Sunday, August 22, 2021

मुहूर्त

 

 

 @RajatSharmaLive जी ! ट्रेन के टाइमटेबल की तरह ही मुहूर्त होता हैजैसे हर समय ट्रेन नहीं चलती उसी प्रकार से हर समय हर काम करने का मुहूर्त नहीं होता | मुहूर्त बिना देखे काम करने वालों को काम होने लायक समय आने तक का इंतजार करना पड़ता है मुहूर्त देखकर काम करने से काम तुरंत बनना शुरू हो जाता है |

 

 @RajatSharmaLive जी ! बिना समय सारिणी पता किए जो लोग स्टेशन पर आ जाते हैं उन्हें ट्रेन आने तक के समय की प्रतीक्षा करनी होती है|जिन्हें समय सारिणी विषय में पता होता है वे समय से आते और तुरंत ट्रेन में बैठ कर चले जाते हैं | उसी प्रकार से अच्छे मुहूर्त का समय होता है और वो कभी कभी आता है |

 

@RajatSharmaLive जी ! प्रकृति और जीवन में अच्छे मुहूर्त (समय) में अच्छी घटनाएँ और बुरे समय में बुरी घटनाएँ घटित होती हैं |मध्यमवर्गीय लोग अच्छे मुहूर्त (समय) की खोज करते हैं ताकि उनके काम में रुकावट न आए वे उधार धन लेकर व्यापार खड़ा करते हैं इसलिए वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते !

 @RajatSharmaLive जी ! प्रकृति और जीवन में अच्छे मुहूर्त (समय) में अच्छी घटनाएँ और बुरे समय में बुरी घटनाएँ घटित होती हैं |मध्यमवर्गीय लोग अच्छे मुहूर्त (समय) की खोज इसलिए करते हैं ताकि उनके काम में कोई रुकावट न आए वे उधार व्यवहार धन लेकर व्यापार खड़ा करते हैं इसलिए वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते !


@RajatSharmaLive जी ! प्रत्येक व्यक्ति का मुहूर्त (समय)  ही भाग्य है कर्म हमेंशा भाग्य के अनुशार ही फल देता है | बहुत लोग दिन रात परिश्रम करते हैं फिर भी भाग्य के बिना उनका जीवन संघर्ष करते करते बीत जाता है जबकि कुछ भाग्यवान लोग सामान्य प्रयासों से ही सफलता के शिखर चूमने में सफल हो जाते हैं क्योंकि भाग्य उनका साथ दे रहा होता है |


विज्ञान के बिना  

 

 

@RajatSharmaLive  जी ! मौसमसंबंधी पूर्वानुमान लगाने की प्रक्रिया में आधुनिक विज्ञान की कोई भूमिका ही नहीं है उपग्रहों रडारों से बादलों की जासूसी कर लेने में विज्ञान कहाँ है ?मुहूर्त विज्ञान वास्तव में विज्ञान है जिसके आधार मौसम संबंधी घटनाओं का सही सही पूर्वानुमान हजारों वर्ष पहले लगा लिया जाता है |  

मुहूर्त (समय) विज्ञान वह विज्ञान है जिसको समझे बिना महामारी का पूर्वानुमान आज तक नहीं लगाया जा सका है | इसीलिए महामारी का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने जितनी भी भविष्यवाणियाँ की हैं वे सारी झूठी निकली हैं जबकि हमने जो भी पीएमओ की मेल पर भेजी हैं वे सभी सही निकली हैं ! 

मुहूर्त (समय) विज्ञान के बिना महामारी मौसम एवं भूकंपों को समझना संभव ही नहीं है | पूर्वानुमान लगाने के लिए तो कोई विज्ञान है ही नहीं फिर भी ऐसेविषयों पर झूठ बोला जाता है | ये दस दिन पहले का मौसम पूर्वानुमान नहीं लगा सकते और हम दस हजार  

 अभाव में यह दुर्गति हो रही है !
भूकंप रडारों से दिखाई नहीं पड़ते इसलिए वैज्ञानिक बेचारे मजबूरी में गड्ढे खोदने में लगे हुए हैं |
 
 मुहूर्त (समय) विज्ञान के आधार पर ही मैं कर पा रहा हूँ |


 
किसी महीने का पूर्वानुमान
@RajatSharmaLive  जी !
कहाँ गई महामारी की तीसरी लहर
 
सही नीला
 
मुहूर्त (समय) विज्ञान पर ही मैंने BHU से रिसर्च किया है | हमारे द्वारा आगे से आगे लगाए गए महामारी से संबंधित पूर्वानुमान पीएमओ की मेल पर आज भी पड़े हुए हैं जो बिल्कुल सही निकले हैं जिसके गवाह अनेकों पत्रकार और राजनेता भी हैं आप अपनी ईमेल आईडी दो तो वही मेल आपको फारवर्ड कर दूँगा !


महामारी के विषय में 19 मार्च 2020 कि मेल में ही मैंने पीएमओ को भेज दिया था आप मेल भेजें तो आपको भी काफी कुछ

 

को न मानना ही है |

मुहूर्त (समय) ही सबकुछ है !इस सच को स्वीकार न कर पाने वाले आप जैसे पत्रकार लोग और चिकित्सक वैज्ञानिक आदि महामारी का कारण आज तक खोज नहीं पाए हैं दो वर्ष के बाद भी असहाय अपाहिज अनाथों की तरह तीसरी लहार की अफवाहें फैलाने में लगे हुए हैं इसके बाद भी आप जैसे लोगों का दिमाग इतना ख़राब है !
@RajatSharmaLive
 

 
 
बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी था जिसने संपूर्ण कोरोनाकाल  में किसी नियम की परवाह नहीं की उन्हें जो जहाँ जैसे हाथों से दिया गया वही खाते पहनते रहे सबको छूते रहे किंतु उन्हें एक दिन जुकाम भी नहीं हुआ क्यों ?
 
रहे एक जैसी चिकित्सा होने पर भी परिणाम चिकित्सक के हाथ नहीं अपितु मुहूर्त के ही हम में होता है
@RajatSharmaLive


 
भूकंप एक्सीडेंट महामारी आदि बड़ी बड़ी दुर्घटनाओं की चपेट में एक साथ बहुत लोग आ जाते हैं किंतु मरते वही हैं जिनके मरने का मुहूर्त आ चुका होता है में दुर्घटनाओं की चपेट में आने पर भी बहुत लोगों को खरोंच तक नहीं लगती यदि साहस है तो इसका कारण खोजिए न ! 

सच्चाई ये है कि बिना मुहूर्त में न कोई पैदा होता है और न ही मरता है | अन्यथा 
 
आपने 
 
आप तो थोड़ा बहुत पढ़े लिखे भी हो आपको 
 
 
   

 

Thursday, August 19, 2021

 dsdycmoffice-up@gv.in

 dycmkcm@gmail.com

 

आदरणीय मंत्री जी 

                                                                                                                                             सादर प्रणाम 

 विषय : पुलिस के संज्ञान में रहते हुए भी हमारे परिवार के लोगों के साथ भूमाफियाओं ने जो  मारपीट की है  | उन लोगों पर कठोर कार्यवाही  करने एवं हमारे परिवार के लोगों की सुरक्षा करने हेतु !

   महोदय , 

                           हमारे गाँव इंदलपुर पोस्ट संभलपुर जिला कानपुर में तहसील बिल्हौर थाना शिवराजपुर का मामला है | गाँव में हम लोगों के दरवाजे पर आजाने जाने का कोई रास्ता नहीं हैआवादी की जमीन  से जो खरंजा रोड बनाया गया था उसे उखाड़कर बाबू शंकर मिश्रा दिनेश मिश्रा आदि  घर बना रहे थे तो इससे हमारे घर का रास्ता बंद हो रहा था उसकी कंप्लेन पुलिस में की गई  उन्होंने राजस्व का मामला बता कर टाल दिया फिर कंप्लेन एस डी एम से की गई उन्होंने तहसीलदार साहब आदि को नाप करवाने के लिए हमारे गाँव में भेजा था वो नाप करके चले गए तब बाबू शंकर मिश्रा एवं उनके परिवार के लोगों ने हमारे भाई साहब ब्रजकिशोर वाजपेयी एवं भतीजों ध्रुव वाजपेयी राम जी वाजपेयी आदि से बहुत मार पीट की है |  इसकी आशंका पहले से थी जिसकी सूचना मैंने सुबह ही  तहसीलदार  साहब   एस डी एम  साहिबा एवं  सी ओ  साहब  और एस एच ओ  साहब को दी थी | 

          इस परपुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया !जब मारपीट हो रही थी तब इन लोगों को मैं बार बार फोन लगाता रहा किंतु उन्होंने उस समय फोन  नहीं उठाया | कुलमिलाकर पुलिस ने  भूमाफियाओं से के साथ मिलकर पूर्व निर्धारित योजना के तहत मारपीट करवाई है | 

       श्रीमान जी ! मारपीट केवल उन्होंने हमारे परिवार के लोगों के साथ की है जबकि पुलिस के द्वारा  लिखी  स्क्रिप्ट के अनुशार अब  इसे  झगड़ा दिखाकर दोनों पक्षों के विरुद्ध कार्यवाही करने के प्रयास किए  रहे है जो गलत है  इससे  भूमाफियाओं  का  मनोबल बढ़ना स्वाभाविक ही है |  

                     अस्तु आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे परिवार के लोगों की  सुरक्षा  की जाए एवं भूमाफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कारवाही की जाए | 

     निवेदक -    

राजेंद्र कुमार वाजपेयी -9889507070 

ब्रजकिशोर वाजपेयी -9838239075 

ध्रुव कुमार वाजपेयी -6306920342 

राम जी वाजपेयी -9838167171 

   मैं वर्तमान समय में दिल्ली में रहता हूँ -डॉ.शेष नारायण वाजपेयी- 9811226973 \9811226983 


 

उनके परिवार के सभी लोग  के और उनके परिवार के

 

 

