन महारानी गौतमी बालश्री के नासिक शिलालेख में अनूपदेश को उपरांत और विदर्भ देश के मध्य में स्थित भू-भाग बताया गया है।

जूनागढ़ शिलालेख में भी यही बात इस संदर्भ में उल्लेखित है कि अनूपदेश आकरावति एवं आनर्त देशों के मध्य में स्थित था। ‘अभिधानचिंतामणि’ को आधार माने तो अनूप से जो अर्थ प्रकट होता है वह उस भू-भाग से है जो जल के निकट हो। हालाँकि इसका एक अभिप्राय और भी प्रकट किया गया है कि ऐसा भू-भाग जहाँ जल का बहाव निरंतर हो। अर्थात जल-प्रवाह की निरंतरता का अभाव न हो। महाभारत में उल्लेखित ‘सागरानूपवासिन’ तथा ‘सागरानूपकंठर्श्च तेच प्रांत निवासिनः’ भी दरअस्ल अनूपदेश की पश्चिमी सीमा को सागर के उपकण्ठ तक बताया गया है अर्थात् भरूच तक सूचित किया है। इसी तरह पुराणों में वर्णित माहिष्मति की स्थिति ऋक्ष पर्वत के निकट है। इसमें ऋक्ष से अभिप्राय मध्य विंध्य से है। कुछेक विद्वानों ने ‘नर्मदानुप’ शब्द के निहितार्थ में अनूपदेश की पूर्वी सीमा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक को स्वीकारा है।

महेष्वर में स्थित सहस्त्रधारा, अर्थात् जहाँ बहती हुई नर्मदा सहस्त्र धाराओं में विभक्त हो जाती है। इन स्थानों पर रेतीले घर मिलने पर डॉ. झाय ने इनका गहन अध्ययन किया था और अपने निष्कर्ष में बताया था कि यहाँ की जलवायु कभी बेहद खुश्क थी। लगभग दस से बारह हजार वर्ष के मध्य एक ऐसी संस्कृति का उद्भव और विकास हुआ जो अपनी परम्परा को तो आत्मसात करती आई किंतु समय की निरंतरता में बदले हुए संदर्भों में उसमें नित नवीन परिवर्तन करती गई।

मध्यप्रदेश के पश्चिम में स्थित निमाड़ अंचल का भूगोल भी बहुत ही अद्भुत है। निमाड़ के एक ओर विंध्य की ऊँची पर्वत श्रृंखला है और दूसरी ओर सतपुड़ा की सात उपत्यकाएँ हैं। इनके बीच में नर्मदा नदी प्रवाहित होती है। नदियाँ हमारी संस्कृति की प्राचीन और मूल्यवान पहचान है। एक तरह से यह संस्कृति का भी उद्गम है। नर्मदा नदी भी निमाड़ की संस्कृति का एक अमित और अभिन्न हिस्सा है।

रामायण काल हैहय वंशी कार्तवीर्यार्जुन माहिष्मती का राजा था। सहस्त्रार्जुन माहिष्मती का राजा था। सहस्त्रार्जुन उसकी उपाधि थी। वर्तमान महेश्वर में हैहय वंशी संस्कृति से संबद्ध परिवार हैं। बुनकर का कार्य करे हुए अंततः ये लोग मारू कहलाने लगे। महाभारत के संदर्भ में कुंतिभोज का उल्लेख है जो अवंति के राजा थे। इसका वर्णन नासिक की गुफाओं में वाशिष्ट पुत्र पुलुकावि के आकारवती के आसपास एवं जूनागढ़ के शासक रूद्रदामन के शुरूआती आलेखों में है। निमाड़ की संस्कृति को आसपास के प्रदेशों ने इसलिए भी ज्यादा प्रभावित किया क्योंकि माहिष्मती उत्तर और दक्षिण का संधि स्थल था। विजयाभिलाषी किसी भी राजा को नर्मदा नदी पार करना जरूरी हो जाता था। मुगल काल में बुरहानपुर नगर राज्य का दक्षिण द्वार था। सेनाओं के, राजाओं के पड़ाव नर्मदा किनारे माहिष्मती में रहते थे इसलिए जाने-अनजाने माहिष्मती तत्कालीन राजनीति के साथ ही संस्कृति को प्रभावित करने वाली केन्द्रीय नगरी हो गई थी। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. हंसराज सांकलिया ने महेश्वर के आसपास खुदाई में मिले अवशेषों के अध्ययन के बाद लिखा है- ‘नावड़ाटवड़ी में 1943-54 एवं 1987 के बाद इस दिशा में कार्य हुआ था।‘ डॉ. सुब्बाराव को एक टीले से बौद्ध स्तूप के अवशेष मिले थे जिससे महेश्वर की पुरातात्विक महत्ता एवं प्राचीनता के प्रमाण मिले। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्नेनसांग ने भी अपने यात्रा वर्णन में माहिष्मती का उल्लेख किया है। हालांकि पुरातत्ववेत्ता डॉ. वि.श्री. वाकणकर ने कतिपय वैज्ञानिक आधारों पर यह भी लिखा है कि आज के विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच बहने वाली नर्मदा के स्थान पर कभी महासागर था। भू-गर्भीय परिवर्तनों के कारण विंध्याचल के शिखर ऊपर आ गए और सागर का लोप होता चला गया। पहले बागजीरा से गुजरात के छोटा उदयपुर तक सिकताष्म (एक किस्म का सफेद पत्थर) की उत्पत्ति हुई तो दूसरी तरफ पंचमढ़ी से सिवनी मालवा तथ गोडवन शैली में सिकताष्म पर्वत श्रंखलायें सामने आईं। इसी भूगर्भीय परिवर्तन ने सिवनी मालवा से धरमराय तथा आगे महाराष्ट्र में अजंता पर्वत मालाएँ और बीच में काफी नीचे जो हिस्सा बना, नीचे होने के कारण निमाड़ कहलाया। हालाँकि किंवदंतियों में निमाड़ के नामकरण के पीछे यहाँ नीम के पेड़ों की बहुतायत होना भी एक कारण बताया जाता है। निमाड़ में दाखिल होने वाला पहला मुगल शासक अलाउद्दीन था जिसने 1721 में इसका नाम निमाड़ प्रांत रखा। अलबत्ता ग्यारवीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आए अलबरूनी ने इस प्रदेश को निमाड़ संबोधित किया है। निमाड़ का सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक वैभव मुगलकाल में अहिल्याबाई के शासनकाल में उभरकर आया। अहिल्याबाई ने इंदौर की अपेक्षा महेश्वर को राजधानी बनाया था। सुंदर घाट, किले का बड़ा रूप और लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बुनकरों की बसाहट की गई थी। 1767 से लेकर तीस वर्ष तक अल्यिाबाई ने निमाड़ और मालवा को अपने न्यायप्रिय शासन और कलाप्रिय दृष्टि से उन्नत बनाया। अहिल्याबाई के बाद वैसा कुशल शासक फिर होलकरों में नहीं हुआ।

