Saturday, November 17, 2012

कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ ?

                    कांग्रेस  से तंग है देश

    आखिर क्या जरूरत थी यह कहने की कि कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ ? ये नारा जो छलावा लगता है आखिर किस चीज में गरीब के साथ जीने में, मरने में या घोटाला करने में?केवल प्रधान मंत्री बनते समय  सत्तासीन पार्टी की अधिष्ठात्री देवी की आत्मा ने उन्हें रोका था बस एकबार!इसके बाद चाहे जितने घोटाले हुए हों या महँगाई किन्तु उस आत्मा ने कभी आवाज नहीं लगाई!इतनी कठोर आत्मा!दामाद पर भूमि घोटाले के आरोप लगे न कोई बात न कोई सफाई उसी  आत्मा की ये ढिठाई !बधाई हो ऐसी आत्मा को!

     आज की महॅंगाई में जीना कितना दूभर हो गया है। आखिर गरीबों के बारे में कौन सोचेगा ? पति पत्नी के साथ दो बच्चों का पालन कितना कठिन हो गया है।आम आदमी मुश्किल से डेढ़ दो सौ रूपए रोज कमा पाता है उसमें कैसे व्यवस्थित किया जाए परिवार?
       आटा, दाल, चावल, सब्जी, दूध, गैस,दवा,शिक्षा  आदि वो सारी चीजें महॅंगी हो गई हैं।जिनके बिना रह पाना कठिन ही नहीं असंभव भी है।इन्हें शौक  शान की चीजें नहीं कहा जा सकता।आप बिलासिता संबंधी चीजों को बेशक महॅंगी होने दें जिसे दिक्कत होगी वो उन चीजों का उपयोग नहीं करेगा किंतु आवश्यकता संबंधी चीजों का ध्यान तो रखा ही जाना चाहिए था।
       कांग्रेस को कोसना हमारी मजबूरी है जो दल सत्ता में है यदि अच्छी बात का श्रेय वो अपने दल और अपनी सरकार को देता है तो बुरी बात का अपयश  भी उसी सरकार को भोगना पड़ेगा।एक दिन पार्क में बैठ कर कुछ लोग सरकारी नीतियों पर बहस कर रहे थे तो एक बूढ़े बापू वहॉं बैठे थे उन्होंने बीच में बोलते हुए कहा कि सरकार अबकी बलात्कार कर रही है।किसी ने कहा सरकार क्यों कर रही है?इसपर उन्होंने जवाब दिया कि जब अच्छे कामों का श्रेय सरकार लेती है तो बुरे काम भी उसी के खाते में जाएँगे।
       वैसे भी चोरी लूट पाट आदि इस तरह के जितने भी अपराध हैं वो सब अपराधी तो अपना फायदा सोच कर ही करता है।उससे हानि तो आम जनता की ही होती है। जिसकी रक्षा करना सरकार का काम है। 
      सरकारी लोगों को या तो सरकार चलाना नहीं आ रहा है या फिर अपराधियों को सरकारों का भय नहीं रहा है या फिर सरकारों के समर्थन से वे अपराध में प्रवृत्त हुए हैं जहाँ कानून मंत्रालय के भ्रष्टाचार के आरोप विदेश मंत्रालय से धोए जाते हों वहाँ सब कुछ संभव है ।

      यह तो सरकार ही जान सकती है या फिर पता लगा सकती है।आम आदमी तो रो ही सकता है सरकार कोई आवे जिसकी सत्ता उससे शिकायत इससे अधिक और किया भी क्या जा सकता है?

राजेश्वरी प्राच्यविद्या शोध  संस्थान की अपील 

   यदि किसी को केवल रामायण ही नहीं अपितु  ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र आदि समस्त भारतीय  प्राचीन विद्याओं सहित  शास्त्र के किसी भी नीतिगत  पक्ष पर संदेह या शंका हो या कोई जानकारी  लेना चाह रहे हों।शास्त्रीय विषय में यदि किसी प्रकार के सामाजिक भ्रम के शिकार हों तो हमारा संस्थान आपके प्रश्नों का स्वागत करता है ।

     यदि ऐसे किसी भी प्रश्न का आप शास्त्र प्रमाणित उत्तर जानना चाहते हों या हमारे विचारों से सहमत हों या धार्मिक जगत से अंध विश्वास हटाना चाहते हों या राजनैतिक जगत से धार्मिक अंध विश्वास हटाना चाहते हों तथा धार्मिक अपराधों से मुक्त भारत बनाने एवं स्वस्थ समाज बनाने के लिए  हमारे राजेश्वरीप्राच्यविद्याशोध संस्थान के कार्यक्रमों में सहभागी बनना चाहते हों तो हमारा संस्थान आपके सभी शास्त्रीय प्रश्नोंका स्वागत करता है एवं आपका  तन , मन, धन आदि सभी प्रकार से संस्थान के साथ जुड़ने का आह्वान करता है। 

       सामान्य रूप से जिसके लिए हमारे संस्थान की सदस्यता लेने का प्रावधान  है।



No comments:

Post a Comment