हमारे भाई साहब का नाम

Thursday, August 12, 2021

नाम

                                                                                                                                                                                            हिंदी  के वर्णों में विज्ञान 

           प्रत्येक व्यक्ति वस्तु स्थान  देश  शहर नगर गाँव मोहल्ला संस्था संस्थान संगठन राजनैतिक दल साहित्यिकग्रंथ फिल्में,काव्य ,नाटक आदि प्रत्येक छोटे से छोटे या बड़े से बड़े अंश में न केवल सारी अच्छाइयाँ होती हैं और न ही सारी बुराइयाँ होती हैं वस्तुतः संसार की समस्त वस्तुएँ उन्हीं अच्छाइयों बुराइयों का  ही सम्मिश्रण हैं |  व्यक्ति वस्तु स्थान  देश  शहर नगर आदि जो जितने अधिक लोगों को अच्छे लगते हैं उन्हें उतना अच्छा मान लिया जाता है और जो जितने कम लोगों को अच्छे लगते हैं उन्हें उतना कम अच्छा माना जाता है  |उनके अच्छा और बुरा लगने का कारण उन सबका अपना अपना नाम का पहला अक्षर होता है | नाम के पहले अक्षर के अनुशार लोगों का स्वभाव होता है | उस व्यक्ति वस्तु स्थान  देश  शहर आदि के लोगों  के नाम के पहले अक्षर के साथ जितना अच्छा संबंध होता है उन दोनों के आपसी संबंध भी उतने ही मधुर होते देखे जाते हैं | वही नगर गाँव मोहल्ला संस्था संस्थान संगठन राजनैतिक दल साहित्यिकग्रंथ फिल्में,काव्य ,नाटक आदि  पहली पसंद होता है वहीँ उसका मन लगता है | 

             संसार के प्रत्येक छोटे बड़े अंश का कोई न कोई नाम होता है उस नाम का जो पहला अक्षर होता है उस अक्षर का वर्ण विज्ञान की दृष्टि से जो स्वभाव होता है उसी प्रकार का स्वभाव उस नाम वाले व्यक्ति वस्तु स्थान आदि का होता है उसी के अनुशार सोच पसंद नापसंद  आदि बनती है | नाम के पहले अक्षर के अनुशार ही मित्र शत्रु बनते हैंउसी के अनुशार देश शहर नगर गाँव मोहल्ले  आदि स्थान  अच्छे या बुरे लगने लगते हैं | जिन दो या दो से अधिक अक्षरों का स्वभाव एक दूसरे वर्ण से मिल रहा होता है उन दोनों अक्षरों वाले लोगों के मन में एक दूसरे के प्रति दोष देखने की दृष्टि नहीं रह जाती है अपितु आपस में एक दूसरे केअंदर दिखाई पड़ने वाले दुर्गुणों में भी गुण खोज लिए जाते हैं और एक दूसरे से मित्रता बढ़ती चली जाती है और जिन वर्णों का स्वभाव एक दूसरे से विपरीत होता है वे एक दूसरे की अच्छाइयों में भी बुराइयाँ खोजते खोजते एक दूसरे के शत्रु होते चले जाते हैं |