सन् 1818 में होलकर अपनी राजधानी महेश्वर से इंदौर ले गए। इसके बाद निमाड़ राजनीतिक परिदृश्य में लगभग हाशिये पर रहा। खरगोन और मंडलेश्वर, निमाड़ को 1914 में दो जिला परगनों में विभाजित किया गया। 1956 में मध्यप्रदेश बनने पर पूर्वी निमाड़ और पश्चिम निमाड़ के दो जिलों का गठन किया गया। बाद में बड़वानी तहसील को पृथक से जिला घोषित किया गया। नर्मदा के नाभि केन्द्र नेमावर से लगाकर हरदा, हरसूद व होशंगाबाद का निमाड़ी संस्कृति से गहरा संबंध है। पौराणिक आख्यानों से लेकर ऐतिहासिक संदर्भ में नर्मदा एक अनिवार्य और पवित्र उपस्थिति है। इसी नर्मदा ने निमाड़ की कला और संस्कृति को भिन्न-भिन्न कारणों से प्रभावित किया। निमाड़ की अधिकांश लोक कथाओं और लोक गायन में नर्मदा देवी की भाँति, पुत्री की भाँति और माँ से लेकर सखी तक बनकर उपस्थित है। निमाड़ में व्रत-उपवास और तीज-त्यौहारों की इतनी अधिकता है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक एक धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान के बगैर कुछ भी संभव नहीं है। आज के इस आपाधापी के युग में अंतर्राष्ट्रीय बाजार के आक्रमण ने संस्कृति को प्रभावित करना जरूर शुरू किया है फिर भी अचरज की भाँति सुदूर गाँवों में ये परंपराएँ जिंदा हैं। विवाह के ढोल-थाली के साथ नृत्य।

शिवरात्रि पर काठी नृत्य, रामलीला, गम्मत, भजन-कीर्तन ये आज भी अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई में लगे हैं। तीज-त्यौहारों पर भित्ति चित्र, सामूहिक गायन की परंपरा आज भी मौजूद है। मॉल संस्कृति के आगमन से पहले, अभी ज्यादा समय नहीं बीता है जब गाँवों में फागुन में चंग पर गाँव का गवैया थाप देता था तो पूरा माहौल संगीतमय हो जाता था। आदिवासी गाँवों में भगोरिया की मस्ती भी परवान चढ़ती है। गणगौर के झालरिये मन को भावुक कर देते थे। बेटी को विदा करना और फिर एक दिन धणियरराजा को मनाकर बेटी को रोकने के दृश्य और गायन गणगौर त्यौहारों में एक आत्मीयता भरकर पूरे गाँव को एक सूत्र में जोड़ने का अनूठा काम करते हैं। तमाम राजनीतिक विभाजन के बावजूद अधिकांश गाँवों में आज भी तीज-त्योहार सामूहिक मनाए जाते हैं इसलिए कहा गया है कि निमाड़ की लोक संस्कृति में लोक की समस्त शक्तियाँ विद्यमान हैं। लोक की परंपरा में समूचे जीवन के अर्थ आकार लेते हैं, यहाँ आकर अक्षर ज्ञान का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यहाँ संत सिंगाजी ने निमाड़ की वाचिक परंपरा को बहुत समृद्ध किया है। संस्कृति परिवर्तनशील होती है, उसमें नित नए अध्याय जुड़ते हैं। इसमें जहाँ जीवन की सकारात्मकता, संघर्ष और विकास जुड़ा होता है वह हिस्सा अमर होता है। यही बात निमाड़ की संस्कृति पर भी लागू होती है। अनावश्यक सारा कुछ नर्मदा में बहता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने जिस तरह बाजार तैयार करके एक नई संस्कृति की बुनावट और बसाहट शुरू की है, निश्चित रूप से निमाड़ की संस्कृति भी उससे अप्रभावित नहीं रहेगी। निमाड़ ज्यादातर प्रकृति पर आश्रित है और कहा जाता है कि सृष्टि में मनुष्य श्रेष्ठ हो सकता है लेकिन सर्वश्रेष्ठ तो प्रकृति ही है। निमाड़ की संस्कृति की संवाहक, संरक्षक प्रकृति है इसलिए प्रकृति से इस तरह संबद्ध निमाड़ की संस्कृति को उसके अबोध होने में ही बचाया जा सकता है। जब तक निमाड़ में नर्मदा को माँ की तरह पूजने की आस्था और सत्कार का ठेठ निमाड़ी अंदाज बना रहेगा, उम्मीद की जा सकती है कि निमाड़ी संस्कृति अपनी संपूर्णता में इसी तरह बनी रहेगी।

Monday, December 14, 2020

Booki मौसम

                                                          समय का महत्त्व -

       प्रकृति एवं जीवन से संबंधित ऐसे ही शकुनों अपशकुनों के आधार पर महाकवि घाघ (देवकलीदुबेजी) ने भविष्य में संभावित अनेकों घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए बड़ी सारी कहावतें कही हैं जिन्हें घाघ भंडरी की कहावतों  के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है उनके आधार पर लगाए गए मौसम संबंधी पूर्वानुमान आज भी सही घटित होते हैं इसी लिए अधिकाँश कृषक वर्ग आज भी उनकी  विश्वास करता है | 