       कई बार ऐसा भी देखा जाता है जो लोग एक दूसरे से कभी मिले ही नहीं पहली बार मिल रहे होते हैं वहाँ भी नाम प्रभाव के अनुशार ही वे एक दूसरे से प्रभावित अप्रभावित आदि होते देखे जाते हैं |कई बार ट्रेन आदि पर बैठे कुछ अपरिचित लोगों की आपस में एक दूसरे से बात चीत होने लगती है उनमें से जिनके नाम अक्षरों का आपस में मेल खा रहा होता है उन दोनों में  बहुत अच्छा तालमेल बैठ जाता है ऐसा लगने लगता है जैसे बहुत पुराने परिचित हों जबकि उन्हीं के बगल में बैठे कुछ अन्य लोगों के साथ कोई बात नहीं होती है | कई बार अत्यंत प्रसिद्धि प्राप्त बड़े नेता अभिनेता खिलाड़ी प्रशासकों आदि जिनसे मिलना जुलना बात चीत करना प्रायः असंभव सा ही होता है उनके प्रति भी मन में मित्रता द्वेष आदि भावनाएँ पनपने लग जाती हैं | यही कारण है कि जिन लोगों का जिन राजनैतिक दलों नेताओं आदि से कभी कोई लेना देना ही नहीं होता है वे अपने नाम प्रभाव से उनसे भी स्नेह या द्वेष करने लगते हैं उनकी भी निंदा प्रशंसा आदि करते देखे सुने जाते हैं |       
          इसी प्रकार स्थान का होता है | कई बार  है कि दिल्ली में रहने वाला कोई व्यक्ति जिस काम को कलकत्ते में जाकर करता है और वहाँ उसका काम बहुत अच्छा चल जाता है उसीप्रकार के काम को कोई कलकत्ते में रहने वाला व्यक्ति दिल्ली में कर रहा होता है और बहुत अच्छा चल जाता है किंतु दिल्ली वाले का दिल्ली में नहीं चलता और कलकत्ते वाले का वही काम कलकत्ते में नहीं चल पाता है | इसका  मतलब दोनों प्रकार के काम दोनों शहरों में चल रहे हैं किंतु  उनके नाम के प्रथमवर्णों का अपने अपने महानगरों के साथ तालमेल न बैठ पाने  के कारण ही दोनों का अपने अपने  महानगरों  में मन नहीं लगता है | 
        कुलमिलाकर नाम के पहले अक्षरों  के प्रभाव के कारण ही  कुछ लोगों को जो देश  शहर नगर गाँव मोहल्ले   या लोग ,वस्तुएँ आदि रुचिकर  या अरुचिकर लगने लगते हैं जबकि उन्हीं के प्रति  कुछ दूसरे लोग उनसे विपरीत सोच रखते हैं जिन्हें ये पसंद कर रहे होते हैं उन्हीं से कोई दूसरे घृणा कर रहे होते हैं |ऐसे ही जिनसे  ये घृणा कर रहे होते हैं उन्हीं से मिलने के लिए कुछ दूसरे लोग बेचैन हो रहे होते हैं | 
          इसी प्रकार से   फिल्मों कहानियों नाटकों में कल्पित पात्रों के नाम का जो चयन किया जाता है  वो  उन पात्रों के नामों के प्रथम वर्णों के आधार पर उनकी भूमिका के अनुशार होना चाहिए अन्यथा उनमें उस प्रकार की सजीवता नहीं आ पाती है और उन्हें वो लोकप्रियता नहीं मिल पाती है जिसके वे  अधिकारी होते हैं |इसीलिए कई महत्वपूर्ण फिल्में  नाटक कहानियाँ आदि वर्ण विज्ञान की भेंट चढ़ गई हैं | कुछ फिल्में  नाटक कहानियाँ काव्य आदि ऐसे भी हुए हैं जिनमें जाने अनजाने में  संयोगवश ही वर्णविन्यास का संयोजन ठीक ठीक हो गया है इसीलिए उनकी प्रसिद्धि  दिनों दिन बढ़ती चली गई |  
रामचरितमानस में नाम विज्ञान -
     राम चरित मानस को ही लें इसमें गोस्वामी जी को वर्ण विज्ञान के अनुशार शब्दों का चयन करते देखा जाता है | इसी लिए तो कई बार कुछ पात्रों के नाम का चयन  वर्णविज्ञान  की दृष्टि से उतना सही होते नहीं दिखा तो गोस्वामी जी ने उस पात्र के नाम की जगह उस नाम के पर्याय वाची शब्द का प्रयोग  करके उसमें सजीवता भरने का प्रयास किया है जबकि  उस   नाम की जगह उतने ही अक्षरों का कोई  दूसरा  पर्याय वाची  शब्द भी मिल रहा होता है गोस्वामी जी चाहते तो  उस शब्द को ही रखकर कविता के प्रवाह को बचा सकते थे  किंतु वर्ण विज्ञान  को व्यवस्थित रखने के लिए ही गोस्वामी जी ने उस प्रकार का शब्द चुना  होता  है | 
 बाल्मीक रामायण  के युद्ध कांड का नाम मानस में लंका  काण्ड लिखा  गया क्यों ?
          इसी प्रकार से राम चरित मानस के सात कांडों का नाम रखते समय गोस्वामी जी बाल्मीकि रामायण  में वर्णित कांडों के नाम ही अपनी रामायण में भी लिखे  हैं बाल्मीकि रामायण के युद्धकांड की जगह पर गोस्वामी जी ने लंकाकांड शब्द का प्रयोग किया है  | यहाँ वर्ण विज्ञान व्यवस्थित रखने के लिए   हीइस प्रकार के उदाहरण देखने को मिलते हैं | 
             श्री राम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था फिर उनका नाम जन्म नक्षत्र के आधार पर क्यों नहीं रखा गया ?
           इस प्रकार से मानस में वर्णविज्ञान संबंधी   अनेकों उदाहरण मिलते हैं | भगवानी श्री राम के ही नाम को लें तो उनका जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था इसलिए ज्योतिष के नियमों के अनुशार उनका नाम ह अक्षर से ही रखा जाना था | के को हा ही ये चार अक्षर पुनर्वसु नक्षत्र में आते हैं  किंतु वशिष्ठ जी  ने ह अक्षर को दुर्बल  समझ कर  ही   उनका नाम ह अक्षर से न रखकर अपितु र अक्षर से राम नाम रखा था !गोस्वामी तुलसी दास जी ने भी यह छिपाया नहीं है -उन्होंने लिखा -धरेउ नाम गुरु हृदय बिचारी | अर्थात गुरू जी ने ज्योतिष बिचार कर नाम नहीं रखा है अपितु अपने मन से  वर्ण विज्ञान के आधार पर नाम रखा है | 
     श्री राम जी का नाम यदि उनके जन्मनक्षत्र पुनर्वसु के अनुशार ह अक्षर पर रख दिया जाता तब संभवतः श्री राम  के स्वामित्व संबंधी गुणों में न्यूनता आ जाती | शासन चलाने या अनुशासन बनाए रखने में  इस प्रकार की प्रसिद्धि नहीं मिल पाती | इसलिए र अक्षर का चयन किया गया | ह  अक्षर से नाम होने पर   शासन प्रशासन के क्षेत्र  में  उस प्रकार की  सफलता  नहीं  मिल पाती है |
       ह अक्षर से प्रारंभ नाम का ही  प्रभाव था कि हनुमान जी जैसे ज्ञानी वीर भक्त आजीवन सेवाकार्य  में लगे रहे | पहले सुग्रीव के साथ थे और बाद में  प्रभु श्रीराम  के साथ समर्पित  रहे |                   
      इतिहास में सम्राट हर्ष  जैसे राजा भी हुए हैं  उस समय बंश परंपरा के अनुशार राजा बनाए जाते थे उनका नाम कुछ भी हो राजा तो उन्हें बनना ही होता था | हिरण्याकशिपु  हिरण्याक्ष भी तो हुए थे महान पराक्रमी थे किंतु स्वामित्व के गुण न होने के कारण ये सत्ता का संचालन कुशलता पूर्वक नहीं कर सके |
     वर्तमान राजनीति में ही देखा जाए तो ह अक्षर वाले लोग कितने प्रदेशों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री या देशों में प्रधानमंत्री  राष्ट्रीय अध्यक्ष आदि बन पाते हैं और बन भी जाते हैं तो थोड़े बहुत समय में ही हटा दिए जाते हैं क्योंकि शासन के क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने में ये अपनी छवि नहीं बना पाते हैं | 
            भारत सरकार  में अभी तक  स्वास्थ्य मंत्री   दायित्व का सफल निर्वाह  करते  रहे  डॉ. हर्ष बर्द्धन  जी योग्य शालीन सहज भाव से अपने दायित्व का निर्वाह करते रहे हैं |इसके आधार पर केंद्र सरकार के दो दो बड़े मंत्रालयों को सँभालने के बाद इस प्रकार का कद तो बन ही जाना चाहिए था कि अधिक नहीं तो दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बनकर उभर पाते  और दिल्ली के विधानसभा चुनावो में अपनी पार्टी  की ओर  से  दिल्ली के मुख्यमंत्री के मजबूत दावेदारों  के रूप में उभारकर सामने लाए जा सके होते | मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने के लिए पार्टी के बाहर से किरण जी को लाया गया | 
        इसी प्रकार से हरीश रावत जी भी मृदु सहज सरल सुयोग्य शालीन हैं फिर भी मुख्यमंत्री पद पर रहकर अधिक समय तक काम कर पाना संभव न हो सका |
             इसके अतिरिक्त भी विश्व के कितने देशों प्रदेशों में राजनैतिक दलों या सरकारों का नेतृत्व  अपने बल पर सँभाल पा रहे हैं  या अभी तक सँभाल पाए हैं ये चिंतन का विषय है | 
ह अक्षर का प्रभाव हिंदुस्तान पर भी है !
         ह अक्षर पराश्रय  का स्वभाव प्रदान करता है  इसलिए हमारेदेश को जब से हिंदुस्तान  कहा  जाने लगा तब से परतंत्रता  हमारे स्वभाव में बशती चली गई | इसीलिए हमें मुगलों अंग्रेजों जैसे कई शासन सहने पड़े | किसी कारण तो हमें कमजोर समझा   गया  तभी तो  दूसरे देश हम पर  शासन करने में सफल हुए  | 
      ह अक्षर से जिन  लोगों का नाम प्रारंभ होता है उन्हें इस अक्षर के प्रभाव से अपने बल पर किसी संस्था संगठन पार्टी  सरकार आदि के प्रमुख पदों पर बहुत कम देखे जाते हैं  यदि ऐसे लोग किसी राजबंश की परंपरा से या अपनी किसी अन्य योग्यता के प्रभाव से  या धन के बल पर  किसी संगठन या सरकार के शीर्ष नेतृत्व को प्रभावित करके किसी प्रमुख पद तक पहुँच पाने में सफल हो भी जाते हैं तो प्रायः उस पद  की गरिमा के अनुरूप अपनी कोई विशेष छाप छोड़पाने में बहुत कठिनाई से ही सफल हो पाते हैं | अपनी जिम्मेदारी पर अपने दायित्व का निर्वाह करना उनके लिए काफी कठिन होता है | ये किसी से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाया करते हैं और बहुत जल्दी किसी से रुष्ट हो जाया करते हैं ये प्रायः बाल स्वभाव के धनी होते हैं | कश्मीर के राजा हरीसिंह  जी  के समय  पैदा हुई कश्मीर समस्या  आज तक चली आ रही है | 
        ह  अक्षर की दुर्बलता  के अन्य उदाहरण भी  व्यवहार में  देखने  को  मिला  करते  हैं | आसंदीवत  नामक  जो नगर कभी अपने गौरव के लिए प्रसिद्ध था | उसी नगर में हाथियों की अधिकता  हो जाने के कारण उसे हस्तिनापुर कहा जाने लगा | बताया जाता है कि उसके बाद ही क्रुद्ध  होकर बलराम जी ने   हल  से हस्तिनापुर  को खींच लिया था !इसके अतिरिक्त भी यह देश तनाव पूर्ण वातावरण का शिकार बना  रहा | गंगा जी अपनी बाढ़ में छै बार उसका कुछ कुछ भाग बहा ले गईं ऐसा बताया जाता है  |    
    पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों में वर्ण विज्ञान -        
                  घरों में पति पत्नी के संबंध बहुत मधुर हुआ करते थे दोनों के मन में दोनों के प्रति स्नेह और सम्मान हुआ करता था  किंतु जब से पति को हसबैंड कहा जाने लगा  तो  ह अक्षर के कारण पत्नी की आधीनता में रहना उसका स्वभाव ऐसा बनता चला गया इसीलिए हसबैंड  हमेंशा अपने माता पिता भाई बहन नाते रिश्तेदारों आदि के अपनेपन को भूलता जाता है  | वह वाइफ और वाइफ पक्ष के प्रति पराधीन होता चला जाता  है |
           पति और पत्नी के नाम के पहले अक्षर एक दूसरे के विरोधी न हों जो वैवाहिक जीवन में  तनाव पैदा होने लगे | इसीलिए पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे को उनके नाम से कभी नहीं   पुकारा करते थे अपितु संकेतों में ही एक दूसरे को संबोधित कर लिया करते थे !ऐसी परिस्थिति में न एक दूसरे का नाम लेते थे और न ही इससे प्रभावित होते थे इसलिए पति पत्नी के बीच उस समय तनाव के अवसर बहुत कम उपस्थित हुआ करते थे |जब से पति पत्नी  एक दूसरे को उनके नामों से  पुकारने लगे तब से आपसी  संबंधों  में तनाव की समस्याएँ अधिक बढ़ी हैं | 
            अपनों का नाम न बुलाना पड़े इसीलिए बहुत सोच बिचार कर संबंधों के नाम रखे गए थे जिनसे एक दूसरे के बीच टकराव की संभावना ही नहीं रहती थी | अपने से उम्र जो छोटा  होता था उसे लाला  बेटा बच्चा जैसे प्रिय संबोधन आत्मीय जनों के द्वारा दिए जाते थे  जो बड़े होते थे वे भैया चाचा दादा मामा मौसा दीदी  जीजा आदि संबंध नामों से ही पुकार लिया जाया करता था | न उनका नाम लिया जाता था और न ही वर्ण विज्ञान संबंधी दोष ही प्रकट हो पाते थे |
             साझे के व्यापारों सामाजिक संस्थाओं संस्थानों उद्योगों राजनैतिक दलों  आदि में वर्ण विज्ञान आदि   का बिचार न करने के कारण  आपसी तनाव बढ़ जाता है और बिना किसी विशेष कारण के संस्थाएँ टूटते  समाप्त होते देखी जाती हैं  | राजनैतिक दलों में फूट पड़ जाती है | वर्ण विज्ञान संबंधी   कारणों   से  भी राजनैतिक दलों के आपसी गठबंधन  और देशों प्रदेशों   की सरकारें   बनते बिगड़ते  देखी जाती हैं | 
             चुनावों  में किस नाम वाले प्रत्याशी के सामने किस नाम वाला प्रत्याशी उतारने से विजय की संभावना अधिक बन सकती है ये वर्ण विज्ञान का विषय है | किसी परिवार में राजनैतिकदल में गत बंधन में या कुछ देशों के बीच आपसी संबंधों में यदि तनाव बढ़ता दिखाई दे तो उसमें किस नाम वाले व्यक्ति को मध्यस्थता सौंपी  जाए जो उस तनाव को घटाकर परिस्थितियों को सँभालने में मदद पहुँचा  सकता है |इसका पता वर्ण विज्ञान के द्वारा लगाया जा सकता है  |
                विदेशों के राजनायिकों से किसी विशेष बात पर कोई महत्त्वपूर्ण  समझौता किए जाने की संभावना हो और संशय हो कि पता नहीं उस देश के प्रतिनिधि हमारी बात मानेंगे या नहीं  और बात मनवाना अपने देश के लिए बहुत आवश्यक हो ऐसी परिस्थिति में वर्ण विज्ञान का उपयोग करते हुए विदेशी राजनायिकोंके नामों के  प्रथम वर्णों के अनुशार अपने देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधिमंडल  में ऐसे लोगों को सम्मिलित करके वार्ता की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जा सकती है जिनके नाम के पहले अक्षर  उन  विदेशी प्रतिनिधिमंडल  में सम्मिलित  लोगों को प्रभावित करके अपनी बात मनवाने में सक्षम हों |

         अपने देश के विषय में -
         अपने प्राचीन गौरव पर बहुत सारी  बातें  देखने सुनने को मिला करती हैं | बताया जाता है कि भारत कभी विश्व गुरु था !कई लोग कहते हैं कि भारत कभी सोने की चिड़िया था किंतु इस प्रश्नका उत्तर मिलना कठिन हो जाता है कि भारत विश्व गुरु कब था और सोने की चिड़िया कब था तथा परतंत्र  कब हुआ  |     
भारतवर्ष  का  पहला अक्षर 'भ ' है !
       वर्ण विज्ञान की दृष्टि से बिचार किया जाए तो भ अक्षर ज्ञान प्रिय  होता है ,अ अक्षर प्रशासन प्रिय  होता  है और ह अक्षर पराश्रय के स्वभाव का निर्माण  करता  है |  अपने  देश को जब जब भारत कहा गया तब तब भारत ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ता रहा  इसलिए  इसे विश्वगुरु  जैसा  सम्मान  मिला ! वर्तमान  सरकार के समय में भारत नाम का व्यवहार  फिर से बढ़ा है इसलिए  फिर से भारत उसी गौरव के पथ पर अग्रसर  होते देखा जा रहा है |    
आर्यावर्त का  पहला अक्षर 'अ' है !
       अ    अक्षर  प्रशासक  स्वभाव का होता है इसीलिए अपने देश का नाम जब आर्यावर्त   था तब यह देश विश्व प्रशासक के रूप में प्रसिद्ध हुआ  | वर्तमान समय में  अ  अक्षर  से अमेरिका है  उसके पराक्रम के प्रति वैश्विक  समाज  का विश्वास बढ़ना  स्वाभाविक  ही है | घरों में माँ को जब तक अम्मा  कहने  की परंपरा  रही  तब  तक उन्हीं का शासन  चलते  देखा  जाता  था | चाचा और चाची के साथ भतीजे का संबंध  स्नेह पूर्ण चला करता था किंतु  अंकल   और  आंटी   शब्द  अ  अक्षर से प्रारंभ होते हैं ये अक्षर प्रशासक  स्वभाव के होने से भतीजे को इनसे चाचा वाला स्नेह नहीं मिलने लगा और आपसी संबंध प्रतिस्पर्द्धात्मक होते  चले गए |  इसी प्रकार स्कूलों में  अध्यापकों का  जो अनुशासन  और सन्मान देखा जाता था वो टीचरों  को कहाँ मिल पा   रहा है |ऐसे  ही नाम के पहले अक्षरों के कारण कई अन्य संबंध भी नाम के पहले अक्षरों के कारण बिगड़ते देखे गए हैं |
        इस प्रकार  से   सम्राटअशोक से ले कर अनेकों उदाहरण व्यवहार में  देखने  को  मिला  करते  हैं |   विश्व हिंदूपरिषद  में अशोक सिंघल जी ,भाजपा में अटल जी ,अमितशाह  ,उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ  दिल्ली में आदेश गुप्ता हैं | काँग्रेस में राजस्थान में अशोक गहलोत  पंजाब में अमरिंदर सिंह  हैं ,दिल्ली काँग्रेस में अजय माकन ,अरविंदर सिंह ,अशोक वालिया जैसे प्रमुख नेतागण  हैं | यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू  हैं | सपा में अखिलेश यादव हैं | आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल  हैं |फिल्मों में अमिताभ बच्चन एवं शासन में अजित डोभाल जैसे लोग भी प्रमुख हैं |           
            राजनीति  में भावी पीढ़ी का दखल अभी से दिखने लगा है | बसपा  में 'आकाश '(मायावती के भतीजे  ) हैं तृणमूल काँग्रेस में  अभिषेक बनर्जी  '(ममता के भतीजे  )हैं  | शिवसेना में आदित्य ठाकरे (उद्धव ठाकरे)के पुत्र हैं |  मनसे में अमित ठाकरे(राज ठाकरे) के पुत्र हैं |  प्रसपा में आदित्य यादव    (शिवपाल यादव के बेटे )  हैं | समाज के विभिन्न वर्गों में  अ अक्षर  के ऐसे और भी अनेकों उदाहरण हैं |  
       अ अक्षर प्रशासक स्वभाव  का  होता है किंतु किसी एक परिवार संस्थान संगठन  सरकार में   बराबरी के कई लोग जब  अ अक्षर वाले हो  जाते हैं तब वहाँ विवाद पैदा होने लगता है |आम आदमी पार्टी में तेरह लोग अ अक्षर वाले आमने सामने आ गए थे जब  तक तक कलह रहा आशुतोष और आशीष खेतान सहित उन तेरहों लोगों के  पार्टी से बाहर जाते ही   सब कुछ शांत   हो गया |     दिल्ली में अ अक्षर वाले अरविंद केजरीवाल सरकार की उपराज्यपाल अ अक्षर वाले अनिल बैजल जी से  तकरार चला ही करती है | 
        कई बार सरकारों की छवि बनाने बिगाड़ने में सक्षम ऊँचे पदों पर बैठे अफसरों का अपने मंत्रियों मुख्य मंत्रियों या प्रधानमंत्रियों आदि के साथ नामजनित तालमेल नहीं बन पाता है  या  फिर एक दूसरे का विरोधी होता  है ऐसे अफसर अपनी ही सरकारों की छवि बिगाड़ा करते हैं |  इसीलिए दिल्ली में अ अक्षर वाले अरविंद केजरीवाल सरकार में जब तक  पुलिसकमिश्नर  पद पर अलोक कुमार वर्मा एवं अमूल्य पटनायक  रहे  तब तक  आपसी आरोपों  प्रत्यारोपों का दौर चलता ही रहा और सरकार की छबि बिगड़ती रही  | यह परिस्थिति कुछ दिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी झेली है  जानकारी के अभाव में अन्य सरकारों में भी ऐसा होता रहता है उसका सरकारी काम काज की गुणवत्ता पर उसी प्रकार का प्रभाव पड़ता है | 
                कई परिवारों में इस बात के कारण ही कलह रहता है जिसका उन्हें पता नहीं होता है | मुलायमसिंह का नाम म अक्षर से प्रारंभ होता है इसलिए उन्हें परिवार में किसी से चुनौती नहीं मिली | पार्टी में जब अखिलेश का नेतृत्व आया तो परिवार की उस पीढ़ी में अपर्णा यादव सहित कई लोगों का नाम अ अक्षर से प्रारंभ होता है स्वयं शिवपाल के दोनों बच्चों का नाम अ अक्षर से आदित्य यादव और अनुभा यादव है | रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव  हैं | ऐसे ही  परिवार में कुछ अन्य नाम भी
 अ अक्षर से  हैं  इसलिए वे लोग अपने से आगे किसी दूसरे को कैसे सह सकते हैं | 
         पार्टी में भी यही यही स्थिति बानी रही | म अक्षर वाले मुलायम सिंह का नेतृत्व  सबको स्वीकार्य था क्योंकि म अक्षर वाला कोई दूसरा चुनौती देने वाला था नहीं फिर भी अमर सिंह आजम खान  दोनों के नाम अ अक्षर से हैं  इसलिए  दोनों आपस में टकराते रहे | जब अ अक्षर वाले  अखिलेश  को नेतृत्व मिला तब  तीनअ अक्षर वाले  हो गए  तो तीनों टकरा गए  परिणाम स्वरूप अमर सिंह बाहर किए गए  और आजम  अल्प संख्यक चेहरा रहे  इसलिए  उनके रूठने पर उन्हें मना लिया जाता रहा  | उधर   बालठाकरे  परिवार  में सब कुछ ठीक चलता रहा किंतु उद्धव के पुत्र आदित्य ठाकरे एवं  राज ठाकरे के पुत्र   अमित ठाकरे  दोनों ही एक दूसरे को अपने से  आगे  नहीं  देख सकते थे | इसलिए  साथ साथ वाली बात बिगड़ गई| 
           लालूप्रसाद यादव जी के परिवार में जब तक वे सक्रिय  रहे तब तक सब  कुछ ठीक था किंतु अब उनके दोनों बेटे ते अक्षर से हैं  ऐसी परिस्थिति में  दोनों बेटों का एक साथ एक पार्टी या एक सरकार में रहकर संगठन का संचालन कर पाना केवल कठिन ही नहीं अपितु असंभव भी है  | 
              राहुल गाँधी   का अपने बल पर प्रधानमंत्री    बन पाना कठिन है किसी दूसरे के नाम पर चुनाव लड़ा जाए बाद में इन्हें बना दिया जाए    या कोई और ऐसे समीकरण बनें    जिससे कुछ लोग   गत बंधन आदि बना कर इन्हें प्रधान मंत्री बना दें ये और बात है | 
         र अक्षर वाले किसी भी व्यक्ति में बहुतों को बहुत कुछ बना देने की अद्भुत क्षमता होती है श्री राम जी ने सुग्रीव और विभीषण को राजा अपने बल पर बनाया किंतु खुद भरत जी के दिए हुए राज्य से राजा बने | ये अपनी सलाहों से बहुतों को अपना बना लेने में सक्षम होते हैं बिरले ही लोग इनकी बातों का बुरा मानते हैं | वे बहुत सम्मान भी देते हैं  इसीलिए सरकारें बनाने बिगाड़ने में या भाजपा के राम लाल जी की तरह संगठन को संगठित रखने में बड़ी भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं | सपा के रामगोपाल जी की तरह सलाहकार अच्छे हो सकते हैं किंतु  जैसे ही किसी संगठन सरकार आदि का प्रमुख पद इनके हाथ में पहुँचता है वैसे ही इनके  आत्मीय लोग इनसे किनारा करने लग जाते हैं धीरे धीरे धीरे ये अलग थलग पड़ते  चले जाते हैं और पद त्याग कर देते हैं | किसी दूसरे की प्रतिष्ठा के बलपर प्राप्त सत्ता का संचालन किया करते हैं | र अक्षर वाले श्री राम जी भरत जी के राज्य से राजा बने थे !रावण कुबेर के राज्य से बना था | वर्तमान राजनीति में राजीवगाँधी जी को इंद्रा जी के निधन से उत्पन्न हुई शोक संवेदना का लाभ मिला था | लालू जी की प्रतिष्ठा पर रावड़ी जी मुख्यमंत्री पद पर रह पाई थीं | कुल मिलाकर र अक्षर वाले बहुत कम लोग हैं जो अपने बल पर सत्ता के शिखर पर पहुँच सके हों  जो पहुँचे भी  उनमें से निन्यानवे प्रतिशत लोग अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए | ऐसी परिस्थिति में राहुलगाँधी जी को सत्ता तक पहुँचाने के लिए किसी वर्णवैज्ञानिकता की मदद की अपेक्षा है | 
          बिहार चुनाव से पहले मैंने एक पत्र कुछ जिम्मेदार लोगों को लिखा था कि बिहार में नीतीश कुमार को यदि पाँच सीटें मिलें तो भी उन्हीं को मुख्यमंत्री बना देना भाजपा के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा अन्यथा वे स्वयं कुछ विशेष करने लायक भले न हों किंतु उनके नेतृत्व में जो कुनबा इकठ्ठा होगा वह केंद्र सरकार के लिए समस्या अवश्य पैदा कर सकता है | 
        भाजपा को पूर्ण बहुमत भले मिल जाए तो भी भारतवर्ष में अपने बलबूते पर सत्ता संचालन करना आसान नहीं होगा इसीलिए अटल अडवाणी जी जैसे महारथियों को भी किसी वर्ण वैज्ञानिक की सलाह पर 'राजग' का गठन करना पड़ा था उसके बाद ही केंद्र की सत्ता में भाजपा अपना कार्यकाल पूरा कर सकी वर्तमान समय में राजग बिखर रहा है यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है क्योंकि राजग  को छोड़कर यदि भाजपा केवल अपने बलबूते पर सरकार गठन करती है तो सत्ता संचालन  भाजपा के लिए आसान नहीं होगा  | 
          इसीप्रकार से व्यापार परिवार  वैवाहिक जीवन घरेलू सदस्यों के आपसी तनाव संस्था संस्थानों राजनैतिक दलों  सरकारों गठबंधनों विदेशों के साथ किसी विशेष वार्ता को करने के लिए बनाए जाने वाले प्रतिनिधि मंडल के संचालन के लिए  वर्णवैज्ञानिक चिंतन की बहुत अधिक आवश्यकता होती है इसके बिना अकारण ही समाज विखर रहा है परिवार टूट रहे हैं वैवाहिक जीवन समस्या ग्रस्त होते जा  पहले   ऊटपटांग नाम रख  लेते हैं | बाद में वे उन्हीं से बुढ़ापे में किनारा कर लेते हैं | प्रमोद जी सहित बहुत  परिवारों में तनाव का कारण वर्ण वैज्ञानिक समस्याएँ ही रही हैं | तलाक जैसी समस्याओं में भी एक बड़ा कारण वर्ण विज्ञान का व्यवस्थित न होना ही है |
             सभी वर्णों के विषय में ऐसा सोचा जाना चाहिए उनके एक दूसरे वर्ण के साथ संबंध के आधार पर ही लोगों की एक दूसरे के साथ मित्रता शत्रुता आदि के विषय में परिकल्पना कर ली जाती है |