     जिस प्रकार से महाकवि घाघ वर्तमान समय में घटित हो रही एक प्राकृतिक घटना को देखकर भविष्य में घटित होने वाली दूसरी घटना का काफी सटीक पूर्वानुमान लगा लिया करते थे,उसी प्रकार से  वर्तमान समय में आधुनिक विज्ञान के द्वारा भी मौसम संबंधी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रतीक रूप में तापमान आर्द्रता एवं अलनीनों ला नीना जैसी कुछ वर्तमान प्राकृतिक घटनाओं  के आधार पर भविष्य में घटित होने वाली आँधी तूफानों वर्षा बाढ़ मानसून आने और  जाने आदि के बिषय में कुछ अंदाजे लगाने के प्रयास किए जाते हैं जिनका विज्ञान के रूप में   प्रमाणित होना अभी बाक़ी है क्योंकि इसके आधार पर लगाए जाने वाले पूर्वानुमानों की सच्चाई हमेंशा संदिग्ध बनी रहती  है | 

    वायु प्रदूषण बढ़ने एवं भूकंप आदि के घटित होने में निश्चित कारण खोजे जाने के अभाव में कुछ ऐसी घटनाओं के घटित होने के आधार स्वरूप कुछ ऐसे काल्पनिक कारण मान लिए गए हैं जो वैज्ञानिक तर्कों की कसौटी पर खरे नहीं उतरते इसीलिए इनके आधार पर ऐसी घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान लगा पाना संभव नहीं हो पाया है | कुल मिलाकर ऐसी अवैज्ञानिक कल्पनाओं की सच्चाई  विज्ञान के रूप में प्रमाणित होनी अभी बाकी है |

    भूकंपों के घटित होने के वास्तविक कारणों के खोजे जाने तक केवल काम चलाने के लिए भूमिगत प्लेटों के लावा पर तैरने या आपस में टकराने या भूमिगत गैसों का दबाव बढ़ने आदि कल्पित कहानियों को ही  भूकंपों के घटित होने का वास्तविक कारण मानकर  संतुष्ट हो जाना ठीक नहीं है अपितु वास्तविक कारणों की खोज तब तक जारी रखी जानी चाहिए जब तक कि उन कारणों के आधार पर लगाए गए भूकंपों से संबंधित पूर्वानुमान सच न होने लगें | जिस किसी भी विधा से भूकंपों से संबंधित पूर्वानुमान लगाने में सफलता मिले उसे ही भूकंप विज्ञान के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए |

 2.  भूकंप आदि उत्पात और प्राकृतिक घटनाएँ (पुराण)

3. भूकंप और घटनाएँ 

     A- मौसम ,(वर्षाबाढ़,सूखा,तूफ़ान,वायुप्रदूषण)

    रोग और महामारी,

        आतंकवाद-उन्माद ,विस्फोट,विस्फोटक साजिश आदि 

        दो राष्ट्रों के आपसी संबंध 

  4. 

 

 भूकंप मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं  

      

 

Saturday, November 28, 2020

मौसम पूर्वानुमान :दिसंबर 2020(वैश्विक)

 

मौसम पूर्वानुमान :दिसंबर 2020(वैश्विक)

वर्षा पूर्वानुमान :   इस वर्ष दिसंबर के महीने में भी बादलों की आवाजाही बनी रहेगी !सामान्य वर्षा का वातावरण कुछ देशों प्रदेशों में बना रहेगा |1 से 24 दिसंबर तक अन्य स्थानों की अपेक्षा विश्व के पूर्वोत्तर भाग में बादलों की अधिकता एवं वर्षा की संभावना अधिक रहेगी |विशेषकर  2 से 9 दिसंबर के बीच एवं 16से 22 दिसंबर के बीच तथा 27 से 31 दिसंबर के बीच भारत समेत विश्व के कुछ देशों प्रदेशों में बादलों की अधिकता रहेगी इसके साथ ही कुछ स्थानों पर सामान्य वर्षा भी हो  सकती है | दिसंबर की 5,7,12,13,16,17,18,19,29,30,31 तारीखों में कुछ देशों प्रदेशों में वर्षा की मात्रा सामान्य से कुछ अधिक हो सकती है|इन्हीं तारीखों में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होने की संभावना है | 
    चक्रवातीवर्षा पूर्वानुमान :दिसंबर महीने में कुछ देशों प्रदेशों में अन्य वर्षों की अपेक्षा हवाओं का वेग अधिक रहेगा !उसमें भी  11 ,12,13,14,24,25,26,27,28 तारीखों में भारत समेत विश्व के कुछ देशों प्रदेशों में तेज आँधी तूफान के साथ वर्षा होने की घटनाएँ घटित हो सकती हैं | इन्हीं तारीखों में समुद्र के किनारे स्थित कुछ प्रदेशों में चक्रवाती तूफानों से हिंसक घटनाएँ घटित होने  की संभावना है | इन तारीखों में विश्व के अधिकाँश भागों में सामान्य एवं सहज वर्षा की संभावना अत्यंत कम है |

कोहरा बढ़ने का पूर्वानुमान :सामान्य तौर पर 1 से 15 दिसंबर तक कोहरा गिरने की घटनाएँ घटित होंगी | उसमें भी 8 दिसंबर से कोहरा गिरने की मात्रा बढ़ने लगेगी !दिसंबर महीने की 8से 11 दिसंबर तथा 19से27 तारीखों में कुछ स्थानों पर कोहरा गिरने की घटनाएँ अधिक दिखाई देंगी !
तापमान घटने बढ़ने का पूर्वानुमान :दिसंबर के महीने में तापमान में क्रमशः गिरावट होते देखी जाएगी !विशेषकर 4 से 11
दिसंबर तथा 18 से 24 दिसंबर में तापमान काफी कम रहेगा !इसी प्रकार से 1,10,15,23,29 दिसंबर को तापमान अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहेगा | 8से 15 दिसंबर तक तापमान क्रमशः बढ़ता जाएगा ! 16 से22 दिसंबर एवं 30 से 31 दिसंबर तक तापमान  क्रमशः कम होते चला जाएगा | 30 दिसंबर के बाद अधिक सर्दी बढ़ना प्रारंभ होगा ! 
 वायुप्रदूषण बढ़ने का पूर्वानुमान: वायु प्रदूषण 11 से 15
दिसंबर एवं 25 से 29 दिसंबर तक क्रमशः बढ़ता जाएगा !इन दिनों में भी कुछ क्षेत्रों में हवाओं का वेग अधिक रहने के कारण वायु प्रदूषण विशेष अधिक प्रभावी नहीं होगा | इसके अतिरिक्त 5 से 11 दिसंबर तथा 19 से 24 दिसंबर के बीच कुछ भागों में वर्षा होने के कारण अन्य दिनों की अपेक्षा वायु प्रदूषण कम रहेगा | 