 

Tuesday, August 10, 2021

देश काल शब्द परिस्थिति प्रयास और भाग्य

         देश काल परिस्थिति प्रयास ,भाग्य और नाम जैसे घटक प्रकृति और जीवन को हमेंशा से प्रभावित करते रहे हैं | इसलिए  प्रकृति  और जीवन में अच्छी बुरी जितनी भी घटनाऍं घटित होती हैं उनके लिए प्रायः यही कारण जिम्मेदार होते हैं किसी घटना में इनमें से कोई एक कारण होता है किन्हीं में दो कारण होते हैं कुछ में दो तीन चार या कभी कभी तो पाँचों कारण सम्मिलित होते हैं  | कुछ घटनाएँ ऐसी भी होती हैं जिनमें  ये घटक न्यूनाधिक अनुपात में सम्मिलित होते हैं | 

        किसी व्यक्ति, वस्तु ,स्थान या घटना  के  स्वभाव पर  उसके नाम का प्रभाव बहुत अधिकपड़ता है | इस महामारी का नाम कोरोना महामारी या कोविड रखा गया जिनका पहला अक्षर 'क' है | 'क'   हिंदी वर्णमाला के व्यंजन समूह का पहला अक्षर है | इसके स्वभाव के अनुशार ही कोरोना महामारी का स्वभाव बना रहा लोग पकड़ते रहे किंतु ये पकड़ में नहीं आ सका |

            इसीलिए प्रत्येक घटना की वास्तविकता  समझने के लिए  उस घटना में सम्मिलित कारणों को खोज कर सबसे पहले उन्हें सामने लाना होता है कि उस घटना के घटित होने में प्रमुखकारण  कौन कौन कौन से हैं |इसके बाद उन संबंधित कारणों के आधार पर ही उस घटना के घटित होने के आधार भूत प्रमुख तत्व खोजे जा सकते हैं | उसके बाद उन्हीं संबंधित कारणों के आधार पर पूर्वानुमान लगा लिया जाता है  | 

             इसके अतिरिक्त  जो घटना जिस विधा से संबंधित होती है उसके अतिरिक्त किसी दूसरी पद्धति का आश्रय लेकर उस पर कोई रिसर्च प्रारंभ किया जाता है तो उससे कोई सार्थक परिणाम आने की संभावना  नहीं रहती है है जैसा कि कोरोना महामारी के समय हुआ | महामारी समय जनित घटना है इसलिए इसके विषय का अनुसंधान भी समयविज्ञान पद्धति से ही किया जाना चाहिए था  किंतु ऐसा न करने का परिणाम ही है कि कोरोना महामारी के घटित होने का कारण ,विस्तार,प्रसार माध्यम ,अंतर्गम्यता आदि के विषय में कोई पारदर्शी प्रामाणिक निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सका है | इसके अतिरिक्त कोरोना महामारी पर किस मौसम का प्रभाव कैसा पड़ता है तापमान एवं वायु प्रदूषण बढ़ने घटने का इस पर क्या प्रभाव  पड़ता है इसके शुरू होने और समाप्त होने का या संक्रमितों की संख्या घटने और बढ़ने का पूर्वानुमान कैसे लगाया जा सकता है आदि |  कोरोना  संबंधित रहस्यों को समझना सुलझाना एवं पूर्वानुमान लगाना ये सब समय संबंधी अनुसंधानों के द्वारा ही संभव था  और समयसंबंधी उसप्रकार के अनुसंधान न होने के   कारण ही कोरोना महामारी से संबंधित किसी रहस्य को आज तक सुलझाया नहीं जा सका है |
              किसी के स्वभाव पर उसके नाम का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है इस दृष्टि से कोरोना महामारी समय से संबंधित घटना तो है ही  इसके साथ ही  कोरोना महामारी के नाम का पहला अक्षर  'क 'है  इसका भी प्रभाव पड़ता है | 

 

                




              कृष्णभगवान अपनी लीलाओं से  लोगों को जितना प्रभावित कर सके उतना राजा बनकर नहीं कर सके ! आज भी श्री कृष्ण की बाल लीलाएँ  ही अधिक प्रसिद्ध  मानी जाती हैं  | क अक्षर खेल कूद हँसी मसखरी में सफलता प्रदान करता है | वर्तमानसमय में  भी कपिलदेव ,कीर्तिआजाद,कपिलशर्मा  अपने अपने क्षेत्र में ही सफल हुए हैं |

          कृष्ण भगवान बंशी बजाकर खेल कूद आदि मनोरंजन पूर्ण कार्य करके लोगों के मन को मोह लिया करते थे | कर्ण धनुर्विद्या में प्रवीण होने के कारण लोगों का स्नेह जीतने में सफल हुए  ! वर्तमान समय में कपिल सिब्बल वकालत संबंधी योग्यता के कारण ,कपिलदेव ,कीर्तिआजाद  ने खेल कूद कर लोगों को आकर्षित किया ,कपिलशर्मा ने  कॉमेडी करके कुमार विश्वास ने कविता गाकर अपनी लोकप्रियता बनाने बढ़ाने में सफल हुए  | 

              कृष्णभगवानका एक नाम रणछोड़दास  भी पड़ा है ! क्योंकि कपट पूर्ण जीवन जीना इनकेस्वभाव में नहीं होता है  जब जरासंध ने कपटपूर्ण  व्यवहार किया  तो श्रीकृष्ण को रण छोड़कर  पड़ा था |अनुशासन  शासन कठोर स्वभाव  किसी सिद्धांत को पकड़ कर चलना इनके स्वभाव में नहीं होता है फिर भी ये अपनी बाणी को कभी फँसने नहीं देना चाहते कि कल कोई ऐसा कुछ कहे कि ये बात आपने भी नहीं बताई थी !इसलिए जो जानकारी हासिल होती है वे छिपाकर कुछ नहीं रख पाते हैं सब कुछ उगलते चले जाते हैं इसलिए ये हर विषय पर अपनी बेबाकराय रखने लिए जाने जाते हैं कुछ छिपाकर चलना  इनके स्वभाव में नहीं होता है  वैसे राजनीति कपटपूर्ण आचरण का ही दूसरा नाम है इसी कारण  ऐसे लोग अपने बलबूते तो नेता बन नहीं पाते हैं  अपितु राजनीति के अलावा अपनी किसी अन्य प्रतिभा से किसी नेता को प्रभावित करके  ये तब तक के लिए राजा ,शासक या नेता बन जाया करते हैं जब तक कि उसे प्रभावित कर पाते हैं | जिस दिन वो रुष्ट होता है उसी दिन राजनीति समाप्त हो जाती है | कई बार किसी का किसी नेता के साथ अच्छा सामंजस्य बन जाता है तो लंबा समय भी राजनीति में निकल जाता है | इसके बाद भी राजनैतिक छल कपट न होने के कारण वे अपने बलबूते पर अपनी  नेतृत्व क्षमता सिद्ध नहीं कर पाते  हैं | 

         इसीलिए  कपिलसिब्बल,कमलनाथ,कुमारविश्वास,कपिलमिश्रा, कन्हैयाकुमार  की  आकर्षक क्षमता का लाभ दूसरे लोग लेकर   इनका लाभ लिया करते हैं इसके बाद इनसे किनारा कर लिया करते हैं | ये क अक्षर वाले लोग प्रशंसा प्रिय होने के कारण  ये शासन के क्षेत्र में अपना व्यक्तित्व न बनाकर हमेंशा दूसरों को ही खुश रखने में लगे रहते हैं | वे अपनी मर्जी के मालिक होते हैं जबतक चाहते हैं इनका उपयोग करते हैं जब चाहते हैं तब छोड़ देते हैं | कुछ लोग कृष्ण जी की तरह हमेंशा उपयोगी  बने रहते हैं जिसके कारण पांडव उन्हें छोड़ने का साहस कभी नहीं जुटा सके और उधर  कर्ण आजीवन दुर्योधन   के प्रति समर्पित बना रहा | 

           ऐसे लोगों  का व्यक्तिगत जीवन में कोई शत्रु   नहीं  होता है  इसलिए ये जिस विश्वास  करने लगते हैं उसी के हो जाते हैं उसी के मित्रों को ये अपना  मित्र और उसी   के शत्रु को अपना शत्रु मानने लग जाते हैं |वे ही जैसा चाहते हैं वैसा ही बात व्यवहार आचार बिचार आदि अपना लिया करते हैं | ऐसी परिस्थिति में  उनके साथ रहते बहुत भीड़भाड़ में रहते हुए भी  इनका अपना  कोई नहीं बन पाता है इसका एहसास उन्हें तब होता है  जब वे उसको छोड़ते हैं जिसके साथ रहने के कारण वे उस भीड़भाड़ को अपनी समझने लगते हैं   |

   


       क अक्षर वाले लोग चुलबुले चंचल और प्रसन्नता प्रिय होते हैं गंभीरता अनुशासन प्रियता इनके स्वभाव में नहीं होती है | यही कारण है कि ये अपने बलबूते पर राजकाज करने में या राजनीति करने या मुख्यबात शासन सत्ता सँभालने में  या कपटपूर्ण व्यवहार करने में या कूटनैतिक पैंतरेबाजी करना इनके बश की बात नहीं होती !चूँकि ऐसा करने की  हिम्मत ही नहीं पड़ती है क्योंकि इनका उस प्रकार का स्वभाव नहीं होता है | इनमें समाज को आकर्षित  कोई  गुण  होता है  विद्या लेखन भाषण वाद विवाद कला गायन नर्तन  अभिनय  जैसे गुणों से ये बहुतों को अपना प्रिय बनालिया करते हैं 

 

में ये सफल नहीं हो  पाते हैं  

 

 

कर्ण      कपिलसिब्बल,कमलनाथ,कपिलमिश्रा,  , कन्हैयाकुमार,कुमार विश्वास    आदि और भी ऐसे लोग हैं  जिन्होंने लेखन पठन पाठन अध्ययन अध्यापन  वाद विवाद कॉमेडी कविता खेलकूद  आदि  में  जो ख्याति अर्जित की वो किसी प्रशासकीय पद पर बैठकर मिलना संभव नहीं होती है |क्योंकि शासन की सुख सुविधाओं एवं बाहरी चकाचौंध को देखकर ये राजनीति की ओर आकर्षित तो हो जाते हैं  अच्छाइयों के कारण में इनकी यही वह प्रमुख कारण है कारण  


हर्षबर्द्धन

उससे संबंधित अनुसंधान

Friday, July 16, 2021

संस्कृत विश्व विद्यालय ही संस्कृत के सबसे बड़े शत्रु हैं !

       भ्रष्टाचार के कारण कोरोना जैसी महामारियाँ पैदा होती हैं  और भयानक स्वरूप धारण कर पाती हैं |सतर्क सरकारें ऐसी महामारियों को आने से पहले ही रोक सकती हैं पुराने राजा लोग ऐसा किया भी करते थे |

    जिस आधुनिक विज्ञान से संबंधित वैज्ञानिक लोग कोरोना महामारी के विषय में जो जो अनुमान लगाते रहे वे गलत निकलते रहे | महामारी का स्थाई स्वभाव लक्षण आदि नहीं निश्चित किए जा सके !विस्तार क्षेत्र प्रसार माध्यम आदि नहीं खोजा जा सका |इसपर मौसम तापमान वायु प्रदूषण आदि के प्रभाव को नहीं खोजा  जा सका इसकी अंतरगम्यता नहीं पता लगाई जा सकी | महामारी के शुरू होने से पहले उसके विषय में पूर्वानुमान नहीं लगा सके !इसके पैदा होने का कारण नहीं खोज सके !कोरोना संक्रमितों की संख्या अपने आप कभी बढ़ जाती है और कभी कम हो जाती है किंतु कब कम होगी कब बढ़ेगी और कब समाप्त होगी !इसका न तो कारण बता सके न ही पूर्वानुमान | तीसरी चौथी आदि लहरें आने की जहाँ तक बात  रही है इसका वैज्ञानिक आधार तो कुछ  है नहीं !अगर तीसरी लहर आ जाएगी तो तीसरी लहर वाली भविष्यवाणी सच मान ली जाएगी  और यदि तीसरी लहर नहीं आएगी तो हमने कंट्रोल कर लिया है इसलिए नहीं आई है |किसी रोग या महारोग की औषधि बना पाना तो तब संभव है जब उस रोग महारोग आदि को ठीक ठीक समझा जा सका हो !रोग को अच्छी तरह से समझे बिना उसकी चिकित्सा कैसे संभव है | 

       ,महामारी का सामना करने के लिए अनुसंधानों के नाम पर हम बिल्कुल खाली हाथ खड़े थे महामारी को लेकर क्या हमारी  कोई तैयारी नहीं थी !ऐसी महामारी कभी आ सकती है मैंने इस विषय में पहले से कुछ क्यों नहीं सोचा जाना चाहिए था जबकि वैज्ञानिक अनुसंधान आखिर क्या खोजने के लिए हमेंशा चलाए जाते हैं |आत्ममंथन किए जाने की आवश्यकता है | 

   महामारी से निपटने की जिम्मेदारी केवल आधुनिकविज्ञान से जुड़े अनुसंधान कर्ताओं की ही तो नहीं है !क्योंकि किसी भी प्राकृतिक घटना का पूर्वानुमान लगाने की जिम्मेदारी के लिए अनादि काल से ज्योतिषशास्त्र की पहचान बनी हुई है |ज्योतिष शास्त्र में मौसम एवं महामारियों से संबंधित घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने की विधियाँ बताई गई हैं |उसी ज्योतिषशास्त्र  के विद्वान् मानकर जिन्हें सरकारी संस्कृत विश्व विद्यालयों में रीडर प्रोफेसर जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता है | ये उनका दायित्व बनता है कि मौसम और महामारी से संबंधित पूर्वानुमान वे भारत सरकार को आगे से आगे उपलब्ध करवाकर सरकार एवं समाज की मदद करते ! किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया क्यों ?

     इसीप्रकार से वेदवर्णित यज्ञादि विधानों में अनेकों ऐसे यज्ञों का वर्णन मिलता है जिनके द्वारा प्राकृतिक आपदाओं एवं महामारियों से समाज को मुक्ति दिलाई जा सकती है |वेद विद्वानों के द्वारा समय समय पर ऐसे दावे भी किये जाते रहे हैं | उन्हीं वेदों शास्त्रों आदि के विद्वान् मानकर जिन्हें सरकारी संस्कृत विश्व विद्यालयों में रीडर प्रोफेसर जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता है | महामारी से जब जनता अकेली जूझ रही थी तब ये जिम्मेदारी उनकी भी बनती थी कि ऐसे कठिन समय में यज्ञ यागादिक अनुष्ठानों के द्वारा महामारी पर अंकुश लगाकर इस महा मुसीबत में जनता की मदद करते !उन्होंने ऐसा आखिर क्योंनहीं किया ?

      संस्कृत विश्व विद्यालयों में कुलपति जैसे पदों पर प्रतिष्ठित किए जाने वाले लोगों में इस जिम्मेदारी को निर्वाह करने का एहसास क्यों नहीं था कि जनता पर आए इतने बड़े संकट के समय उनके विश्व विद्यालयों की भी कोई जिम्मेदारी बनती है | संस्कृतविज्ञान की क्षमता को समझने की उनमें योग्यता नहीं थी या वे इतने लापरवाह एवं अदूरदर्शी हैं या उन्हें ये पता था कि जिन रीडरों प्रोफेसरों की नियुक्तियाँ उनके कार्यकाल में की गई हैं उनमें उन विषयों की योग्यता नहीं हैं जिन पदों पर उन्हें प्रतिष्ठित किया गया हैं इसलिए जनता की ऐसी महामुसीबत में उन्होंने मौन  रहना ही बेहतर समझा है | 

            ऐसे कुलपतियों को नियुक्त करने वाले लोगों की क्या मजबूरी है कि वे अपने अपने कर्तव्यों का पालन करने की क्षमता से विहीन अयोग्य एवं गैर जिम्मेदार लोगों को संस्कृत विश्व विद्यालयों में कुलपति जैसे बड़े पदों पर प्रतिष्ठित कर देते हैं | उनकी आखिर कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं होनी चाहिए | इतना बड़ा पद उसके अनुसार सैलरी और जिम्मेदारी शून्य !उसका परिणाम जनता को भोगना पड़ता है | ऐसे कुलपतियों के कार्यकाल में विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों का आधार उनकी योग्यता थी या कुछ और इसकी जाँच क्यों नहीं करवाई जानी  चाहिए !महामारी के समय जनता की मदद करने में जो पूरी तरह असफल हुए हैं इस बात को यूँ ही भुला दिया जाना जनता के पक्ष में कतई ठीक नहीं है | यदि संस्कृत का उत्थान लक्ष्य है तो ऐसे प्रकरणों की न केवल निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए अपितु संस्कृत के उत्थान की राह में रोड़ा बने दोषियों के विरुद्ध पारदर्शिता पूर्वक कार्यवाही भी की जानी चाहिए  |

            आयुर्वेद के शीर्ष ग्रंथ चरक संहिता में महामारी प्रारंभ होने से पहले महामारी आने का पूर्वानुमान लगाने की न केवल विधि बताई गई है अपितु महामारी आने से पहले ही महामारी से मुक्ति दिलाने वाले औषधीय द्रव्यों के भी संग्रह का निर्देश दिया गया है | आयुर्वेद के बड़े बड़े शिक्षण संस्थानों में नियुक्त रीडर प्रोफेसर आदि सरकारी आयुर्वेदज्ञ लोगों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे महामारी जनित रोगों से मुक्ति दिलाते किंतु उनकी तरफ से भी ऐसी कोई भूमिका अदा नहीं की गई |   इसके कारण  तो सभी से पूछे जाने चाहिए   | 

             भारत में जब राजतंत्र था उस समय  ऐसे विषयों के विद्वानों की इस प्रकार की धाँधली नहीं चला करती थी | प्रत्येक विषय के विद्वानों की योग्यता का परीक्षण उस समय डिग्रियों के आधार पर न होकर अपितु खुली समाज में शास्त्रार्थ के द्वारा हुआ करता था | ज्योतिषियों  को मौसम या महामारी जैसी घटनाओं का आगे से आगे सही सही पूर्वानुमान उपलब्ध  करवाना ही होता था |उनके असफल  होने का कारण उनकी अयोग्यता मानी जाती थी | 

               ज्योतिषियों से पूर्वानुमान मिल जाने पर महामारी जैसी सभीप्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से बचाने की व्यवस्था आगे से आगे की जाती थी  वेदों के विद्वान लोग ऐसे यज्ञ अनुष्ठान आदि आयोजित किया करते थे | जिनसे प्राकृतिक आपदाओं  के प्रारंभ होने से  पूर्व ही उन पर अंकुश लगाने की व्यवस्था की जाती थी | यदि थोड़ा बहुत झटका   महामारियों का  लग  भी जाता था  तो उसके लिए आयुर्वेद के विद्वानों ने आगे से आगे औषधियाँ तैयार करके रखी होती थीं उनसे समय रहते   महामारियों को नियंत्रित कर लिया जाता था   | 

               उस युग में यदि इतनी सतर्कता न बरती जाती   तब तो सृष्टि आगे ही नहीं बढ़  पाती  ! उस समय न तो इतनी अत्याधुनिक मशीने थीं  | जाँच के लिए इतने उत्तम  संसाधन  नहीं थे | वैक्सीन  जैसी व्यवस्था  की   परिकल्पना ही नहीं थी !ऐसी परिस्थिति में सृष्टि का आगे बढ़ पाना कैसे संभव था |

 सरकारी संस्कृत विश्व विद्यालयों के ज्योतिष विभागों में ज्योतिष शास्त्र को पढ़ाने की जिम्मेदारी सँभाल रहे लोगों में ऐसे अनुसंधान करने की योग्यता नहीं है क्या ? क्या सोर्स सिफारिश और घूसखोरी के आधार पर अयोग्य लोगों को योग्य पदों पर कुछ छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित कर दिया गया है ? इतनी इतनी भरी भरकम सैलरी उठाने वाले  संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों  ज्योतिषविभागाध्यक्षों प्रोफेसरों रीडरों की इतनी बड़ी लापरवाही पर सरकारों का मौन संशय पैदा करता है | 

 

इतनी बड़ी चूक होने के 

   