 आग लगने के बिषय में पूर्वानुमान:इस वर्ष दिसंबर के महीने में 1,10,15,23,29 को वातावरण में ज्वलनशील गैसों की अधिकता अन्य दिनों की अपेक्षाअधिक रहेगी !इसलिए आग से संबंधित उद्योगों ,बिजली से संबंधित कार्यों ,रसोई घरों, होटलों, ढाबों आदि जिन कार्यों से आग लगने की संभावनाएँ अधिक बनी रहती हैं उनमें विशेष अधिक सतर्कता बरती जानी चाहिए |
  उत्पात का समय :दिसंबर महीने की 10 ,
11 ,12,13,14,24,25,26,27,28 तारीखों में संपूर्ण प्रकृति में बेचैनी बढ़ने के कारण पृथ्वी की गहराई से लेकर आकाश की ऊँचाई तक इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा | भूकंप ,बज्रपात एवं विमान दुर्घटना जैसे हिंसक हादसे  हो सकते हैं |समय के प्रभाव से अकारण वाहनों का टकरा जाना,बसों का खाई में गिरजाना,दंगा फैलना,सरकारों एवं शासन के बिरुद्ध आंदोलन, देशों की  सीमाओं पर संघर्ष गोलीबारी तथा बमविस्फोट आदि हिंसक आतंकवादी घटनाओं के घटित होने की संभावना इस समय में अन्य समय के अपेक्षा अधिक रहती है |जीवों में मानसिक बेचैनी बढ़ने के कारण जीव अधिक हिंसक एवं आक्रमक हो सकते हैं |लोगों के चिंतन में उन्माद की मात्रा  अन्य समय की अपेक्षा अधिक बढ़  जाने से परिवारों, जातियों, संप्रदाओं, समुदायों, देशों में तनाव बढ़ सकता है | इसमें भी 10,11,12,13,14 दिसंबर में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए | ऐसे समय में जिन्हें पहले से कोई तनाव चला आ रहा होगा उन्हें इस समय में अधिक परेशानी होगी | जिनके साथ ऐसा नहीं है इस समय में बेचैनी उनकी भी बढ़ेगी किंतु उन्हें अधिक परेशानी का अनुभव नहीं होगा |    
   रोगों का पूर्वानुमान :कोरोना महामारीका बिषैलापन वातावरण से संपूर्ण रूप से समाप्त हो चुका है | मौसमी  कारण जिन्हें सर्दी जुकाम खांसी आदि की दिक्कतें कुछ बढ़ती हुई दिख रही हैं उन्हें कोरोना से जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा !विश्व के बड़े बड़े उद्योग पतियों कोरोना वैक्सीन बनाने के नाम पर भारी भरकम धनराशि लगा रखी है ऐसे लोग विज्ञापनों के  वैक्सीन  पर कुछ भी बेचने के लिए आमादा है इउनके इस षड्यंत्र में कुछ  देशों प्रदेशों की सरकारों एवं  चिकित्सा अनुसंधानों से जुड़े लोग एवं मीडिया प्रबंधनों को अपने पक्ष  में कर लिया गया है | अब  जनता की बारी है यदि वो ऐसे षड्यंत्रों में फंसती है तो यह उसका अपना दुर्भाग्य होगा |


Thursday, October 29, 2020

वैश्विक मौसम पूर्वानुमान :नवंबर 2020

 

मौसम पूर्वानुमान :नवंबर 2020(वैश्विक)

    वर्षा :   इस वर्ष नवंबर के महीने में भी बादलों एवं सामान्य वर्षा का वातावरण कुछ देशों प्रदेशों में बना रहेगा | विशेषकर 5 से 12 नवंबर के बीच एवं 18 से 24 नवंबर के बीच भारत समेत विश्व के कुछ देशों प्रदेशों में बादलों की अधिकता रहेगी इसके साथ ही कुछ स्थानों पर सामान्य वर्षा भी हो  सकती है | नवंबर की 10,12,18,19,20, 23,26,29 तारीखों में कुछ प्रदेशों में मध्यम वर्षा हो सकती है|6,8,9,13,21,22 नवंबर को भारत समेत विश्व के अधिकाँश भागों में विशेष वर्षा हो सकती है इन्हीं तारीखों में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी एवं कुछ स्थानों पर अधिक वर्षा होने की संभावना है |6 से 9 नवंबर के बीच ईरान में अधिक बारिश हो सकती है |  

  चक्रवातीवर्षा :नवंबर महीने की 1,2,3,14,15,16,17,27,28,29,30 तारीखों में भारत समेत विश्व के कुछ देशों प्रदेशों में आँधी तूफान के साथ वर्षा होने की घटनाएँ घटित हो सकती हैं | इन्हीं तारीखों में समुद्र के किनारे स्थित कुछ प्रदेशों में चक्रवाती तूफानों से हिंसक घटनाएँ घटित हो सकती हैं |इन तारीखों में विश्व के अधिकाँश भागों में सामान्य एवं सहज वर्षा की संभावना अत्यंत कम है |20 नवंबर  को अमेरिका में तूफान आने की संभावना है |

 तापमान घटने बढ़ने का पूर्वानुमान : नवंबर के महीने में अन्य वर्षों की तरह अधिक गिरावट नहीं होगी 8 से 14 नवंबर तक तापमान क्रमशः कम होगा !इसी प्रकार से 21 से 25 नवंबर तक तापमान क्रमशः कम होते देखा जाएगा | 4,13,17,26 को अन्य दिनों की अपेक्षा तापमान कुछ बढ़ जाएगा | 