            संस्कृत विश्व विद्यालयों  में कुलपति  रीडर   प्रोफेसर आदि पदों पर भ्रष्टाचारपूर्वक जिनकी नियुक्तियाँ की जाती हैं  उन अयोग्य  लोगों में महामारी  का पूर्वानुमान लगाने एवं यज्ञादि प्रयासों से उस पर अंकुश लगाने की योग्यता ही नहीं होती है | कुलपति  पदों पर विराजमान अयोग्य एवं कर्तव्यभ्रष्ट लोग संस्कृत को इतना दुर्बल सिद्ध कर देते हैं  कि महामारी में भारत के प्राचीन विज्ञान की कोई भूमिका  दिखाई ही नहीं पड़ती है | 

             ज्योतिषविभाग हैं उनके रीडर प्रोफेसर हैं जिन्हें सरकारी कोष से भारी भरकम धनराशि सैलरी के रूप में दी जाती है | ऐसे विश्व विद्यालयोंके कुलपतियों से लेकर शिक्षकों तक की नियुक्तियों में इतना अधिक भ्रष्टाचार व्याप्त है कि  अयोग्य लोगों को योग्य पदों पर बैठा  दिया जाता है जो कुछ करने लायक नहीं होते हैं |भ्रष्टाचार का यह ज्वलंत प्रमाण है कि भारी भरकम सैलरी लेने वाले संस्कृत विश्व विद्यालयों के ज्योतिष  विभागों के रीडर प्रोफेसरों के द्वारा कोरोना महामारी के विषय में कोई पूर्वानुमान नहीं बताया जा  सका है |विज्ञान के नाम पर बातें  हों किंतु  महामारी के शुरू और समाप्त होने का कारण  खोजै नहीं जा सका है    का पूर्वानुमान लगाना ही इससे बचाव का एक मात्र विकल्प है | पूर्वानुमान लगाना आधुनिक विज्ञान के बश का होता तो वो अबकी बार ही लगा लेते | 

    

      संस्कृत विश्व विद्यालयों में कुलपति पद पर नियुक्त लोगों की यह जिम्मेदारी बनती है कि अपने विश्व विद्यालयों में वे ऐसे विषयों पर अनुसंधान करवावें आवश्यकता पड़ने पर देश और समाज के काम आवें | भारत वर्ष में प्राचीन काल में भी तो प्राकृतिक आपदाएँ महामारियाँ आदि घटित होती रही हैं तब तो आधुनिक विज्ञान नहीं था | उस समय तो ऐसी संकटकालीन परिस्थितियों से मुक्ति दिलाने की संपूर्ण जिम्मेदारी प्राचीन विज्ञान पर होती थी और वे ऐसे संकटों से जनता को बचाने का रास्ता भी निकाल लिया करते थे | उसी प्राचीन विज्ञान पर इसी उद्देश्य से अनुसंधान करवाना संस्कृत विश्व विद्यालयों का कर्तव्य होता  है | ऐसे संस्कृत विश्व विद्यालयों में कुलपति पद नियुक्त किए गए लोगों से ये अपेक्षा होती है कि वे इसके लिए  करेंगे किंतु प्राकृतिक आपदाओं  और महामारियों के समय ऐसे पदों पर प्रतिष्ठित लोगों का मौन एवं निष्क्रिय  बने रहना  दुखद है | 

            सभी धर्मों संप्रदायों ने के शीर्ष आचार्य अपने अपने आराध्य  को सर्व सक्षम बताते थकते नहीं हैं और अपने को सिद्ध साधक संत आदि पदों पर प्रतिष्ठित कर लेते हैं | उनमें से कुछ आचार्य लोग ऐसे भी होते हैं जो जनता के बड़े बड़े दुखों रोगों संकटों आदि को दूर करने में अपने को इतना अधिक सक्षम मानते हैं कि बड़े बड़े जनता दरवार लगवाकर उनके दुखों रोगों संकटों आदि से मुक्ति दिलाने का दंभ भर रहे होते हैं | महामारी से जूझती जनता को इस आपदा से मुक्ति दिलाने का उनका भी दायित्व बनता है किंतु उनकी ओर से भी ऐसे कोई प्रभावी प्रयास होते नहीं दिखे जिनके कुछ जनता को लाभ भी हुआ हो जबकि उनके जीवनयापन समेत संपूर्ण सुख सुविधाओं की व्यवस्था का भी संपूर्ण खर्च जो उनके अनुयायी वहाँ करते हैं वे भी इसी समाज के अंग हैं वे भी महामारी से पीड़ित हुए हैं | उन्हें भी इस महामारी ने बहुत दुःख दिए हैं ऐसी महामुसीबत में जनता की मदद करने का कुछ दायित्व  तो उनका भी बनता ही है | भविष्य में संभावित महामारी में जनता की मदद करने के लिए कुछ संकल्प तो उन्हें भी लेने ही चाहिए  |

      सरकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति हमेंशा से रही है इस प्रवृत्ति के कारण योग्य पदों पर अयोग्य लोगों के बैठने का रास्ता आसान बना रहता है |ऐसान्यूनाधिक हर युग में होता रहा है फिर ये तो कलियुग है | महामारी के समय ये बात खुलकर सामने दिखाई पड़ी है |सरकार के जो विभाग जिन कार्यों के उद्देश्य से जिन विषयों का अनुसंधान करने के लिए बनाए गए हैं |यदि उन्हीं विभागों से संबंधित कार्यों की आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमिका का निर्वाह करने में वे असफल  हुए हैं और कोरोना महामारी के समय उन विभागों से आशानुरूप उस प्रकार की मदद नहीं मिल पाई  है तो कहीं न कहीं कोई बड़ी चूक हो रही है जिसका दंड निरपराध जनता को प्राकृतिक आपदाओं एवं महामारियों के रूप में भुगतना पड़ता है | भविष्य में ऐसी परिस्थिति न पैदा हो इसके लिए सरकारों को अभी से गंभीरता पूर्वक सभी सक्षम विधाओं को सम्मिलित करके कोई ऐसी वैज्ञानिक विधा विकसित करनी अवश्य चाहिए ताकि भविष्य में जब कभी दूसरी महामारी आवे तब सरकार एवं समाज के पास अपने पास बचाव के लिए कुछ तो हो अबकी तरह बिल्कुल खाली हाथ न हो | 

      आधुनिक विज्ञान हो या प्राचीन विज्ञान सरकार अनुसंधानों के नाम पर सभी पर खर्च करती है | निरपराध जनता टैक्स रूप में अपने खून पसीने की कमाई से जो धन सरकारों को देती है जनता का वो धन सरकारें जिन जिन विभागों पर व्यय करती हैं वे विभाग जनता की मदद करने में कितने सफल हो पाते हैं |इस बात का परीक्षण पारदर्शिता पूर्वक करना सरकारों की अपनी जिम्मेदारी है | जनता के प्रति यह जवाबदेही  सरकारों  की बनती है | 

    बिना हथियारों के महामारी से लड़ने या उस पर विजय प्राप्त करने का दावा कितना भी कर लिया जाए किंतु सच्चाई यही है कि पिछले डेढ़ वर्ष में कोरोना महामारी के विषय में हमारे वैज्ञानिकों के द्वारा जितने भी अनुमान लगाए जाते रहे वे सभी गलत निकलते रहे | महामारी के स्वभाव के विषय में जो भी बोला जाता रहा वो सच न होने के कारण ही बाद में महामारी के  स्वरूप बदलने की बात बोली  जाती रही जबकि महामारी के  वास्तविक स्वरूप के विषय में किसी को कुछ पता ही नहीं था | 

    
कोरोना महामारी हो या वर्षा बाढ़ आँधी तूफ़ान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ एक बार प्रारंभ होने के बाद अपनी मर्जी से ही जाती  हैं और ये पहले धक्के में ही जितना नुक्सान करना  होता  है वो कर देती हैं बाद में तो भूकंपों की तरह कुछ समय तक हल्के झटके लगते रहते हैं | महामारी भी अपने समय से ही जाएगी ! इसके समाप्त होने का संभावित समय क्या होगा !इसे खोजे जाने की आवश्यकता है |

       महामारी के विषय  वास्तविक अनुसंधानों से यूं ही बचा जाता रहेगा और संक्रमितों की संख्या बढ़ने का कारण कोरोना नियमों का पालन न करने को मान लिया जाएगा और संक्रमितों की संख्या कम होने का कारण कोविड नियमों का पालन आदि उपायों को माना जाता रहेगा और तीसरी चौथी आदि लहरों की निराधार अफवाहें इसी प्रकार से उड़ाई  जाती रहेंगी | उन अफवाहों के अनुशार महामारी संक्रमितों की संख्या यदि बढ़ने लगी तो  भविष्यवाणी को सच मान लिया जाएगा और तीसरी लहर न आई तो वैक्सीन आदि प्रयासों से उसे कंट्रोल कर लिया माना जाएगा | समय प्रभाव से महामारी जिस दिन अपने  आप से ही समाप्त होगी उस दिन चिकित्सकीय प्रयासों को इसका श्रेय देकर इस प्रकरण को हमेंशा हमेंशा के लिए बंद कर दिया जाएगा !इस लापरवाही की कीमत भविष्य में कोई दूसरी महामारी आने पर जनता को ही चुकानी पड़ती है कोरोना महामारी के समय भी ऐसा ही हो रहा है और हमेंशा से ऐसा ही होता चला आ रहा है |                

           भारत के प्राचीन वेद विज्ञान की दृष्टि से ज्योतिष के द्वारा महामारी समेत समस्तप्राकृतिक आपदाओं का अनुसंधान पूर्वक पूर्वानुमान लगा लिया जाता है  | इसी प्रकार से वेद में वर्णित यज्ञ विधियों से ऐसी समस्त प्राकृतिक आपदाओं  पर न केवल अंकुश लगाया जा सकता है अपितु पूर्वानुमान समय से पता लग जाएँ तो इन्हें रोका भी जा सकता है | वर्तमान समय में भारत सरकार के द्वारा वेद वैज्ञानिक अनुसंधानों को बहुत प्रोत्साहित किया जा रहा है बहुत धनराशि खर्च की जा रही है  | इसके बाद भी सभी संस्कृत विश्व विद्यालयों के ज्योतिषविभागों  के रीडर प्रोफ़ेसर  आदि लोग महामारी के विषय में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सके और वेदविभागों  के रीडर प्रोफ़ेसर  आदि लोग महामारी पर अंकुंश लगाने के लिए कोई प्रभावी यज्ञ आदि उपाय नहीं कर सके | यहाँ तक कि संस्कृत विश्व विद्यालयों के कुलपति  पदों पर विराजमान लोगों के द्वारा भी महामारी  का पूर्वानुमान लगाने या इस पर अंकुश लगाने के लिए  कोई  प्रयास नहीं किए गए | ये दुखद है |


Saturday, July 10, 2021

k-71

माननीय थानाध्यक्ष महोदय जी (कृष्णानगर)                                                                                          
                                                                    सादर नमस्कार !
 