 वायु प्रदूषण बढ़ने का पूर्वानुमान:वायु प्रदूषण 1 से 3 नवंबर तक क्रमशः बढ़ता जाएगा !4 नवंबर से अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ कम होने लगेगा !कुछ भागों में वर्षा होने के कारण 9 से 14 नवंबर के बीच वायु प्रदूषण का स्तर काफी कम हो सकता है |इसके बाद 15 से 19 नवंबर तक वायु प्रदूषण क्रमशः बढ़ते चला जाएगा !इसके बाद कुछ दिनों तक वायु प्रदूषण से कुछ राहत मिलेगी ! वर्षा हो जाने के कारण कुछ क्षेत्रों में विशेष राहत भी मिल सकती है इसके अतिरिक्त अन्य स्थानों में वायु प्रदूषण अधिक कम होने की आशा नहीं की जानी चाहिए! 25 नवंबर से वायु प्रदूषण फिर से क्रमशः बढ़ना प्रारंभ होगा ,जो 30 नवंबर तक क्रमशः बढ़ता चला जाएगा !27 से 30 नवंबर के बीच वायु प्रदूषण का स्तर नवंबर के संपूर्ण महीने में सबसे अधिक होगा !दिल्ली जैसे नगरों में वायु प्रदूषण बढ़ने का स्तर 500 से अधिक हो जाएगा | 

  विनम्र निवेदन वायु प्रदूषण बढ़ने के बिषय में :इस तकनीक से वायु प्रदूषण पूर्वानुमान के अनुसंधान में दिवाली के पटाखा फोड़ने,पराली जलाने, वाहनों उद्योंगों से निकलने वाले धुएँ  तथा भवन निर्माण से उड़ने वाली धूल को सम्मिलित नहीं किया गया है |मैं अपने अनुसंधान के आधार पर विश्वासपूर्वक कह सकता हूँ कि वायु प्रदूषण बढ़ने में ऐसी कल्पित कहानियों का कोई विशेष संबंध नहीं है | 

 कोहरा बढ़ने का पूर्वानुमान :6 नवंबर से कोहरा गिरने की मात्रा बढ़ने लगेगी !11,12,13,14,24,25,26,27 तारीखों में कुछ स्थानों पर कोहरा गिरने की घटनाएँ अधिक दिखाई देंगी !

आग लगने के बिषय में पूर्वानुमान :इस वर्ष नवंबर के महीने में हवाओं में ज्वलनशील गैसों की अधिकता अन्य वर्षों की अपेक्षाअधिक रहेगी !इसलिए आग से संबंधित उद्योगों ,बिजली से संबंधित कार्यों ,रसोई घरों, होटलों, ढाबों आदि जिन कार्यों से आग लगने की संभावनाएँ अधिक बनी रहती हैं उनमें विशेष अधिक सतर्कता बरती जानी चाहिए |इस महीने दीपावली भी है पटाखा आदि फोड़ने में विशेष सावधान रहना चाहिए !इसके साथ ही अग्निशमन सेवाकार्यों को अधिक सतर्क रहना चाहिए |इस दृष्टि से 5,14,17,27 तारीखें विशेष  ध्यान देने योग्य हैं | 

 उत्पात का समय : नवंबर महीने की 2,4,12,13,14,15,16,27,28,29,30 तारीखों में संपूर्ण प्रकृति में बेचैनी बढ़ने के कारण पृथ्वी की गहराई से लेकर आकाश की ऊँचाई तक इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा | भूकंप ,बज्रपात एवं विमान दुर्घटना जैसे हिंसक हादसे  हो सकते हैं |समय के प्रभाव से अकारण वाहनों का टकरा जाना,बसों का खाई में गिरजाना,दंगा फैलना,सरकारों एवं शासन के बिरुद्ध आंदोलन, देशों की  सीमाओं पर संघर्ष गोलीबारी तथा बमविस्फोट आदि हिंसक आतंकवादी घटनाओं के घटित होने की संभावना इस समय में अन्य समय के अपेक्षा अधिक रहती है |जीवों में मानसिक बेचैनी बढ़ने के कारण जीव अधिक हिंसक एवं आक्रमक हो सकते हैं |लोगों के चिंतन में उन्माद की मात्रा  अन्य समय की अपेक्षा अधिक बढ़  जाने से परिवारों, जातियों, संप्रदाओं, समुदायों, देशों में तनाव बढ़ सकता है | इसमें भी 13,14,15,16,17 का  समय अधिक संयम पूर्वक बिताने का है इसमें विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए | ऐसे समय में जिन्हें पहले से कोई तनाव चला आ रहा होगा उन्हें इस समय में अधिक परेशानी होगी | जिनके साथ ऐसा नहीं है इस समय में बेचैनी उनकी भी बढ़ेगी किंतु उन्हें अधिक परेशानी का अनुभव नहीं होगा |    

  रोगों का पूर्वानुमान :वातावरण क्रमशः महामारी के बिषैलेपन से क्रमशः मुक्त होता जा रहा है इसीलिए कोरोना महामारी 16 नवंबर के बाद संपूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगी फिर भी वायु मंडल में थोड़ा बहुत संक्रमण बना रह सकता है | तापमान के असंतुलन से ऋतुजनित रोगों की संभावना भी इस वर्ष कुछ अधिक रहेगी |इसलिए बचावहेतु सावधानी अवश्य बरती जानी चाहिए |

मौसम पूर्वानुमान :नवंबर 2020(भारत

     

   
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1से 3 नवंबर  तक राजस्थान में बारिश की संभावना है |

2 और 3 नवंबर को  हरियाणा पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तरी महाराष्ट्र में सामान्य बारिश हो सकती है |पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर,मध्य प्रदेश में तेज हवा के साथ वर्षा संभव है | जम्मू-कश्मीर,गुलमर्ग,उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी का अनुमान है।लाहौल, किन्नौर और चंबा के ऊपरी क्षेत्र में वर्षा हो सकती है | 

4 नवंबर को दिल्ली सहित समस्त उत्तर भारत के साथ साथ बिहार छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश हिमाचल झारखंड अरुणाचल उड़ीसा तेलंगाना राजस्थान आदि में बारिश की संभावना है हिमाचल आदि में बर्फबारी हो सकती है | 

5नवंबर को छिंदवाड़ा में बारिश हो सकती है |

 6नवंबर को दक्षिणी ओडिशा में बारिश संभव है .मध्य महाराष्ट्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र समेत कुछ जगहों पर तेज हवाओं एवं हल्के  गर्जन के साथ बारिश हो सकती है |

 7 नवंबर को दिल्ली के आस पास अधिक बादल एवं वर्षा की संभावना है |

8  नवंबर को  मौसम सामान्य रहेगा 

9  नवंबर को  कुल्लू मनाली ,मंडी तथा  यमुनोत्री आदि पहाड़ी इलाकों में बारिश हो सकती है । बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी की संभावना है  !