विषय : बिल्डरराजीव जोशी एवं उसके परिवार द्वारा हमारे ऊपर किए गए हमले के बिषय में सुरक्षा हेतु !
 
       महोदय
 
   मैं A-7\41 में कृष्णा नगर दिल्ली के सेकेंड फ्लोर में अपने बच्चों के साथ रहता हूँ! परिवार में हमारी पत्नी एवं तीन बेटियाँ और एक बेटा है |इसी बिल्डिंग के फस्ट फ्लोर में बिल्डर राजीव जोशी का फ्लैट है ! उसमें उनका परिवार रहता है |
    बिल्डर राजीव जोशी इसी बिल्डिंग के अंदर मुख्यगेट से सीढ़ियों के रास्ते को धोखाधड़ी पूर्वक कार पार्किंग बताकर बेच रहा है | इससे मुझे आने जाने में समस्या होगी इसलिए इसके विरुद्ध मैंने ऑनलाइन कंप्लेन पहले से दे रखी है |हमारे कंप्लेन करने से चिढ़े बिल्डर राजीव जोशी के लोग पिछले कई दिन से हमारे साथ मारपीट करना चाह रहे थे किंतु हमने झगड़ा करने का मौका ही नहीं दिया | 
     अपनी उसी कंप्लेन के संदर्भ में कल अर्थात 26-7-2021की शाम मैं कृष्णानगर थाने गया था बच्चे घर पर ही थे ! इसीबीच शाम4बजकर23मिनट पर कुछ लोगों के साथ राजीव जोशी की पत्नी और उनके दामाद भूपेंदर ने आकर हमारा दरवाजा खटकाकर गाली गलौच करते हुए दरवाजा खोलवाने की कोशिश करने लगे तो हमारे बच्चे डर गए और वे लोग हमें मार देने की धमकी देकर चले गए | बच्चों ने घबड़ाकर हमें फोन किया मैंने कहा तुम परेशान हो मैं किसी काम से कहीं आया हूँ |इसके कुछ देर बाद हमारे पडोसी का फोन आयाकि वो लोग कह रहे हैं कि तुम्हें घर घुसने नहीं देंगे | मैं अपने एक मित्र के साथ 6 \ 24 बजे घर घुसा और सीढ़ियों से अपने फ्लोर पर जा रहा था उधर फस्ट फ्लोर पर घात लगाए जोशी के लोग बैठे थे इन्होंने हमें मारने की नियत से गाली गलौच करते हुए घसीट कर हमें अंदर ले जाने के लिए दौड़े तो मैं दौड़कर अपने फ्लोर पर पहुँच गया वहाँ कैमरा लगा हुआ था ये लोग गाली गलौच करके हमें अपने दरवाजे पर बुलाते रहे मैं अंदर चला आया ! 6 \20 पर ये हमें बुलाने आये तो मैं नहीं गया | 
    6\ 38बजे दो तीन लोगों के साथ खुद राजीव जोशी हमारे घर आया साथ में उसका दामाद भूपेंदर और जोशी की पत्नी भी थी और हमारे बच्चों एवं हमारे मित्र के सामने हमें गंदी गंदी गालियाँ देते हुए हमें जान से मारने की धमकी देने लगा लगा | जोशी की पत्नी यह कहकर गई है कि मैं अपने कपड़े अपने हाथों से फाड़कर रेप का केस लगवा दूँगी | उधर जोशी गाली देता रहा और हमें मरवा देने की धमकी देकर 6.55 पर हमारे घर से निकले हैं |     हमारे दरवाजे पर घटी सारी घटना के वीडियो साक्ष्य रूप में हमारे पास हैं | 
     थाने से बीटअफसर जगन्नाथ जी हमारे बोलाने पर आए चौकी पर हमें दोनों को ले गए वहाँ भी जोशी हमें गाली दे रहा था जिसपर जगन्नाथ जी ने उसे डाँटा तब शांत हुआ और कहा कि अब गाली दी या झगड़ा किया तो मैं बंद कर दूँगा यह कह कर जोशी और हमें भेज दिया | 
      लाल क्वाटर वाले रोड पर मैं चला आ रहा था वहाँ एक आदमी मिला उसने कहा कि जोशी से पंगा लेना तुम्हें बहुत महँगा पड़ेगा तू बहुत जल्दी मार दिया जाएगा |तेरे दरवाजे पर कैमरे न लगे होते तो आज ही तेरा काम तमाम कर दिया जाता | 
    श्रीमान जी !राजीव जोशी के द्वारा दी या दिलाई जा रही धमकियों के अनुशार मेरे या मेरे बच्चों के साथ कभी भी कोई हादसा किया या करवाया जा सकता है जिससे हम और हम  और  हमारे बच्चे भयभीत हैं | अतएव आपसे विनम्र निवेदन है कि राजीवजोशी एवं उसके परिवार के लोगों के द्वारा हमारे साथ की जा रही गुंडागर्दी से हमारी एवं हमारे सुरक्षा की जाए | 
 
                                                                                                       निवेदक 
    
                         
      
 


  

   
 
 4\23 पर वो आईं  
 
जोशी 6.38 पर आए और 6.55 पर गए हैं  
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 










माननीय थानाध्यक्ष महोदय जी (कृष्णानगर)                                                                                          
                                                                    सादर नमस्कार !
 
विषय :बिल्डिंग की छत पर रखी हमारी सामूहिक पानी की टंकियों को टॉप फ्लोर वालों के द्वारा काटकर बेचदिए जाने के विषय में दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्यवाही करवाने हेतु  !
 
   महोदय,

      k-71,दुग्गलबिल्डिंग, छाछी बिल्डिंगचौक,कृष्णानगर दिल्ली 51 में 16 फ्लैट और 4 दुकानें हैं इसी में हम लोगों के भी फ्लैट्स हैं |इसी बिल्डिंग की टॉप फ्लोर का फ्लैट नं 15 सोनू गुप्ता का है | फ्लैट नं 13 और फ्लैट नं 16 राजेंदर शर्मा के हैं | इसकी छत पर सभी फ्लैटों के हिसाब से पानी की 16 टंकियाँ सन 1998 में जबसे बिल्डिंग बनी है तभी से सामूहिक रूप से रखी हुई थीं | इसके अतिरिक्त कुछ लोगों ने अपनी पर्सनल टंकी भी रख ली थी |

      राजेंदर शर्मा और सोनू गुप्ता कुछ वर्ष पहले कहने लगे कि हमने छत खरीद ली है इसलिए छत पर रखी टंकियाँ  हटा लो अन्यथा हमें टंकी रखने का किराया दीजिए | हम लोगों ने छत की रिपेरिंग तो करवा दी टंकियाँ रखने का किराया नहीं दिया | पैसे न मिलने पर राजेंदर शर्मा पहले डराता धमकाता रहा बाद में टंकियों में गंदी चीजें डालने लगा और टंकियाँ फाड़ देने एवं पाइप काट देने की धमकी देता रहा | गुंडागर्दी पूर्वक हमेंशा मारपीट पर उतारू रहता है | छत पर जाने के दरवाजे पर सामूहिक ताला लगा हुआ था जिसकी ताली सबके पास थी उस ताले को बदलकर उसने अपना ताला लगा दिया और टॉप फ्लोर वालों के अतिरिक्त सबका छत पर जाना बंद करवा दिया | इससे तंग होकर हम लोगों ने टंकियों से आ रहे गंदे पानी का उपयोग करना बंद कर दिया !टंकियाँ और पाइप वैसे ही लगे रहे छत पर हम लोगों का आना जाना संभव था ही नहीं |

      राजेंदर शर्मा अपने को कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी एसएचओ बताकर धमकाता है !राजेंदर शर्मा ने कुछ अफसरों के जाली आईडीकार्ड बनवा रखे हैं | कंप्लेन करने पर जो लोग आतें हैं ये अपना वही कोई न कोई कार्ड दिखाकर डरा धमका कर लौटा देता है | आस पास भी इसने पुलिस आफीसर की ही पहचान बना रखी है हर किसी को उठाकर बंद कर देने की धमकी देता है लोग इससे डरते हैं | इसीलिए  फ्लैटों  में रहने वाले लोगों में लगभग 10 घरों का पानी पिछले कई वर्षों से इसने बंद कर रखा है | भयवश कोई कंप्लेन नहीं करता है यदि कोई कंप्लेन करता भी है तो कोई कार्यवाही नहीं होती है | इसलिए कुछ लोग अपने फ्लैट बेचकर चले गए हैं  कुछ ने किराए पर उठा दिए हैं कुछ  लोग जो बचे हैं उनमें से कुछ राजेंदर शर्मा की गुंडागर्दी को डरते हैं इसलिए कंप्लेन नहीं करते हैं और न ही गवाही देते हैं |कई लोग नए आए हैं उन्हें ये बातें पता भी नहीं हैं| पानी उनके यहाँ भी नहीं आता है |  अभी  पता लगा कि लॉकडाउन के समय राजेंदर शर्मा और  सोनूगुप्ता ने हम लोगों की टंकियाँ और पाइप कबाड़ी को बेच दिए हैं |

      श्रीमान जी ! हम लोग तब से  छत पर गए ही नहीं हैं  जबकि राजेंदर शर्मा और  सोनूगुप्ता आदि की छत पर जाने आने से लेकर न केवल सभी गतिविधियाँ चालू हैं अपितु वे सारे अपने  काम कर ही रहे हैंउनकी पानी की टंकियाँ भी चालू हैं  | वही ऊपर रहते हैं उनके अतिरिक्त जब हम लोगों का आना जाना नहीं है तो किसी और दूसरे का आना जाना कैसे संभव हो सकता है | पानीटंकियों के पाइप कटे होने के कारण हम दस लोगों के फ्लैटों में अभी तक टंकियों का पानी नहीं आ रहा है न्याय की आशा में कार्पोरेशन के पानी से किसी तरह काम चलाया जा रहा है |

        अतएव आपसे विनम्र निवेदन है कि दोषियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मिका कार्यवाही की जाए | इसके साथ ही राजेंदर शर्मा एवं सोनूगुप्ता के खर्चे से ही हम सभी लोगों की टंकियाँ रखवाई जाएँ एवं पानी का सारा सिस्टम ठीक करने का खर्चा भी इन्हीं से वसूला जाए |                                                          निवेदक :