10 नवंबर को पहाड़ों पर जारी बर्फबारी हो सकती है

11 नवंबर को डिंडौरी एवं गोरखपुर में तेज हवाओं के साथ बारिश संभव है |

12 नवंबर को पंजाब में  तेज हवा के साथ बारिश एवं झारखंड में उत्तर प्रदेश आदि में बादल  छाए रहने की संभावना है |

13 नवंबर को बेंगलुरू समेत दक्षित भारत के कई जगहों पर वर्षा हो सकती है |
14
नवंबर को झारखंड के सिमडेगा ,गुमला बारिश एवं .आंधी की संभावना है 

  15 नवंबर को झारखंड एवं कटनी (मप्र) में विभिन्न स्थानों पर बारिश वर्षा का अनुमान है | गोरखपुर के आकाश में अधिक बादलोन की आवा जाही अधिक हो सकती है ।
 
16
नवंबर को असम एवं पश्चिमबंगाल में तेज आँधी का अनुमान है |

17 एवं 18 नवंबर को उड़ीसा के दक्षिणी भाग में एवं देश के पहाड़ी इलाकों में बारिश की संभावना है | देहरादून में बादल रहेंगे ।उत्तरकाशी, यमुनोत्रीधाम सहित यमुना घाटी मेें हल्की बारिश संभव है।ऊंचाई वाले इलाकों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी और कहीं बारिश हो सकती है छत्तीसगढ़ बेमेतरा में और झारखंड के साहिबगंज में तेज  हवा एवं बारिश की संभावना  है |

19,20और 21 को हिमाचल उत्तराखंड जम्मूकश्मीर बर्फबारी हो सकती है बिहार झारखंड उड़ीसा उत्तर प्रदेश आदि में बादलों की अधिकता रहेगी  |बिहार में आंधी-पानी संभव है कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र , पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है !21 नवंबर को दिल्ली में बादल छाए रहने की संभावना है | 

22 नवंबर को बिहार और झारखंड में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है |
23
नवंबर को पश्चिमी राजस्थान में ,जैसलमेर ,पोखरण में काली घटाओं के साथ बारिश हो सकती है । जोधपुर  में हल्के बादल छा सकते हैं । फलोदी में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

24 नवंबर को दिल्ली में बादलों की अधिकता के साथ सामान्य वर्षा हो सकती है !कुल्लू लाहौल स्पीति की ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी एवं निचले क्षेत्रों में बारिश की संभावना है । 
25 को दिल्ली ,उप्र मप्र
पंजाब हरियाणा आदि अधिकाँश उत्तर भारत में आँधी के साथ अच्छी वर्षा एवं पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है | 

 26 नवंबर को हिमाचल में शिमला सहित प्रदेश के अन्य भागों में भी वर्षा संभव है | कुल्लू ,लाहौल-स्पीति ,रोहतांग दर्रा समेत मनाली व लाहौल की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हो सकती है ।बलिया में  तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है |

27 नवंबर को झारखंड बिहार पूर्वी उत्तर प्रदेश राजस्थान आदि में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है | दिल्ली में बादल छाए रहेंगे !श्रावस्ती तराई आदि में वर्षा एवं बज्रपात संभव है | 

 28  नवंबर को दिल्ली आदि में सामान्य बादल एवं अच्छी धूप रहेगी | बिहार पटना मधेपुरा आदि में तेज हवाओं के साथ घने  बादल छा सकते हैं | 

29 नवंबर को बिहार के  सहरसा में बारिश की विशेष संभावना है | जोधपुर में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित इससे सटे कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है ।

30 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर समेत गुरुग्राम और फरीबाद में बारिश हो सकती है| ग्वालियर में तेज हवा के साथ बारिश संभव है | जमशेदपुर झारखंड के कोल्‍हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्‍यालय जमशेदपुर समेत आसपास के इलाके में बादलों की अधिकता के साथ अधिक वर्षा हो सकती है | राजस्थान में ठंडी हवाओं के साथ हल्‍की बारिश हो सकती है | बिहार के शिवहर जिले के तरियानी प्रखंड क्षेत्र में एवं .सीतामढ़ी में आंधी के साथ वर्षा एवं बज्रपात संभव है| कर्नाटक के बेंगलुरु तेज  बारिश एवं अल्मोड़ा में आँधी के साथ तेज बारिश हो सकती है ।

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18. 11

19. 12

20. 13 

21.  14

22. 15

23. 16

24. 17

25. 18

26. 19

27. 20

28. 21

29. 22

30.  23

 

 

                                                                        अप्रैल - 2020 
 

20 को झारखंड बिहार पूर्वी उत्तर प्रदेश राजस्थान आदि में आँधी के साथ अच्छी बारिश हुई काफी बारिश हुई है दिल्ली में बादल छाए रहे !श्रावस्ती: तराई में अचानक बदले मौसम के मिजाज के बीच सोमवार रात बारिश के साथ ओले गिरे। गरज-चमक के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर सिरसिया थाना क्षेत्र के बगही गांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
21 को दिल्ली आदि में सामान्य बादल एवं अच्छी धूप रही है बिहार पटना मधेपुरा आदि में सुबह 7 बजे खूब घने बादल छा गए दिन में रात लगने लगी आँधी और बारिश अच्छी हुई | 
22 को प्रातः काल बिहार सहरसा में अधिक बारिश हुई | जोधपुर. शहर में बुधवार को मौसम के अलग ही नजारे देखने को मिले। दिनभर की तीखी तपिश ने लोगों को परेशान किए रखा। वहीं रात सवा आठ बजे शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित इससे सटे कुछ क्षेत्रों में यकायक हल्की बारिश शुरू होने से लोग चौंक उठे। शाम को शहर के कुछ हिस्सों में थोड़ी देर के लिए बरसे बादलों से उमस बढ़ गई।

23को दिल्ली-एनसीआर में बदला मौसम का मिजाज, गुरुग्राम और फरीबाद में बारिश हुई , दिल्ली में छाए बादल |ग्वालियर में 23 गुरुवार सुबह तेज हवा के साथ बारिश हुई | जमशेदपुर झारखंड के कोल्‍हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्‍यालय जमशेदपुर समेत आसपास के इलाके में गुरुवार दोपहर दिन में रात सा नजारा दिखा। जमकर बादल गरजे तो मेघ भी बरसा।आंधी-बारिश से दस घंटे तक बिजली गुल|राजस्थान में गुरुवार को सुबह-सुबह राजधानी जयपुर समेत विभिन्न इलाकों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया और ठंडी हवाओं के साथ हल्‍की बारिश हुई.सीतामढ़ी में गुरुवार की देर रात भारी आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के साथ ही अासमान से बड़े-बड़े ओले गिरने की खबर मिली है।बिहार के शिवहर जिले के तरियानी प्रखंड क्षेत्र में भयंकर आंधी तूफान के साथ ओले पड़े हैं. बेमौसम बरसात और वज्रपात से हजारों एकड़ गेहूं के फसल को नुकसान पहुंचा है| बेंगलुरु, एएनआइ। कर्नाटक के बेंगलुरु में तेज बारिश ने जीवन अस्‍तव्‍यस्‍त कर दिया है। बीती रात बेंगलुरु में हुई तेज बारिश के करण कग्गेरे में सड़क धंस गई।अल्मोड़ा में गुरुवार की शाम तेज आंधी तूफान साथ जमकर बरसे मेघ !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मौसमपूर्वानुमान : अक्टूबर 2020

 भारत के कई प्रदेशों में अक्टूबर के महीने में भी मध्यम वर्षा होते रहने की संभावना है |  
1 अक्टूबर को उत्तर भारत के कुछ भागों में बादल और वर्षा की सामान्य संभावनाएँ बन सकती हैं |
2 से 3 अक्टूबर तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश ,हिमाचल एवं उत्तराखंड आदि में बारिश की होने की संभावना है |
4 और 5 अक्टूबर को हिमाचल पंजाब से लेकर दिल्ली तक तेज हवाओं के साथ सामान्य वर्षा की संभावना है |
6 और 7 अक्टूबर को दिल्ली ,उत्तर भारत, बिहार, झारखण्ड आदि में बारिश हो सकती है |समुद्र के किनारे बसे देशों प्रदेशों में अधिक वर्षा एवं आँधी तूफ़ान की संभावना है | इन दिनों में जिन क्षेत्रों में वर्षा नहीं होगी और वायु का प्रवाह भी अधिक नहीं होगा वहाँ वायु प्रदूषण की मात्रा अधिक बढ़ जाएगी |
8 अक्टूबर को मौसम प्रायः सामान्य रहेगा |
9 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश हो सकती है |
10 अक्टूबर को वर्षा और बादलों की मात्रा सामान्य से कुछ अधिक रहेगी इसके साथ ही राजस्थान एवं हरियाणा के हिसार और भिवानी आदि जिलों के साथ साथ देश के कई अन्य प्रदेशों में भी अधिक बादल एवं वर्षा होने की संभावना है |
11 अक्टूबर को उत्तरभारत समेत देश के अधिकाँश भागों में अधिक बादल और अच्छी वर्षा की संभावना है |
12 अक्टूबर को दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश होगी | देश के कुछ स्थानों पर अधिक बारिश भी हो सकती है | पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश राजस्थान मध्यप्रदेश आदि में भी बारिश हो सकती है |इस दिन दिल्ली समेत समस्त उत्तर भारत में काली घनघोर घटाएँ देखने को मिल सकती हैं |
13 अक्टूबर को देश के दिल्ली आदि कुछ प्रदेशों में वर्षा होगी किंतु पहले की अपेक्षा मात्रा कुछ कम रहेगी |
14 और 15 अक्टूबर को देश के कई भागों में अधिक मात्रा में बादलों का जमावड़ा लगा रह सकता है | इसके साथ ही मध्यम वर्षा हो सकती है |
16 अक्टूबर को कुछ प्रदेशों में अधिक बादल एवं अत्यंत सामान्य वर्षा होने की संभावना है |
17 से 19 अक्टूबर को तेज हवाओं के साथ कुल्लू ,लाहौल तथा रोहतांग आदि में बादल वर्षा की मात्रा अधिक रहेगी|इन दिनों में उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बिहार बंगाल उड़ीसा मध्यप्रदेश,झारखंड ,छत्तीसगढ़ आदि समूचे उत्तर भारत में अधिक बादल वर्षा बज्रपात एवं आँधी तूफान तथा समुद्र के किनारे बसे प्रदेशों में चक्रवात जैसी हिंसक घटनाएँ घटित हो सकती हैं |
20 अक्टूबर को अधिक बादलों से आसमान आच्छादित रहेगा |तेज हवा के साथ साथ मध्यमवर्षा  की संभावना है | समुद्र के किनारे वाले प्रदेशों में चक्रवाती वर्षा की संभावना अधिक है |
विशेषबात : 21 से 31 अक्टूबर तक अधिकाँश देशों प्रदेशों में वर्षा की मात्रा कुछ अधिक रहेगी |
21 अक्टूबर को मौसम सामान्य रहेगा |झारखंड बिहार आदि क्षेत्रों सामान्य वर्षा होगी तथा संपूर्ण उत्तर भारत में बादल छाए रहने की संभावना है |
22 अक्टूबर को अधिकाँश प्रदेशों में मध्यम वर्षा की संभावना है |   

23 अक्टूबर को कुछ प्रदेशों में सामान्य वर्षा हो सकती है |
24 से 26 अक्टूबर तक विशेष अधिक वर्षा की संभावना है |बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री धाम सहित हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, रुद्रनाथ, लाल माटी, घांघरिया, पाणा, ईराणी, झींझी आदि गांवों के साथ साथ देश के कुछ अन्य प्रदेशों में भी अधिक वर्षा होने की संभावना है |
27 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के इलाके में अधिक वर्षा हो सकती है |
28अक्टूबर को तेज हवाओं के साथ बादलों की आवा जाही लगी रहेगी कहीं कहीं सामान्य से कुछ अधिक वर्षा भी हो सकती है |
29 अक्टूबर को दिल्ली के आस पास बादल रहेंगे एवं सामान्य वर्षा हो सकती है|कुछ अन्य स्थानों पर भी मध्यम वर्षा की संभावना है |  
30 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर आदि में तेज हवाओं के साथ मध्यम वर्षा होने की संभावना है |
31 अक्टूबर को तेज आंधी तूफ़ान के साथ एक आध प्रदेशों में वर्षा हो सकती है|समुद्र के किनारे के प्रदेशों में चक्रवाती तूफ़ान से समस्या पैदा हो सकती है |

Sunday, October 4, 2020

पत्रकारिता की अर्थी पर बैठकर भ्रष्टाचार की नदी में नौका बिहार कर रहे हैं पत्रकार !

पत्रकारिता की अर्थी पर बैठकर भ्रष्टाचार की नदी में नौका बिहार कर रहे हैं पत्रकार !

      भ्रष्टाचार की बारिश से पत्रकारिता की फसल तवाह होती जा रही है ! पहले भ्रष्टाचार मिटाने एवं जनजन तक सही सूचनाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से मीडियाचैनल न्यूजपेपर मैगजीन रूपी खेतों में पत्रकारों की फसल तैयार की जाती थी उससे निर्भीक ईमानदार कर्मठ समाज के शुभचिंतक एवं सतर्क  संविधान प्रहरी पत्रकारों का प्राकट्य होता था | अब रूपी भ्रष्टाचार जलवायुपरिवर्तन के प्रभाव से पत्रकारिता का मौसम बिगड़ रहा है पत्रकारों की फसल चौपट होती जा रही है | पत्रकारिता का स्तर इतना अधिक गिर चुका है कि टीवी चैनलों पर बिना मुद्दे के चीखने चिल्लाने वाले खूसट लोग भी अपने को पत्रकार समझने लगे हैं | 

     जिन पत्रकारों को पहले कभी शेर समझकर कर सरकारें डरा करती थीं वे आज कुकुरों की तरह  सरकारों के आगे दुम दबाए घूम रहे हैं | कुत्तों की दुम केवल हिलती ही है वो न तो कुत्तों  को लगने वाले मक्खी मच्छरों  का निवारण कर पाती है और न उस कुत्ते के गुप्तांगों को ही ढक पाती है |वर्तमान लोकतंत्र में पत्रकारिता अब इसी ढर्रे पर चलती दिख रही है |

      अपने स्वागत में पूछ हिलाने से खुश मालिक जिस प्रकार से कुछ टुकड़े कुत्ते की ओर फ़ेंक देता है निरर्थक भौंकते मीडिया के साथ सरकार भी ऐसा ही वर्ताव कर रही है इससे पत्रकारों की वेष भूषा बनाए घूम रहे डरपोक एवं स्वार्थी लोग कुछ  काली कमाई इकट्ठी करने में भले सफल जाएँ किंतु उनके भटकने से पत्रकारिता मरती जा रही है | इस प्रकार से लोकतंत्र चौथा स्तंभ खतरे में होने का मतलब लोकतंत्र की बिल्डिंग के साथ कभी भी  छोटा बड़ा कैसा  भी हादसा हो सकता है |  इसलिए अभी भी सजीव पत्रकारों को चाहिए कि वे अपनी सजीवता का परिचय दें और प्रिय पत्रकारिता को बचा लें | 

     जनता के खून पसीने की कमाई टैक्स रूप में नोच कर सरकारें जिन भूकंप मौसम और महामारी के लिए  किए जाने वाले अनुसंधानों पर खर्च किया करतीं हैं उन अनुसंधानों से आज तक मिला क्या ?वे केवल अफवाहें फैलाया करते हैं और बिना सर पैर की कल्पित कहानियाँ सुनाया करते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता है यह सिद्ध करने के लिए मेरे पास पर्याप्त प्रमाण हैं |उन प्रमाणों को सरकार सुने तो उसकी पोल खुलती है और मीडिया सुने तो उसका श्वानधर्म नष्ट होता है |

     कोई सजीव व्यक्ति चिंतन करे तो पता लग सकता है कि कोरोना जैसी महामारी में वैज्ञानिक अनुसंधानों का योगदान शून्य रहा है जिसे न समझ में आवे वो हमसे प्रमाणित प्रमाण ले | क्या जनता इसीलिए इन पर अपना पेट काट काट कर पैसे खर्च किया करती है कि मुसीबत के समय ऐसे लोग केवल कल्पित कहानियाँ सुनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लें | मीडिया जीवित होता तो ये प्रश्न सरकार और अनुसंधान कर्ताओं से पूछे ही जाने चाहिए थे | 

      जिन आईएएस आईपीस अधिकारियों  की अयोग्यता अनुभव विहीनता भ्रष्टाचार लापरवाही आदि दुर्गुणों के कारण अपराधी तैयार होते हैं केवल उन अपराधियों को सजा सुनाकर सरकार यदि अपराध मुक्त समाज बनाने का सपना देखती है तो सरकार अपराधों को समाप्त करने के प्रति गंभीर नहीं है ऐसा माना जाना चाहिए |अधिकारी कर्मठ होते हैं तो अपराध घटता है और अपराधी यदि अधिकारियों से सबल होते हैं तब अपराध बढ़ता है | वर्तमान समय में बढ़ते अपराधों का कारण अधिकारी हैं या अपराधी यह समझाना मीडिया का काम है | ऐसी परिस्थिति में पत्रकारों का धर्म बन  जाता है कि वे सरकारों की आँखें खोलें किंतु मीडिया में सजीवता बची हो तब न ऐसा हो !

       लोकसभा विधान सभा की कार्यवाहियों में हुल्लड़ मचाने वाले माननीय सदस्यों की क्या गलती ये तो उन लोगों के स्वभाव में है जिसे वे बचपन से करते आ रहे हैं गलती उन्हें ऐसे सदनों तक लाने वाले दलों की है अन्यथा वे अपने स्वभाव को क्यों छोड़ दें | उसी जुझारूपन के कारण उन्हें दलों ने टिकटें दी हैं और वे ऐसे सदनों तक पहुँचे  भी उन्हीं दुर्गुणों के कारण हैं |निर्जीव मीडिया के जनजागरण में असफल रहने के कारण ही यह बिषम परिस्थिति पैदा होती है |

       ऐसी परिस्थिति में मीडिया यदि स्वस्थ और निष्पक्ष होता तो सुखी हो सकता था समाज !